ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। आतंकियों के खिलाफ दो अफ़सर और दो लेडी ऑफिसर का खतरनाक मिशन, जंगल और शहर में लगातार एक्शन, सस्पेंस और तबाही से भरा। शहादत, घायल अफ़सर और निर्दोषों की रक्षा—देशभक्ति और साहस की यह रोमांचक कहानी केवल मनोरंजन के लिए है।
ऑपरेशन त्रिशूल-ए-भारत
काली रात और तेज़ हवाओं के बीच, अरब सागर की लहरें हिंसक हो रही थीं।
दूर पश्चिमी तट पर दो काले बोटें बिना किसी रोशनी के आगे बढ़ रही थीं। उनमें बैठे लोग इंसान नहीं, बल्कि मौत के पैग़ाम। उनके हाथों में हाई-कैलिबर हथियार, चेहरे पर नफ़रत की परछाई। उनके लक्ष्य साफ़ था—भारत को भीतर से तबाह करना।
दिल्ली में RAW हेडक्वार्टर में माहौल गंभीर था। सैटेलाइट स्क्रीन पर बोटें लगातार फ्लिकर कर रही थीं। RAW चीफ ने भारी आवाज़ में कहा—
ये कोई आम आतंकी नहीं हैं ये पूरी तरह से प्रशिक्षित हैं और उनके पीछे बड़ा नेटवर्क है। समय कम है।
फाइलें खुलीं—विदेशी हथियार, गुरिल्ला ट्रेनिंग, ब्लैक ऑपरेशन का कोड नाम ब्लैक रेन और मिशन के लिए ज़रूरी नक्शे।
PM आवास – इमरजेंसी मीटिंग
प्रधानमंत्री की आँखों में नींद नहीं थी। टेबल पर भारत का नक्शा फैला था, और हर संवेदनशील क्षेत्र पर लाल निशान।
अगर ये लोग भारत में घुस गए, तो हमारी रीढ़ हिल जाएगी। इन्हें रोकना ही हमारी ज़िम्मेदारी है।
कमरे में मौजूद अफ़सरों की निगाहें जमी हुई थीं। PM की उँगली दो नामों पर रुकी—
कर्नल अर्जुन सिंह – हिंदू, अनुभवी, शांत और निर्भीक।
कमांडर इमरान खान – मुस्लिम, रणनीति मास्टर, तेज़ और बेबाक।
यही दोनों सीमा पर दुश्मन को रोकेंगे। कोई गलती बर्दाश्त नहीं।
मिलिट्री कैंप – मिशन की तैयारी
तेज़ बारिश में हेलीकॉप्टर उतरा। कर्नल अर्जुन ने कच्ची ज़मीन पर कदम रखा। चेहरा पत्थर जैसा सख़्त, आँखों में युद्ध का अनुभव। इमरान पहले से वहाँ था, चुप और सावधान।
दूसरी बटालियन से दो लेडी ऑफिसर आईं—
कैप्टन सिया वर्मा – स्नाइपर, 800 मीटर की दूरी से मौत।
लेफ्टिनेंट आयशा रहमान – क्लोज़ कॉम्बैट एक्सपर्ट, चाकू और हाथ उसकी भाषा।
पाँचवाँ सदस्य अंधेरे से निकला—RAW एजेंट। नाम गुमनाम, चेहरा ढका।
मिशन आसान नहीं… दुश्मन हर कदम पर है।
ऑपरेशन का नाम बोर्ड पर लिखा गया—
त्रिशूल-ए-भारत
जंगल का नरक – पहला एम्बुश
जंगल की रात घनी थी। कीचड़, गीले पत्ते और अंधेरा। RAW एजेंट ने कहा—
कुछ गड़बड़ है
शब्द पूरा होते ही— धांय!
हाई-कैलिबर स्नाइपर बुलेट RAW एजेंट के सीने में। वह ज़मीन पर गिरा। खून पत्तों पर फैल गया।
कर्नल अर्जुन ने पकड़ने की कोशिश की, पर आँखें खुली रह गईं—साँसें थम चुकी थीं।
इमरान ने चारों तरफ़ देखा। आवाज़ भारी हुई—
अब हम अंधेरे में हैं। ये हमें पहले से देख रहे हैं।
जंगल का हर पौधा, हर पेड़ अब खतरनाक था।
जंगल में निर्दोषों का खुलासा
RAW एजेंट की बॉडी के पास GPS डिवाइस मिला। लोकेशन ब्लिंक कर रही थी। वहाँ पहुँचे—
12–15 आम लोग बंधे थे। महिलाएँ, बच्चे, बूढ़े।
एक औरत रोते हुए बोली—
हमें ज़बरदस्ती लाया गया… अगर सेना आई तो सबको मार देंगे।
मिशन अब बदल चुका था—आतंकियों को मारने के साथ-साथ लोगों को बचाना।
दूसरा एम्बुश – हीरो भी घायल
जैसे ही टीम ने लोगों को खोलना शुरू किया, गोलियाँ बरसीं।
कर्नल अर्जुन के कंधे में गोली लगी। खून बह रहा था, पर बंदूक नहीं छोड़ी। इमरान ने उसे कवर किया।
धमाका— लेफ्टिनेंट आयशा ज़मीन पर गिर पड़ी। पैर में शरापनल।
मुझे छोड़ो… लोगों को निकालो, उसने दाँत भिंचकर कहा।
सिया ऊँचाई पर अकेली थी। आँसू और गुस्सा दोनों आँखों में। उँगली ट्रिगर पर, हर गोली मौत का पैग़ाम।
जंगल युद्धभूमि बन गया। हर कदम पर लाशें, हर आवाज़ में खतरा।
अचानक आवाज़—
बहुत देर कर दी इंडियन आर्मी…
साया बाहर आया। वही स्नाइपर जिसने RAW एजेंट को मारा।
पूर्व स्पेशल फोर्स, भारत की रणनीति जानता।
टाइमर उसके हाथ में—
या लोग बचाओ, या अपने अफ़सर।
टिक-टिक की आवाज़ हर दिल को डराती।
इमरान ने छलांग लगाई। अर्जुन ने आख़िरी ताकत से बम की वायर काटी। धमाका हुआ, लेकिन कंट्रोल में। विलेन निहत्था हो गया।
शहर में अंतिम लड़ाई
सुबह, शहर में अलर्ट। लोग सुरक्षित निकाले गए।
अर्जुन और इमरान घायल, खड़े।
आयशा स्ट्रेचर पर।
सिया ने अंतिम दुश्मन ढेर किया। RAW एजेंट की बॉडी तिरंगे में लिपटी।
कोई जश्न नहीं। सिर्फ़ सन्नाटा।
PM को मैसेज—
मिशन सफल, शहादत हुई।