Chandranandini - 2 in Hindi Adventure Stories by Uday Veer books and stories PDF | चंद्रनंदिनी - भाग 2

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चंद्रनंदिनी - भाग 2

प्रतापगढ़ राज्य में एक छोटा सा गांव होता है, चंदनपुर नाम का एक गांव होता है, उस गांव में तीन बहने रहती हैं, उनके मां-बाप नहीं होते हैं, तीनों ही बहुत गरीब होती है, तीनों बहनें एक से बढ़कर एक खूबसूरत होती है, तीनों बहनें जंगल से लकड़ियां काट कर लाती हैं और उन्हें बेचकर खाने-पीने का इंतजाम करती हैं|

एक दिन तीनो बहने सुबह सुबह जल्दी ही लकड़ियां काटने के लिए चली जाती है, ताकि आते हुए ज्यादा गर्मी ना हो, उस दिन और दिनों के मुकाबले बहुत ज्यादा ही गर्मी होती है, तीनो बहने जल्दी ही लकड़ियां काट कर वापस गांव आ जाती हैं, और लकड़ियां बेचकर अपने खाने का सामान लेकर अपने घर आ जाती हैं, और थोड़ी देर आराम करने के लिए बैठ जाती हैं, तीनो बहने आपस में बातें करने लगती हैं, दोनों बड़ी बहन आपस में बातें करती हैं और कहती हैं, कि क्यों ना आज हम अपनी ख्वाहिशों के बारे में बात करते हैं|

बड़ी बहन:- सबसे पहले मैं अपनी ख्वाहिश के बारे में बताती हूं, मेरी ख्वाहिश है, कि मेरी शादी महाराज रूद्र प्रताप सिंह के रसोइए के साथ हो जाए, महाराज के लिए हर रोज अच्छे-अच्छे पकवान बनाए जाते हैं, मुझे भी हर रोज अच्छे-अच्छे पकवान खाने को मिलेंगे, सोचना, कितना मजा आएगा, मेरी जिंदगी किसी महारानी की तरह गुजरेगी|

दूसरी बहन:- मेरी ख्वाहिश है, कि मेरी शादी महाराज के सेनानायक के साथ हो जाए तो सारी सेना का अधिपत्य मेरे पति के हाथ में होगा, यानि कि मेरे हाथ मे होगा, और राज दरबार में भी मेरा खूब दबदबा रहेगा, हर कोई मुझे सलाम ठोकेगा, और सभी मेरी हर बात सुनेंगे|

फिर दोनों बहने छोटी से उसकी इच्छा के बारे में बताने को कहती है, तो वह चुप ही रहती है, तो बड़ी बहन कहती है:-

बडी बहन:- तू चिंता ना कर, हम तेरी भी शादी महाराज के किसी नौकर के साथ करा देंगे|

छोटी:- मेरी ख्वाहिश है, कि मेरी शादी हमारे राज्य के महाराज, रूद्र प्रताप सिंह के साथ हो, मैं हमारे राज्य की महारानी बनू, मेरे शेर की तरह बहादुर बेटे हों, उन्हें कभी भी युद्ध में कोई हरा ना सके|

मेरी चांद से भी खूबसूरत बेटी हो, वो हंसेतो फूल खिल उठे, चारों दिशाएं हंसने लगे, वो रोए तो उसके आंसू मोती बनकर टपके, उसके आंसू मोती बन जाए, कोई भी अगर एक बार देख ले, तो बस देखता ही रह जाए, उसे देख कर चांद भी शर्मा जाए, देव लोक की अप्सराएं भी उसकी खूबसूरती के सामने नतमस्तक हो जाएं|

दोनों बहने उसकी बात सुनकर हंसने लगी, देखो तो जरा ये तो महारानी बनने के सपने देखने लगी, बच्चे भी पैदा कर लिये इसने तो, और छोटी बहन की खूब खिचाई करती हैं|

तभी बाहर से किसी की आवाज आती है, दोनों बहने चुप हो जाती हैं, और झांककर बाहर देखती हैं, तो दो व्यक्ति उनके दरवाजे के बाहर खड़े हुए होते हैं, और देखने में मैं दोनों ही व्यापारियों की तरह लगते हैं, तो छोटी अपने चेहरे को हल्का पर्दा करके बाहर आती है, व्यापारी उससे पीने के लिए पानी मांगते हैं, छोटी बर्तन में पानी ला कर देती है, और दोनों पानी पीते हैं, और अपने घोड़ों को पानी पिलाने की बात कहते हैं, तो छोटी उन्हें सामने सरोवर की ओर इशारा कर देती है, दोनों व्यापारी अपने घोड़ों को सरोवर में पानी पिलाते हैं, और थोड़ी देर आराम करने के बाद वहां से चले जाते हैं, छोटी दोनों के पानी पीने के बाद बर्तन उठाकर अंदर आ जाती है|

लेकिन कुछ सोचने लगती है

बड़ी बहनें:- तुझे क्या हुआ, क्या सोचने लगी?

छोटी:- मुझे लगता है, इन व्यापारियों को कहीं देखा है, शायद प्रतापगढ़ के मेले में देखा होगा, लेकिन देखा जरूर है|

दोनों बड़ी बहनें फिर छोटी की खिंचाई करने लगती है, कि कहीं महाराज रूद्र प्रताप सिंह तो नहीं आ गए, तुझसे शादी करने के लिए, और तेजी से खिलखिला कर हंस पड़ती है|

क्रमश.............