Bandhan - 40 in Hindi Fiction Stories by Maya Hanchate books and stories PDF | बंधन (उलझे रिश्तों का) - भाग 40

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बंधन (उलझे रिश्तों का) - भाग 40

chapter 40 
नो रीकैप 
कपाड़िया कॉर्पोरेशन में वनराज अपने केबिन में गुस्से से बैठा हुआ था, तभी शिवाय दरवाजा knock कर कर अंदर आता है और वनराज के सामने खड़े हो जाता है ...जैसे ही वनराज ने शिवाय को दिखा तो वह अपने चेयर से उठकर शिवाय को एक जोरदार थप्पड़ मारता है।
जिसे देखकर शिवाय की आंखें खुली की खुली रहती है क्योंकि आज तक वनराज ने शिवाय पर हाथ उठाना तो दूर आंखें बड़ी कर कर भी नहीं देखा था। 
शिवाय अपने गाल पर हाथ रखकर बस वनराज को देख रहा था कि।। वनराज ने उस फाइल को उठाकर शिवाय के ऊपर फेंकते हुए बोला यह सब क्या है शिवाय ।।।।।।(जैसे ही वनराज ने फाइल फेंका था तो उसे फाइल के सारे पेपर उड़कर शिवाय के ऊपर से नीचे गिर जाता है। )आज पहली बार वनराज ने शिवाय का पूरा नाम लिया था नहीं तो वह हमेशा शिवाय को शिवू या छोटे कर कर बुलाता था।
यह तुमने क्या किया शिवाय ?इतना बोलकर वह शिवाय को और एक जोरदार से थप्पड़ मारता है।
वनराज जो अपनी कमर पर हाथ रखकर केबिन में इधर से उधर घूमते हुए बोला मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी शिवाय ।आज तुमने मेरा भरोसा तोड़ दिया है।  मैं हमेशा कितने गर्व से कहता था कि "दी शिवाय कपाड़िया" मेरा छोटा भाई है आज तूने मेरा सर शर्म से झुका दिया, मेरा भरोसा तोड़ दिया।
वनराज की बात सुनकर शिवाय को कुछ समझ नहीं आ रहा था तो वह वनराज से पूछ्ता यह क्या बोल रहे हो भाई आप ............मैंने ऐसा क्या किया है जो आप इतना गुस्सा कर रहे हो ?अपने मुझे क्यों मारा ?
शिवाय की बात सुनकर वनराज अपनी उंगली शिवाय की तरफ करते हुए बोला क्या तुम्हारे अंदर अभी भी इतनी हिम्मत है कि तुम मुझसे सवाल कर सको इतना बोलकर वह नीचे गिरे हुए फाइल के पेपर में से एक पेपर निकाल कर शिवाय को देता है।
शिवाय जब उसे पेपर को अपने हाथ में लेकर पड़ता है तो उसके हाथ से वह पेपर छूट जाता है और उसे अब समझ में आया कि क्यों उसके भाई ने उसे क्यों मारा और इतने गुस्से में क्यों है? 

(चलिए ,यह सब क्या हुआ जानने के लिए हम चलते हैं। कुछ दिन पहले।)
  
सिटी हॉस्पिटल 

एक आदमी एक लड़की को अपनी बाहों में उठाते हुए अस्पताल के अंदर आ रहा था उसके पीछे-पीछे एक आदमी दूसरे आदमी को अपने कंधे का सहारा देते हुए अस्पताल के अंदर आ रहा था। इस वक्त उसे लड़की का पूरा शरीर खून से भरा हुआ था और पीछे आने वाले आदमी के शरीर पर कई छोट थी ।
जो आदमी लड़की को अपनी गोद में लेकर आ रहा था वह कोई और नहीं शिवाय था और उसकी गोद में सांची खून से लथपथ बेहोश थी, उनके पीछे वनराज कश्यप को सहारा देते हुए ला रहा था कश्यप के भी शरीर पर बहुत सारी चोट थी लेकिन वह होश में था उसकी हालत सच्ची जैसी नहीं थी। 
उनके पीछे-पीछे एंबुलेंस आती है जो दो स्ट्रेचर निकलती है जिसमें दो और आदमी होते हैं। 
इस वक्त शिवाय घबराकर डॉक्टर को चिल्ला रहा था डॉक्टर डॉक्टर.........
शिवाय की आवाज सुनकर जल्दी से एक डॉक्टर वहां आती है। तो उस (शिवाय)के हाथ में लड़की को खून से देखकर डॉक्टर पहले तो वाट वॉइस इस स्ट्रेचर मंगवाती है और उसे स्टेचर पर साची को लेट कर एमरजैंसी रूम में ले जाती है। 
उसे डॉक्टर के साथ और भी डॉक्टर आए थे जो कश्यप और बाकी और दो लोगों को इमरजेंसी तो वार्ड में ले जा रहे थे। 

कश्यप के साथ वनराज था शिवाय हॉस्पिटल की फॉर्मेलिटी पूरी करने गया था। 

कुछ देर बाद 
मोहिनी जी उर्मिला जी शेखर जी अद्वित चारों भाग कर रिसेप्शन के पास आते हैं और बोलते हैं कि अभी एक इमरजेंसी कैसा है क्या आप उसे वार्ड का नंबर बता सकते हो तो वह असिस्टेंट पहले उनसे उनके डिटेल्स लेती है फिर उन्हें वार्ड का नंबर देती है। 
(जब मोहिनी शेखर और उर्मिला जी कपाड़िया मेंशन जाने के लिए घर से बाहर आ रहे थे तो तब मोहिनी जी को वनराज का कॉल आया था, पहले तो वह वनराज का कॉल देखकर उन्हें कुछ समझ नहीं आता क्योंकि वनराज उन्हें कभी कॉल नहीं करता था फिर भी वह कॉल उठाती है तो वनराज उन्हें बस कश्यप और सांची के एक्सीडेंट के बारे में बताता है जिसे सुनकर वह अपनी होश खो बैठती है।
जैसे वह होश में आती है तो वह शेखर और उर्मिला) जी को भी वही बात बताती है जो वन राज्य ने बताया उसके बाद वह लोग सीधे हॉस्पिटल के लिए निकल जाते हैं।।)

उनके पीछे-पीछे खुशी जी ,रुचिता जी, इशिता की अरनव जी भी आते हैं और सेम सवाल रिसेप्शनिस्ट से पूछते हैं।
तो रिसेप्शनिस्ट भी उनके डिटेल्स लेती है और उन्हें एमरजैंसी रूम नंबर बता देती है।।
इस वक्त पूरा कपाड़िया परिवार सांची के इमरजेंसी वार्ड के पास खड़ा था ,इस वक्त किसी के मन में किसी के लिए बैर नहीं था ना ही कोई गुस्सा बस था तो आंसू दर्द और घबराहट ‌।
सभी लोग सूद भूद को चुके थे, खुशी जी , उर्मिला जी को संभाल रही थी तो तुम इशिता और रुचिता जी मोहिनी जी को संभाल रहे थे। 
अद्वित एक तक इमरजेंसी वार्ड की तरफ देख रहा था ना उसकी आंखों में आंसू थे ना ही कुछ बस उसके एक्सप्रेशंस कोल्ड थे जैसे वह किसी आदमी में चला गया हो। 
उसकी हालत देखकर वनराज उसके करीब जाकर उसे कंधे पर हाथ रखता है तो अद्वित एक नजर मनराज को देखा है और से गले लगाता है पर जोर-जोर से रोने लगा था। 
सबकी इतनी हालत खराब देखकर अरनव जी को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि इस वक्त रमन भी वहां नहीं था कि वह संभाले सके।
बस शेखर जी अकेले थे । उनके पास कोई नहीं था क्योंकि सब जानते थे कि अगर इस वक्त कोई शेखर जी को संभाल सकता है तो सिर्फ रमन जी ही है पर रमन जी की हालत ऐसी नहीं थी कि वह हॉस्पिटल आ सके। 
तभी शेखर जी अपनी होश में आते हुए बोले यह सब कैसे हुआ उनका सवाल सुनकर सब लोग वनराज और शिवाय की तरफ देखा है तो शिवाय जवाब देता है। हम किसी काम से ऑफिस से बाहर गए थे जैसे ही लौट रहे थे तो हमने सड़क पर भीड़ देख था जिसे देखकर हमने कर रोक कर भीड़ के अंदर गए तो हमने वहां देखा था कि किसी का एक्सीडेंट हुआ है तो जैसे-जैसे हम करीब जा रहे थे तो हमने देखा वह कोई और नहीं कश्यप सच्ची थे और उनके साथ सिद्धार्थ मल्होत्रा और राम शर्मा भी थे। यह एक्सीडेंट कैसे और कब हुआ हमें नहीं पता।
जैसी मैंने यह देखा तो भाई ने पहले एंबुलेंस को बुलाया फिर मैं और भाई ने साची और कश्यप को लेकर हॉस्पिटल आ गए थे। मिस्टर शर्मा और श्री मल्होत्रा एंबुलेंस में आ रहे थे। 
इस वक्त सांची मिस्टर मल्होत्रा और मिस्टर शर्मा की हालत बहुत ही ज्यादा क्रिटिकल है तीनों को इस वक्त ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया है। 
शिवाय की बात सुनकर अब सब की हिम्मत टूट चुकी थी तभी उन्हें किसी के गिरने की आवाज आती है तो वह देखते हैं कि यह कोई और नहीं अंकिता जी और जया जी होती है। इस वक्त वह दोनों यह खबर सुनकर  बेहोश हो चुके थे ।

वनराज ने उन्हें भी कॉल कर कर बता दिया था कि राम और सिद्धार्थ जी का एक्सीडेंट हुआ है जिसकी वजह से वह भी दौड़े दौड़े हॉस्पिटल आए थे। 
इस वक्त पूरे अस्पताल का माहौल मातम की तरह छा गया था अभी किसी को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें कुछ देर पहले तक सब कुछ ठीक था सब लोग खुश थे शर्मा और मल्होत्रा सगाई के बारे में बात कर रहे थे कपाड़िया जिंदगी में अभी-अभी खुशियां आना शुरू हुआ था लेकिन अचानक एक हाथ से ने सब कुछ बदल दिया। 
जया जी ने अभी तक यह बात तरुण को नहीं बताई थी ना ही अंकिता जी ने आरोही को। तब तक वहां शशांक भी आता है।
शशांक और वनराज डॉक्टर को बुलाते हैं और अंकिता और जया जी को एक वार्ड में शिफ्ट कराकर उनका इलाज करवाते तो वह बस दोनों सदमेस्ट बेहोश हो गई थी जो कुछ देर बाद उन्हें होश भी आ गया था।।

तभी कश्यप भी अपनी इलाज करवा कर इमरजेंसी वार्ड के बाहर आ जाता है उसे देखकर सब लोग उसके पास जाकर उसके हालात पूछते हैं उसके बाद उसे चेयर पर बिठाते हैं। 

कुछ देर बाद रमन जी भी हॉस्पिटल आ जाते हैं क्योंकि उनका दिल घर पर रहने का मन ही नहीं रहा था। वजह हॉस्पिटल जाकर वहां के स्थिति का सारा जायजा लेते हैं उसके बाद शेखर जी के पास बैठते हैं।।

शेखर जी की हालत कुछ खास ठीक नहीं थी उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि उनके करीब कौन बेटा है कौन नहीं वह एक नजर रमन जी को देखते हैं और अपना सर के कंधे पर रखकर बोले यहां सब क्या हुआ भाई? इतने सालों बाद रमन जी अपने छोटे भाई के मुंह से अपने लिए भाई सुनकर इमोशनल हो जाते हैं।
लेकिन वह जानते थे कि इस वक्त इमोशनल होने का वक्त नहीं है वह खुद को संभालते हुए शेखर जी से बोले कुछ नहीं बस माता रानी हम लोगों की परीक्षा ले रही है और तुम चिंता मत करना हमारे बच्चों को कुछ नहीं होगा उनकी बात सुनकर शेखर जी बस एक सुकून महसूस करते हैं और अपनी आंखें बंद कर कर उनके कंधे पर सर रखे रहते हैं।
रमन जी उने संभाल रहे थे लेकिन, वह  भी अंदर से घबराए हुए थे।
जब शिवाय सबको यहां देखा है तो उसे समझ नहीं आता है कि बच्चे कहां है तो वह खुशी जी से पूछता है कि बच्चे का है तो खुशी की उन्हें बोलती है कि वह तीनों बच्चे तरुण आरोही के साथ है इसे सुनकर शिवाय गहरी सांस लेता है। 

ऑपरेशन चल ही रहा था सभी लोग परेशान होकर ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठे थे सबकी ऐसी हालत देखकर शिवाय कैफेटेरिया जाता है और सबके लिए पानी और चाय कॉफी का आर्डर कर कर ले आ ही रहा था कि वह देखता है कि आरोही तरुण कौरव और आर्य अस्पताल के अंदर आ रहे थे इस वक्त सान्नवि स्ट्रेचर पर बेहोश पड़ी थी।
तरुण आर्य को संभाल रहा था जो रो-रो कर अपनी हालत बुरा कर चुका था तो आरोही संवि को होश में लाने की कोशिश कर रही थी। कौरव उनके पीछे-पीछे आ रहा था।
शिवाय अपनी बेटी को इस तरह स्ट्रेचर पर बेहोश रहते देखकर उसके हाथों से सारा सामान गिर जाता है और वह दौड़कर संवि के पास जाता है उसे उठाने की कोशिश करता है। 

आखिर क्या हुआ संवि को? 
क्या यह सब हादसा सिर्फ हादसा था या किसी की षड्यंत्र। 
जाने के लिए पढ़िए अगला चैप्टर।

गैस रिव्यू ओर कमेंट देना मत भूलना। आईटी'एस ए हम्बल रिक्वेस्ट।