The unique business of Ballu in Hindi Comedy stories by Gayatree writer books and stories PDF | बल्लू का अनोखा बिजनेस

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बल्लू का अनोखा बिजनेस

बल्लू एक छोटे से गाँव में रहता था, जो बचपन से ही बहुत शरारती और नटखट था। पढ़ाई में उसका मन बिल्कुल नहीं लगता था, लेकिन उसकी शरारतों के किस्से पूरे गाँव में मशहूर थे। बब्लू के पापा हमेशा कहते, "बब्लू, कुछ काम कर ले, वरना जिंदगी भर यूँ ही आवारा घूमता रहेगा!" लेकिन बब्लू को तो बस मस्ती करनी थी।                                                                        एक दिन गाँव में एक बड़ा मेला लगा। बब्लू के दोस्त चिंटू ने कहा, "चल बब्लू, मेले में चलेंगे, खूब मज़ा आएगा!" बब्लू तैयार हो गया। दोनों दोस्त मेले में पहुँचे, वहाँ झूले, गोलगप्पे, खिलौने और बहुत सारी दुकानें लगी थीं। बब्लू की नज़र एक खिलौने की दुकान पर पड़ी, जहाँ भीड़ लगी थी। उसने देखा, दुकानदार एक ऐसा खिलौना बेच रहा था, जो हँसते-हँसते गिर जाता था। सब बच्चे खिलौना देखकर हँस रहे थे।                            बब्लू के दिमाग में एक आइडिया आया। उसने सोचा, "अगर मैं भी कुछ ऐसा अनोखा बेचूं, तो खूब पैसे कमा सकता हूँ!" लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे। चिंटू ने कहा, "बब्लू, मेरे पास 50 रुपये हैं, कुछ जुगाड़ कर लेते हैं।" दोनों ने मिलकर सोचा और बब्लू के दिमाग में एक नई शरारत सूझी।                                              बब्लू ने गाँव के पुराने कबाड़ से कुछ खाली डिब्बे, रस्सी और रंगीन कागज इकट्ठा किए। उसने उन डिब्बों को जोड़कर एक अजीब सा खिलौना बना दिया, जो रस्सी खींचते ही जोर-जोर से आवाज करता था और हिलने लगता था। बब्लू ने उसका नाम रखा – "हिलता-डुलता डिब्बा।" अब बारी थी इसे बेचने की!                   अगले दिन बब्लू और चिंटू ने गाँव के चौक पर अपनी दुकान लगा ली। बब्लू ने ज़ोर-ज़ोर से आवाज लगाई, "आओ-आओ, देखो अनोखा खिलौना, हिलता-डुलता डिब्बा, बच्चों की हँसी का खजाना!" बच्चे दौड़कर आए, किसी ने डिब्बा खींचा तो वो ज़ोर से हिलने-डुलने लगा, सब बच्चे हँसने लगे। बब्लू ने दाम रखा – सिर्फ 10 रुपये! देखते ही देखते सारे डिब्बे बिक गए।                                                                       अब बब्लू को लगा कि वो तो बिजनेसमैन बन गया! अगले दिन उसने और डिब्बे बनाए, लेकिन इस बार उसने डिब्बे में छोटी सी सीटी भी लगा दी, जिससे वो आवाज भी करने लगे। अब तो बच्चों के साथ-साथ बड़े भी उसकी दुकान पर आने लगे। एक दिन गाँव के प्रधान जी भी वहाँ आ गए। उन्होंने पूछा, "बब्लू, ये क्या बेच रहे हो?" बब्लू बोला, "प्रधान जी, ये है हिलता-डुलता डिब्बा, बच्चों को हँसाने का सबसे सस्ता तरीका!"।                                                                       प्रधान जी ने भी एक डिब्बा खरीदा और जैसे ही रस्सी खींची, डिब्बा ज़ोर से हिलने लगा और सीटी बजने लगी। प्रधान जी हँसते-हँसते लोटपोट हो गए। उन्होंने बब्लू की तारीफ की और कहा, "बब्लू, तू तो बड़ा जुगाड़ू निकला!"।                                                    अब बब्लू की दुकान गाँव में हिट हो गई। लेकिन बब्लू की शरारतें यहीं नहीं रुकीं। एक दिन उसने सोचा, "क्यों न डिब्बे में रंगीन पाउडर भी डाल दूँ, जिससे डिब्बा हिलते ही रंग उड़ जाए!" उसने ऐसा ही किया। अगले दिन जब बच्चों ने डिब्बा खींचा, तो रंग उड़कर सबके कपड़ों पर लग गया। बच्चे तो खुश हो गए, लेकिन उनकी मम्मियाँ गुस्सा हो गईं। सब मम्मियाँ बब्लू के पास पहुँचीं और बोलीं, "बब्लू, ये क्या किया! सारे कपड़े गंदे कर दिए।"।                                              बब्लू घबरा गया, लेकिन उसकी समझदारी देखो – उसने तुरंत माफी माँगी और बोला, "आंटी, चिंता मत करो, मैं खुद सबके कपड़े धो दूँगा!" अब बब्लू की दुकान के साथ-साथ कपड़े धोने का नया बिजनेस भी शुरू हो गया।                                                                        धीरे-धीरे बब्लू गाँव का सबसे मशहूर और मजेदार बिजनेसमैन बन गया। उसकी शरारतें और जुगाड़ ने सबको हँसाया भी और उसकी किस्मत भी चमका दी। अब गाँव में सब कहते हैं, "अगर जिंदगी में हँसी चाहिए, तो बब्लू की दुकान जरूर जाना!"                     तो कैसी लगी बब्लू की मजेदार कहानी? अगर और भी सुननी है, तो मुझे फोलो कर लीजिए!😄