chapter 51 in Hindi Drama by Maya Hanchate books and stories PDF | बंधन (उलझे रिश्तों का) - भाग 51

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बंधन (उलझे रिश्तों का) - भाग 51

एपिसोडएपिसोड 51
कुछ दिनों बाद 

आज कपाड़िया मेंशन में बहुत हलचल थी क्योंकि संवि और सांची के ठीक होने की वजह से  अर्णव जी और खुशी जी ने अपने घर में हवन रखवाया था
खुशी जी और उर्मिला जी दोनों मिलकर सोफे पर बैठकर सारी तैयारी पर नजर रख रहे थे। तो वही घर के सारी लेडीज़ हवन की तैयारी कर रहे थे जैसे प्रसाद बनाना, घर और मंदिर को फूलों से सजना मालए बनाना। 

यह पूजा बड़ी नहीं थी पर इस पूजा में काम से कम 70 से 80 लोग आने वाले थे जिसमें शर्मा और मल्होत्रा खानदान और कुछ दोस्त इनवाइटेड थे। 

यह पूजा की मूरत सुबह के 8:00 बजे थी जिसकी वजह से सब के सब हर -बड़ी में तैयार हो रहे थे।

इस वक्त सभी ने पीले रंग के कपड़े पहने थे, सारे कपाड़िया खानदान के जेंट्स पीले रंग की कुर्ती के साथ सफेद रंग का पैंट पहना हुआ था तो औरतों ने पीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी। 
किसी ने भी हैवी मेकअप या ज्वेलरी नहीं पहना था। सब लोग सादगी से तैयार हो गए थे। 

तब तक हवन शुरू करने के लिए पंडित जी आ जाते  हैं। और खुद  हवन की तैयारी करने लगते हैं। 
बाद में एक-एक कर कर सभी लोग आते हैं। 
जिन मैं पहले शर्मा रहते हैं। उन लोगों ने आज नारंगी रंग के कपड़े पहने हुए थे। (राम जी ,अंकित जी,शशांक ,आरोही)

उनके साथ-साथ मल्होत्रा भी आते हैं जिन्होंने से नारंगी रंग के ही कपड़े पहने हुए थे।+ जया जी, रुद्रा जी, तरुण ,सिद्धार्थ, वीर होती है।)


फिर एक-एक कर कर बाकी लोग आते हैं जिसमें 
इंद्रजीत खन्ना और उनकी P .A माया आती है ।
जिसे देखकर अर्णव जी, इंद्रजीत का वेलकम करने जाते हैं। इंद्रजीत अरनव जी के पैर छूता है।।

इंद्रजीत को ,अरनव जी आशीर्वाद देते है और इंद्रजीत से पूछते हैं तुम्हारा वह खड़ूस बुड्ढा दादा क्यों नहीं आया?
वह उनकी तबीयत एकाएक खराब हो गई है जिसकी वजह से वह नहीं आ पाए, लेकिन उन्होंने आपके लिए और पूरे परिवार के लिए ढेर सारी तो फिर भेजे हैं ।।।इतना बोलकर इंद्रजीत, माया को इशारा करता है ,जिसे देखकर माया उसके इशारे को समझ कर बाहर चली जाती है , कुछ बॉडीगार्ड के साथ  बहुत सारे गिफ्ट लेकर आती है।।
 जिसे देखकर वहां के लोग देखते ही रह जाते हैं।।
 
अर्णव जी उन गिफ्ट्स को देखकर मन ही मन बड़बड़े इस बुड्ढे की तो दिखावट करने वाली आदत कभी नहीं जाएगी। जब देखो तब अपनी अमीरी  का रॉब  झड़ाना जरूरी होता है।।
तभी वह इंद्रजीत को माया के साथ देकर इंद्रजीत से पूछते हैं यह कौन है, तुम्हारी पत्नी है क्या?

नहीं..... मैं इनकी पर्सनल असिस्टेंट हूं माया एकदम से जवाब देती है। उसका जवाब सुनकर इंद्रजीत उसे घूरने लगता है। 

 तभी खुशी जी आती है - बोलती है ऐसे ही मेहमानों को दरवाजे पर खड़े  रखना है क्या? अंदर चलिए।
इसके बाद खुशी जी इंद्रजीत और माया को अंदर लाती है पर अरनव की और बाकी लोग वहीं खड़े होते हैं। ।
एक-एक कर कर सभी मेहमान आने लगते हैं। कार्तिक और उसके पेरेंट्स भी आते हैं।

इन मेहमानों में एशिया के बेस्ट बिजनेसमैन आए हुए थे जिसमें हर्ष बजाज, इशान ठक्कर, विहान  ठक्कर, जैसे बड़े नाम गिरने बिजनेसमैन थे।।

कुछ देर बाद सभी कपाड़िया लोग और बाकी मेहमान हवन पूजा के लिए बैठ जाते हैं और पंडित जी पूजा शुरू कर देते हैं।

यह पंडित बहुत ही सिद्ध पंडित थे जो साल में एक या दो हुई पूजा करते थे और बाकी समय अपने साधना में विलेन रहते थे, इन पंडित का नाम राजाराम था, इनकी उम्र 86 की थी उनके चेहरे पर बड़ा तेज था जिसे देखने भर से ही , सभी का मन शांत हो जाता था।। उनकी विशेषता यह थी कि वह आशीर्वाद बंद आंखों से देते थे वह उसे इंसान की स्पर्श और उसके होने वाले प्रेजेंट को महसूस कर कर उनके आने वाले भविष्य के बारे में बताते थे। इस हवन पूजा के लिए राजा अकेले नहीं आए थे बल्कि अपने 11 शिष्यों को लेकर आए थे,,जो उनकी इस पूजा में मदद करने वालेथे।

कुछ एक से दो घंटे तक यह हवन पूजा चलती रहती है। 
उसके बाद एक-एक कर कर सभी लोग राजाराम जी से आशीर्वाद लेने आते हैं। 
 पहले सारे बड़े लोग आशीर्वाद लेते हैं अपनी-अपने जीवनसाथी के साथ। राजा राम जी आशीर्वाद देते देते उनसे उनके आने वाले भविष्य के बारे में भी चेतावनी देते हैं। 

उसके बाद छोटों की बारी आती है, जहां पहले रुचिता और वनराज होते हैं। राजाराम जी उन दोनों को आशीर्वाद देते हुए बोलते हैं जीवन में कठिन परिस्थिति आएंगे विश्वास भी डगमग आएगा पर तुम्हारी सूझबूझी तुम्हारे रिश्ते और विश्वास को बचाएगी। 

उनकी बात सुनकर वनराज को तो कुछ समझ नहीं आता है पर रुचिता परेशान हो जाती है। 
उसके बाद तरुण और आरोही आशीर्वाद लेने आते हैं, जिस पर राजारामजी बोले हर वक्त जो आपको चाहिए वह मिले यह जरूरी नहीं होता है, जीवन में हमेशा दो मार्ग होते हैं जिसमें ना कुछ अच्छा होता है ना ही कुछ बुरा बस आपको एक मार्ग चुनकर, उसे मार्ग पर चलना होता है। कर्म करते जाओ फल अवश्य मिलेगा।।

उसके बाद सांची अद्वितीय और कश्यप आते हैं।
और आशीर्वाद लेते हैं तीनों एक-एक कर कर आशीर्वाद लेते हैं पहले सांची की भविष्यवाणी प्रेम में आत्मसमर्पण होना चाहिए परंतु प्रेम आत्मसम्मान से ज्यादा नहीं होना चाहिए। 
अद्वितीय जब तक इस मोह माया क्रोध लोभ से जुड़े रहोगे तब तक अंधेरे में रहोगे। 
कश्यप ; जीवन के कष्टों का फल मिलेगा,खुशी आने वाली है।

माया: प्रेम और जिम्मेदारी संतुलन बनाकर रखना। 
इंद्रजीत: प्रेम की परीक्षा लेना नहीं देना सीखो। 
राजाराम की बात सुनकर इंद्रजीत और माया एक दूसरे को देखने लगते हैं। (एंजेल्स इनोसेंट माफिया)
ठक्कर ब्रदर्स आते हैं: जो बीत चुका वह बीत चुका बस आने वाले कल पर ध्यान देना। वरना सब कुछ गवा बैठोगे। (डोरी, मोहब्बत या नफरत की)

हर्ष बजाज : जिसका इंतजार कर रहे हो उसका सिर्फ इंतजार करते रहोगे अपने कर्मों का फल पाओगे जितनी दुख पीड़ा तुमने उसे दिया है उससे ज्यादा तुम्हें मिलेगा प्रकृति हमेशा न्याय करती है उसे उसका नया मिलेगा वह लौट कर आएगी तुमसे अपने हर अन्याय का बदला लेगी।
राजाराम की बात सुनकर हर्ष के आंखों के सामने अनवी का मासूम चेहरा आता है  पर वह राजा राम जी के बातों को सीरियस नहीं लेता है वह तो बस यहां अपनी दादी की सहेली उर्मिला जी की वजह से आया था।(हमारी कॉम्प्लिकेशनशिप, जल्दी)

शिवाय, दुर्गा ,कार्तिक,आर्य संवि। 5 एक साथ आशीर्वाद लेते हैं। दुर्गा और कार्तिक: रिश्ते में कभी आहम को आने मत देना। शिवाय: जो बोया है वही काटोगे। संवि :खुशियों की लहर लाएगी जिसके साथ होगी ,जिसकी जिंदगी में होगी जिसके घर में होगी उनके लिए स्वयं आदिशक्ति का रूप होगी जो प्रेम करुणा क्रोध हर भाव से पूर्ण है। पर खुशियां द्वार पर होकर भी द्वार पर नहीं रहेगी जिंदगी कठिनाइयों से भारी रहेगी।
आर्य : जिसके लिए अपना परिवार ही स्वयं प्रथम होगा जो हमेशा अपनों के लिए लड़ेगा। ।

उसके बाद वह सब की तरफ देखते हुए बोले एकता में ही ताकत होती है जब तक एक रहोगे तब तक तुम्हें कोई नहीं तोड़ पाएगा।

राजा राम जी की बात सुनकर सभी के मन में अलग-अलग भाव चल रहे थे।।
घर की बहुएं और बेटे राजा राम और उनके शिष्यों को भोजन करवाते हैं ,जिनमें सात्विक भोजन था।
भोजन के बाद राजा राम अपने शिष्यों को लेकर वहां से चले जाते हैं कपड़ियास व्यू ने बड़े आधार से भेज देते हैं। 
इसके बाद सभी लोग खुद भी खाना शुरू कर देते हैं। 
इस समय दोपहर के 1:00 रहे थे सबके दिलों में अलग-अलग प्रश्न चल रहे थे किसी को राजा राम जी की बातें सिर्फ बातें लग रही थी तो किसी को उनकी बातों में सच्चाई नजर आ रही थी।‌
अरनव की माया और इंद्रजीत को सबको इंट्रोड्यूस करवाते हैं। तो वही हर्ष को वनराज इंट्रोड्यूस करवाता है, ठक्कर ब्रदर को शेखर जी इंट्रोड्यूस करवाते हैं। 
सब लोग कुछ देर बाद एक दूसरे में गुल मिल जाते हैं।।

 क्या राजा राम जी की चेतावनी होगी सच। जाने के लिए पढ़िए अगला चैप्टर।।

guys मेरी स्टोरी प्लैंड नहीं रहती है जिसकी वजह से आपको नवल देर से मिलती है।

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