एक जादुई शेर
लेखक: विजय शर्मा एरी
(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)
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प्रस्तावना
अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे एक छोटे से गाँव ‘कनकपुर’ में आज भी लोग जादू-टोने, रहस्यमयी शक्तियों और जंगल के गूढ़ रहस्यों पर विश्वास करते थे। लेकिन गाँव में रहने वाला 12 साल का नितिन इन बातों पर कभी भरोसा नहीं करता था। उसका मानना था—जो दिखे वही सच है। बस उसी को मानना चाहिए।
पर वह नहीं जानता था कि उसी के जीवन में एक ऐसा चमत्कार होने वाला है, जो उसके सभी विचार बदल देगा—एक जादुई शेर के रूप में।
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1. जंगल का डर और दादी की कहानी
नितिन की दादी हर रात उसे कहानियाँ सुनाती थीं। एक रात दादी ने फुसफुसाहट जैसी धीमी आवाज़ में कहा—
“बेटा, इस जंगल में एक शेर है… पर साधारण नहीं… जादुई! वो सिर्फ अच्छे दिल वाले लोगों के सामने आता है। और जिसे चाहता है… उसका रक्षक बन जाता है।”
नितिन हँस पड़ा—
“दादी, शेर भी जादुई होते हैं क्या?”
दादी मुस्कुराईं, “सब कुछ किताबों में नहीं मिलता, बेटा।”
पर नितिन को तब भी विश्वास नहीं हुआ।
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2. खोई हुई बकरियाँ
एक दिन गाँव में हड़कंप मच गया। चरवाहे की तीन बकरियाँ जंगल में खो गई थीं। सभी ने मान लिया कि उन्हें जंगली जानवर खा गए होंगे।
नितिन को लगा कि यह बात इतनी जल्दी मान लेना गलत है, सो वह अकेले ही जंगल की तरफ निकल पड़ा।
जंगल में घुसते ही उसे ठंडी हवा, पत्तों की खड़खड़ाहट और दूर कहीं से आती गर्जना सुनाई दी। उसके कदम लड़खड़ाए मगर वो रुका नहीं।
कुछ दूर जाने पर उसे खून के छींटे दिखाई दिए। उसका दिल धड़क उठा। वह सोच ही रहा था कि तभी झाड़ियों के पीछे से एक तेज रोशनी चमकी।
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3. पहली मुलाकात—जादुई शेर
रोशनी जैसे ही कम हुई, उसके सामने जो था… उसे देखकर नितिन की साँसें रुक गईं।
वहाँ एक विशाल, चमकता हुआ शेर खड़ा था। उसकी आँखों में हल्की नीली चमक थी और उसके शरीर से सोने जैसी रोशनी निकल रही थी।
नितिन डर के मारे काँपता हुआ बोला—
“मैं… मैं दुश्मन नहीं हूँ।”
शेर धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसकी आवाज़ इंसानों जैसी थी पर गहरी और गंभीर—
“डरो मत, बालक। तुम्हारा दिल साफ है, इसलिए मैं तुम्हारे सामने आया हूँ।”
नितिन की आँखें फैल गईं—
“तुम… बोल सकते हो!”
शेर मुस्कुराया—
“मैं साधारण शेर नहीं… जंगल का रक्षक हूँ। लोग मुझे स्वर्ण सिंह कहते हैं।”
नितिन धीरे-धीरे शांत हुआ। फिर बोला—
“क्या तुम बकरियों को ढूँढने में मदद कर सकते हो?”
शेर की आँखें चमकीं—
“यही तो मेरा काम है।”
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4. रहस्यमयी गुफा और खतरा
शेर नितिन को लेकर जंगल के अंदर गहराई में गया। हवा अचानक ठंडी हो गई। पक्षियों की आवाज़ें बंद हो गईं। सामने एक बड़ी गुफा थी, जिसके अंदर से किसी जानवर की गुर्राहट सुनाई दे रही थी।
“बकरियाँ वहीं हैं,” शेर ने कहा।
“लेकिन अंदर एक ‘काला भेड़िया’ है—जो जंगल को नष्ट करना चाहता है।”
नितिन ने डरते हुए पूछा—
“क्या हम उसे हरा पाएँगे?”
शेर बोला—
“मैं अकेला नहीं… तुम भी मेरे साथ हो। साहस हो तो असंभव भी संभव हो जाता है।”
गुफा के अंदर काला भेड़िया लाल आँखों से झपटा। नितिन चीखा—
“शेर भाई, सावधान!”
इस पर स्वर्ण सिंह ने ऐसी गर्जना की कि गुफा की दीवारें काँप उठीं। भेड़िया डरकर पीछे हटा, लेकिन हमला करने से बाज नहीं आया।
नितिन ने एक लंबी लकड़ी उठाई और शेर की तरफ दौड़ते भेड़िए को रोक लिया। भेड़िया झटका खाकर गिर पड़ा। तब शेर ने छलांग लगाकर उसे गुफा से बाहर भगा दिया।
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5. बकरियों की वापसी और गाँव की खुशी
बकरियाँ सुरक्षित थीं। नितिन उन्हें बाहर लाया। शेर बोला—
“तुमने साहस दिखाया। यही तुम्हें खास बनाता है।”
नितिन मुस्कुराया, “अगर आप साथ न होते तो मैं कुछ नहीं कर पाता।”
शेर ने अपना विशाल सिर नितिन के कंधे से छुआ—
“तुम जैसे बच्चों की वजह से ही दुनिया में अच्छाई बची हुई है।”
जंगल से बाहर आते ही पूरे गाँव में खुशी फैल गई। चरवाहे ने रोते हुए नितिन को गले लगाया—
“बेटा, तुमने मेरी जान बचा ली, वरना गाँव वाले मुझे दोषी ठहरा देते।”
दादी ने उसे गले से लगा लिया—
“देखा, मैंने कहा था न—जंगल तुम्हें बुलाता है।”
नितिन चुप रहा, उसने शेर के बारे में कुछ नहीं बताया। उसे लगा—“कुछ चमत्कार केवल महसूस किए जाते हैं, दिखाए नहीं जाते।”
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6. नया खतरा—लकड़हारों का झुंड
कुछ महीनों बाद गाँव में खबर फैली कि शहर से आए लोग जंगल काटने वाले हैं ताकि बड़ी फैक्ट्री बनाई जा सके।
नितिन बेचैन हो गया।
“अगर जंगल खत्म हुआ तो शेर कहाँ जाएगा?”
वह तुरंत जंगल पहुँचा। शेर पहले से ही उसका इंतज़ार कर रहा था—
“मैं जानता हूँ, मनुष्य फिर से अपने स्वार्थ में अंधा हो रहा है।”
नितिन बोला—
“हमें उन्हें रोकना होगा। लेकिन कैसे?”
शेर ने कहा—
“सच सबसे बड़ी शक्ति है। चलो गाँव वालों को सच्चाई दिखाते हैं।”
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7. सबूत और सच्चाई—नितिन की जीत
नितिन ने गाँव के बुजुर्गों, सरपंच और बच्चों को जंगल लेकर गया।
वहाँ शेर ने खुद को उनकी आँखों के सामने प्रकट कर दिया।
गाँव वाले दंग रह गए।
सरपंच कांपती आवाज़ में बोला—
“हम… हम इस जंगल को नहीं काटने देंगे। ये हमारा रक्षक है।”
गाँववालों ने मिलकर जिला अधिकारी को चिट्ठी लिखी, सोशल मीडिया पर वीडियो डाले, और आंदोलन खड़ा कर दिया।
सरकार ने जंगल को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया।
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8. अंतिम विदाई और नया वादा
उस रात नितिन फिर जंगल गया। शेर चाँदनी में खड़ा था।
“अब तुम सुरक्षित हो,” नितिन बोला।
शेर ने हल्की मुस्कान से कहा—
“सुरक्षा सिर्फ मेरी नहीं… ये जंगल, ये जानवर, ये धरती—सबकी सुरक्षा तुम्हारे जैसे लोगों पर निर्भर है।”
नितिन की आँखें भर आईं—
“क्या मैं फिर कभी आपको देख पाऊँगा?”
शेर धीरे-धीरे चमकते हुए आसमान की ओर उठने लगा—
“जब भी तुम साहस और सच के रास्ते पर चलोगे… मैं तुम्हारे साथ हूँ। मैं हर बच्चे के दिल में बसता हूँ, जो अच्छाई पर यकीन रखता है।”
और अगले ही पल शेर सोने की चमक में बदलकर गायब हो गया।
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9. उपसंहार—जंगल का छोटा रक्षक
नितिन अब गाँव का सबसे जिम्मेदार बच्चा बन चुका था। वह बच्चों को पेड़ लगाने, जानवरों की रक्षा करने और पर्यावरण बचाने की शिक्षा देता था।
लोग कहते हैं—
“कनकपुर के जंगल में एक जादुई शेर रहता है।”
पर नितिन जानता है—
“जादू शेर में नहीं, हमारे दिलों में होता है।”
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