गली नंबर 11 में सुबह की शांति केवल तभी टूटती थी जब भाभी जी की हँसी हवा में फैलती, और वही हँसी इतनी असरदार थी कि मोहल्ले के लोग किसी अलार्म या मोबाइल के बिना जाग जाते; कहते थे, अगर भाभी मुस्कुरा दें, तो दूध भी अपने आप फट जाएगा। पप्पू हमेशा अपनी खिड़की के पास खड़ा नेटवर्क ढूँढता, लेकिन असल में उसकी नज़र हमेशा छत पर आने वाली भाभी पर रहती। जब भाभी बाल सुखाती हुई छत पर आतीं, पप्पू की धड़कनें इतनी तेज़ हो जातीं कि लगता था दिल उसके सीने से बाहर निकलने वाला है। खुद से बुदबुदाते हुए वह कहता — नेटवर्क नहीं, आज फिर दिल कनेक्ट हो गया। भाभी ने नीचे देखा और मुस्कुरा कर कहा, पप्पू, मोबाइल नीचे रखो… इतना झुकोगे तो दिल गिर जाएगा। मोहल्ले के लोग सिर्फ़ देखते रह जाते, ओह्ह्ह! की आवाज़ उनके कानों में गूँजती। सुबह 8 बजे भाभी झाड़ू लगा रही थीं और पप्पू दूध लेने जा रहा था, पर हर कदम पर दिल का झटका लेना उसकी आदत बन गई थी। भाभी ने झाड़ू रोक कर कहा, पप्पू, ज़रा देखना दूध फटा तो नहीं? पप्पू ने नज़र उठाकर उत्तर दिया, दूध का तो नहीं पता भाभी, पर मेरा दिल ज़रूर हिल गया। भाभी ने सिर हिलाया और हँसते हुए कहा, ज़्यादा हिलो मत, वरना मोहल्ला समझ जाएगा।
पायल की झंकार सुनते ही पप्पू का बीपी अपने आप नाप लिया जाता, मोहल्ला CCTV से नहीं, भाभी की नज़रों से सिक्योर रहता। किचन में एक हलचल हुई, शर्मा जी बाहर गए हुए थे। भाभी ने आवाज़ दी, पप्पू, जरा मिक्सर पकड़ना। पप्पू गया, मिक्सर उठाया, पर आँखें कहीं और टिकी थीं। भाभी ने घूरते हुए कहा, मिक्सर हाथ में है, दिमाग कहाँ है? पप्पू ने मासूमियत से कहा, भाभी, दिमाग स्लो है… आपके सामने प्रोसेसिंग तेज़ हो जाती है। भाभी ने आँखें तरेरीं और कहा, ओहो! ज़्यादा स्पीड मत बढ़ाओ, ओवरहीट हो जाओगे! मोहल्ले वाले दूर से खड़े थे और सोचना शुरू कर दिया था, यह लड़का पागल है या प्यार में?
रात को छत पर हवा चल रही थी, भाभी कुर्सी पर बैठीं, पप्पू सामने खड़ा। भाभी ने पूछा, पप्पू, आज हवा कुछ ज़्यादा नहीं? पप्पू मुस्कुराया, हवा नहीं भाभी, आप पास बैठी हैं, माहौल गरम है। भाभी हँस पड़ीं, इतना गरम मत करो, AC नहीं है! हल्की बारिश शुरू हुई, भाभी छत से कपड़े उतार रही थीं और पप्पू ने छाता खोला। उसने हँसते हुए कहा, भाभी, बारिश में भीग जाओगी। भाभी ने देखा और शरारत से कहा, और तुम? पप्पू ने धीमे से कहा, मैं तो पहले से भीगा हूँ आपकी बातों से। भाभी ने छाता लिया और मुस्कुराते हुए कहा, संभलकर… फिसल जाओगे। पप्पू ने कहा, अगर गिरा, तो संभाल लीजिएगा। मोहल्ले में ठहाके गूँज उठे, आंटी लोग कान लगाकर कहतीं, आज फिर पप्पू छत पर है। अंकल बोले, अरे छोड़ो, ये तो फ्री का कॉमेडी शो है।
एक दिन भाभी ने कहा, पप्पू, हँसी मज़ाक ठीक है, पर इज़्ज़त सबसे ज़रूरी। पप्पू सीधा हो गया, भाभी, आपकी मुस्कान मेरी खुशी है, और आपकी इज़्ज़त मेरी लिमिट। भाभी ने सिर हिलाया और मुस्कान थोड़ी गहरी हो गई। इसके बाद पप्पू मोहल्ले के लिए हमेशा हॉट और सेक्सी कॉमेडी का जिंदा उदाहरण बन गया।
अगली सुबह, भाभी छत पर योगा कर रही थीं, पप्पू नीचे खड़ा अपनी नज़रें जमाए, मोबाइल और नोटबुक के बीच प्यार की गणित कर रहा था। भाभी ने झुके और मुस्कुराते हुए कहा, पप्पू, सूरज भी आपका इंतज़ार कर रहा होगा। पप्पू ने झुककर जवाब दिया, भाभी, सूरज को तो छोड़िए, मैं तो सिर्फ़ आपकी आँखों की रोशनी में ही सुबह देखना चाहता हूँ। मोहल्ला हँस पड़ा, और भाभी ने शरारत से कहा, देखो, अगर दिल फिर से फट गया तो जिम्मेदारी तुम्हारी होगी।
पप्पू की हर कोशिश भाभी को इंप्रेस करने की थी, और भाभी शरारती मुस्कान से उसे हमेशा हवा में तैरने देतीं। कभी-कभी वह छत पर आते और पप्पू को जानबूझ कर परेशान करतीं, पप्पू, बाल उधार से सूख रहे हैं, अपना दिमाग छोड़ो और बाल देखो। पप्पू झुकता, बालों में हाथ डालता, और भाभी हँसती। मोहल्ले की बुजुर्ग महिलाएँ खिड़कियों से झाँककर कहतीं, इन दोनों की जोड़ी तो पूरे गली का मनोरंजन बन गई।
दिन और रात के बीच, प्यार और हँसी का यह खेल चलता रहा। भाभी जब किचन में मिठाई बना रही थीं, पप्पू चुपचाप पास खड़ा था, अपनी नज़रें पकड़ा नहीं रहा था, पर दिल हर बार हवा में उछलता। कभी-कभी वह पूछता, भाभी, ये शक्कर कहाँ डालूँ? भाभी मुस्कुराती, जैसे दिल कहे, बस बहुत झकझोर मत देना।
छत की रातें और बारिश की रिमझिम, पायल की खनक और पप्पू की हड़बड़ाहट — यह सब गली नंबर 11 की पहचान बन गई। मोहल्ला कहता था, ये लड़का पागल है या प्यार में दीवाना। लेकिन भाभी हमेशा कहतीं, जो दिल से हँसता है, वही असली मस्ती जानता है।
और इस तरह, गली नंबर 11 में प्यार, हँसी, शरारत, और हल्की-सी सेक्सी रोमांस का एक अनोखा मिक्स हर सुबह और रात को चलने लगा। पप्पू की धड़कनें, भाभी की मुस्कान, मोहल्ले की जासूसी — यह सब मिलकर एक ऐसा कॉमिक-सेक्सी-रोमांटिक ड्रामा बना दिया, जो गली में कभी खत्म नहीं होता।