The Man from Earth - Film Review in Hindi Film Reviews by aarya chouhan books and stories PDF | The Man from Earth - Film Review

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The Man from Earth - Film Review

कभी आपने सोचा है कि अगर कोई इंसान हजारों सालों से जिंदा हो और उसने पूरी सभ्यता को अपनी आँखों से देखा हो, तो वह कैसे बातें करेगा? और अगर वह अचानक आपके घर आकर कहे कि “भाई, मैं 14,000 साल से जिंदा हूँ”, तो आप क्या करेंगे? शायद आप हंस पड़ेंगे, कोई टोपी पहना देंगे या फिर झाड़ू उठाकर बाहर निकाल देंगे। लेकिन The Man from Earth यही कहानी है – और यकीन मानिए, यह आपको हंसाएगी नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर कर देगी।
फ़िल्म की शुरुआत होती है एक साधारण से घर में, जहाँ प्रोफ़ेसर जॉन ओल्डमैन (David Lee Smith) अपने दोस्तों से कहता है कि वह अब यहाँ से हमेशा के लिए जा रहा है। दोस्त पूछते हैं – क्यों? तो जॉन कहता है – “क्योंकि मैं बूढ़ा नहीं होता… और 14,000 साल से ज़िंदा हूँ।”
अब सोचिए, अगर आपके किसी यार ने ऐसा बोला होता तो आप तुरंत उसके सिर पर हाथ फेरकर बोलते – “भाई, बुखार तो नहीं है?” 😅 लेकिन यहाँ उसके दोस्त सब प्रोफेसर हैं – बायोलॉजी, हिस्ट्री, आर्कियोलॉजी, साइकोलॉजी… मतलब एकदम इंटरव्यू बोर्ड। और यहीं से शुरू होती है असली मज़ेदार बहस।
फ़िल्म की खासियत:
इसमें न ही धूम-धड़ाका है, न विलेन का “मैं दुनिया फोड़ दूँगा” वाला डायलॉग, न ही हेलिकॉप्टर से कूदता हीरो। पूरी फ़िल्म एक ही कमरे में बैठकर सिर्फ बातचीत है। लेकिन मज़ा यह है कि यह बातचीत Netflix की 10 वेबसीरीज़ से ज्यादा थ्रिलर लगती है।

जॉन बताता है कि वह क्रो-मैग्नन आदमी (आदिमानव) के जमाने से ज़िंदा है। उसने बुद्ध, ईसा, शेक्सपियर, और न जाने कितनी सभ्यताओं को देखा है। सुनकर दोस्तों के दिमाग के CPU गरम होने लगते हैं। कोई सवाल पूछता है – “इतिहास कैसे लिखा गया?”, कोई पूछता है – “धर्म की असलियत क्या है?”, और कोई चिल्लाकर कहता है – “अगर यह सच हुआ, तो हमारी सारी किताबें गलत साबित हो जाएंगी!”
यहां पर फ़िल्म का जादू खुलता है। हर जवाब ऐसा लगता है जैसे किसी ने सीधे आपके दिमाग में एक नया बल्ब जला दिया हो।

मजेदार बातें:

पूरी मूवी में एक भी गाना नहीं, लेकिन हर डायलॉग गाने से ज्यादा असरदार लगता है।

एक घर में सेटिंग है, लेकिन लगेगा आप टाइम मशीन पर सफर कर रहे हों।
जॉन का कैरेक्टर:
David Lee Smith ने जॉन को इतना रहस्यमय और शांत दिखाया है कि आपको खुद लगेगा – "यार, हो सकता है यह सच बोल रहा हो!" उसका हर जवाब इतना ठोस और दिलचस्प होता है कि दर्शक चुपचाप कुर्सी से चिपक जाता है।

दर्शकों पर असर:
इस फ़िल्म को देखने के बाद आप अपनी लाइफ़ में पहली बार किताब उठाकर हिस्ट्री पढ़ने का मन बना सकते हैं। 😁 और शायद यह भी सोचें कि – “अगर अमर इंसान सच में हुआ तो वह अभी मेरे पड़ोस में तो नहीं रहता?”
और हाँ, अगर आप यह सोच रहे हैं कि इसमें रोमांस, ऐक्शन या डांस मिलेगा – तो ज़रा संभल जाइए। यह फ़िल्म गोलगप्पे नहीं, बल्कि धीरे-धीरे चखने वाली कॉफी है। इसका मज़ा धीरे-धीरे आता है और दिल-दिमाग पर गहरा असर छोड़ता है।

क्यों देखनी चाहिए यह फ़िल्म?

क्योंकि यह आपको 90 मिनट में 14,000 साल की सैर कराती है।

क्योंकि इसमें "बिना दिखाए" सब दिखा दिया गया है।

क्योंकि यह फ़िल्म दिमाग को जिम करवा देती है – सोच सोचकर आपकी ब्रेन मसल्स स्ट्रॉन्ग हो जाती हैं।
रेटिंग:
मेरी तरफ से यह फ़िल्म पूरे 5 में से 5 स्टार्स। ⭐⭐⭐⭐⭐
कारण साफ है – ऐसी यूनिक और नॉन-ग्लैमरस लेकिन ब्रेन-स्टॉर्मिंग फ़िल्म बार-बार नहीं बनती।

निष्कर्ष:
The Man from Earth कोई साधारण मूवी नहीं है, यह एक बौद्धिक पटाखा है। यह आपको हँसाएगी नहीं, डराएगी नहीं, लेकिन सोच सोचकर आपकी रातों की नींद उड़ सकती है। यह फ़िल्म इस बात का सबूत है कि असली सिनेमा डायलॉग, कहानी और आइडिया से बनता है, न कि करोड़ों के स्पेशल इफ़ेक्ट से।
तो अगर आप भी दिमाग को थोड़ा घुमाना चाहते हैं और अपने दोस्तों से कहकर बहस छेड़ना चाहते हैं – “भाई, क्या पता अमर लोग सच में होते हों” – तो यह मूवी जरूर देख डालिए।


कोई भी किरदार ओवरएक्टिंग नहीं करता, सब बिलकुल लाइब्रेरी मोड में हैं – गंभीर लेकिन मज़ेदार।