बैटल गॉड Ch 1 - अंत क्या?करोडो साल पहले दानवो, दैत्यओं ने मिल कर स्वर्ग पर आक्रमण किया। देवताओं और दानवो, दैत्यओं की लड़ाई अपने चर्म स्तर पर चल रही थी। चारो तरफ खून बह रहा था। ऐसे मैं एक योद्धा दानवो और दैत्यओं ं को गाज़र मूली की तरह काटता हुआ अकेला ही उनकी सेना के अंदर घुसा चला जा रहा था। और देवता भी युद्ध करने मैं लगे हुए थे। तरह तरह के दिव्य आस्त्रों का प्रयोग किया जा रहा था। कंही आग, तो कहीं बिजली कहर वरपा रही थी।जल और धरती के तत्व तभाई मचाई हुई थी। आसमान खून के रंग से लाल होता जा रहा था।युद्ध के बीच मैं एक देवता दूसरे देवता से बोला, " इस बार यह कालकेतु और धूम केतु नहीं बचेंगे। पिछली बार तो यह त्रिनेत्रा भाई से अपनी जान बचाकर भाग गए थे। इनकी हिम्मत तो देखो फिर स्वर्ग पर अपनी सेना के साथ आक्रमण कर दिया। "दूसरी तरफ वो युवा योद्धा अकेले ही दानवो दैत्यओं को मारते हुए उनकी सेना के बीच मैं जा चूका था। फिर अचानक उसको खून की उलटी होनी शुरू हो गयी उसका शरीर उसका साथ छोड़ने लगा।उसको कमजोर पड़ता देख कर दानवो और दैत्यओं ने दुगने उत्साह से उस पर अपने अस्त्र शस्त्र का प्रयोग करना शुरू कर दिया। उसका शरीर लहूलुहान हो गया था। उसके हाथो पर से खून गिर रहा था। जब भी वो अपनी शक्ति को प्रयोग करने की कोशिश करता अपने आपको और भी कमजोर होता महसूस करता था। समय के साथ उसका चेहरा पीला पड़ गया। सारे शरीर पर उसका ही खून लगा हुआ था। मगर फिर भी वो मजबूती के साथ अपने हाथ मैं तलवार पकडे हुए था। तलवार का मुठ पर कई मणि और हीरे जडे हुए थे।वो तलवार परम दिव्य थी।आखिर कार वो युवा योद्धा घुटनो पर बैठे गया तलवार के सहारा लेकर।तभी एक आवाज़ आयी, " कैसे हो त्रिनेत्रा ? "यह आवाज़ वो पहचान गया। ये दानव राज कालकेतु की आवाज़ थी। जो दानव सेना से बाहर आ गया था।" क्या हुआ कमजोरी लग रही है ? खड़ा नहीं हुआ जा रहा है ? फिर तुम मुझसे युद्ध कैसे करोगे ? "इतना बोल कर हसने लगा।इतने मैं दूसरी आवाज़ का मालिक बोला, " अब यह युद्ध मरने के बाद करेगा। "यह दैत्य राज धूमकेतु था। दोनों उस पर हंस रहे थे और वो विवश था। क्युकी अपनी शक्तियां जागरूक करते ही खून की उलटी हो रही थी। तभी पीछे से चार देवता और एक देवी उन के बीच आती हैं।उनको देख कर वो बोलता है, " कामिनी तुम यंहा से चली जाओ मदद लेने के लिए। कमल, मनीष, विकास रोहन, को यही छोड़ दो। तब तक यह संभाल लेंगे। " उनको त्रिनेत्रा ने बहुत कुछ विद्या सिखाई थी। यह वो लोग थे जिन पर वो आँख बंद करके विश्वास किया करता था। कामिनी देवी उसकी प्रेमिका थी।हलाकिवो अभी भी नहीं समझ पाया था की उसके साथ क्या हुआ है।जब उसने बोला और कोई जवाब नहीं आया अपने दोस्तों और कामिनी की तरफ से तब उसने गर्दन घुमा कर उनको देखा उनके चेहरे पर विजय मुस्कान थी।तब उसको एहसास हुआ की उसके साथ छल हुआ है और करने वाले भी उसके अपने है। जिन लोगों ने दुश्मन का हाथ पकड़ लिया था।वो वीर योद्धा था मृत्यु के मुख पर खड़े होकर भी उसने अपनी पूरी शक्तियों का आवाहन करना शुरू कर दिया था।अगर वो ऐसा नहीं करता तो जो उम्मीद थी वो भी ख़त्म हो जाती। जब सबने देखा की वो अपनी शक्तियों को आवाहन कर रहा है तो दानव राज कालकेतु और दैत्य राज धूम केतु ने अपने दिव्य अस्त्र से उस पर हमला बोल दिया। मगर उनके वो दिव्य अस्त्र उसके कवच को नहीं तोड़ पाए। तब कामिनी ने पीछे से कुछ विशेष मुद्रा मैं जाप कर कुछ मन्त्र पढ़े और उसके हाथ मैं एक चाकू दिखाई दिया।उसने वो चाकू उसकी पीठ पर मार दिया और फसा कर नीचे खींच दिया। इस काम में कामिनी की सारी दिव्या ऊर्जा शक्ति ख़त्म हो गयी थी। उसका चेहरा भी पीला पड़ गया था।कवच के टूटते ही बांकी के चारो लोगों ने अपने आस्त्रों से उस पर बार कर दिया। सब लोगों ने मिल कर उसके शरीर पर अनगिनत जखम दे दिए थे।इस समय उसके दिल मैं एक भाला घुसा हुआ था। उसको निकाल लिया गया और उसकी सांसे धीरे धीरे कमजोर पड़ने लगी।. उसने अपनी अंतिम सांस आने से पूर्व मन ही मन मृत्युंजय विद्या का ध्यान किया और उसकी आत्मा ने शरीर छोड़ दिया। जैसी ही इधर उसकी आत्मा ने शरीर छोड़ उधर उन लोगों ने उसकी आत्मा को नष्ट करने की लिए उसके शरीर के टुकड़े टुकड़े कर डाले।मगर वो यंहा चूक गए। मृत्युंजय विधा उसने किसी को भी नहीं बताई थी की उसने कब और किस से सीखी थी। आज इसी ने उसे हमेशा नष्ट होने से बचा लिया था।जब उन सात लोगों ने देखा की उसकी आत्मा नष्ट नहीं हुई है तो वो लोग परेशान हो गए। उन लोगों ने तुरंत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके उसको एक पत्थर मैं सबने मिल कर सील कर दिया। यह सील तभी ही खुल सकती थी जब उसके जैसा ही कोई योद्धा का खून उस पत्थर पर पड़ेगा।उन सातों ने उसको सील करने के बाद चैन की सांस ली और उस काले नीले पेले हरे गुलाबी लाल सफेद यह सभी रंग का मिल कर वो पत्थर बन गया था। उस पत्थर को उठा कर कामिनी ने स्वर्ग से नीचे फेंक दिया।वो अजीब रंग का पत्थर पृथ्वी पर आकर पहाड़ियों के बीच आकर गिर गया।उस घटना के होने के बाद वो लोग वापस स्वर्ग लोक में आ गए और उन चार देवताओं ने और कामिनी ने बताया की, " कालकेतु और धूमकेतु ने अपने दिव्या अस्त्र से त्रिनेत्रा का अंत कर दिया। हमने बहुत कोशिश की मगर सही समय पर हम लोग उसके पास जा नहीं पाए। उसके बाद उसके शरीर के आंगो का अंतिम संस्कार कर दिया गया। "और स्वर्ग के एक शक्तिशाली योद्धा का अंत हमेशा के लिए हो गया।क्यों की आत्मा के नष्ट होने के बाद फिर पुनरावृति नहीं होती तो उसका अस्तित्व ही ख़त्म हो जाता है।क्या यही अंत था उस बैटल गॉड त्रिनेत्रा का ?उस घटना को हुए करोडो साल बीत गए थे एक तरीके से नया युग या कल्प की शुरुआत हो रही थी समय का काल चक्र अपनी गति से चलता रहा और एक लम्बे अंतराल के बाद कुछ करोडो साल पहले की व्यवस्था की रूप रेखा वैसे ही रही जैसा प्राचीन इतहास मैं चलता आ रहा था। शक्ति और सामर्थ वान की हमेशा इज़त होती है होती थी और होती रहेगी। शक्तियों के इस दौड़ वाले समय मैंउत्तर दिशा मै वशां हुआ एक गुरुकुल जिसका नाम शंकर नाथ गुरुकुल है। इस गुरुकुल मैं राज्य की कई नामी खानदानो के लड़के लड़कियां यहाँ ट्रेनिंग है। इस गुरुकुल पर राज्य के प्रभाव शाली खानदानो का वर्चस्वपहले से ही था। ऐसे मैं तीन खानदानो के लड़के और लड़कियों मैं हमेशा एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी रहती थी। मौर्यवंशी, सूर्यवंशी, चंद्र वंशी खानदान के लोग हमेशा एक दूसरे से आगे निकलने का प्रयास करते थे। कहते है शक्ति ही राज करती है। शंकर नाथ गुरु कुल मैं वाहरी छात्रों और आंतरिक छात्रों दो वर्ग मैं बाटे हुए थे। गुरु कुल काफ़ी लम्बे झेत्र मैं बनाया हुआ था। उसमे आंतरिक छात्रों के रहने और ट्रेनिंग के लिए अलग सुख सुविधा थी। और वहरी छात्रों के लिए अलग। यह गरुकुल का नियम था वो बाहरी छात्र भी ज़ब बनते थे ज़ब कोई चक्र उनका जाग्रत हो जाता था। ऐसे माहौल मैएक लड़का जिसका नाम रुद्राक्ष अग्निवाशी था वो भी गुरु कुल मैं शिक्षा लेने आया हुआ था। अग्निवंशी खानदान पुरे राज्य मैं सबसे शक्तिशाली था उसका रुतवा और शक्ति अलग ही लेवल की थी। रुद्राक्ष अग्निवंशी 12साल का लड़का था। उसके परिवार के चाचा ताऊ के बच्चों ने अपने चक्र जाग्रत कर लिए थे और कुछ गुरु कुल के आंतरिक छात्र के दौर पर पडोनीत हो चुके थे कुछगुरु कुल के वाहरी छात्रों की रैंकिंग मैं सबसे आगे थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी अपने परिवार मैं सबसे कमजोर था। उसका कोई सन्मान नहीं करता था कोई इज़त नहीं मिलती थी उसको हमेशा हर कोई उसकी बेज़ती करता रहता था। यही हाल उसका यंहा गुरु कुल मैं था एक से दो साल के अंदर उसके अपने मुलाधर चक्र को जागरूक कर लेना चाइये था। हर चक्र को जागरूक करने के लिए नो स्तर थे और रुद्राक्ष अग्निवंशी पिछले तीन साल से चौथे ही स्तर पर लटका हुआ था। उसको अपने परिवार से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती थी किसो उस से कोई उम्मीद नहीं थी उसकी माँ पहले ही ख़त्म हो चुकी थी और जो दूसरी माँ थी वो उस से नफरत करती थी। श्याम अग्नि वंशी जो रुद्राक्ष का पिता था उसने भी अपनी उम्मीद इस लड़के से खो दी थी.अब उनकी उम्मीद दूसरी बीबी के दोनों बच्चों पर टिकी हुई थी। उनकी दूसरी बीबी के एक लड़की और एक लड़का थालड़की गीता बहुत ही नक्चड़ी और घमंडी ऐसा ही उसका भाई सुनील था दोनों अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते थे। वो दोनों भी रुद्राक्ष को तकलीफ देने मैं कोई मौका और कोई कमी नहीं रखते थे। श्याम के बच्चे अपने चाचा राम के बच्चों से हमेशा आगे निकलने की दौड़ मैं रहते थे। अब ऐसे मैं श्याम बड़े थे तो घर के मुखिया की कुर्सी उनकी ही थी उनके बाद किसको मिलेगी इस बात की होड़ थी। शंकर नाथ गुरुकुल मैं काम करने वालों छात्रों को अलग से छोटे छोटे कमरे आउटर साइड मैं बनाये गए थे। यह छात्र काम करने के लिए बिल्डिंग के अंदर जाते जो आंतरिक और बाहरी विभाग की बिल्डिंग बनी हुई थी। इनका मासिक वेतन तीस स्वर्ण मुद्रा मिलती थी जिस से इन लोगो को अपने खाने का खर्चा और अन्य जरुरत को पूरा करना होता था। इतनी स्वर्ण मुद्रा मैं इनकी जरूरत ही मुश्किल से पूरी हो पाती साधना के लिए जड़ी बूटी या औसधी की गोलिया इनके लिए सपना मात्र थी। जल्दी ही उसके सौतले भाई और बहन आंतरिक छात्र बन गए। और रुद्राक्ष अभी भी अपने चौथे स्तर पर ही अटका हुआ था। वो डेली सुबह उठता अपने पतले दुबले शरीर की साथऔर बेसिक मर्शियल आर्ट की एक तकनीक thunder पंच का अभ्यास करता। उसकी आँखों मैं एक अलग सा जनुन था। उसकी आँखों मैं दृढ़ इच्छाशक्ति से भरी हुई थी वो डेली खुद से कहता था एक दिन वो सूरज बन कर चमकेगा। उसने कभी किसी का बुरा सोचा ना बुरा किया। वो अपने घर वालो की बातो को भी दिल पर नहीं लेता था। ज़ब की उसके माँ और भाई बहन उसको टार्चर करने मैं कोई कमी नहीं रखते थे। उसको अपने ऊपर और अपनी मेहनत और भगवान पर भरोसा था एक दिन वक्त जरुर बदलेगा। वो गुरुकुल मैं बाहरी विभाग मैं करता और डेली अपना अभ्यास करता था मगर साधनों की कमी हमेशा उसको खलती थी। गुरुकुल ने एक अभियान निकाल जिसमे छात्रों को उत्तर के मायावी जंगल मैं जा कर जानवरो का शिकार करना था. अभियान निकलने का मकसद छात्रों को लड़ाई की वस्तिक छमता से पर्चीय कराना था। आंतरिक छात्रों ने अभियान के लिए अपनी अपनी तैयारी की और गुरुकुल के आचार्य के आँगले आदेश का इंतज़ार करने लगे। अचारयो ने उन आंतरिक छात्रों को कुछ और लोग जो उनका सामान उठा सके उसके लिए। सामान्य विभाग था जिसमे काम करने वाले छात्र रहते थे उसमे से जो जिसको अपने साथ ले जाना चाहे ले जा सकता था। सुनील और गीता ने रुद्राक्ष को अपने साथ ले जाने के लिए पंजीकरण करवा दिया। 30 लोगो का ग्रुप दस दस मैं बट कर अभियान के लिए उत्तर के मायावी जंगल की तरफ निकाल पड़े। सारे राश्ते रुद्राक्ष अपने सर पर सामान उठा कर चलता रहा। उसकी इस्थिति के बारे मैं सब जानते थे फिर उसके भाई बहन ही उसके साथ ऐसा व्यवहर कर रहे थे तो कोई क्या बोल सकता था। जबकि हकीकत यह थी उन लोगो ने अभियान के बारे मैं अपने घर पर अपनी माँ को बताया था। सारी चीजों को समझने के बाद रुद्राक्ष को खतम करने का सुनेहरा मौका था कोई सक भी नहीं करेगा और मुखिया के पद का दावेदार भी ख़तम हो जायेगा। श्याम अग्निवंशी को उसकी माँ अपने आप संभाल लेगी। इस साजिश से अनजान रुद्राक्ष उनके साथ अभियान पर निकल गया था। मायावी जंगल मैं यह लोग काफ़ी अंदर तक आ गए थे सभी तीस तीस के लोग और सहायक साथ मैं थे। इन लोगो ने सही और सुरक्षित जगह देख कर टेंट लगा दिया। और रात्रि विश्राम करने के बाद सुबह सबने जंगल के अंदर पहाड़ो पर चढाई करनी शुरू कर दी। धीरे धीरे यह लोग कई पहाड़ पार करके जंगल के बीच मैं आ गए वंहा बहुत सी घेरी खाई था अलग अलग जानवरो की आवाज़ आ रही थी जो नये थे वो डरे हुए थेजो पुराने थे वो शांत थे। रात मैं उन लोगो ने कुछ खरगोश का शिकार करके उसको बनाया खाया। और फिर दिन मैं शिकार करने लगे। तीन टीम तैयार हुई हर एक टीम के साथ सहायक रखा गया। गीता और सुनील की टीम मैं रुद्राक्ष था। और वो लोग अपनी टीम को जंगल मैं शिकार करने के लिए घुश गए। गीता सुनील हिरन का पीछा कर रहे थे यह सभी तीन रैंक के थे। इनका शिकार करके इनका तिलसमी पत्थर आसानी से मिल जाता। सभी लोगो ने प्लान के हिसाब से हमला किया और उन हिरन का पीछा किया आठ लोग आगे निकाल गए पीछे तीन लोग रह गए जो हिरन अलग दिशा मैं भगा थे वो उसके पीछे थे। गीता सुनील उस हिरन का पीछा करते हुए उस मायावी जंगल मैं एक ऐसी जगह आ कर खड़े हो गए जँहा बहुत गहराई की खाई थी ऊपर से देखो तो अंत हीन नज़र आ रही थी। सुनील और गीता ने एक दूसरे की तरफ देखा और आँखों ही आँखों मैं कुछ इशारा किया। उसके बाद सुनील रुद्राक्ष को बोला जा कर खाई के किनारे से वो फूल और जड़ी बूटी लेकर आ। ज़ब रुद्राक्ष ने देखा खाई को तो दिन मैं भी नीचे देखने पर काला घना अंधेरा ही दिखाई दे रहा था। पता नहीं कितनी गहराई है इसकी। वो संबल कर खाई के किनारे गया और हाथ बड़ा कर उस फूल को तोड़ने की कोसिस करने लगा उसका सारा ध्यान खाई और फूल पर था मौके का फयदा उठा कर सुनील और गीता उसके पास आ गए थे उसको पता ही नहीं चला। पास आकर सुनील और गीता ने खींच कर लात मारी रुद्राक्ष को। ज़ब तक उसको कुछ समझ आता तब तक वो खाई के बीच हवा मैं थे नीचे गिरता जा रहा था। उसने आखिरी बार सुनील और गीता को देखा वो खड़े खड़े मुस्करा रहे थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी ने भी अपनी आँख बंद कर अपनी नियति को मान लिया था शायद उसका यही अंत था। मगर अंदर से वो बिलकुल टूट गया था। की कोई इतना भी नीचे गिर सकता है। कुछ दिन बाद सब लोग जंगल से शिकार करके वापस आ गए और सब लोगो को बताया गया की रुद्राक्ष हिरन के पीछे भागते वक्त खाई मैं गिर कर मर गया उसका पैर फिसल गया था। किसी को कुछ भी फर्क नहीं पढ़ा की कोई मर गया है श्याम को जरूर दुख हुआ मगर गीता की माँ ने अपने जाल फैला कर उनका भी मन हल्का कर दिया। इधर रुद्राक्ष खाई की गहराई मैं गिरता हुआ चला जा रहा थाएक वक्त आया ज़ब वो काफ़ी लम्बे समय तक अंधेरे मैं ही गिरता रहा और ज़ब वो उस खाई मैं जमीन से टकरा कर अँधेरे मैं लुढ़कता हुआ एक पत्थर से टकरा कर वेहोश हो गया था उसके शरीर से खून बह रहा था शयाद उसकी कमर और हाथ पैरो की हड़िया टूट चुकी थी। मगर उसकी सांस अभी भी चल रही थी वेहोशी की हालत मैं शरीर से खून बह ता ही जा रहा था जिस पत्थर से वो टकराया था उसके खून से लाल हो चूका था। गौर से अगर देखा जाता तो वो पत्थर उसके खून को सोख रहा था कुछ समय तक खून को सोखने के बाद वो पत्थर फट गया और इधर रुद्राक्ष के जीवन की डोरी टूट गयी। उस पत्थर के टूटते ही उस अन्देरी गुफा मैं चारो तरफ रोशिनी ही रोशिनी फैल गयी। और एक रोशिनी की किरण आसमान को चिरते हुए अंतरिक्ष मैं चली गयी। उस रोशिनी मैं सूरज के साथ रंग थे दो रंग और जो मिल कर बने थे और रंगों को यह नो रंग ने पूरी गुफा और अंतरिक्ष को जा कर रोशन कर दिया था। उसके बाद वो प्रकाश गायब हो गया। वो आत्मा जो उस पत्थर से निकली थी उसने रुद्राक्ष को देखा और उसके शरीर मैं प्रवेश कर गयी। वो आत्मा अपने आप से ही बोली वक्त अब भी नहीं बदला लोग अब एक दूसरे को धोके से मारते है। हम्म्म इसका शरीर तो बहुत कमजोर है काफ़ी खून बह चूका है इसके शरीर का। मुझे इसके शरीर को परिस्कर्ट करना पड़ेगा। यह थी त्रिनेत्रा की आत्मा जिसको बैटल गॉड के नाम से समस्त वृह्माण्ड जानता जनता था जिसके नाम से स्वर्ग के देवी देवता कापते थे। जिसके सामने खड़े होने मात्र से बड़े बड़े सुरमा पानी पानी हो जाते थे। त्रिनेत्रा ने रुद्राक्ष के शरीर मैं जाने के बाद उसके शरीर के पुनः निर्माण के लिए यौगिक विधि का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया धीरे धीरे उसने हड़ियों और अन्य महत्वपूर्ण आंगो को परिस्करत किया। करोड़ सालो के बाद वो मुक्त हुआ था मगर उसकी आत्मा परम दिव्या स्तर को भी पार करके परम व्रह्म स्तर पर जा चुकी थी यह उसकी इतने काल की साधना का ही फल था। उसने रुद्राक्ष की यादो को देखा की इस शरीर का मालिक कौन था और उसके साथ क्या हुआ। उसकी यादो को देख कर त्रिनेत्रा को समझ आया जो मेरी जिंदगी मैं हुआ था वही इसकी जिंदगी मैं हुआ है। इसकी आध्यात्मिक नसो और चक्र को बंद किया गया थारुद्राक्ष मैं प्रतिभा की कोई कमी नहीं थी। त्रिनेत्रा ने नाड़ी संसोधन विधि का प्रयोग किया और बंद नसो को खोल दिया। फिर उसने चक्र कया पलट विधि का इस्तेमाल किया और सभी चक्र को खोल दिया। फिर उसने पांच तत्व कायाकल्प क्रिया विधि का प्रयोग करके उसकी काया को अपने रहने योग्य बनाया उसको इतना शख्शष्म बनाया की वो उसके आत्मा की शक्ति को थोड़ा तो झेल सके। रुद्राक्ष अगिनवंशी का यह दूसरा जन्म था। 12साल का ही तो हुआ था और इतना कुछ देखना और झेलना पड़ा उसको। त्रिनेत्रा ने खुद से कहा इस शरीर को बनने के लिए काफ़ी समय और संसाधन लगेंगे। तो अब रुद्राक्ष उर्फ़ त्रिनेत्रा का अंगला कदम क्या होगा?रुद्राक्ष अग्निवंशी जो खाई मैं गिर कर ख़तम हो गया था। उसकी दृढ़ इच्छा शक्ति और लड़ने के जानून जो उसकी आत्मा मै था उसकी नेकी ने जो पुण्य कर्म अर्जित किये थे उसने अपना शरीर त्यागने से पहले अनजाने मैं ही। बैटल गॉड त्रिनेत्रा की आत्मा को उस पत्थर की सील से मुक्त कर दिया था। अब रुद्राक्ष अगिनवंशी के शरीर मैं त्रिनेत्रा था। उसने अपनी प्राचीन ज्ञान की वजह से कुछ दुर्लभ विधि का प्रयोग करके। रुद्राक्ष के शरीर को काफ़ी हद तक अपने योग्य बना लिया था। इस समय त्रिनेत्रा उस हज़ारो फूट खाई के तल पर खड़ा था ऊपर देखने पर अंधेरा ही अंधेरा नज़र आ रहा था। त्रिनेत्रा उठा और उस तल मैं कुछ महसूस किया अँधेरे मैं और एक दिशा की तरफ चल पड़ा इस खाई के तल मैं चील की तरह आकार था। रुद्राक्ष उर्फ़ त्रिनेत्रा जो एक दिशा मैं आगे आगे अँधेरे मैं चलता चला जा रहा था उस खाई एक हिस्से मैं आकर रुक गया। फिर उसने अपनी अध्यात्मिकदेवता वाली शक्ति को इस्तेमाल किया और आग जला दी उसके हाथो से निकलने वाली आग हर दिशा मैं वंहा फैल गयी। उस उजाले मैं उसने देखा की खाई के इस भाग पर एक पत्थर का दरवाजा बना हुआ था जिसके ऊपर मिट्टी और जाले जमे हुए थे. ऐसा लग रहा था जैसे उस जगह कई सदियों से कोई नहीं आया हो। रुद्राक्ष उस पत्थर के दरवाजे के पास जा पंहुचा और एक हाथो से हवा और दूसरे हाथो से आग को उस पत्थर से टकराने दिया। जैसे ही हवा और आग उस दरवाजे से टकराई खड़ी की दीवारों मैं एक कम्पन हुआ और सामने का दरवाजा नीली रोशिनी से चमक उठा। धूल मिट्टी और जाला सब साफ हो गया था। फिर त्रिनेत्रा उस नीली चमकने वाली रोशिनी के पास गया और गौर से दरवाजे को देखा तो उस पर एक प्राचीन पैटर्न बना हुआ था जिसको की फार्मेशन कहते थे। इसको किसी शक्ति शाली चीज को सील करने के लिए किया जाता था और इसमें एक जैसी शक्ति वाले साथ लोगो की जरूरत होती थी। अपने समय की फार्मेशन यंहा पर देख कर करोडो साल बाद उसके मन मैं भी उत्सुकता जाग उठी की आखिर हुआ क्या होगा। त्रिनेत्रा पहले बैटल गॉड था तो उसको सभी तरह का ज्ञान युद्ध कलाये और वृह्माण्ड मैं होने वाली हर चीज की जानकरी थी। उसने उस कछुआ सर्प फार्मेशन को तोड़ने का मन बना लिया और अपनी वर्तमान शक्ति जो यह शरीर सेह सकता था थोड़ी ही देर मैं उस फार्मेशन को तोड़ दिया। और फार्मेशन के बीच केंद्र मैं अपनी ऊर्जा डाल दी। कुछ समय अंतराल के बाद वो गुफा टाइप पर जो दरवाजा था अपने आप टूट कर विखर गया। दरवाजा खुलने के बाद उसमे से जेहरीली हवा के साथ कई तरीके की गैस वाहर निकली। अपनी ऊर्जा और अध्यात्मिकदेवता की शक्ति से उसने गुफा के अंदर हवा और प्रकाश ककी किरणे भेज दी और खुदभी गुफा के अंदर जाने लगा पांच सात किलोमीटर अंदर जाने के बाद वो गुफा के मुहने पर जा पंहुचा और सामने देखा की एक पत्थर जो सफेद और पीले रंग की रोशिनी को छोड़ रहा था। उसके ऊपर एक अंडकार आकृति जिसका साइज एक हिरन के बराबर होगा बीच हवा मैं उस पत्थर पर लटका हुआ था। गौर से देखने पर पता चलता था की उस अंडे के ऊपर सुनहरी रंग की लाइन बनी हुई थी जिसने उसे जकड़ा हुआ था। और उसको शक्ति उस पत्थर के ऊपर से निकलने वाली सफेद और पीली रंग की रोशिनी से मिल रही थी। उसके सामने एक पानी का तालाव बना हुआ था जिसमे से दिव्या ऊर्जा का स्पंदन हो रहा था। वो अंडा भी रह रह कर कुछ समय बाद अलग अलग रंग की रोशिनी मैं चमकने की कोशिश करता था जैसी की वोकिसी चीज का विरोध कर रहा हो। उसने नज़र घुमा कर देखा तो और कुछ खास उसको नज़र नहीं आया लेकिन इस जगह को देख कर वो समझ गया था कई करोडो साल से बंद थी। यह बात तो वो खुद उस फार्मेशन को तोड़ते वक्त समझ गया था। अभी उसका शरीर कमजोर था मगर उसकी आत्मा की शक्ति परम् व्रह्म स्तर पर आ चुकी थी यह स्तर त्रिदेव की शक्ति के समान होता था। क्यों की त्रिदेव को भी शक्ति अविनाशी परम व्रह्म से मिलती थी जो निराकार रहते थे। उसके ऊपर भी दो स्तर थे जो परम दुर्लभ थे जो किसी देवता और देवी को भी युगो की तपस्या के बाद भी मिल जाये उसकी भी कोई गुरंटी नहीं थी। वो वंहा के माहोल को देख कर काफ़ी सब कुछ समझ गया था मगर कन्फर्म ज़ब ही होगा ज़ब वो उस शक्ति फार्मेशन को तोड़ देगा। उसके पास समय ही समय था उसने विचार विमर्श किया अपने मन मैं क्या कदम लेना ठीक रहेगा। फिर उसने एक साफ जगह को देखा और साधना शुरू कर दी वो अपने शरीर को पंचतत्व क्रिया साधना के द्वारा पूंनिर्माण करने की यौगिक विधि करने लगा। धीरे धीरे वो ध्यान की शून्य अवस्था मैं खो गया उसके माथे के बीच मैं अंदर एक दिव्या ज्योति जल रही थी. उस दिव्या ज्योति का साइज भी किसी दीपक की लौ की तरह था मगर उसकी शक्ति अनंत थी। इधर वो ध्यान मैं था अंदर ज्योति का तेज़ बढ़ने लगा बढ़ते बढ़ते उस तेज़ ने उसके सारे शरीर के मांस और हड़िया गला थी वो एक भयानक दर्द के दौर से गुजर रहा था। और इधर उसके शरीर के वाहर चारो तरफ पांच तत्व खेलते हुए दिखाई दे रहे थे अग्नि वायु जल धरती आकाश सब मिल कर उसके शरीर को बना रहे थे। उसकी आत्मा अभी भी दिव्य ज्योति से जुडी हुई थी एक दिन पूरा निकल गया ज़ब उसके शरीर का निर्माण पूरा हुआ। फिर उसकी आत्मा ज्योति उस परम दिव्या ज्योति से अलग हुई और धीरे धीरे उसने अपनी साधना से आँखे खोली। आँखे खोलने के बाद उसने देखा गुफा मैं काफ़ी तभाई हुई थी मगर वो पानी का तलाव और वो पत्थर का अंडा अभी भी अपनी पुरानी ही हालत मैं थे। त्रिनेत्रा उठा और अपने शरीर को देखा उठते हुए उसके शरीर की हड़िया चटक रही थी ऐसा लग रहा था असीम ताकत उसके अंदर बह रही हो उसका शरीर किसी वज्र की तरह कठोर हो चूका था सामान्य शक्ति के अस्त्र और माध्यम शक्ति के अस्त्र उसके शरीर को कोई नुकसान नहीं पंहुचा सकते थे। मगर अभी उच्च और उच्तम स्तर का शक्ति अस्त्र उसको नुकसान पहुंचने मैं सक्षम थे। पूर्ण परम वज्र शरीर पाने के लिए यह क्रिया तीन बार करनी होती थी कुछ समय अंतरल के बाद ज़ब इस शरीर के अंग अंग मैं शक्ति सीमा फूल हो जाये। तो चरण था। अभी उसका शरीर बिलकुल बादल गया था उसके पास से ही शक्तिशाली आभा का भान हो रहा था इस मृत्युलोक मैं त्रिनेत्रा के यह पहला चरण था। उसकी आँखों का रंग बदल गया था उसकी आँखों मैं एक मैं चार रंग और दूसरी आँख मैं पांच रंग देखे जा सकते थे सभी जटिलता से एक दूसरे मैं पूरी तरह मिले हुए थे। उसका शरीर बलिष्ठ हो गया था। 12साल का होने के बाद भी वो 18 साल की उम्र की तरह दिखना शुरू हो चूका था। उसके बाद त्रिनेत्रा ने अपना हाथो को उस तलाव के पानी मैं जा कर डाला उसको अजीब सी दिव्या ऊर्जा की आभा महसूस हुई। और वो बिना किसी डर के तलाव मैं कूद गया और अपने शरीर को ढील छोड़ दिया. उसको बड़ी अच्छी अनुभूति हुईऔर वो वंही अपनी आध्यात्मिक साधना करने लग गया। साधना करते करते उसको समय का ज्ञान ही नहीं रहा उसने अपने साधना काल मैं उस तालव को सूखा दिया था ज़ब उसके शरीर मैं ऊर्जा शक्ति जाना बंद हो गयी जो आध्यात्मिक शक्ति का निर्माण करती थी। तो उसने अपनी आँखे खोली और देखा की उसके 6चक्र यानी की आज्ञा चक्र अपनी पूर्ण दिव्याता पर था। अब उसको शून्य चक्र और महा शून्य चक्र की दिव्यता पाने के लिए और भी शक्ति की जरूरत पड़ेगी। रुद्राक्ष अग्निवंशी दुनिया की नज़र मैं और खुद वो त्रिनेत्रा था एक बैटल गॉड। जिसके नाम से सभी वृह्माण्ड और गैलेक्सी के सुरमा डरते थे। इतने सारे घटना क्रम मैं त्रिनेत्रा ने ध्यान दिया की उस पत्थर से निकलने वाली सफेद और पीली रोशिनी कमजोर हो गयी थी और उस अंडे के अंदर से निकलने वाला रंग की चमक बढ़ गयी थी। त्रिनेत्रा ने देखा की उसको त्रिदेव फार्मेशन से बंद किया गया था। उसने इस फार्मेशन को तोड़ने के आदि शक्ति दुर्गा कवच फार्मेशन का इस्तेमाल किया और पांच दिन के अंदर उस फार्मेशन को तोड़ दिया। जैसे ही फार्मेशन टुटा गैलेक्सी और वृह्माण्ड मैं अलग अलग जगह हलचल मच गयी। उन लोगो के मुख मण्डल पर चिंता की रेखा बन गयी थी हर किसी का अपना अपना प्रतिक्रिया करने का तरीका थामगर असर बहुत दूर तक हुआ था। इस बात से त्रिनेत्रा अभी अनजान था। फार्मेशन के टूटने के बाद वो अंडा उस पत्थर पर नीचे टिक गया। त्रिनेत्रा ने अपना हाथ उसके ऊपर रखा उसको महसूस करने के लिए। उसकी आँखों मैं चमक आ गयी यह त्रिदेव के द्वारा वृह्माण्ड मैं बनाया गया सबसे पहला और सबसे शक्तिशाली ड्रैगन का अंडा था जिसको immortal ड्रैगन किंग बोलते थे और जितनी भी प्रजाती थे सब इससे ही निकली थी यह सभी की ब्लडलाइन की शक्ति को अपने अंदर कर सकता था। त्रिनेत्रा ने उस अंडे पर अपनी अंगुली पर कट लगाया औरकुछ खून की बूँदे उस पर डाल दी और थोड़े ही समय मैंउसकी खून को अंडे के अंदर सोख लिया गया। और उसके साथ ही वो अंडा टूट कर विखर गया औरएक दिव्या ऊर्जा की लहर जो डार्क अलग रंगों मैं थी निकली और त्रिनेत्रा के अंदर चली गयी। उस ऊर्जा के शरीर के अंदर जाते ही वो खुद भी तुरंत ध्यान समधी मैं बैठ गया। उस ऊर्जा के भाहव ने उसको शून्य स्तर से महा शून्य स्तर सीधा पार करा दिया और वो परम शून्य स्तर की शुरुआत पर रुक गया। उसने अपनी अंतर आत्मा मैं देखा तो एक ड्रैगन नज़र आया जिसके सौ से ज्यादा मुँह थे और वो एक शक्ति पुंज रूप मैं उसकी sea of soul मैं मजे से घूम रहा था यह तो दिव्या शक्ति की मदद से त्रिनेत्रा उसको समझ सका था। अगर गलती से कितने भी छोटे रूप मैं यह बाहर आ गया तो यकीन से आधे भूखंड को एक बार मैं ही साफ कर देगा। ज़ब यह अपनी शक्ति के चर्म पर होगा तो कई ग्रहो को अपने एक बार से ही नस्ट करने की शक्ति होंगी। स्वर्ग लोक मैं जल्दी ही आऊंगा। त्रिनेत्रा बोला देवी कामिनी तुमने अच्छा नहीं किया तुम सब लोगो ने मेरे साथ छल किया। उसके बाद त्रिनेत्रा अपनी यादो के खयालो से वाहर निकला और वर्तमान मैं आया। वो इस समय इस शरीर के मालिक रुद्राक्ष अग्निवंशी के रूप मैं था। उसको अपना लम्बा सफऱ इस शरीर के साथ तय करना था यह सोचते हुए वो उस गुफा से बाहर निकला और वापस चील के आकर की घाटी की उसी जगह आया जिस जगह उसकी मृत्यु हुई थी। वो बोला मैं रहा हूँ गीता और सुनील। उसके बाद वो घाटी की दूसरी दिशा मैं चलने लगा और दो दिन बाद कई पहाड़ो को पार करके एक गुफा के मुँह से वो बाहर निकला तो उजाला फैला हुआ था जंगली जानवर चिंघड़ रहे थे। रुद्राक्ष के शरीर मैं आत्मा तो देवता की थीऔर सब कुछ उसी स्तर का था। मगर इस पंचतत्व के शरीर के कुछ दायरे भी थे जिनको समय के साथ तोडना पड़ेगा.अब उसका सफऱ रुद्राक्ष की यादो के साथ शुरू हो चूका था। आगे क्या होगाजारी रहेगी। रुद्राक्ष अग्निवंशी उस घाटी से वहार आ चूका था उसने देखा इतने अंतराल के बाद सूर्य की रोशिनी को देखा उसके आँखे अलग अलग रंग से चमक उठी मानो उसकी आँखों मैं हज़ारो सूर्य हो उसनेसूर्य देव को दोनों हाथ जोड़ कर प्रणाम किया और बोला अनुज का प्रणाम सुविकार करें ज्येष्ठ। इतना कहते ही सूर्य की शक्तिशाली किरण प्रकाश गति से आयी और उसके शरीर से टकरा गयी। वो किरण उसके शरीर से थोड़ी देर तक टकराती रही और उसकी शरीर ऊर्जा त्रिनेत्रा के शरीर ने सोख ली। उस रोशिनी की किरण की शक्ति से उसका परम दिव्या स्तर आधे राश्ते पर जा पंहुचा था। अब इस स्तर को पार करने के लिए उसे अभी आधा राश्ता और तय करना था। सूर्य से आने वाली रोशिनी की किरण इतनी शक्तिशाली थीं की अगर वो किसी ग्रह से टकरा जाती तो सेकंड मैं उस ग्रह मैं विस्फोट हो जाता। मगर त्रिनेत्रा ने उस ऊर्जा को पूरा तीस मिनट तक आत्मसत किया था। उसके बाद रुद्राक्ष मायावी जंगल से निकलना शुरू कियासामने जो भी जानवर आ रहा था वो उनका शिकार करता हुआ उनकी शक्ति मणि जो उनके माथे मैं होती थीं लेता जा रहा था। जंगल से बाहर आते आते उसने रैंक एक से लेकर पचास तक के जानवरो को मार डाला था इस समय कोई उसको देख लेता तो कह ही नहीं सकता था की यह वारह साल का लड़का होगा। रुद्राक्ष इन सब जानवरो की मणि कोई अपने पास रखा और पुरानी यादो मैं शांकरनाथ गुरुकुल का राश्ता खोजते हुए आखिर मैं वो गुरुकुल के दरवाजे पर जा पंहुचा। दरवाजे पर खड़े हुए कर्मचारी ने उसको रोका और बोला ऐ लड़के कँहा घुसा चला जा रहा हैं। रुद्राक्ष ने बोला मैं इस गुरुकुल का ही छात्र हूँ। ज़ब ध्यान से उसने देखा तो पाया यह तो रुद्राक्ष अग्निवंशी है वो कर्मचारी बड़ा हैरान हुआ वो बोला तुम तो जंगल मै मर गए थे खाई मैं गिर कर। रुद्राक्ष ने उसको कोई जवाब नहीं दिया और अपना पंजीकरण कार्ड जो टोकन टाइप था उसको दिखाया और अंदर आ गया। उसको गायब हुए लगभग दो महीने हो चुके थे सबने सोचा लिया थे वो मर चूका है। दो महीने बाद आज ज़ब वो गुरुकुल मैं वापस लौटा तो कुछ लोग तो उसको पहचान ही नहीं पाए। पहले दुबला पतला दिखने वाला रुद्राक्ष अब एक मजबूत शरीर का मालिक था उसने अपना आभा और औरा पूरी तरीके से प्राचीन मर्शियल की विधि से छुपाया हुआ था। उसके शरीर के वाहरी ही बदलाव देखे जा सकते थे उसने अपने शरीर कोई भी ऊपर से सामान्य ही रखा. हुआ था। वो सीधा अपने कमरे मैं गया तो देखा उसके कमरे को गुरुकुल के बाहरी विभाग के आचार्य के द्वारा बंद करवा दिया गया था। फिर वो बाहरी विभाग मैं अपने कमरे की चाभी लेने के लिएविभाग के अंदर चला गया और वंहा जा कर उसने पंजीकरण केंद्र पर अपना पंजीकरण कार्ड टोकन निकालऔर अपने कमरे की चाभी मांगी। रामसिंह जो केंद्र को सँभालते थे। ज़ब कोई छात्र अपने घर जाता था या कंही किसी काम से वाहर जाना होता था तो ज्यादा तर लोग अपने कमरे की चाभी यंहा जमा करवा देते थे। आचार्य रामसिंह को लगा कोई छात्र वापस आया है उसको अपने कमरे की चाभी चाइये। वो बोले अपना नाम और कमरा नंबर बोलो। इस बात वो बोला मेरा नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी है मेरा कमरा नंबर चालीस है। जैसे ही उनोहनें रुद्राक्ष अग्निवंशी का नाम सुना तुरंत उठ कर खड़े हो गए और सामने देखा। तो देखते ही रह गए पहले और अब के रुद्राक्ष अग्निवंशी मैं ज़मीन और आसमान का फर्क था। रामसिंह जी ने पूछा तुम इतने दिनों कँहा थे गीता और सुनील ने अभियान से वापस आकर बताया था तुम मायावी जंगल मै एक भयानक खाई मैं गिर गए थे। इस बात पर रुद्राक्ष अग्निवंशी बोला वो सही कह रहे थे मेरी किस्मत अच्छी थीं की मैं जिन्दा बच गया। रामसिंह जी को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ मगर अपने उम्र के अनुभव से वो बता सकते थे कुछ तो जरूर हुआ है जो दो महीने मैं लड़का इतना बदल गया है। अपनी सोचा और हैरानी को काबू करते हुए उन्होंने उसकोकमरा नंबर चालीसा की चाभी दे दी उसके बाद रुद्राक्ष अपने कमरे की तरफ चला गया। उसने अपना कमरा खोला और देखा भाई ज़मीन पर लेटने की चटाई और एक तरफ खाना बनने का सामान रखा हुआ था। उस जगह मैं एक प्रभावशाली परिवार का लड़का रह रहा था। इस से लाख गुना अच्छे तो उसके घर मैं नौकर रहते थे। त्रिनेत्रा ने अपने आप से बोला अब कल से सब कुछ बदलना शुरू हो जायेगा। उसके बाद तुरंत पुरे गुरुकुल मैं यह बात फैल गयी की रुद्राक्ष अग्निवंशी वापस आ गया है। बाहरी विभाग के छात्र और आंतरिक विभाग के छात्रों मैं जंगल मैं आग की तरह खबर उसी दिन पुरे गुरुकुल मैं फैल गयी थीं। कुछ आचार्य को उस से बहुत सहानुभूति भी थीं कुछ सोचा चलो अच्छा है वो वापस आ गया। ज़ब यह खबर सुनील और गीता और उसके चाचा ताओ के लड़को और लड़कियों को मिली कुछ हैरान थे। टेंशन मैं तो गीता और सुनील थे उसके और भाई बहनो को भी पता था की उसकी मौत मैं इन दोनों का ही हाथ है अब ज़ब वो वापस आ गया है तो कल सब कुछ साफ हो जाएगा। कुछ लोग खुश थे तो कुछ लोग दुखी थे उनके चेहरे पीले हो रखे थे। अगर कल वो यह बोल देता है विभाग मैं की सुनील और गीता ने उसको खाई मैं मारने के लिए गिरा दिया था तो गुरुकुल से तो उनको निकला ही जायेगा, और किसी गुरुकुल मैं भी उनका शिक्षा लेना बंद हो जायेगा साथ मैं बदनामी होंगी वो अलग की अपने ही भाई को मारने की कोसिस करी थीं। अगली सुबह रुद्राक्ष अपने सारे काम समय से निपटा कर अपने कमरे से बाहर ही निकला था की सामने से एक कर्मचारी आया और उसको बोला तुमको वहारी विभाग और आंतरिक विभाग के आचार्य ने मीटिंग हाल मैं बुलाया है। वो बोला ठीक है मैं आता हूँ। उसने निकलने से पहले अपने साथ सारी शक्ति मनिया भी ली थीं। जो उसकी कमर की पोटली मैं लटक रही थीं। वो सीधा चलता हुआ मीटिंग हॉल मैं जा पंहुचा था उसकी चाल और उसको देख कर लग ही नहीं रहा था की रुद्राक्ष अग्निवंशी है। सभी आचार्य ने उसका देखा फिर गुरुकुल प्रमुख ने उस सेपूछा तुम्हारे साथ हादसा कैसे हो गया था. उसने सब कुछ बताया बस यह बात झुंपा गया की गीता और सुनील अग्निवंशी ने उसको मरने के लिए खाई मैं धकेल दिया था। उसके बाद दूसरे आचार्य ने पूछा तुम मायावी जंगल की भयानक खाई मैं से जीवित कैसे बचे। इस पर उसने सभी को बताया ज़ब वो खाई मैं गिरने के बाद वेहोश हो गया था मुझे बस इतना याद है की उस वक्त मैं मरने वाला था। उसके बाद मेरी आँख किसी साधु जैसे योद्धा को मैंने देखा था जिसने मेरा इलाज किया था। ज़ब मैं ठीक हो गया तो मैं अपने गुरुकुल वापस आ गया। लेकिन गुरुकुल प्रमुख को अभी सक था की रुद्राक्ष सच्चाई छुपा रहा है। मगर वो कुछ कर भी नहीं सकते थे। उसके बाद रुद्राक्ष अगिनवंशी विन्रम होकर बोला मै अपनी शक्ति मणि को बेचना चाहता हूँ। वंहा सभी मोजूद थे यह सही अवसर थे उसके लिए शक्ति मनिया बेचने के लिए। उसने अपनी पोटली खोली और शक्ति मनिया वंहा के टेबल पर खोल कर डाल दी। ज़ब उन लोगो ने देखा तो सभी अचारयो के मुँह खुले के खुले रह गए इतनी अनमोल मणि उनके सामने पड़ी हुई थीं। वो लोग उन मणि को देख कर पागल हुए जा रहे थे। रुद्राक्ष बोला अगर गरुकुल के खरीदने के लायक नहीं हैं तो मैं बाहर नीलामी भवन जो राज्य मैं है उसमे बेचने की कोसिस करना चाउंगा। गुरु कुल प्रमुख ने तुरंत अपना निर्यण सुनाया यह सभी मणिगुरुकुल ही खरीद लेगा। क्यों की बहुत कम लोग ज्यादा रैंक की मणि बेजते थे। वो लोग मणि की शक्ति को अवसोसित करके अपनी आध्यात्मिक शक्ति और चक्र जागरूक करते थे इनकी बाजार मैं बड़ी मांग थीं। गुरु कुल प्रमुख ने दूसरे आचार्य को बोला इनको रैंक के हिसाब से अलग अलग कर लौ 1,2345678910,50ज़ब सभी को रैंक की हिसाब से अलग अलग किया तो पचास मणि तो रैंक पचास के जानवर की ही थीं। सभी मणि की कीमत सौ करोड़ स्वर्ण मुद्रा से भी ऊपर जा रही थीं। उसके बाद गुरुकुल प्रमुख ने बोला तुम मेरे साथ अभी राज्य के राजा के पास चलो। उन मणि की कीमत ज्यादा थीं और गुरुकुल उनको अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। गुरुकुल प्रमुख रुद्राक्ष अग्निवंशी को अपने साथ राज्य के राज महल मैं ले गए और राजा किशोरी लाल को सारी बात बताई। किशोरी लाल भी अपनी साधना को बढ़ना चाहते थे और अपने बच्चों की भी। रैंक 50 बहुत काम मिलने वाली शक्ति मणि थीं। सारी कीमत निकालने के बाद राजा किशोरी लाल ने रुद्राक्ष को दो सौ करोड़ स्वर्ण मुद्रा का भुगतान किया और अपने मंत्री को बोला मुद्रा डाल कर लाने के लिए। मंत्री ने तुरंत उनकी आज्ञा का पालन किया और सुन्दर सीसोने की रिंग ला कर राजा को दे दी। गुरु कुल प्रमुख ने वो रिंग अपने हाथ मैं ली और अपनी आध्यात्मिक शक्ति उस मैं डाल दी और उसमे अपनी ऊर्जा भी छोड़ दी। उसने उस रिंग को अपने हाथ की ऊँगली मैं पहन लिया और उसमे देखा स्वर्ण मुद्रा का ढेर लगा हुआ थाइस स्टोरेज रिंग का स्पेस भी अच्छा था उसके अंदर बहुत जगह थीं आराम से आधे राज्य का सामान उसमे आ सकता था। उसके बाद गुरुकुल प्रमुख ने रुद्राक्ष अग्निवंशी को देखा और बोला तुम गुरु कुल चलो मै आता हूँ। उन्होंने उसके जाने से पहले अपना हाथ हवा मैं घुमाया और सोने का टोकन उसको दे। दिया और बोले जा कर केंद्र मैं दे देना। इधर वो गुरु कुल के लिए निकल आया उधर गुरु कुल प्रमुखराजा किशोरी लाल से बोले महाराज मुझे लगता है अब राजकुमार और आपकी परेशानी ख़त्म हो जाएगी। इस पर महारज बोले यह हीरा तुम्हे मिला कँहा से है। इस पर वो बोले यह लड़का श्याम अग्निवंशी की पहेली पत्नी का बेटा है। जो शून्य स्तर का साधक है। हमने तो सुना था उस लड़के मैं कोई प्रतिभा नहीं है। प्रमुख ने कहा लगा तो मुझे भी ऐसा ही था मगर बात ऐसी नहीं है जैसी देखती है। किशोर लाल ने कहा आपकी वजह से मेरे बहुत फायदा हुआ यह सब मैं वाहर से पांच सौ करोड़ मैं भी नहीं खरीद पता। यह अनमोल शक्ति मणि है रैंक पचास के जानवर की।। उसके बाद गुरुकुल प्रमुख भी गुरुकुल मैं आने के लिए निकल लिए। इस समय रुद्राक्ष अग्निवंशी उस सोने के टोकन के साथ आंतरिक विभाग मैं खड़ा हुआ था। जो शिकारी दल अभियान का केंद्र था उसमे जा कर वो सोने का टोकन दे दिया। उस केंद्र का आचार्य आँखों को खोल खोल कर बार बार उस टोकन को देख रहा था। ज़ब वो संतुस्ट हो गया तो उसने आंतरिक विभाग की सबसे आली शान कोठी उसके नाम पंजीकरण कर दिया और उसको सोने का टोकन वापस दे दिया। उसके बाद उसको सारी जानकरी दे दी उस कोठी की उसमे नौकर चाकर हर सुख सुविधा मौजूद थीं। रुद्राक्ष अग्निवंशी आंतरिक विभाग की उस कोठी मैं चला गया और उस कोठी के वाहर पत्थर पर अपना सोने का टोकन रखा और अपनी आध्यात्मिक शक्ति डाल दी। आज से यह कोठी उसके रहने की जगह थीं सभी नौकारों चकरो और हर चीज की व्यवस्था उसके लिए एक दिन मैं शाम तक गुरुकुल प्रमुख ने करवा दी थीं। उसके दो कारण थे। । राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी राज्य के राजा किशोरी लाल के यंहा से अपने शांकनाथ गुरुकुल के आंतरिक विभाग की सबसे आलिशान कोठी मैं आ चूका था। कोठी मैं नौकर चाकर सभी का इंतज़ाम था। रुद्राक्ष अग्निवंशी उर्फ़ त्रिनेत्रा अपने विशाल कक्ष मैं जा कर आराम करने लगता है। आगे के सफर के बारे मै विचार करते हुए सोचता है मेरा शरीर अभी स्वर्ग के लोगो से और उन दानव कालकेतु और दैत्य धूम केतु से मुकाबला करने के लायक नहीं है अभी तो उसका एक मामूली दानव भी मेरे इस शरीर को नस्ट कर सकता है। मुझे इसको जल्दी से जल्दी और मजबूत बनाना होगा। ज़ब मैं इतने करोडो साल तक इंतजार कर सकता हूँ तो थोड़ा और इंतजार सही ज़ब तक मैं इस शरीर के माध्यम से अपनी वास्तव की छमता प्रयोग करने के लायक नहीं बन जाता मैं इसमें सुधार करता रहूँगा। वो अपने इन्ही विचारों मैं डूबा हुआ था इतने मैं एक नौकर आ कर उसको बोलता है गुरुकुल प्रमुख आये तुमसे मिलने। रुद्राक्ष नीचे हाल मैं आता है देखता है गुरुकुल प्रमुखबैठे हुए उसका इंतजार कर रहे है उनकी आँखों मैं अलग ही चमक थीं। गुरुकुल प्रमुख रुद्राक्ष से बोलते है यह लौ अपनी स्टोरेज रिंगइसमें पूरी पांच सौ करोड़ स्वर्ण मुद्रा है। और वो स्टोरेज रिंग उसको दे देते है रुद्राक्ष उसमे अपनी आध्यात्मिक शक्ति डालता है और अपनी ऊर्जा से उस स्टोरेज रिंग को सील कर देता है अब उसको उसके अलावा कोई भी प्रयोग नहीं कर सकता था। यह त्रिनेत्रा की पुरानी विधि थीं अपने सामान को सुरक्षित रखने की.उसने उसको अपने हाथ की ऊँगली मैं पहन लिया और वो बोला इसमें ज्यादा मुद्रा क्यों है। इस पर गुरुकुल प्रमुख ने बिना बात को घुमाई करते हुए बोले रुद्राक्ष जो तुम पहले थे वो अब नहीं रहे हो तुम्हरी पूरी काया बदल गयी है पहले तुम दुबले पतले लगते थे। अब तुम अपनी कम आयु होते हुए भी ज्यादा आयु के दीखते हो तुम्हारी शरीर की भी शक्ति के बारे मैं मुझे नहीं पता किसी स्तर पर है लेकिन मेरे विचार से यंहा गुरुकुल मैं कोई भी 12साल की उम्र मैं तुम्हारा मुकाबला करने लायक नहीं है। मेरे गुरु ने मुझे सालो पहले ज़ब मैं ट्रेनिंग ले रहा था तो मुझे किसी प्राचीन ग्रन्थ से कई विधि के बारे मैं जानकारी थींजिसने तुम्हारा इलाज किया और तुमको ठीक किया वो इस विधि के कोई महान गुरु होगा। राजा किशोरी लाल के लड़के को बड़ी अजीब वीमारी है उसको कोई भी वेद हकीम और औसधी विषेसग्या पकड़ नहीं पाया। उनका एक ही लड़का है अगर तुम अपने उस महागुरु को लाकर उसके इलाज मैं मदद करने के लिए उपहार है। तुम्हरी शक्ति मणि से उसकी जीवन रेखा और बढ़ गयी है। इधर एक दिन मैं इतना कुछ हो गया था और उधर छात्रों मैं हंगामा मचा हुआ था सभी लोग रुद्राक्ष अग्निवंशी के जिन्दा होने की चर्चा मैं लगे हुए थे। बाहरी विभाग के सिस्य और आंतरिक विभाग के सिस्य के लिए अभी मुद्दे थे चर्चा करने के लिए। आंतरिक विभाग के एक छात्र बोला वो पहले भी कचरा था और अब भी कचरा है और आगे भी कचरा ही रहेगा। यह उनके अग्निवंशी खानदान के ही लड़का था उसको अपनी शक्ति पर बहुत था वो अपना मणि पुरक चक्र जागरूक कर चूका था अंगले के पहले स्तर पर था। इधर सुनील और गीता अग्निवंशी की परेशानी ख़त्म हो गयी ज़ब उनको पता चला की रुद्राक्ष ने मायावी जंगल की घटना मैं उनका नाम नहीं लिया। क्यों की वो भी आंतरिक छात्र बन चुके थे तो उन लोगो ने सोचा। डर की वजह से उसने उनका नाम नहीं लिया है। जिन्दा होने की खबर ज़ब उनकी माँ को लगी तो वो बोली मरता भी नहीं है. इसकी माँ को तो मैंने ज़हर दे कर धीरे धीरे मारा था। पता नहीं इस सपोले से कब पीछा छूटेगा। श्याम अग्निवंशी को ज़ब खबर लगी की रुद्राक्ष जिन्दा है तो उनको बहुत खुशी हुई। क्यों की कैसा भी सही वो उनका पहला लड़का था। श्याम अग्निवंशी ने गुरुकुल प्रबंधक को पत्र लिखा की वो कुछ समय के लिए रुद्राक्ष को घर भेज दे। गुरुकुल की तरफ से भी जवाब आ गया की अभी होने वाली प्रतियोगिता के ख़तम होने के बाद वो उसको घर भेज देंगे। गुरुकुल संचालक श्याम का मित्र था। श्याम ने उस पर एहसान किया था उसकी और उसके परिवार की जान को बचा कर। ज़ब उसकी रुद्राक्ष की मौत की खबर लगी थीं तो वो भी काफ़ी दुखी हुआ था। यह इन लोगो का घरेलु झगड़ा था वो इसमें बीच मैं नहीं पड सकता था। लेकिन ज़ब रुद्राक्ष वापस दो महीने बाद जिन्दा आया और एक नये रूप मैं तो वो खुद भी हैरान था। इधर गुरुकुल प्रमुख से बात करके उसने हाँ बोल दिया था। मगर सबको उसके बारे मै बताने के लिए मना कर दिया था वो भी उसकी बात मान गए जो उन दोनों के बीच मै हुई थी। आँगले दिन वो अपनी कोठी से निकल कर आंतरिक विभाग की बिल्डिंग को देख रहा था घूम रहा था। उसका राश्ता चार पांच लोगो ने रोक लिया उसने नज़र उठा कर देखा तो सुनील गीता और उनके चमचे खड़े हुए थे उनमे से एक बड़े रोब से बोला यह कचरा यहाँ क्या कर रहा है. क्या इसको गुरुकुल के नियम नहीं पता। रुद्राक्ष ने उनकी कोई बात का जवाब नहीं दिया और उनको साइड कर आगे जाने लगा। उन लोगो को अपनी बेज़ती लगी इस तरह नज़र अंदाज़ करके एक कचरा जा रहा है। इस पर गीता बोली शयाद ये अपनी औकात भूल गया है। सुनील बोला लगता है इसको फिर से इसकी औकात याद दिलानी पड़ेगी। उसने अपने चमचो को बोला जरा इसको सबक तो सिखाओ। उन तीन लड़को ने रुद्राक्ष को घेर लिया और उस पर हमला करने की तैयारी करने लगे। रुद्राक्ष ने देखा की यह लोग नहीं मान रहे है और उसके लिए परेशनी खड़ी कर रहे तो वो कुछ नहीं बोलाचुपचाप अपनी जगह खड़ा रहा. ज़ब उन लड़को का हमला उसको लगा फिर भी वो शांति से खड़ा रहा। ज़ब उन लोगो ने देखा की उनका हमला वैकार हो गया है और रुद्राक्ष उनको ही देखे जा रहा है उन पांचो का मुँह खुला रह गया। जो तीन लड़के उसको घेर कर खड़े थे रुद्राक्ष ने बड़े आराम से अपना हाथ घुमाया और उनको उड़ता हुआ भेज दिया गया तीनो उड़ते हुए दिवार से जा टकराये उनके चेहरे पीले पड़ गए तीनो मरने की हालत मैं आ गए। उनको अभी तक नहीं समझ आया उनके साथ क्या हुआवो एक कचरे से कैसे हार सकते है। सुनील और गीता तो सदमे मैं अपना मुँह खोले खड़े थे। उनको ऐसा ही छोड़ कर रुद्राक्ष आगे निकल गया। आंतरिक विभाग देखने लगा। इस घटना की खबर शाम होते होते सभी लोगो के पास जा पहुंची। जो लोग घायल हुए थे वो आंतरिक विभाग के 8,9,10, रैंक के छात्र थे जबकि गुरुकुल मैं एक हज़ार से ज्यादा छात्र पढ़ने आते थे। मर्शियल आर्ट और हथियार की ट्रेनिंग लेते थे। उसी दिन रात के समय उसको पता चला की प्रतियोगिता की घोषणा कर दी है। कल बाहरी और आंतरिक छात्र जिसकी जितनी ताकत है उसके हिसाब से चैलेंज कर सकता है। तो फिर कल रुद्राक्ष अग्निवंशी क्या करने वाला हैं। राकेश स्टोरी । अंगले दिन रुद्राक्ष अग्निवंशी उठा और और फ्रेश होकर प्रतियोगिता पंजीकरण कार्यालय मैं जा पंहुचा। उसने प्रतियोगिता के लिए अपना पंजीकरण कराने के लिए अपना सोने का टोकन निकाल और उसको दे दिया। पंजीयन अधिकारी आंखे फाड़ कर उस टोकन को देखता रहा फिर उसने रुद्राक्ष अग्निवंशी का पंजीयन कर दिया। उसके बाद वो ट्रेनिंग हाल मैं चला गया हथियार चलाने का अभ्यास करना चाहता था। ट्रेनिंग हाल मैं आंतरिक छात्र और अन्य छात्र अभ्यास कर रहे थे। ज़ब उनोहनें देखा की रुद्राक्ष ट्रेनिंग के लिए आया है तो पहले से ही उनको कल के बकाए के बारे मैं पता चल चूका था इधर यह बेफिक्र हो हथियार घर मैं गया और एक तलवार चुनी जो उसको ठीक लगी। ज़ब उसने इतने लम्बे समय के बाद तलवार अपने हाथ मैं ली तो उसको कालरूपा की याद आ गयी। वो हथियार घर की तलवार को पकड़ कर घूमने लगा। उस ने आधे घंटे का अंदर पचास से भी ज्यादा तलवार की मूव्स का अभ्यास कर डाला। उसके तलवार चलाने पर ना तलवार दिख रही थी और ना ही उसका हाथ। अंदर बैठे ट्रेनर भी हैरान परेशानी मैं थे जो मूव्स वो इतने सालो मै नहीं कर पाए। रुद्राक्ष उनको ऐसे कर रहा था जैसे कोई बच्चा खिलोने से खेलता है। उसने सभी हथियार के साथ अभ्यास किया और करने के बाद अपनी कोठी मैं वापस आ गया। ट्रेनिंग हाल मैं वो सबके मन मैं एक खौफ छोड़ आया था।। सभी के दिलो और दिमाग़ ट्रेनर से लेकर छात्र तक। जो वंहा मौजूद थे उनके मन मैं रुद्राक्ष अग्निवंशी के ही ख्याल आ रहे थे।। इधर जो बच्चे जो घायल हुए थे.रमेश प्रजापति, रोहित मौर्य वंशी, हुए गणेश चंद्र वंशी। काफ़ी घायल हो गए थे और ऐसे लड़के से जो गुरुकुल का कचरा था. जिसके जीने और मरने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता था। रही सही आग गीता और सुनील ने लोगो को भड़काने और उसको गलत साबित करने के लिए घटना को तोड़ मरोड़ कर बताया। जिसके कारण ट्रेनर जो मौर्य परिवार का था शून्य स्तर का योद्धा था रुद्राक्ष जलने लगा था। इन तीनो लोगो ने अपने कुछ लडके उस रुद्राक्ष अगिनवंशी को ख़त्म करने के लिए भेज दिए। एक कचरे से लड़के के लिए इतने काबिलियत वालो लोगो का जाना किसी को समझ मैं नहीं आ रहा था। तीनो परिवारों ने बोल दिया था गुरुकुल का कोई भी अधिकारी कर्मचारी ट्रेनर तुम्हारे बीच आता है तो उसको छोड़ने की जरुरत नहीं हैं। उस पागल लड़के को मरना ही होगा नहीं तो हर कोई हम पर हसेगा। वो चालीसा पचास लोग शांकरनाथ गुरुकुल के अंदर चले गए सबने अपनी आध्यात्मिक शक्ति को प्रसारित किया और शक्ति शाली आभा छोड़ दिया। इतने सारे शून्य स्तर के लड़काओ को देख कर पुरे आश्रम मैं हलचल मच गयी। सभी अधिकारी, कर्मचारी, और ट्रेनर बाहर आ गए। उनको लगा की हमला हुआ है हमारे ऊपर। मगर उनमे से एक शक्तिशाली और रोबदार आवाज मैं बोला हमें तुम लोगो को कोई नुकसान नहीं पहुंचाने आये है। हमें रुद्राक्ष अग्निवंशी कँहा है बता दो हमें उसको लेकर चले जायेंगे। उसने हमारे परिवार के बच्चों को घायल किया है वो तीन महीने तक विस्तर पर रहेंगे। उनमे से एक ट्रेनर जो आंतरिक विभाग से था वो बोला रुद्राक्ष अग्निवंशी यंहा नहीं हैं. वो उधर कोठी मैं रहता है गुरुकुल प्रमुख के द्वारा उसको दी गयी है। उन लोगो सुना और हवा की तेज़ी से कोठी के सामने जा कर खड़े हो गए। उनमे से काले कवच वाला योद्धा ने रोबदार आवाज मैं रुद्राक्ष को आवाज लगायी और उसको बाहर आने के लिए बोला अगर वो नहीं आया तो कोठी को भी उसके साथ नस्ट कर देंगे। इतना सोर सुन कर नौकर अंदर गया और उसको बताया की तुमको मारने के लिए तीन परिवारों के लोग आये हुए है। यह वही लड़को के परिवार वालो के योद्धा है। ज़ब रुद्राक्ष अग्निवंशी ने यह बात सुनी तो उसकी भौ चढ़ गयी अच्छा तो अब यह बात हैं। रुद्राक्ष वाहर आया शांति से खड़ा हुआ और उन लोगो को देख कर बोला बताओ क्या काम था मुझसे मैं ही हूँ रुद्राक्ष अग्निवंशी। उसकी बात को सुनकर एक योद्धा जिसने सोने का कवच पहना हुआ था बोला तुम मरने बाले हो हम तुम्हारा सर काट कर ले जायेंगे.उसका इस तरह निडर खड़ा देख कर सबने सोचा उसको सदमा लग गया है। इसलिए कुछ बोल नहीं रहा हैं। रुद्राक्ष अग्निवंशी ने उनको जवाब दिया तुम लोग वापस चले जाओ जैसे आये थे वैसे ही अपने प्राण देने की जरुरत नहीं है किसी की इज़्ज़त के लिए। जो जिस लायक होता है वही उसको मिलता है। ज़ब उसके मुँह से ऐसी बात सुनी तो एक बार चौंक गए फिर हसने लगे। उनमे से एक बोला ख़तम करो इसको और चलो यंहा से कोई और आये उस से पहले। ज़ब रुद्राक्ष ने देखा यह लोग नहीं मानेगे। जैसे ही उनमे से एक तलवार लेकर उसको मारने के लिए आगे बड़ा. रुद्राक्ष अग्निवंशी ने अपनी सील खोल दी और अपनी आभा छोड़ दी। उसके आभा के दवाब से ही वो योद्धा खून की उलटी करने लगा था। त्रिनेत्रा ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति प्रसारित की और अपनी दिव्या ऊर्जा का औरा खोल दिया उसके दवाब मात्र से ही चालीस मैं चार ही बचे बाकी के लोग खून की उलटी कर रहे थेजो बचे हुए चार थे उनकी भी हालत ठीक नहीं थी वो खड़े होने के लिए संघर्ष करते नज़र आ रहे थे। किसी को कुछ समझ नहीं आया उनके साथ क्या हो रहा है अचानक इतना भयानक दवाब जिसमे सांस लेने मैं भी दिकत हो रही थी। त्रिनेत्रा ने मंत्र पड़ा और अपना हाथ ऊपर उठाया और उसके हाथ मैं एक दिव्या तलवार आ गयी. और उसने एक ही बारमैं चालीस के चालीसा लोगो का सर काट दिया और उनको गुरुकुल के आंतरिक विभाग की तरफ लात मार कर फैक दिए। जँहा पर और लोग अधिकारी कर्मचारी और ट्रेनर और छात्रों का मजमा लगा हुआ था। वो कटे हुए सर हवा मैं उड़ते हुए उन लोगो के सामने एक एक कर गिर गए। ज़ब सभी लोगो ने देखा की उन चालीसा लोगो के कटे हुए सिर है। सबके दिल मैं डर की भयानक लहर दौड़ गयी। पीछे से रुद्राक्ष अग्निवंशी आया और बोला सर इनके यह है और इनका शरीर मेरी कोठी के वाहर पड़े हुए है इनके परिवार वालो को और जिन लोगो ने इनको भेजा था बोल देना इनकी लाश उठा ले जाये। गुरुकुल प्रमुख तक भी यह खबर जा चुकी थी। हर कोई अब यह सोचा रहा था की यह लड़का मायावी जंगल से वापस आकर पूरा शैतान बन चूका है। गुरुकुल मैं सबको अपनी अपनी औकात याद आ गयी थी की कचरा कौन है। उस समय तो रुद्राक्ष किसी को कुछ नहीं बोला। और वापस अपनी कोठी मैं जा कर सौ गाया। इधर अधिकारी और कर्मचारी सब ने उन लाशो को वंहा से हटवा दिया। और सभी के परिवार मैं सुचना भेज दी गयी। सब अब यह सोच रहे थे कल कौन सा बबाल होगा। जिस ट्रेनर ने उसका पता बताया था उसको तो पसीना ही आता जा रहा था. गुरुकुल प्रबंधक से तो एक बार बच जाऊंगा मगर ज़ब इसको और इसके परिवार वालो को पता चलेगा तो क्या होगा। राकेश स्टोरी । त्रिनेत्रा ने उसको मारने आये हुए चालीसा योद्धा जो प्रजापति परिवार, मौर्य परिवार, चंद्र परिवार। से थे उनको सन्देश भिजवा दिया था। और खुद आके अपनी कोठी मैं आराम से सौ गया था। अंगले दिन वो उठा फ्रेश हुआ नौकर ने भोजन ला कर दिया उसने खाना खाया और आंतरिक विभाग का राश्ता पकड़ लिया। ज़ब वो आंतरिक विभाग से गुजर रहा था जो रैंकिंग वाले छात्रों ने और बिना रैंकिंग वालों ने उसको सदमे और भय से देखा। गीता और सुनील तो छुपते घूम रहे थे कंही गलती से उसके सामने ना पड़ जाये। बाहरी छात्रों मैं भी भय की लहर थी जो उसको परेशानी पैदा किया करते थे। उसने किसी को कुछ भी नहीं बोला और सीधा मुख्यालय मैं जा पंहुचा। गुरुकुल प्रमुख और सभी अधिकारी, कर्मचारी और ट्रेनर मौजूद थे। उसके देख कर सबके मन मैं डर और सदमे की लहर हिलोरे मार रही थी। जिन लोगो को गुरुकुल की शामिल शक्ति हराने मैं असमर्थ थी उसको इसने पांच मिनट मैं सबको ख़त्म कर दिया था। बस गुरुकुल प्रमुख का ही हाल ठीक था बांकी के लोग तो भय से उसको देख रहे थे मानो शैतान से मुलाक़ात हो रही हो। रुद्राक्ष अग्निवंशी ने वंहा पर सब से पूछा आप लोगो ने उनको मुझे मारने के लिए अंदर कैसे और क्यों आने दियाफिर कुछ लोगो ने धीरे से बोलना शुरू किया और सारी बात सुनी। और समझी। फिर रुद्राक्ष ने पूछा मौर्य परिवार का ट्रेनर कौन है जिसने उनको मेरा पता बताया था। उन लोगो की अब तक बातो को सुन कर लगा था रुद्राक्ष अग्निवंशी इतने लोगो के सामने कुछ नहीं कर पायेगा। फिर उसने बोला मैं हूँ। त्रिनेत्रा ने उसकी तरफ देखा और अपनी आध्यात्मिक आभा छोड़ दी। उसने अपनी ऊर्जा का औरा खोला और वंहा दवाब के कारण लोगो का दम घुटने लगा। जो ट्रेनर खड़ा था अब घुटने टेक कर खून की उलटी कर रहा था। त्रिनेत्रा के हाथ की ऊँगली से एक सफेद किरण निकली और उस ट्रेनर से जा टकराई उसका शरीर चीथड़े हो गया। मुख्यालय मैं खून ही खून विखर गया। फिर उसने अपने आभा को दवा दिया जिस कारण सबको ठीक से सांस आयी. ऐसा लगा जैसे उनके ऊपर से पहाड़ हट गया हो। कभी किसी ने नहीं सोचा होगा की ऐसा भी दिन आएगा। एक कचरा आज का शक्तिमान था। इसके बाद रुद्राक्ष प्रमुख को बोला अपने दुश्मन को जिन्दा छोड़ देना अपने जीवन के साथ घात होता है। और जैसा आप लोग बोल रहे थे की शक्तिमान ही संतुलन लाता है। मैंने कोई नियम नहीं तोड़ा मैंने बस आत्मसुरकाशा की है। गुरुकुल मैं हुए हादसे की खबर पुरे राज्य मैं फैल गयी और लोग तरीके तरीके की बाते करने लगे हुए थे। तीनो परिवार का मज़ाक उड़ाया जा रहा था की एक कचरे ने सबको उनकी औकात याद दिला दी थी। प्रतियोगिता गुरुकुल नेशुरू की बाहरी और आंतरिक छात्रों के लिए पंद्रह दिन मैं प्रतियोगिता ख़त्म हो गयी किसी ने भी रुद्राक्ष अग्निवंशी को नहीं चुनौती दी। इस बार छोटे राज्य का उभरता सितारा थारुद्राक्ष अग्निवंशी। प्रतियोगिता का इनाम प्रथम आने का उसको मिला था वाकी पर और छात्रों ने अपना हक जमाया था। एक लाख स्वर्ण मुद्रा का इनाम और एक आध्यात्मिक शक्ति की तलवार उसको मिली थी। रुद्राक्ष ने अपना इनाम का स्वर्ण मुद्रा और तलवार कोउन छात्रों मैं बाट दिया था जो अलग अलग गांव और काबिले से आते थे जिनके पास धन की कमी रहती थी और जो संसाधन न मिलने के कारण पीछे रह रहे थे। सबको स्वर्ण मुद्रा देने के बाद उसने अपनी दिव्या दृस्टि का इस्तेमाल किया और सबको देखा। उन सब छात्रों मैं एक छात्र उसको बड़ा अजीब लगा उसके शरीर मैं दिव्य ऊर्जा की आभा और घनी अध्यात्मिक शक्ति महसूस हो रही थी। रुद्राक्ष ने उसको अपने पास बुलाया और उसका नाम पूछा वो दुबला पतला लड़का उसके पास आया और अपना नाम करण बताया। रुद्राक्ष को उसकी आँखों मैं डर और झिझक साफ महसूस की थी। उसने प्रमुख से बात करके उस लड़के को अपनी कोठी पर नियुक्ति करवा दिया और उसको वो तलवार दे दी। उसको कोठी की देखभाल का काम दियाजिस से वो अपनी साधना को ज्यादा समय दे पाए। फिर वो सबसे बाते करके अपने घर क लिए निकल गया। पुरे गुरुकुल मैं रुद्राक्ष अग्निवंशी की ही बाते चल रही थी। उन लोगो को जिनको उसने मुद्रा भुगतान किया था वो छात्र उसकी बहुत इज़्ज़त करने लगे थे। दूसरी तरफ राज्य मैं उसके दुश्मन उस पर घात लगा कर हमला करने की तैयारी कर रहे थे। इधर रुद्राक्ष अग्निवंशी की यादो को देखता हुआ त्रिनेत्रा लाल राज्य की एक रियासत जा पंहुचा। उसने अपनी साधना को आज्ञा चक्र पर दवा दिया। और रियासत के अंदर कदम रखा और अग्निवंशी महल पर जा पंहुचा। दूर से महल के अंगरक्ष ने देखा कोई युवा इधर ही अपनी मस्त चाल मैं चलता हुआ आ रहा है। तो उसने सभी सैनिको को तुरंत साबधान किया। गेट पर आकर ज़ब उन लोगो ने देखा तो यह तो रुद्राक्ष अग्निवंशी है इस परिवार के नाम पर कलंक लेकिन यह इतना बदल कैसे गया हमने सुना था तू मर गया था फिर बच कैसे गया। उन लोगो ने बड़ी बतमीज़ी से बात कर रहे थे वो लोग जबकि वो इस रियासत का होने वाला राजा था। उस अंगरक्ष और उन सैनिको को अपने पास बुलया और एक खींच के थपड मारा एक ही थपड मैं हवा की तिनके की तरह इधर उधर दीवाल से जा टकराये। उनके दिल मैं सदमा बैठ गया की यह क्या हुआ शून्य स्तर का योद्धा एक थपड मैं खून की उलटी कर रहा था। पहले डरा और सहेमा रहने वाल इतना निडर और शक्तिमान कब हो गया। राज्य मैं होने वाली घटना की खबर अभी इन लोगो तक नहीं मिली थी। वरना यह लोग हरकत नहीं करते। उसने उन लोगो की तरफ मुड़ कर भी नहीं देखा। और महल मैं अंदर चला गयावो अंदर जा कर श्याम अग्निवंशी के निवास की तरफ जाने लगा। महल के नौकर और कर्मचारी सबने देखा कोई श्याम अग्निवंशी के निवास की तरफ जा रहा है। उनोहनें तुरंत इसकी सुचना गीता और सुनील की माँ और लोगो ने उनके भाई दे दी जा कर। श्याम ने देखा कोई युवक उनके कमरे के अंदर आ गया है तो खिड़की के किनारे खड़े थे पीछे मुड़ कर देखा। पहले तो वो पहचान नहीं पाए फिर ज़ब वो युवक बोला पीताजी अब कैसे है आप। रुद्राक्ष को पहचानते ही श्याम ने अपने बेटे को गले लगा लिया। तुम तो बिलकुल बदल गए हो फिर बाप बेटे मैं घंटो बातचीत होती रही। उसने उनकी साधना का स्तर पूछा तो पता चला की वो एक लम्बे समय से एक ही स्तर पर अटके हुए है। उसने रैंक पचास की दो मणि निकाल कर पापा की दी और बोला इनकी शक्ति आप अवसोसित करो आप इस को पार कर जाओगे। उनको आश्चर्य तो हुआ पर कुछ नहीं बोले रुद्राक्ष को और सोचने लगे ईश्वर की मर्जी भी अजीब होती है। उसके बाद उसकी सौतेली माँ और चाचा आ गए साथ मैं परिवार के अन्य लोग भी आ गए वो सबसे प्यार से मिला.मगर गीता और सुनील की तो उसकी आँखों मैं देखने तक की हिम्मत नहीं हो रही थी। उसके सारे कांड के बारे मैं इन लोगो को पता था जो कुछ भी गुरुकुल और लाल राज्य मैं हुआ था और जो चल रहा था। रुद्राक्ष ने निडर होकर बोला ज़ब तक मेरे पीताजी ठीक है सब ठीक है. अगर मेरे पीताजी को कुछ हुआ तो उस दिन सब कुछ खतम हो जायेगा। वो वंहा खड़े सभी लोगो को बचपन से जनता था किसकी मनसा क्या है। उसने साफ बोला सुनील और गीता तुमको मैं एक बार माफ कर रहा हूँ जो तुमने मुझे जान से मारने की कोसिस मायावी जंगल मैं की थी। वो दोनों उसकी शक्ति देख चुके थे इसलिए कुछ नहीं बोले और लोगो के मुँह भी बंद ही रहे। वो कुछ दिन महल मैं रुका और फिर अपनी रियासत को छोड़ कर लाल राज्य के शंकर नाथ गुरुकुल मैं वापस आ गया। वंहा आकर वो बाहरी विभग के छात्रों से मिला और उनकी साधना स्तर के बारे मैं पूछा कैसा चल रहा है। जिसको जिसको परेशानी आ रही थी उन छात्रों की मदद की साधना विधि समजा कर। फिर वो अपनी आंतरिक विभाग मैं अपनी कोठी मैं आ गयाउसने यंहा पर करण को नियुक्ति करवाई थी उसको ध्यान आया। उसने एक नौकर से पूछा करण कँहा है तो वो बोला करना साधना कर रहा है ऊपर कमरे मैं। रुद्राक्ष ऊपर कमरे जा पंहुचा जिसमे करण ध्यान मैं था। त्रिनेत्रा ने देखा वो अपनी ऊर्जा शक्ति को अपने मुलाधर चक्र मैं प्रवेश करने जैसे ही कोशिश करता है तो एक सुनहरे रंग के रेखा जिसने उसके सातों चक्र को बंद कर रखा था वो बहुत प्रयास के बाद ऊर्जा का एक अंश मुश्किल से मुलाआधार चक्र मैं प्रवेश कराने मैं सफल हो पा रहा था। इस तरीके से उसका अंतर मन और आत्मा दोनों घायल हो रहा था मग़र फिर भी कोशिश जारी थी उसकी। ऐसा लग रहा था जैसे की वो खुद से ही लड़ाई लड़ रहा हो.त्रिनेत्रा ने अपनी दिव्या दृस्टि से देखा तो पाया उसके ऊपर अस्टम चक्रम बंधन विधि से उसके शरीर को वंधन मैं डाला हुआ था यह एक प्राचीन काल की विधि क्रिया थी। एक बात तो साफ थी इस करण की पृष्ठ भूमि असाधारण थी। यह बात उसको समझ आ गयी थी। और कोई होता तो अब तक ख़तम हो जाता। त्रिनेत्रा ने कुछ विचार कर अपनी आभा और दिव्या ऊर्जा छोड़ी और महा शून्य ॐ शत चक्र सोधन विधि का प्रयोग किया। और करण के माथे के बीच दो ऊँगली रख दी अब वो करण से मन रूप मैं समाधी मैं जुड़ गया। और अपनी महा शून्य स्तर की दिव्या शक्ति और ऊर्जा को उसके चक्र मैंडालना शुरू कर दिया महा शून्य जैसे ही दिव्या ऊर्जा शक्ति से अपने चर्म पर आया करण की आत्मा के अंदर एक विस्फोट हो गया दिव्या ऊर्जा पागलो की तरह उसके शरीर मै बहने लगी। उसका मुलाआधार स्वादिष्ठान मणि पूरक अनहत विसुद्ध आज्ञा चक्र अपने चर्म पर आ गए। करण इस समय मानसिक औरशरीर की पीड़ा से गुजर रहा थामहा शून्य और आज्ञा चक्र को चर्म पर जाते ही उसके शरीर की दिव्या शक्ति ऊर्जा उसके रोम रोम मैं फूट रही था करण चारो और से दिव्या प्रकाश की रोशिनी मैं नहाया हुआ था। पांच घंटे तक त्रिनेत्रा वंही करण के पास रुका ज़ब उसका शरीर ठीक हो गया तो थोड़ी देर बाद उसने अपनी आँखे खोली और साधना से उठ गया। और उठते ही ज़ब देखा की सामने रुद्राक्ष अग्निवंशी बैठा हुआ है। और उसको देख कर मुस्करा रहा है। करण सीधा उसके पैरो मैं गिर गया और बोला आप सच मैं महा गुरु है मैंने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी की मैं कभी आज़ाद हो पाउँगा। करण ने अपना पूरा परिचय रुद्राक्ष को बताया की उसका पूरा नाम करण दिव्य नाग वंशी हैं। रुद्राक्ष ने करण जैसे तुम रह रहे थे वैसे ही रहते रहो और अपनी साधना और समाधी की शक्ति को बढ़ाओ अब तुम उस आत्मा के काले बंदन से आजाद हो। मैं कल आगे के सफर के लिए निकाल जाऊंगा हम फिर जरूर मिलेंगे। उसके गुरुकुल छोड़ कर जाने की बात सभी को पता चल गयी उसी दिन तीनो परिवारों के बुजुर्ग जो अपने परिवार की गुप्त टेक्निकस मैं महारत हासिल कर चुके थे रुद्राक्ष अग्निवंशी को ख़त्म करने की योजना बना ली वो लोग उसको गुरुकुल के बाहर राज्य मै मारेंगे। सबसे मिल कर वो लाल राज्य को छोड़ कर जाने के लिए निकल गया। अभी वो राज्य बीच मैं ही आया था। उसको पचास साठ लोगो ने तीनो तरफ से घेर लिया और बोले इतनी जल्दी क्या है रुद्राक्ष अग्निवंशी राज्य को छोड़ कर जाने की। फिर उन लोगो मैं से तीन बुजुर्ग बाहर आये उन लोगो ने काला, सोने का, चांदी का, कवच पहन रखा था उनके अंदर से हिसँक आभा निकाल रही थी। हमारा हिसाब किताब पहले ही बराबर हो चूका है अगर तुम लोग और जीना चाहते हो अपने परिवार को मरते हुए नहीं देखना चाहते हो। तो मेरा राश्ता छोड़ दो और अपने काम से काम रखो। उनमे काले कवच वाला बोला तू खुद मौत के मुँह मैं खड़ा है बात बड़ी बड़ी कर रहा है.चांदी के कवच वाला बोला इसको मार कर इसका सिर इसी राज्य के चोहरये पर लटकाएंगे जो आगे लोगो को सबक मिलेगा की हमारे परिवार से उलझने का मतलब क्या होता। उन लोगो ने अपने अपने हमले तैयार किये और उसके ऊपर हमला कर दिया। मगर उनका यह हमला खाली चला गया था क्यों की वो रुद्राक्ष अपनी जगह से गायब हो चूका था। त्रिनेत्रा ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति की आभा छोड़ी और अपने शरीर मैं अपनी दिव्या ऊर्जा को खोल दिया उसकी शक्ति का दवाब इतना था की मुश्किल से कुछ लोग सीधे खड़े होने मैं कामियाब थे. उन बुजुर्ग की आँखों मैं भी सदमा देखा जा सकता था उन तीनो ने जल्दी से आग पानी और हवा का हमला तैयार किया अपनी पूरी शक्ति को लगा करऔर रुद्राक्ष पर वर्फ के भाले आग की तलवार और हवा के चक्र एक साथ उसके शरीर से टकराने वाले थे. रुद्राक्ष ने कोई प्रतिरोध नहीं किया और उनको अपने शरीर से टकराने दिया। उसके शरीर से टकरा कर उनके सारे हमले निसफल हो गए। उन सभी योद्धा को रुद्राक्ष ने बोला तुम सभी मरने वाले हो किसी को कोई और हमला करना है मेरे ऊपर। यह कह कर उसने मंत्र पड़ा और उसके हाथ मैं दिव्या तलवार प्रकट हुए और उसने बिजली की गति से सबके सिर काट दिए। नीचे खड़ी जनता जो तब से यह लड़ाई देख राही थी सदमे मैं आसमान से कटे हुए सरो को नीचे गिरता हुए देख रहे थे। उसके बाद कुछ घंटो मैं लोगो को खबर मिली की तीनो परिवार के लोगो को जड़ के साथ ख़त्म कर दिया गया। पुरे राज्य मैं डर और सदमे की लहर दौड़ गयी किशोरी लाल को भी ज़ब सब कुछ पता चला तो वो कुछ नहीं बोले। आखिर गलती उन परिवार के लोगो की थी जो हाथ धो कररुद्राक्ष अग्निवंशी के पीछे पड गए थे। रुद्राक्ष दो दिन और रुका रुका और उन तीनो परिवार की सारी सम्पति अपने कब्जे मैं की. उसे तीनो परिवार से एक हज़ार करोड़ स्वर्ण मुद्रा का लाभ हुआ। उसके बाद उसने राज्य के राजा को उनके सारे धंदे और प्रॉपर्टी बेचने का प्रस्ताव रखा। उनकी सारी प्रॉपर्टी और बिज़नेस को राजा ने खरीद लिया। और राजा किशोरी लाल ने रुद्राक्ष अग्निवंशी को एक लाख करोड़ स्वर्ण मुद्रा का भुगतान किया। उसने सारी मुद्रा को अपनी आध्यात्मिक चेतन शक्ति से देखा और उन हज़ार स्टोरेज रिंग्स को अपनी एक टॉप ग्रेड रिंग मैं डाल दिया जिसमे पांच सौ करोड़ पहले ही पड़े हुए थे। उसके बाद वो लाल राज्य से बाहर निकल गया। मग़र लाल राज्य मैं वो अपनी नाम और शक्ति की छाप छोड़ गया था। राकेश स्टोरी । त्रिनेत्रा ने लाल राज्य छोड़ दिया था और उसका लक्ष्य भीम प्रान्त था। भीम प्रान्त के नीचे दस राज्य आते थे। मगर भीम प्रान्त जाने से पहले वो एक बार फिर मायावी जंगल जाना चाहता। पता नहीं उसको क्यों ऐसा लगता था की कोई चीज उसको अपनी तरफ खींच रही हैं। त्रिनेत्रा एक बार फिर मायावी जंगल की घेराई मैं प्रवेश क़र गया। वो अपने सामने आने वाले जानवरो की शिकार करता हुआ अंदर की तरफ बढ़ता जा रहा था। उसने अब दो सौ जानवरो का शिकार क़र लिया होगा जिनका स्तर रैंक पचास तक था। वो एक बार फिर से उसी रहस्यमी खाई के पास खड़ा था जँहा रुद्राक्ष अग्निवंशी को मृत्यु प्राप्त हुई थी। और त्रिनेत्रा को मुक्ति मिली थी। त्रिनेत्रा इस बार उस खाई मैं कूद गया और थोड़ी देर मै वो खाई के तल पर था। जँहा अंधेरा ही अंधेरा था। खाई मैं रहने वाले जानवरो मैं हलचल मच गयी ज़ब उनको शक्तिशाली आभा का दवाव महसूस हुआ। यही वो जगह थी ज़ब पहेली बार रुद्राक्ष ज़मीन से टकराया था। खून की गंध को सूंगा जा सकता था। इस बार त्रिनेत्रा ने दूसरी दिशा की तरफ बढ़ना शुरू किया जो बाहर जाने के राश्ते से उलटी दिशा मैं था। उसकी आँखे चमक रही थी सब कुछ साफ दिख रहा था उसको अँधेरे मैं.उसको चलत्ते हुए काफ़ी देर हो गए थी आखिर मैं वो उस खाई के उस अंतिम भाग मैं खड़ा था जँहा उसको केबल अपने सामने पहाड़ की दीवारे ही नज़र आ रही थी। उस आखिरी दिवार पे पहाड़ के भूखंड आगे की तरफ निकले हुए थे मगर थे वंद आगे से उस खाई की चौड़ाई काफ़ी थी। पहले त्रिनेत्रा एकदिशा मैं अंत तक गया और फिर वापस वंही आ गया जँहा से चला था। फिर वो वंहा से दूसरी दिशा की तरफ चलना शुरू किया और एक दो किलोमीटर चलने के बाद उसके एक या दो आदमी के प्रवेश करने जितनी एक गुफा दिखाई दी जो तीन भूखंड के बीच मैं छुपी हुई थी अगर कोई बहुत बारीकी से ना देखे तो उसको पता ही ना चले की वो कोई गुफा का रास्ता भी हो सकता है। वो दूसरी दिशा के अंत तक गया मगर उसको कुछ भी नहीं दिखा। फिर वो वापस आकर उस जगह पर रुक गए जँहा उसको वो रास्ता दिखाई दिया था. त्रिनेत्रा ने उस गुफा के अंदर प्रवेश किया और चलने लगा एक किलोमीटर चलने के बाद गुफा की चौड़ाई बढ़ गयी थी वंहा एक साथ पचास आदमी भी चल सकते थे। उस गुफा मै कई मोड़ थे अंदर का माहोल ऐसा था जैसे सदियों के बाद यंहा किसी के कदम पड़े हो। वो घूमवदार राश्तो से होकर गुजरता रहा और लगभग एक दिन पूरा उन राश्तो पर चल क़र उसके मुहने पर आ गया। उस गुफा के मुहने जाने की तरफ राश्ता छोटा होता जा रहा था और आखिर मैं वो राश्ता एक दो आदमी जितना ही रह गाया था। त्रिनेत्रा उस गुफा से वाहर निकला तो सामने का अलग ही नज़ारा था। पानी की झील जिसमे अलग अलग तरीके के पेड पौधे फूल लगे हुए थे एक विशाल झेत्र मैं फैली हुई थी। चारो और जंगल और पहाड़ देखे जा सकते थे। एक पहाड़ जिस से लावा बाहर आ रहा था चल क़र और उसके अंदर से अजीब से धुंआ निकलता दिखाई दे रहा था। उसने सोचा वास्तव मैं मायावी जंगल है किसने सोचा होगा की उस रहस्यमी खाई मैं कोई राश्ता इस तरीके के जंगल मैं भी निकलता होगा। उसने किसी भी दिशा मैं आगे बढ़ने से पहले थोड़ा आराम करने का सोचा। और वो पानी के किनारे की तरफ गया। और उस पानी की झील को देखने लगा। कुछ देर देखने के बाद वो वंहा से एक दूर पत्थर पर जा क़र बैठ गया और अपने हाथ घुमा क़र खाने का सामान निकला अपनी स्टोरेज रिंग मैं से और शांति से खाने लगा। भर पेट खाने के बाद वो आराम से उस पत्थर पर लेट गया। दूर से देखने पर ऐसा लग रहा था जैसे वो सौ रहा हो। थोड़ी देर बाद उस झील के पानी मैं हलचल हुई और दो आँखे उसको देख रही थी उन आँखो का रंग हरा था। उन आँखों मैं चमक साफ देखी जा सकती थी। धीरे धीरे वो आँखों वाला आकृति का मालिक त्रिनेत्रा के कुछ दूर आकर रुक गया उसका अपनी सांस पूरा नियंत्रण था। उसको बिना देखे ही त्रिनेत्रा बोला तुम आ गए मैं तुम्हारा ही इंतजार क़र रहा था। यह एक सौ फूट लम्बा चौड़ा एक विशाल अजगर था जो उसको निगलने आया था. उसकी शक्ति रैंक आराम से 100रैंक के ऊपर होंगी। ज़ब उस अजगर ने देखा और सुना की वो जिसका शिकार करने आया था वो उसका ही इंतजार क़र रहा है तो वो बोला भला अपनी मौत का इंतजार करते हुए इतने काल के बाद किसी मनुष्य को देख रहा हूँ। सब उस ज्वालामुखी पर्वत की खुफा मैं जाना चाहते है खजान पाने के लिए मगर आज तक कोई हासिल नहीं क़र पाया उसको ज्यादा तर लोग तो मेरे हाथो से ही मारे गए है। जो बच क़र भाग गए वो आगे मारे गए है। त्रिनेत्रा ने उसको बोला ज़ब तुम मुझे मारने वाले हो तो मुझे कुछ जानकारी भी दे दो की यह मायावी जंगल क्या है ऐसा कौन सा खजाना यंहा पर छुपा हुआ है। इस बात पर वो अजगर बोला इस मायावी जंगल के अंदर आने के चारो तरफ से कई राश्ते है कुछ गुप्त है जंगल के अंदर जंगल यह राज करोडो साल से ऐसे ही चला आ रहा हैं। जो साम्राज्य इस इतिहास को जानते हैं उनको पता है प्राचीन काल मैं युग और कल्प से पहले देवताओं और असुरो मैं युद्ध हुआ था। उनमे एक स्वर्ग का योद्धा था जिसको सब बैटल गॉड के नाम से जानते थे उसका नाम त्रिनेत्रा था उसको धोखे मार दिया गया और उसकी आत्मा को किसी जगह कैद क़र दिया गया। उसकी एक दिव्याशक्ति वाली तलवार जिसको वो सतरूपा कहता था वो उस ज्वालामुखीपर्वत है कहते है उसकी आत्मा को कैद करके उसकी तलवार को स्वर्ग असुरो ने फैक दिया था और वो पृथ्वी लोक मैं आकर गिर गयी थी। इतना कह क़र अजगर बोला बस बहुत हुआ अब मरने को तैयारी क़र लौ। इतना कह क़र उसने हमला क़र दिया और अपना विष उसके पर डाल दिया। मगर यह क्या उसके विष का हमला एक अदृश्य शक्ति के कवच से टकरा क़र ख़त्म हो गया। त्रिनेत्रा ने मंत्र पड़ा और उसके हाथ मै दिव्य तलवार आ गयी और उसने तलवार के एक ही बार से उस अजगर का सर काट दिया। फिर उसकी शक्ति मणि को ले लिया और स्टोरेज रिंग मैं डाल दी। उसके बाद उसने आपको ज्वालामुखी पर्वत की तरफ देखा और उसकी और बढ़ने लगा। उसने अपना पूरा औरा ऊर्जा का खोल दिया और अपनी शक्तिशाली आभा को प्रसारित किया और कुछ ही देर मैं हवा उड़ क़र वो ज्वालामुखी पर्वत.पर खड़ा था हवा मैं नीचे उतरा और और उस पर्वत मैं जानी वाली गुफा मैं घुस गया वो बिना किसी चिंता और फ़िक्र के ज्वालामुखी के केंद्र मैं जा पंहुचा। ज़ब वो ज्वालामुखी के केंद्र मैं पंहुचा तो उसने देखा एक पत्थर के भूखंड के ऊपर एक छोटा टीला बना हुआ था जिसके अंदर से ऊर्जा निकल रही थी। उसके अंदर जाने के बाद उस भूखंड पर छोटा पहाड़ टाइप था उसमे से चमक निकालने लगी जैसे कोई किसी का इंतज़ार क़र रहा हो और उसका इंतज़ार पूरा हो गया हो। उस फैले हुए लावा को देखा और फिर वो उस भूखंड पर जा क़र खड़ा हो गया उसने अपनी दिव्या ऊर्जा की किरण छोड़ी और वो उस पहाड़ मैं समाने लगी। और कुछ सेकंड मैं ही उस मिट्टी मैं विस्फोट हो गया और त्रिनेत्रा के हाथ मैं एक तलवार आ गयी। उस तलवार और उसकी ऊर्जा मिल क़र जैसे ही एक हुई तलवार मैं भयानक शक्ति का संचार हुआ और उसने अपनी तलवार को आसमान की तरफ क़र दिया। भयानक नौ रंग की रोशिनी आसमान को चीरते हुए पृथ्वी को पार करके अंतरिक्ष मैं फैलती ही चली गयी। वो रोशिनी अनंत वृह्माण्ड मैं चीरते हुए फैल गयी। स्वर्ग लोक दानव और दैत्य लोक मै हलचल मच गयी। देवी कामिनी कालकेतु धूमकेतु सबसे ज्यादा चिंता मैं आ गए थे। तो कुछ लोगो मै स्वर्ग के अंदर ख़ुशी की लहर भी दौड़ गयी थी। वंही कुछ सवाल उठा खड़े हुए थे। जो सबको परेशान क़र रहे थे. लेकिन जवाब तो त्रिनेत्रा के पास था। लेकिन वो कँहा हैं किस रूप मैं है इसका जवाब नहीं था किसी के पास। यह बात सब लोगो को समझ आ गयी थी आने वाला समय प्रलय लेकर आएगा। समय कितना लगेगा यह नहीं पता। त्रिनेत्रा ने सतरूपा को चूमा और बोला आखिर हम फिर एक हो ही गए। सतरूपा का निर्माण भगवान शंकर, भगवान विष्णु, भगवान व्रह्म, आदि शक्ति दुर्गा माँ की सम्मिलित शक्ति से हुआ था। उसके बाद उसमे ॐनकार की शक्ति समयी हुई था। उस तलवार का पूजन तीनो देवो और देवियो ने निर्गुण निराकार परम पिता भगवान सदा शिव को शिवलिंग रूप मैं इस्थापित करके किया था। उसमे सदा शिव की असीम शक्ति समाई थी। यह तलवार हर दिव्या अस्त्र शस्त्र को रोक सकती थी और समय आने पर उनको नस्ट भी क़र सकती थी। इसको अपने जीवन मैं त्रिनेत्रा ने कमाया था. जिसके कारण उसके दुशमन भी बने थे। मगर उसने कभी गलत मार्ग नहीं पकड़ा धर्म मार्ग पर ही चलता रहा था। राकेश स्टोरी । त्रिनेत्रा अपनी तलवार को पकड़ क़र ज्वालामुखी मुखी के अंदर खड़ा था। उसकी तलवार ऊर्जा मैं बदल क़र उसके शरीर मैं चली जाती है। उसके बाद वो नार्मल होकर वाहर आता है और एक बार मुड़ क़र उस ज्वालामुखी को देखता है फिर वो जंगल के रास्ते पैदल पैदल ही पार करते हुए उसी पानी की झील के पास आ जाता है वो देखता है जानवरो ने उस अजगर के शरीर को खा लिया था उसके शरीर का थोड़ा बहुत ही भाग बचा हुआ था। उसके जाने के बाद ज्वालामुखी के विशाल लावा से एक ड्रैगन का मुँह बाहर निकलता है. वो खुद ही अपने आप से बोलता है आज तो बेटा बाल बाल बचा है उसने immortal ड्रैगन किंग की अन्सिएंट ब्लड लाइन को महसूस क़र लिया था। वो इस मायावी जंगल मैं करोडो साल से छुपा हुआ था। उसके बाद और भी दैत्यकार जानवर फिर से बाहर आ जाते है है जो उस वक्त छुप गए थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी यंहा अपनी तलवार को लेने आया था जिसकी ऊर्जा का आभास उसे हो रहा था। यह तो किस्मत की बात थी जँहा वो कैद था वंही उसकी तलवार फेक दी गयी थी। झील के किनारे आ क़र रुद्राक्ष फिर से साधना की अवस्था मैं बैठ जाता है पांच तत्व को आवहन करता है और ध्यान मैं चला जाता है उसके शरीर के चारो तरफ अग्नि वायु जल धरती और आकाश पांचो तत्व घूमते दिखाई दे रहे थे। वो ध्यान अवस्था मैं अपने प्राण को माथे के बीच परम दिव्या ज्योति के साथ जोड़ देता है और उसकी प्राण ज्योति उस मैं समा जाती है। इधर वाहर उसके शरीर का सारा मांस गल जात हैं फिर उसकी हड़िया भी गल जाती है जिस जगह वो बैठा हुआ था पांच तत्व के अलवा उस जगह कण ही नज़र आ रहे थे जो ऊर्जा से भरे हुए थे। उनके बीच मैं हवा मैं एक ज्योति जल रही थी उसका तेज़ और ताप इतना जितना सूरज का भी ना। उस ज्योति से निकलने वाला प्रकाश उन कण मै जा रहा था। ज़ब वो सारे कण ऊर्जा से भर गए तब पांच तत्व की शक्ति उन पर पड़ने लगी और धीरे धीरे शरीर का निर्माण होना शुरू हो गया एक दिन रात आग वर्षती रही हवा का तूफ़ान चलता रहा धरती तत्व का तांडव होता रहा, आसमान से बिजली गिरती रही कभी चांदी के रंग जैसी कभी सफेद तो कभी घोर कालीएक दिन रात के बाद प्रकृति का प्रकोप शांत हुआ. इधर रुद्राक्ष अग्निवंशी ने परम वज्र शरीर पा लिया था,। फिर कुछ समय बाद उसने अपनी आँखों को खोला और अपने शरीर को देखा देखने से ही उसकी कठोरता का एहसास हो रहा था। उसका शरीर का रोम रोम शक्ति से भरा हुआ लग रहाथा एक अलग ही चमक निकल रही थी। फिर उठा और अपने शरीर को हाथ पैरो को इधर उधर घुमा तो हड़िया चटकने की आवाज वंहा गूंज गयी। उसके बाद उसने अपने कपडे निकले स्टोरेज रिंग से और अपना सामान चेक किया सब कुछ वैसा ही था जैसा उसने रखा था। अभी उसके खाने की रसद और उसकी रिंग मैं स्वर्ण मुद्रा। उसने अपने हाथ मैं तीन स्टोरेज रिंग थी एक मैं पांच सौ करोड़ स्वर्ण मुद्रा. और उसके सफऱ का सामान था। दूसरी रिग किशोरी लाल की जिसमे एक लाख करोड़ स्वर्ण मुद्रा थी. और एक वो थी जो उसने ज़ब ली थी ज़ब तीनो परिवार का खात्मा किया था। जिसमे दस हज़ार करोड़ स्वर्ण मुद्रा थी। इतना धन रुद्राक्ष अग्निवंशी के पर्याप्त एक जीवन सुख से काटने के लिए। लेकिन उसका लक्ष्य बहुत बड़ा था। उसको अभी रुद्राक्ष के शरीर की छमता और बढ़ानी थी। फिलाल के लिए काफ़ी था बाहर सफऱ करने के लिए। उसके बाद उसने अपनी आध्यात्मिक शक्ति को जागरूक किया वायु तत्व की विधि का इस्तेमाल करके उड़ता हुआ वो मायावी जंगल से बाहर आ गया। लेकिन एक गड़बड़ हो गयी थी उसको दिशा का ज्ञान नहीं रहा उस मायावी जंगल मैं। पहले पहले वो पैदल उस गुफा के मार्ग से आया था इधर और इस बार उसने उड़ क़र उस जंगल को पार किया था। जंगल पार करके वो जिस दिशा मैं निकला उसे एक राज्य नज़र आया मगर कौन से राज्य यहां दूर से दिख नहीं रहा था। वो नीचे उतरा और उसकी तरफ जाने वाली एक सड़क पकड़ी. और चल पड़ा पैदल पैदल आगे जा क़र कुछ लोग और भी मिले जो उस राज्य मैं जा रहे थे। जैसे जैसे वो आगे बढ़ता जाता उसको ज्यादा से ज्यादा लोग मिल रहे थे ज़ब वो राज्य के प्रवेश द्वार पर आया तो वंहा चेकिंग के लिए रुक गया। उसने वंहा आने का अपना कारण बताया की वो शक्ति मणि बेचने आया है वो मायावी जंगल से आ रहा है। उसने अपना नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी लिखवाया और राज्य मैं घुस गया। राज्य की चरदीवारों पर सैनिक योद्धा खड़े हुए थे लाल पत्थर का इस्तेमाल करके राज्य के चारो और चारदिवारी बनायीं गयी थी। अंदर सुंदर मकान और कोठिया बनी हुई थी होटल यात्री के रुकने के लिए बने हुए थे भोजन के लिए भोजनालय थेमधुशाला शराब पीने वालो के लिए बनायीं हुई थी हर चौक पर सैनिक गस्त करते हुए दिखाई दे रहे थे। वो किसी के निजी काम मैं कोई धखल नहीं दे रहे थे। यंहा की नियम व्यवस्था को देख क़र रुद्राक्ष अग्निवंशी को अच्छा लगा. उसने एक होटल देखा और उसकी तरफ चला गया। रुद्राक्ष ने सदा कपडे डाले हुए था उन कपड़ो मैं उसकी कद काठी एक बलिष्ठ और मजबूत शरीर का मालिक बना रही थी उसके लम्बे बाल हवा मैं लहरा रहे थे गोरा रंग उस पर चेहरे पर तेज़ दमक रहा था। होटल के मैनेजर ने उसको एक नज़र देखा और बोला बताओ मैं क्या मदद क़र सकता हूँ। उसने कहा उसे रोकने के लिए एक कमरा चाइये कुछ दिनों के लिए। मैनेजर बोला सबसे अच्छा रूम 50 स्वर्ण मुद्रा का हैं उसमे आपको काफ़ी सुविधा मिलती है रुद्राक्ष को देख क़र लग नहीं रहा था वो इतना महंगा कमरा ले पायेगा। यह उस मैनेजर के दिमाग़ मैं चल रहा था। रुद्राक्ष अग्निवाशी उसने अपना नाम लिखवाया और कमरे की चभी ली और दो सौ स्वर्ण मुद्रा उस मैनेजर को हाथ घुमा क़र निकाल क़र दे दी। वो बोला कुछ समय के कोई मुझे परेशान न करें। खाना शाम को खाऊंगा अभी आराम करूँगा। इतना बोल क़र वो आगे जाने लगा। फिर रुक क़र कुछ सोच क़र उसने मैनेजर से पूछा यंहा नीलामी घर कँहा हैं। मैनेजर बोला नीलामी घर मैं मेरी जान पहचान है आपको क्या बेचना हैं मुझे बताओ मैं बात करवा दूंगा। वो बोला मुझे शक्ति मणि बेचनी है। मैनेजर ने पूछा कितनी रैंक की 100 रैंक तक की उसको लगा की रुद्राक्ष मज़ाक क़र रहा है। इसकी उम्र के हिसाब से तो यह पांच रैंक या दस रैंक तक ही शिकार क़र सकता होगा। इधर मैनेजर अंदाजा लगा रहा था। ज़ब रुद्राक्ष ने देखा उसको भरोसा नहीं हो रहा है तो उसने रैंक सौ की मणि निकाल क़र मैनेजर को दिखाई। मणि को देख क़र मैनेजर सदमे मैं चला गया। फिर नार्मल होकर बोला मैं आपकी बात करवाता हूँ अपने कमरे मैं आराम करो। मैनेजर का काम ही यही था कोई काम का व्यापार करने वाला, कोई काम का समान बेचने वाला आये तो नीलामी घर ले आये। इसमें मैनेजर का कमीशन भी बन जात था। मणि देखने के बाद उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था अपने आप से ही बात किये जा रहा था आज तो मेरी लाटरी लग गयी। राकेश स्टोरी । त्रिनेत्रा उर्फ़ रुद्राक्ष अग्निवंशी होटल के कमरे मैं आराम से सौ रहा था वो अपने सफऱ की थकान मिटा रहा था। इधर होटल का मैनेजर नीलामी घर के मैनेजर के पास जा पहुँचता है और उसको बोलता है उसको शक्तिमणि की नीलामी करवानी है। वो मैनेजर बोलता है रैंक बताओ मैनेजर कहता है 1मणि सो रैंक हैं 30,40,50,60,70,80,90, रैंक की है नीलामी घर का मैनेजर पूछता है भाई क्या भांग पी क़र आया है तुझे पता भी है तू क्या बोल रहा है। तेरे चकर मैं मेरी नौकरी भी चली जाएगी नशा ही करना और उतरना था तो होटल मैं ही रहता। ज़ब होटल का मैनेजर देखता है उसकी बात को मज़ाक मैं ले रहा है. वो बोलता है मैंने भी पहले यही सोचा था भाई जो तू सोच रहा है। देख सबूत दिखता हूँ तुझे और वो कुछ रैंक पचास की मणि उसको निकाल क़र दिखता है। मैनेजर का मुँह खुला जात है फिर होटल का मैनेजर बोलता है मेरा मुँह भी पहले तेरी तरह ही खुला था। भाई बात क़र ले इस बार पूरा पांच प्रतिशत मुनाफा लूंगा। ऐसा मोटा मुर्गा कँहा बार बार मिलता है। बता भाई क्या बोलता है नहीं तो मैं खान परिवार, शान परिवार, कांति परिवार को सुचना भिजवा देता हूँ। वो लोग खरीद लेंगे। यह श्यामगढ़ राज्य के मजबूत परिवार थे इनका कारोबार प्रान्त के अन्य राज्यों मैं भी फैला हुआ था। इनके पास मजबूत योद्धा थे। जो की इनके परिवार की सुरकक्षा और अन्य काम सँभालने मैं मदद करते थे। हर परिवार के पास कमसेकम सौ योद्धा थे जिनके रैंक अलग अलग थे उनकी शक्ति के हिसाब से। श्यामगढ़ का राजा श्याम सिंह महा शून्य स्तर का योद्धा था दिव्य स्तर मैं वो कभी भी प्रवेश क़र सकता था। राजकुमारी राधा सिंह खूबसूरत तेज़ और व्यवसाय मैं बहुत निपुण थी। वो यह राज्य का नीलामी घर देखती थी। नीलामी घर का प्रबंधक राजकुमारी को शक्ति मणि के बारे मैं बताता है। राजकुमारी उस से पूछती है मणि किसके पास है तो वो बोलता है कोई योद्धा है जो राज्य के होटल मैं आकर रुका हुआ है उस होटल का मैनेजर मेरा जानकार हैं। फिर राधा सिंह कहती है कल उस योद्धा को नीलामी घर मैं बुलाओ। यह बड़ी खबर है हम अच्छी स्वर्ण मुद्रा कमा सकते है। इतनी रैंक की मणि से किसी की भी साधना तेज़ी से बढ़ेगी दो साल का काम एक साल मैं होगा। ऐसी चीजें कोई नहीं अपने हाथ से जाने देना चाहेगा। रुद्राक्ष अग्निवंशी शाम को खाना खा क़र फिर सौ गया था वो सुबह व्रह्म काल मैं उठा और अपनी साधना करने लग गया उसने चार घंटे साधना और ध्यान से बाहर आया। उसने अपनी आभा को सामान्य बनाया और फिर फ्रेश होकर होटल के मैनेजर के पास जा पंहुचा। उस से पूछा क्या हुआ मणि की नीलामी के बारे मैं। मैनेजर न उसको उसकी मणि वापस दी और बोला तुमको नीलामी घे बुलाया गया है। तो वो बोला ठीक चलो चलते है। होटल के मैनेजर के साथ वो नीलामी घर को निकल गया ज़ब वंहा पंहुचा तो सब लोग उसका ही इंतजार क़र रहे थेवंहा राजकुमारी राधा सिंह उनका मैनेजर बैठा हुआ था एक प्राइवेट कमरे मैं। ज़ब होटल का मैनेजर रुद्राक्ष अग्निवंशी को लेकर रूम मैं पंहुचा तो सबने देखा की वो एक 12,13साल के लड़के के साथ आया है उसको देख क़र नीलामी घर के मैनेजर ने पूछा भाई वो योद्धा कँहा है और तुम किसी को भी अपने साथ ऐसे यंहा नहीं ला सकते हो। कमरे राजकुमारी एक सोफे पर बैठी हुई थी और उसके पास चार योद्धा खड़े थे जो उसके बॉडी गार्ड थे सबने अपने अपने कवच पहने हुए थे. उनके आभा से ही पता चलता था वो किसी पर भी इशारा मिलते ही हमला क़र देंगे। ज़ब होटल मैनेजर ने बात सुनी तो वो बोला यह कोई आम लड़का नहीं हैं वो शक्तिमाणी इसकी ही है. एक बार तो सब लोग यह बात सुनकर हैरान रह गए थे. मगर फिर भी बे बोले तुम्हे पक्का यकीन है क्या यह वही है। उसने कहा हाँ मुझे इसने ही कल मणि दी थी नीलामी करवाने के लिए। राजकुमारी की साधना शक्ति भी शून्य स्तर तक थी। उन लोगो ने ज़ब रुद्राक्ष अग्निवंशी की जाँच कारने की कोसिस की तो कोई भी सफल नहीं हो सका। उनके सामने खड़ा लड़का एक अजीब सी रहाशयमी आभा लिए हुए था। वो बिलकुल शांत खड़ा हुआ था जैसे उसको किसी बात का कोई डर नहीं हो। फिर रुद्राक्ष अग्निवंशी ने पूछा तो अपने क्या विचार किया है इनकी नीलामी के लिए। राधा सिंह बोली हम नीलामी करवाने के लिए तैयार है क्या आपके पास रैंक सौ की भी मणि है. इस बात को सुनकर रुद्राक्ष ने अपनी पलकों को एक बार झपकाया और फिर हवा मैं हाथ घुमाया तो सौ शक्ति मणि उनके कमरे मैं उड़ती हुई नज़र आयी अलग अलग रंग की मणि और सबकी अलग रैंक कोई भी रैंक तीस के नीचे की नहीं थी। राधा सिंह और सबको एक बार सदमा सा लगा जिस तरीके की शक्ति का प्रदर्शन रुद्राक्ष ने किया था वो कमाल थी। उसने वापस हाथ घुमाया और अपनी पलकों को झपकायाफिर सभी मणि गायब हो गयी वापस उसके स्टोरेज रिंग मैं। अब तो राजकुमारी की उत्सुकता उसको लेकर बढ़ गयी थी। उसकी खूबसूरत होने का भी उसके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ा था कोई भाव नहीं आया था चेहरे पर। राधा सिंह ने उसको बताया नीलामी का आयोजन हम दो दिन बाद करेंगे हम सभी परिवारों और योद्धा और व्यापारी को इसकी सुचना भेज देंगे। तब तक आप हमारे राज्य की मेहमान नवाज़ी का आनंद उठाओ। उसने एक स्वर्ण टोकन निकाल और रुद्राक्ष अग्निवंशी को दे दिया। उसके बाद वो वापस अपने होटल आ गया। वंहा का सारा काम उसने होटल के मैनेजर के ऊपर छोड़ दिया था। यह खबर आग की तरह हर तरफ फैल गयी कोई इसको अफवाह बता रहा था तो कोई अपने काम को बढ़ाने का तरीका समझ रहा था। मगर साथ मैं राजा श्याम सिंह की इज़्ज़त की भी बात थी अगर यह खबर झूठी निकली तो। एक दिन के अंदर ही बड़ी संख्या मैं लोग श्याम गढ़ आना शुरू हो गए थे। दूसरे दिन 12राज्य के लोग वंहा आये हुए थे। इस बार कमाल की बात यह थी की प्रान्त शहर मोहनगढ़ से भी मुख्य प्रान्त अधिकारी आया हुआ था। उसकी पहनावा और उसका औरा अलग ही दिख रहा था। वो नीलामी मैं भाग लेने आया हुआ था। यह देखकर राधा सिंह ने सोचा इनको किस जानवर की मणि की तलाश है। अंगले दिन जिस दिन नीलामी शुरू होनी थी सबको नीलामी घर मैं बैठने के लिए उचित प्रबंध किये गए थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी के लिए एक प्राइवेट पारदर्शी कमरा अलग से था जिसमे वो बैठ गया जा क़र। फिर राधा सिंह आयी और उसने वो मणि ले जा क़र नीलामी घर के बीच बने हुए मंच पर रख दी उनको उनकी रैंक के हिसाब से अलग अलग क़र दिया गया। सबसे पहले रैंक तीस की दस मणि है इनकी शुरुआती बोली पचास हज़ार स्वर्ण मुद्रा है। बोली लगनी शुरू हुई पहेली रैंक तीस की मणि एक लाख स्वर्ण मुद्रा मैं बिक गयी। इसी तरह सब मणि बिक गयी रैंक तीस की।। रैंक चालीसा की शक्ति मणि बोलो शुरू होती डैड लाख स्वर्ण मुद्रा। कई राज्य के राजकुमार आये हुए थे। उन लोगो ने दो लाख की बोली पर मणि खरीद ली। नीलामी मैं सबसे ज्यादा बोली रैंक सौ की मणि की लगी थी वो अनमोल मणि थी उसी को लेने के लिए प्रान्त प्रमुख आया हुआ था उसकी कीमत चालीस हज़ार करोड़ स्वर्ण मुद्रा मैं बिच गयी। नीलामी की सारी मणि बिकने के बाद सब लोग उस योद्धा को मिलना और देखना चाहते थे। सबकी बात से सहमत होकर वो रुद्राक्ष अग्निवंशी के पास जा पहुंची और उसको बोला क्या आप मिलना चाहेंगे वैसे तो पहचाना गुप्त रखी जाती थी। रुद्राक्ष अग्निवंशी ने बोला मुझे कोई परेशानी नहीं है ज़ब तक कोई मुझे परेशान नहीं करता है। रुद्राक्ष अग्निवंशी मंच पर आया उसको देख क़र सब लोग बोलने लगे राधा सिंह उस योद्धा को बुलाओ इस लड़के को मंच पर क्यों खड़ा क़र दिया.राजकुमारी राधा सिंह ने सबको बताया यह सारी शक्तिमणि रुद्राक्ष अग्निवंशी की ही थी। इनोहने हमारे नीलामी घर को दी थी बेचने के लिए। सभी लोग आश्चर्य मैं 12,13 साल के लड़के को देख रहे थे जो मच पर खड़ा था। कुछ का दिमाग़ चल रहा था कुछ लोग यह सोच रहे थे हो सकता है इसको किसी और महान योद्धा ने बेचने को दी हो और वो खुद सामने नहीं आना चाहता हो। फिर यह विचार सबको ज्यादा ठीक लगा। वंही कुछ लोग उसको लूटने की योजना बनने मैं लगे हुए थे। वंहा प्रान्त प्रमुख की साधना सबसे ज्यादा दी दिव्या स्तर पर होने के बाद भी कुछ पता लगा पाने मैं असमर्थ थे। उनको कुछ तो अजीब लगा। इतनी बड़ी मुद्रा राशि के बाद कोई भी सबके सामने आने का सोचता भी नहीं और यह लड़का निडर होकर मंच पर खड़ा हुआ था। कुछ तो बात थी। जाने से पहले प्रान्त प्रमुख से रुद्राक्ष अग्निवंशी उनसे मिला और उसको एक स्वर्ण टोकन दिया बोले प्रान्त नगर मोहन गढ़ आना हो कभी तो यह टोकन दिखा देना हम लोगो की मुलाक़ात हो जाएगी। इसके बाद राजकुमारी राधा सिंह ने दो सौ स्टोरेज रिंग ला क़र उसके सामने रखा दी. और बोली इन सब मैं कुल मिला क़र 80लाख हज़ार करोड़ स्वर्ण मुद्रा है। तुम चेक क़र लौ। रुद्राक्ष की आँखों से रोशिनी की किरण निकल क़र उन स्टोरेज रिंग पर जा टकराई और बो बोला ठीक है उसके बाद उसने उन स्टोरेज रिंग्स को हाथ घुमा क़र वंहा से गायब क़र दिया। वो सारी स्वर्ण मुद्रा से भरी हुई रिंग उसके पुराने स्टोरेज रिंग मैं रख दी थी। राजकुमारी ने पूछा अब तुम कहा जाओगे। वो बोला कुछ दिन आपके राज्य मैं रुक क़र आगे सफऱ पर निकल जाऊंगा। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी नीलामी घर से निकल क़र उस होटल की तरफ चल पड़ा जिसमे वो रुका हुआ था। अलग अलग लोगो के गुटों ने उसका पीछा करना शुरू क़र दिया था। यंहा तक की यंहा के मुख्य परिवार वालो ने भी अपने गुप्तचर उसके पीछे लगा दिए थे सब उसको लूटना चाहते थे इतनी स्वर्ण मुद्रा मैं वो चार राज्य बना सकते थे। कहते की लालच बुरी बला होती है। उसका वो खजाना किसी को भी मिल जाता तो वो अपनी एक अलग पहचाना बनने मैं कामियाब हो जाता। उसका नाम प्रान्त नगर मैं ऊँची पद मैं जुड़ जाता। सबकी अपनी अपनी योजना थी। सभी परिवारों के उच्च प्रतिभा वाले लड़ाके युवा पीड़ी वाले अपनी अपनी योजना को बनाने मैं लगे हुए थे। इधर रुद्राक्ष चिंता मुक्त हो क़र होटल के कमरे मैं सौ रहा था. उसके कमरे के चारो तरफ अदृश्य फार्मेशन लगा हुआ था। वो आराम से चैन की नींद सोया उस रात्रि मैं। अंगले दिन वो उठा फ्रेश हुआ और होटल मैनेजर को बोला राज्य घूमने जा रहा है। होटल मैनेजर ने अन्य लोगो की हरकत को पहले ही महसूस क़र लिया था। इसलिए उसने रुद्राक्ष को आगाह करते हुए कहा. कुछ लोग तुम्हारा पीछा क़र रहे है अपना ध्यान रखना। आखिर मैं उसका इतना तो बताना बनता था जिस आदमी की वजह से उसकी किस्मत बदल गयी थी। उसने भी मोटा मुनाफा कमाया था। वो उसको मरते हुए कैसे देख सकता था। जिस पर उसकी उम्र भी कोई ज्यादा नहीं थी। रुद्राक्ष शहर को घूमने के लिए निकल गया. उसकी हर चीज को करीने सेबनाया हुआ था महल, राजमहल, बिल्डिंग, कोठी, मधुसाला। जो लोग उसका पीछा क़र रहे थे उनको अभी तक ऐसा मौका ही नहीं मिला था जो उस पर हमला क़र पाए। सबके सामने वो लोग हमला तो क़र नहीं सकते थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी को समझ आ गया था वो लोग ऐसे नहीं मानेगे। फिर वो जानबूझ क़र उस तरफ चल पड़ा जिधर सुनसान राश्ता था कोई आ जा नहीं रहा था.जैसे ही वो सुनसान राश्ते मैं थोड़ी दूर आया उसे कुछ लोगो का गुट दिखाई दिया वो सारे के सारे पचास लोग होंगे। मगर कुछ ही लोग उसके पास चल क़र आये उनके चेहरे पर निशाना थे जो इस बात को सबूत करते थे वो लुटेरे है। उनमे से एक मोटा तंगड़ा आदमी आया और बोला बच्चे नीलामी की स्टोरेज रिंग हमें दे दे हम तुझे जिन्दा छोड़ देंगे। रुद्राक्ष अग्निवंशी बोला तुम लोग अपनी मौत से खेल रहे हो मेरी बात मानो मेरा पीछा मत करो कुछ भी हस्सील नहीं होगा। उसकी बात को सुन क़र वो हसने लगा और बोला हम यंहा पचास लोग है तू अकेला है वो भी छोटी उम्र का एक लड़का तू हमारा क्या क़र लेगा ज़ब तक कोई तुझे बचाने आएगा तब तक हम अपना काम खतम करके जा चुके होंगे। यह कह क़र वो मोटा आदमी उसको थप्पड़ मारने के लिए आगे बड़ा और अंगले ही पल अपने आपको हवा मैं उड़ता हुआ पाया वो उड़ता हुआ एक किलोमीटर दूर दिवार से टकरा क़र वेहोश हो गया था। रुद्राक्ष ने तो बस हल्का हाथ घुमा क़र उसको थप्पड़ मारा था। ज़ब बांकी के लोगो ने यह देखा तो बे बोले जल्दी से इसको सब मिल क़र ख़त्म करो और निकलो यंहा से। रुद्राक्ष ने उन लोगो की तलवार ली.और सबका सिर सेकंड मैं कट दिया था। कुछ कौन के झींट उसके कपड़ो पर आ गए थे। फिर वो गली से दूसरी गली मैं मूड गया। आगे जाकर फिर उसको कुछ योद्धा का समूह मैं था टकरा गया। ज़ब उन लोगो ने उसको देखा उनके मन मैं फूल खिल गए हम लोग तुमको ही ढूंढ रहे थे अब जा क़र मिले हो। वो सभी आज्ञा चक्र और शून्य स्तर के योद्धा थे। उन लोगो ने भी वही बात बोली। की अपनी स्टोरेज रिंग उनके हवाले क़र दे। रुद्राक्ष ने उनको बोला मेरा राश्ता छोड़ो और अपने काम से काम रखो अगर तुम लोग मरना नहीं चाहते हो। पर कोई उसकी बात नहीं माना और एक ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति के साथ आग की लपटो से हमला क़र दिया। वो फिर बोला मैं अब भी कह रहा हूँ अपने काम से काम रखो चले जाओ नहीं तो सब मारे जाओगे। शून्य स्तर के योद्धा ने आकाश तत्व का हमला उसके ऊपर तैयार करके क़र दिया बिजली की की किरण उसकी छाथी से आ टकराई। वो अपनी जगह शांति से ही खड़ा रहा वो बोला और किसी कोई हमला करना है तो क़र लौ फिर तुम सब मारने वाले हो। वो सब लोग चारो तरफ से उसके ऊपर हमला करने लगे कोई वर्फ के भाले से करता तोकोई आग की जंजीर से करता है तो कोई बिजली की चांदी की किरण से उसके ऊपर हमला करता है। सब लोगो को लगा की वो मर जायेगा सबके एक साथ हमला करने से। मगर रुद्राक्ष अग्निवंशी एक शरीर पर एक खरोच तक नहीं आयी। सबका मुँह सदमे मैं खुला रह गया। फिर रुद्राक्ष बोला तुम्हारा समय ख़त्म हुआ उसने आँख बंद करके मंत्र पड़ा और उसके हाथ मैं एक चमकती हुई तलवार आ गयी। यह दिव्या तलवार थी फिर वो अपनी जगह से गायब हुआ और अंगले पल सभी योद्धा मृत पड़े हुए थे। उसने अपना हाथ हवा मैं घुमाया और सबकी भंडारण रिंग उनके हाथो से निकल क़र हवा मैं उड़ने लगी और अगले ही पल गायब हो गयी। उनको उसने एक अलग स्पेस तैयार करके उसमे डाल दिया। उसको बस अपनी ऊर्जा शक्ति का प्रयोग करना पड़ा था। जिन गुप्तचर ने यह सब देखा था उनका कलेजा मुँह को आ गया था। वो फटाफट नौ दो गायरा हो गए। रुद्राक्ष वंहा से निकल क़र वापस उस तरफ चलने लगा जिस तरफ उसका होटल था। हथयाकांड की खबर कुछ समय बाद पुरे राज्य मैं फैल गयी। सब कोई हैरानी मैं था.एक साथ इतने लोगो को किसने मार डाला। ज़ब उन मारे हुए लोगो की पहचान लुटेरे के रूप मैं हुई तो लोग समझ गए जरूर इन लोगो ने किसी शक्ति शाली आदमी को लूटने की कोसिस की होंगी। आगे ज़ब वो सौ योद्धा और मरे मिले तो लोगो ने इसको नीलामी घर से जोड़ क़र देखना शुरू क़र दिया उसमे से काफ़ी योद्धा नीलामी घर मैं नीलामी वाले दिन मौजूद थे। अब लोगो को समझ आने लगा था की क्या हुआ होगा। मगर जो बात नहीं समझ आ रही थी वो यह की वो लड़का तो उम्र मैं छोटा है। फिर इनको मारा किसने। यह खबर जल्दी ही श्याम सिंह के पास जा पहुंची। उनोहनें तुरंत अपने अंगरक्ष के साथ घटना का निरिक्षण किया। उनको दिव्या ऊर्जा की अनुभूति हुई। मगर कोई दिव्य पुरुषमेरे राज्य मैं उनोहने मन ही मन सोचा। कौन होगा वो। इधर रुद्राक्ष अग्निवंशी श्यामगढ़ राज्य को छोड़ क़र जाने की तैयरी क़र रहा था। उसने होटल मैनेजर से बात चित करी और प्रांतीय नगर जाने के राश्ते के बारे मैं पूछा. कुछ जानकरी ली। और उसने होटल छोड़ दिया और राज्य से वाहर निकल आया उसने खाने पीने का सामान पहले ही अपनी स्टोरेज रिंग मैं रख लिया था सफऱ लम्बा था और वो इस सफऱ को दुनिया घूमते हुई पूरा करना चाहता था। वो अकेले ही चल पड़ा और जल्दी ही लोग पीछे छुटते गए और राश्ता और भी अकेला और सुनसान हो गया। उत्तर दिशा की तरफ बढ़ना जारी रखता है। ज़ब वो पहाड़ो के झेत्र मैं घुसता है उसके दोनों साइड जंगल के पेड खड़े हुए थे. बीच मैं राशता था जो टेड़ा मेडा था. वो उस उस मार्ग पर मस्ती से चलता हुआ जा रहा था। 25,30, किलोमीटर पीछे राज्य को छोड़ आया था। उसको वंहा कुछ लोग राजसि कपडे पहने हुए बैठे हुए थे। उनके पास अलग अलग कपडे पहने हुए तीन सौ चार सौ लोग टेंट लगाए हुए थे। ऐसा लग रहा था जैसे यह लोग यंहा किसी का इंतजार क़र रहे हो। जिस जगह उन लोगो ने डेरा डाला था वंहा से राश्ता दो दिशा मैं बट रहा था। जो तीन लोग राजसि कपडे पहन क़र बैठे थे उनके शरीर पर सुनेहरा कवच पहन रखा था उनके साइड मैं तलवार की मयान लटक रही थी। उनके पीछे तीन बूढ़े लोग जिनकी ढाडी सफेद हो गयी थी वो खड़े हुए.थे। ऐसे लग रहा वो तीनो किसी खास काम से आये हुए थे। वो लोग किसी साम्राज्य के राजकुमार लग रहे थे। उनके पीछे खड़े हुए बूढ़े लोगो की आभा बहुत शक्तिशाली लग रही थी। रुद्राक्ष अग्निवंशी को ज़ब उन लोगो ने देखा तो उनमे से एक लड़का बोला ये लड़के कँहा जा रहा है। इधर आ उनमे से एक राजसि कपडे वाले आदमी की अभिव्यक्ति घमंड से भरी हुई थी। इतने मैं एक योद्धा ने ज़ब उसको देखा तो दूसरे लड़के के कान मैं कुछ बोला उसकी बात को सुन क़र उस राजसि कपडे वाले को बड़ा आश्चर्य हुआ। रुद्राक्ष को जिसने बुलाया था उसने पूछा कँहा से आ रहा है और कँहा जा रहा है। क्या नाम है तेरा। रुद्राक्ष बड़े आराम से उन लोगो के पास आया और बोला मेरा नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी है वो यह तो कह नहीं सकता था की वो त्रिनेत्रा है। उसको बिना भय और चिंता के जवाब देते देखा तो सबको अजीब लगा। बोला कँहा से आ रहा हूँ कँहा जा रहा हूँ वो मेरा निजी मामला है। उसके बाद वो मुड़ क़र जाने लगा। उस बीच वाले लड़के को अपनी बेज़ती लगी इतने लोगो के सामने कोई इस तरीके से बात क़र रहा था जिसकी उम्र इतनी कम थी। उस समूह मैं से कुछ योद्धा श्यामगढ़ राज्य मैं नीलामी घर मैं शक्तिमणि लेने गए हुए थे. उनको पता था सब कुछ वही सब कुछ उस योद्धा ने साइड वाले लड़के को बताया था। ज़ब दोनों राजसि कपडे पहने लड़को ने आपस मैं बात करी फिर तीसरे वालो को बताया वो बोला भाई रहने दो हमें क्यों किसी से पंगे लेने. मेरी बात मानो और उसको जाने दो वो जिधऱ भी जा रहा है। वो दोनों उस तीसरे वाले पर भड़क गए तुम कायर हो साथ भी डरपोक जो एक बच्चे से डर रहे हो जबकि हमारे पास साम्राज्य के प्रशिक्षण पाए हुआ योद्धा और महा गुरु है जो पीताजी ने हमारे साथ भेजे है और तुम उस बच्चे से डर रहे हो और वो दोनों हसने लगे। तीसरा वाला कुछ भी नहीं बोला.उसको उनका आचरण पता था। वो दोनों बोले औये लड़के घुटने टेक क़र हमसे माफ़ी मांग अपनी बतमीजी के लिए और अपनी नीलामी की स्वर्ण मुद्रा की स्टोरेज रिंग हमें दे दे। हम तुझे जीवित छोड़ देंगे। उनकी बात को सुन क़र रुद्राक्ष अग्निवंशी रुक गया। मगर उसकी आँख की पुतली सिकोड ली। वो बोला शक्ति का घमंड। सब कुछ होते हुए भी अहंकार। उन तीन महागुरु ने भी उनको बोला राजकुमार यह बात ठीक नहीं हमारा लक्ष्य यह नहीं है. हमारा लक्ष्य विष केतु का रहस्यमी जंगल है जँहा सुना है दिव्या नाग रहता है और आप लोगो को उसकी बाहरी परिधि मैं जानवरो के साथ अभ्यास करना है। रुद्राक्ष अग्निवंशी ने उन दोनों को बोला तुम्हारा हमारा कोई झगड़ा नहीं है। तुम अपना काम करो और मुझे अपना काम करने दो। उसकी बात की सुन क़र उसने अपने योद्धा को बोला जा क़र इसके हाथो और पैरो को तोड़ दो और वो भंडारण रिंग मुझे ला क़र दो। उनमे से एक योद्धा आगे आया रुद्राक्ष की तरफ देखते हुए बोला राजकुमार की बात मान लौ जान बच जाएगी। त्रिनेत्रा ज़ब देखा की यह लोग नहीं मान रहे है। मगर उसने उसमे से एक की आँखों मैं निराशा और मायुषी देख ली थी। रुद्राक्ष ने बोला आगे जो होगा उसका मुझे दोष मत देना कोई। उस योद्धा ने उसको मारने के लिए अपनी फिस्ट कला का प्रयोग करके एक घुसा मारने के लिए अपना हाथ बढ़ाया और जैसे ही उसका हाथो पूरी ताकत के साथ उसके शरीर से टकराया हड़िया टूटने और दर्द से चीखने की आवाज़ आयी। सबको लगा की रुद्राक्ष की आवाज़ होंगी मगर सामने का नज़ारा ही कुछ और था वो तो वैसे ही आराम से खड़ा हुआ था जैसे पहले खड़ा हुआ था। उस योद्धा की हाँथ की हड़िया टूट गयी थी वो दर्द मैं था उसको एक हल्का से एक थप्पड़ मारा और उसकी गर्दन गोल घूम गयी वो वही गिर क़र मर गया। सामने का नज़ारा देख क़र सबको सदमा लग गया इतने लोगो के सामने उसने उसके ही आदमी को मार दिया था। रुद्राक्ष उन बूढ़े लोगो को देख क़र बोला उनकी आँखे मैं चमक उठी थी। की मैं आखिरी बार कह रहा हूँ मुझसे दूर रहो। अपना काम करो। मुझे मेरा काम करने दो। इस घटना ने उन दोनों राजकुमार का अहंकार को और बड़ा दिया बे बोले तुझे क्या लगता है तू एक आदमी को मार क़र बच जायेगा। यंहा चार सौ लोग और तीन महागुरु है। रुद्राक्ष अग्निवंशी बोला तुम लोगो के मुँह लगु इतना समय नहीं है मेरे पास। इतना कह क़र उसने अपनी पूरी आभा को प्रसारित क़र दिया और अपनी दिव्या ऊर्जा को खोल दिया। एक दम से चारो तरफ भयंकर दवाब हर किसी को महसूस होने लगा महा गुरु को दिव्या ऊर्जा का औरा महसूस हो गया था उन लोगो ने फटाफट उन लोगो को सुरक्षित करने के लिए अपनी शक्ति को प्रसारित किया मगर सब बेकार। रुद्राक्ष अपनी जगह से गायब हुआ था कुछ देर के लिए और उसके बाद फिर दूसरी जगह प्रकट हुआ उसके हाथो मैं तलवार थी जिस से खून टपक रहा था। उसके बाद उसने उन महा गुरु की तरफ देखा ज़ब उन लोगो ने नज़ारा देखा तो चारो तरफ लाश लाश पड़ी हुई थी इतनी जल्दी सब खतम हो गया था वो लोग परेशानी मैं था वंही उन दोनों के आँखों मैं मौत दिखाई दे रही थी वो दोनों तो सदमे मैं थे उनका मुँह खुला हुआ था। उन महा गुरु का कोई भी बाररुद्राक्ष का कुछ नहीं विगाड़ पा रहा था। ज़ब उसने देखा उन लोगो नें सारे हमले क़र लिए तो तो वो एक फिर अपनी जगह से गायब हुआ और तीनो महागुरु की गर्दन और उन दो राजकुमार के सर ज़मीन पर पड़े थे। तीसरे को नहीं मारा था अभी रुद्राक्ष अग्निवंशी नें। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी नें वंहा सभी लोगो को मार दिया था। उसके बाद उसने अपनी आध्यात्मिक शक्ति से सबकी स्टोरेज रिंग उनके हाथो से निकाल क़र अपनी स्टोरेज रिंग मैं ऊर्जा झेत्र मैं डाल दिया था। उसके बाद उसने उन राजसि कपडे वाले लड़को और गुरु की स्टोरेज रिंग निकाल इन लोगो की रिंग अलग अलग रंग की थी यह नार्मल नहीं लग रही थी। उसके बाद वो नार्मल हुआ और फिर उस आखिरी राजसि वाले लड़के से पूछा। तुम बताओ क्या चाहते हो। वो बोला मै मरना नहीं चाहता मुझे छोड़ दो बदले मै जो तुमको चाइये ले लौ.बो बोला अपना परिचय दो. वो लड़का बोला मेरा नाम हिमांशु राज है और उत्तर साम्राज्य के महाराज का लड़का हूँ जो उनकी पहेली पत्नी से हुआ था. यह लोग जो ख़तम हो गए है यह मेरे सौतेले भाई थे। तुम लोग यंहा क्या कर रहे हो। इस बात पर हिमांशु बोला हम विष केतु जंगल मै जाने के लिए आये थे। हम लोगो को गुप्त सुचना मिली थी की इस रहस्यमाई विष केतु जंगल मै किसी को दिव्य नाग दिखाई दिया था इस जंगल मैं बहुत रहस्य है। हमारे साम्राज्य के महा गुरु का कहना है की इसी जंगल मैं से कोई एक मार्ग पृथ्वी के नीचे बसें हुए नाग लोक मैं जाता है। इस जंगल मैं अजीब तरीके की मायावी शक्तियां रहती है कभी कोई भी इस जंगल के केंद्र मैं नहीं पहुंच पाया इसको तीन परिधि मैं बांटा हुआ है बाहरी भीतरी और केंद्र.उसकी बात को सुनकर त्रिनेत्रा कहता है इस जंगल को कौनसा राश्ता जाता है जिस से मैं वंहा जा सकूँ। वो कहता है लेफ्ट साइड वाला राश्ता जाता है. राइट साइड वाला यह प्रान्त नगर की तरफ जाता है। हिमांशु रुद्राक्ष से कहता है इन लोगो के मरने की खबर साम्राज्य के महाराज को पता चल गयी होंगी इन लोगो के आत्मिक पत्थर नस्ट हो चुके है। उधर से और भी शक्तिशाली लोग इधर आते होंगे। तुमको क्या लगता है मै डरता हूँ। हिमांशु बोला ऐसा मैंने कब कहा मै अपने लोगो को और मरता हुआ नहीं देखना चाहता हूँ। हिमांशु अपनी स्टोरेज रिंग और डायमंड का टोकन रुद्राक्ष को देता है और बोलता है ज़ब उतर साम्राज्य मै आना होतो इस टोकन को दिखा कर मुझसे मुलाक़ात हो जाएगी। हिमांशु रुद्राक्ष को बोलता है हम भविष्य मै अच्छे मित्र जरूर बनेंगे। बो बोलता यंहा पर बाकी सब कुछ वो अपने हिसाब से संभाल लेगा। रुद्राक्ष लेफ्ट साइड का मार्ग लेकर आगे बढ़ जाता है विष केतु जंगल मै जाने के लिए। चार पांच घंटे का सफर करने के बाद वो पहाड़ो के किनारे एक नदी देखता है जो जंगल के बीच से निकल रही थी और आगे बहती जा रही थी। रुद्राक्ष अग्निवंशी वंही रुकने का सोचता है। पहले वो कुछ खरगोश और हिरन का शिकार करता है और उनको आग जला कर बोन फायर करता है उनको आग मैं पकते हुए छोड़ कर वो नदी मैं नहाने चला जाता है उसने जो आग जलाई थी मांस को पकाने के लिए उसकी खुश्बू और आग का धुंआ आसमान मैं जा रहा था। इधर रुद्राक्ष नहा रहा था उधर धुंआ को देख कर सात आठ रथ हवा मैं उड़ते हुए नीचे उतरते है। जिधऱ वो मांश पक रहा था। उसमे से मसालो की खुश्बू मीट के साथ आ रही थी वो लोग रथ को थोड़ी दूर रोक कर पैदल ही उस तरफ चल पड़ते है ज़ब वंहा उनको कोई दिखाई नहीं देता है तो सोचते कंही किसी जानवर नें मार तो नहीं इस आदमी को। वो सभी लोग जैसे ही आगे बढ़ते हुए 500मीटर के दायरे मैं आते हैं तो किसी अदृश्य दिवार से टकरा जाते है। उनमे से कोई भी कितनी कोसिस कर ले आगे नहीं बढ़ पा रहा था। सब लोग थोड़ी दूर बह रही नदी की तरफ ज़ब देखा तो उन लोगो को नदी मै कोई नहाता हुआ दिखाई दिया दिया। वो लोग उस शरीर की मजबूती को महसूस कर पा रहे थे। गोरा चेहरा बलिष्ठ भुज बल। वो नहा कर निकलाऔर बिना इधर उधर देखे सीधा अपने पक रहे मीट को देखा जो पक चूका था। फिर उसे महसूस हुआ की आस पास शक्तिशाली लोगो की आभा आ रही थी। ज़ब उसने नज़र घुमा कर देखा सात आठ रथ खड़े हुए हैं और कुछ लड़के लड़कियां योद्धा और बुजुर्ग लोग इधर ही देख रहे है। उसने अपना हाथो को घुमाया और फार्मेशन हट गया उन लोगो को भी पता चल गया था उस लड़के नें फार्मेशन हटा दिया है। वो सभी लोग चल कर उसके पास आने लगे। उनमे से एक लड़का बोला दोस्त तुमने मीट बहुत स्वादिस्ट पकाया है लगता हर तरफ खुश्बू फैल रही है। रुद्राक्ष अग्निवंशी बोला ऐसी कोई बात नहीं है ज़ब इंसान अकेला होता है तो यह सब काम अपने आप सीख जाता है। उस लड़के नें पूछा क्या हम लोग भी आपके साथ बैठ सकते है। वो बोला बिलकुल दोस्त आ जाओ अगर आप कोई भेद नहीं समझते हो लोगो मैं। सभी लोग आ जाते है। वो सबको खाने के लिए मीट दिया और फिर खुद खाने बैठ गया कुछ लड़किया उसको ही देख रही थी मगर उसने एक बार भी किसी की तरफ मुड़ कर नहीं देखा। जो बुजुर्ग थे उनोहने पूछा क्या नाम है तुम्हारा। बो बोला रुद्राक्ष अग्निवंशी। उनमे से एक लड़का बोला तुम लाल राज्य और श्यामगढ़ वाले रुद्राक्ष अग्निवंशी तो नहीं हो है ना। वो बोला तुम कैसे जानते हो उसको। इस बात वो लड़का बोला मैंने सुना है उस अकेले नें ही कई परिवार को जड़ से खतम कर दिया था। इस तरीके की बाते होना शुरू हो जाती है खाते खाते वो सब कुछ चुप चाप सुनता रहता है.फिर वो भर पेट खाने के बाद उन लोगो से पूछता किसी को और तो नहीं चाइये। सब मना कर देते है। उनमे से एक बुजुर्ग पूछते है तुम इधर कँहा जा रहे हो वो बोलता है विष केतु जंगल मै। दिव्य नाग की ख़ोज मै। फिर वो लड़का पूछता हैं तुमने बताया नहीं। इस बात को सुनकर वो बोलता हैं हाँ मैं वो ही रुद्राक्ष अग्निवंशी हूँ। फिर वो हवा मैं हाथ घुमाता हैं तो दो टोकन सोने के उसके हाथ मैं आ जाते हैं वो उनको दिखता हैं। फिर वो प्रान्त प्रमुख का टोकन भी दिखता है। सब लोग हैरान रह जाते हैं। अब तक उस लड़के नें जो सुना था वो सबको बता चूका था और अब हालत यह थे वो सब करने वाला उनके सामने बैठा था। वो सब लोग कहते हैं हम लोग भी वंही शिकार करने जा रहे हैं उसकी आउटर रिंग मैं। मुझे तो सेंटर रिंग मैं जाना हैं। वो बोलता हैं रात्रि हो चुकी हम लोगो को सौ जाना चाइये फिर वो एक फार्मेशन बनाता हैं और अपने लिए लेटने के लिए टेंट बना देता हैं और उसमे लेट जाता हैं। वो पीछे मुड़ कर नही देखता की कौन क्या कर रहा है. अपने शरीर के चारो और दिव्य कवच तैयार करके सौ जाता है। राकेश स्टोरी । त्रिनेत्रा उन लोगो के साथ अपना पकाया हुआ भोजन खाने के बाद नदी किनारे उस जंगल मैं एक फार्मेशन बना कर सौ जाता हैं। फार्मेशन जंगली जानवरो से सुरक्षा के लिए थी कोई जानवर हमला ना कर दे। वो आये हुए लोग दक्षिण सम्राज्य से थे वो राजकुमार और राजकुमारी और साथ मैं उनकी सुरक्षा के लिए आये हुए योद्धा और कुछ बुजुर्ग महा गुरु थे। जो बिगड़े हालत मैं उनकी सुरक्षा कर सके। त्रिनेत्रा तो नींद ले रहा था इधर यह लोग बात कर रहे थे वो बुजुर्ग आपस मैं बोले वीरसिंह तुमको यह लड़का अजीब और रहस्यमी नहीं लगता हम लोग इसके बनाये हुए फार्मेशन को पहले ना देख पाए और ना फिर हम उसको तोड़ पाए। इस बात पर मान सिंह बोले कह तुम ठीक रहे हो मैंने इसके शक्ति स्तर को देखने की कोसिस करी लेकिन मैं कुछ पता ही नहीं लगा पाया हूँ। दीखता तो यह साधरण हैं लेकिन हैं नहीं कोई तो रहस्य हैं। जो इतनी छोटी उम्र मैं इसने इतने लोगो को हिला कर रख दिया है। तुम्हे क्या लगता हैं वीर सिंह हमें इस तरीके के योद्धा के अपने दक्षिण साम्राज्य मैं बुलाना चाइये या नहीं। यह सब लोग आपस मैं बात कर रहे थे। तभी मान सिंह और वीर सिंह के आत्मिक पत्थर पर सन्देश आता हैं की उतर साम्राज्य के चार सौ योद्धा तीन महागुरु और दो राजकुमार को मार दिया गया हैं वो श्यामगढ़ सीमा से लगे जंगल मैं डेरा डाला हुआ था। उनका एक राजकुमार हिमांशु ही बचा हैं। इसलिए सभधानी से काम ले। वो लोग इस सन्देश को पढ़ कर हैरान हो जाते हैं। ऐसा कौन हैं जिसने इतनी बड़ी दुश्मनी मोल ले ली हैं। उनके गुरु किसी को कुछ नहीं बताते हैं और त्रिनेत्रा को सक की नज़रो से देखते हैं। फिर वो सोचते हैं महा गुरु और इतने योद्धा क्या यह संभव हैं इस उम्र के लड़के के द्वारा मारे गए हो। दोनों के मन मैं उथल पुथल मची हुई थी कोई निष्कर्ष पर जा पा रहे थे। सुबह त्रिनेत्रा उठता हैं और नदी मैं इस्नान करके साधना करने लग जाता हैं बाकी सभी लोग सौ रहे थे। तो उसने सोचा थोड़ा ध्यान कर लिया जाए। वो पद्म असन लगा कर बैठ जाता हैं और ध्यान करने लग जाता हैं। ध्यान की गहन अवस्था मैं ज़ब वो प्रवेश कर जाता हैं तो बाहर की दुनिया से बिलकुल कट जाता हैं। वो अपने अंतर्मन मैं उस ड्रैगन को देख रहा था जो उसकी परम दिव्या ऊर्जा मैं आराम कर रहा था। वो अपनी ऊर्जा को मुलाआधार चक्र से शुरू करके एक चक्र को पार करता हुआ शेषत्रसार चक्र मैं अपनी ऊर्जा को ले जा कर छोड़ देता हैं उसके बाद उसके साते चक्र मैं ऊर्जा की चर्म पर जा कर कर एक तेज़ आभा मंडल बन जाता हैं। उसके बाद वो अपनी ध्यान साधना से अपनी आँखो को खोलता हैं और उठा जाता हैं। वास्तव मैं वीर और मान सिंह सौ नहीं रहे थे वो आँख बंद करके लेटे हुए थे। उनोहने रुद्राक्ष अग्निवंशी की परम् दिव्या स्तर की ऊर्जा देख ली थी। उनका खुद का स्तर भी दो कदम नीचे था। दोनों ही सदमे मै थे मगर कोई कुछ नहीं बोला। रुद्राक्ष अग्निवंशी नें अपना फार्मेशन हटाया और अपनी स्टोरेज रिंग मैं से कुछ सामान निकाला और बचा हुआ हिरन और खरगोश का मीट आग जला कर पकाया। ज़ब मीट की खुश्बू उन लोगो की नाक मैं गयी तो सब लोगउठ गाये। वो बोला मैंने अपने हिसे का खाना खा ले रहा हूँ बांकी आप लोगो के लिए छोड़ दिया हैं। आप लोग खा लेना। राजकुमारी सीता, गीता, रीता, रवि, रोहन, सोहन, मोहन, तो यह सोच रहे थे किस तरीके का बंदा हैं कोई भावना नहीं दिखाई देते इसके चेहरे पर। रवि जो कल सबसे ज्यादा बात कर रहा थे वो बोला छोटे भाई मजा आ गया सुबह सुबह इतना स्वादिस्ट खाना खाने को मिल रहा हैं। रात का स्वाद भी अभी तक मुँह मैं ही हैंरुद्राक्ष को उसका स्वाभाव पसंद आया था कोई घमंड नहीं कोई अहंकार नहीं। वो बोला बड़े भाई यह तो इन मसालो का कमाल हैं। रवि नें पूछा तुम किधर जा रहे हो वो बोला मैं विष केतु जंगल मैं अंदर जाऊँगा। ज़ब वो जाने के लिए उठा और जाना शुरू किया तो वीर सिंह नें उसको आवाज़ लगा कर रोका और अपने हाथ से एक टोकन दिया और बोला ज़ब कभी तुम्हारा मन दक्षिण साम्राज्य की तरफ आने का हो तो आने के बाद किसी भी सैनिक को यह डायमंड टोकन दिखा देना वो तुम्हे हमारे पास पंहुचा देगा। और लोग भी थे उसको टोकन देता देख कर हैरान थे. उस टोकन का शक्ति और मूल्य वो सभी लड़के लड़कियां और योद्धा अच्छी तरह से जानते थे। एक अजनबी को टोकन देता देख कर सबको अजीब लगा। मगर किसी नें कुछ बोलने की हिम्मत नहीं की। उन दोनों का पद और औदा सम्राट के बराबर था। रुद्राक्ष नें उसके बिना किसी भाव के लिया और हवा मैं गायब हो गया. फिर वो सबसे बातचीत करके नदी किनारे जंगल मैं दाखिल हो गया इस जंगल को पार करने के बाद विष केतु जंगल पड़ता था रुद्राक्ष को यकीन था की नदी विष केतु जंगल के बीच मैं निकलेगी। उसने दो तीन पैड़ो को अपनी तलवार से काटा और उनके तनो को आपस मैं पेड की लता से बांध दिया उसके बाद उसने उनको उठा कर नदी मैं फैक दिया और खुद भी खुद के उनके ऊपर खड़ा हो गया। इस समय वो तेज़ बहती हुई नदी के बीच मैं पानी के धारा के साथ जा रहा था उसको दोनों तरफ अपनी साइड मैं घणा जंगल ही जंगल दिखाई दे रहा था। वो उसी लकड़ी की नाव पर लेट गया और कुछ आध्यात्मिक शक्ति का छोड़ दिया जो आने वाले खतरे से उसको पहले ही साबधान कर सके वो नदी पहाड़ो से होती हुए। कई घूमवदार राश्तो को पार करते हुए बहती जा रही थी।उसको नदी मैं यात्रा करते हुए आधा दिन बीत चूका था उसके बाद वो नदी का जो अंगला घूमने वाला मोड़ आया तो उसको कुछ अजीब सी गंध उसकी नाक से टकरा गयी। यह गंध ज़हर की थी। वो समझ गया इसके बाद वो विष केतु जंगल मैं प्रवेश कर जायेगा। उसने अपने चारो तरफ दिव्या अदृश्य शक्ति का फार्मेशन बनाया और उस लड़की की नाव के ऊपर खड़ा हो गया। यह जंगल बाकी मैं रहस्य से भरा हुआ हैं और इतना कह कर नदी से उड़ कर जंगल मैं घुस गया। घना जंगल पेड ऊंचे ऊंचे खरपतवार उनसे गुजरता हुआ वो आगे की तरफ बढ़ता रहा. उसको चारो तरफ से भयंकर जानवरो के आवाज सुनाई दे रही था। वो किसी डर के अंदर बढ़ता रहा हैं उसको घने जंगल मैं दो पहाड़ो के बीच एक विशाल गुफा दिखाई दी वो साबधानी सेउस तरफ गया तो उसको गरुड़ के बच्चे दिखाई दिए जो खेल रहे थे उन गरुड़ के बच्चों का आकर भी एकहाथी जितना था उसने ध्यान से देखा तब समझ आया यह तिलसिमी गरुड़ के बच्चे है तिलसिमी गरुड़ बहुत शक्तिशाली होते हैं एक पूरा वायस्क तिलसमी गरुड़ की रैंक एक हज़ार होती हैं। उसका शरीर पंख सब कुछ वज्र की तरह कठोर हो जाता हैं इस रैंक पर युद्ध कौशल की कई विधि को इस्तेमाल कर सकते हैं जो उनके पास हो। यह गरुड़ एक हमले मैं ही अपने दुशमन को मार सकते हैंरुद्राक्ष अग्निवंशी उस गुफा के पास जा चूका था जैसे ही उन गरुड़ के बच्चो नें किसी मनुष्य को अपने पास देखा तो वो अपने मुँह से आवाज़ निकालने लगे। उनकी आवाज़ जंगल मैं गूंज गयी जैसे की यह सन्देश हो किसी के लिए थोड़ी ही देर मैं आसमान से एक विशाल दो सौ फूट का गरुड़ उड़ता हुआ उधर आया उसके पंख हिलाने से भयानक मिटी और हवा एक साथ उड़ रही थीजैसे की कोई तूफ़ान आया हो। उस विशाल गरुड़ को देख कर वो बच्चे अंदर चले गए। ज़ब उस विशाल तिलसमी गरुड़ नें देखा की एक मनुष्य बिना किसी डर के उसके सामने खड़ा हुआ हैं। तो वो बोला मानव तुम्हारी हिम्मत की तारीफ करनी पड़ेगी जो तुम यंहा तक आ गए। बताओ तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या हैं। क्यों की इसके बाद तुम मारने वाले हो। रुद्राक्ष अग्निवंशी नें कहा मैं यंहा पर उस दिव्या नाग की तलाश मैं आया हूँ. जो इस जंगल मैं कही छुपा हुआ हैं। इस बात पर वो गरुड़ हँसा और बोला बहुत अच्छा क्यों की तुम मारने वाले हो तो मैं तुमको उसका पता बता देता हूँ। मेरी गुफा के बाद एक दिव्या गरुड़ गुफा आती हैं और उस दिव्या गरुड़ की गुफा से होकर वो राशता नीचे ज़मीन मैं उस दिव्या नाग की तरफ जात हैं। अब तुम मरने वाले हो। इतना कह कर वो विशाल गरुड़ अपनी चूंच से उस पर हमला करने के लिए नीचे आता हैं। जैसे ही वो गरुड़ उसके शरीर से टकराता हैं देखने से ऐसा लग रहा था इस लड़के के चीथड़े उड़ा देगा। लेकिन परिणाम उस गरुड़ की सोच से अलग निकलता हैं उसकी चौच उसके शरीर से टकरा कर टूट गयी था। सदमे मैं वो तिलसमी गरुड़ बोलता हैं परम् वज्र शरीर उसका शरीर घायल होकर नीचे गिर जाता हैं। उसके मन मैं सदमा था यह युद्ध कला तो देवताओं की थी वो यह सोच रहा था की सामने खड़ा कोई देवताओं मैं से हैं क्या। वो दुबारा खड़ा हुआ और आसमान मैं उड़ कर अपने पंजो से रुद्राक्ष के सिर पर बार करने की कोसिस की लेकिन इस बार रुद्राक्ष नें भी अपनी मुठी बना कर खींच कर उसके शरीर पर दे मारी। उस मुठी की मारे से वो उड़ता हुआ पहाड़ से जा टकराया जिसके कारण पूरा पहाड़ ही टूट कर मिट्टी बन गया। रुद्राक्ष चल कर उस पहाड़ के पास जा खड़ा हुआ और उस गरुड़ को देखा वो मरने के कगार पर था उसका शरीर फट गया था. जँहा मुका पड़ा था वंहा झेद हो गया था। उसने मरते हुए पूछा तुम कौन हो। वो बोला त्रिनेत्रा स्वर्ग का योद्धा। उसकी बात को सुन कर वो सदमे था जिसके बारे मैं उसके पूर्वज कहानी सुनते सुनाते थे वो आज उसके सामने खड़ा था। त्रिनेत्रा अपनी तलवार को निकलता हैं और उसका सर काट देता हैं. उसके बाद उसकी शक्तिमणि को ले लेता हैं और मुँह मैं निगल जाता हैं। उस शक्ति मणि की शक्ति उसके अंदर जा कर पिगल जाती हैं और उसकी शक्ति के साथ एक हो जाती हैं। उसके बाद रुद्राक्ष उस गुफा मैं जात हैं देखने के लिए कोई खास चीजें मिल जाये। वो अंदर जात हैं तो देखता हैं गुफा मैं जानवरो को हड़ियों के ढेर लगे हुई थे वो अंदर जाता जाता हैं उसको गुफा के अंदर काफ़ी मात्रा मै शक्तिमणि एक जगह दिखाई देती है। वो उन सब मणि को अपनी रिंग मैं रख देता हैं उसके पास दस हज़ार शक्ति मणि होंगी पता नहीं कब से यह गरुड़ इतने high रैंक के जानवरो का शिकार के रहा था। उन मणि को लेते वक्त उस मणि के ढेर के नीचे कोई वस्तु हलके से हरे रंग मैं चमक राही थी उसके ऊपर मिट्टी की मोटी परत जमीं हुई थी जिस कारण फीकी चमक दिख रही थी। रुद्राक्ष अपने हाथ से मिट्टी निकलता हैं और उस चीज को बाहर निकलता हैं तो देखता हैं वो हरे रंग की मणि थी उसके अंदर ऐसा लग रहा था कई सूरज हरे रंग के बंद हो। वो उस मणि को अपने मुँह मैं निगल जाता हैं। उसके शरीर की दिव्या ऊर्जा के सम्पर्क मैं आकर वो भी उसके साथ मिल जाती हैं। उसके बाद वो गुफा के आखिर मै जा पहुँचता है और देखता है वो तिलसमी गरुड़ के बच्चे उसको ही देख रहे थे। वो उनकी आँखों मैं नफरत देख सकता था इसलिए वो उन लोगो को भी ख़तम कर देता हैं और उनकी तिलसमी मणि ले लेता हैं। गुफा मैं आने का उसको बहुत फयदा हुआ था उसके पास अब हाई रैंक तिलसमी जानवरो की मणि थी। राकेश स्टोरी । त्रिनेत्रा उस तिलसमी गरुड़ को मारने के बाद उसकी गुफा मैं जाता हैं और वंहा से मणि और दो और तिलसमी गरुड़ को मार कर वापस आ जाता हैं। इस समय वो गुफा से बाहर खड़ा हुआ था और उस दिशा की तरफ देख रहा था जिस तरफ दिव्या गरुड़ की गुफा का राश्ता था। वो जंगल और पहाड़ो को पार करते हुए उधर जाना शुरू कर देता हैं राश्ते मैं उसको कई प्रकार के तिलास्मी जानवर से मुलाक़ात होती हैं वो उन जानवरो को कुछ नहीं कहता था जो उस पर हमला नहीं कर रहे थे। कुछ पहाड़ो को ही वो कर पाया था आगे उसके पहाड़ से उतर कर मैदान दिखाई देता हैं. ज़ब वो उस मैदान मैं से होकर गुजर रहा होता हैं तो उसको हाथियों की चिंघाड़ने की आवाज आने लगती हैं। यह सफेद रंग के तिलसमी हाथी थे इनके लम्बे दंत. और विशाल शरीर इनका शरीर एक नार्मल हाथी से पांच गुना बड़ा था। वो उसकी तरफ ही बढ़ते हुए आ रहे थे. जैसे वो नाराज हो एक मनुष्य उनके इलाके मैं क्या कर रहा हैं. उन हाथियों के झुण्ड नें रुद्राक्ष पर हमला कर दिया। रुद्राक्ष अग्निवंशी भी उनसे भिड़ गया और एक एक हाथी को उठा उठा कर फैकने लगा। लेकिन वो भी मजबूत हाथी थे वो भी तिलसमी हाथी उनमे से कोई जल्दी से हार मानाने को तैयार नहीं था। रुद्राक्ष अग्निवंशी नें देखा की यह तो हार नहीं मान रहे हैं तो फिर उसका मन बदल गया उसने अपने हाथो मैं थोड़ी सी शक्ति को संचालित किया और अपने वज्र शरीर को चालू किया और उन हथियो पर टूट पड़ा जिस भी हाथी के माथे पर मुक्का मार रहा था उसका माथा फट जा रहा था। उसने पांच मिनट मैं फिर सारे हाथियों को मार दिया। उनकी शक्ति मणि निकाल ली। यह तिलसमी हाथी बहुत कीमती होते थे इनकी शरीर से कई तरिके की चीजें बनाई जाती थी। उसने उन सारे हाथियों के एक अलग स्टोरेज रिंग मैं डाल दिया। और उन मणि को अलग रख दिया। था। उन हाथियों को मारने के बाद रुद्राक्ष नें आगे बढ़ना जारी रखा और जंगल मैं चलता गया उसका सामना कुछ पहाड़ को पार करने के बाद उसका सामना लाल रंग के उड़ने वाले तिलसमी शेरहो गया। यह उसका इलाका था. तिलसमी शेर नें एक शानदार धाड़ मारी और और रुद्राक्ष अग्निवंशी को देखने लगा। उसका मन लड़ाई करने का नहीं था अब वो उसको नज़रअंदाज़ करके आगे जाने लगा ज़ब शेर नें देखा की की एक लड़का उसकी नज़रअंदाज़ करके उसके झेत्र से निकला जा रहा हैं उसने उड़ान भरी और उसके आगे जा कर उसका राश्ता रोक लिया। शेर बोला मेरा भोजन मेरे ही सामने से जा रहा हैं मैंने बडे दिनों से किसी मनुष्य का मांस नाही खाया हैं और तुम्हारी तो उम्र भी कुछ नहीं हैं तुम्हारा शरीर तो बहुत मुलायम होगा। हाहाहा। अब मरने के लिए तैयारी कर लो लड़के। रुद्राक्ष उसको बोला तुम्हारी मेरी कोई दुश्मनी नहीं हैं मैं यंहा दिव्या गरुड़ के लिए आया हूँ तुम मुझे जाने दो. उसकी बात को सुनकर शेर बोला दिव्य गरुड़ और तुम जाना चाहते हो हाहाहा। इतने स्वादिस्ट शिकार को मैं भला उसके कैसे खाने दे सकता हज़ार को पार कर जाती थी। शेर नें अब देखा न तब और रुद्राक्ष के ऊपर झपत पड़ा उसने अपना मुँह खोला उसको खाने के लिए और उसने रुद्राक्ष के हाथो को निशाना बनया था। रुद्राक्ष नें दो कदम पीछे लिए और जैसे ही वो शेर मुँह खोले उसके पास आया वो फुर्ती से एक तरफ हट गया। शेर का हमला बेकार हो गया था। शेर नें ज़ब देखा की वो उसके हमले से बच गाया है उसको और तेज़ गुसा आया और उसने इस बार हवा मैं उड़ कर उसके सर को निशाना बनाया। जैसे ही वो उसके सर को मुँह मैं काटने के लिए आया रुद्राक्ष नें हवा मैं छलांग लगायी और उसके माथे एक मुक्का जड़ दिया। मुक्का पड़ते ही वो शेर जो हवा मैं था लड़खड़ा कर ज़मीन पर गिर गया उसको ऐसा लगा की उस से कोई पहाड़ टकारा गया हो। ऐसी भयानक ताकत एक लड़के मैं देखा तो उसका भी दिमाग़ घूम गाया। लेकिन वो कमजोर नहीं पड़ सकता था इस बार उसने अपनी शरीर की सारी ताकत को एक किया और रुद्राक्ष अग्निवंशी की तरफ गोली की तरह उड़ता हुआ हमला करने के लिए आगे बढ़ गया मगर इसबार जो मुका उसको पड़ा उसमे उसके सिर के चीथड़े उड़ गए थे। वो कब मर गया उसको भी समझ नहीं आया था। उसने उसकी मणि और शरीर को स्टोरेज रिंग मैं डाला और आगे चल पड़ा। कुछ और पहाड़ और जंगल पार किये उसने इस विष केतु जंगल के और। फिर वो एक खाई मैं उतर गया यह खाई हज़ारो फूट गहरि थी। वो खाई के तल पर खड़ा था इस वक्त उस खाई के पहाड़ पथर पेड पौधे उसको और रहस्यमी बना राहु थे। उस खाई मैं अजीव सी शांति फैली हुई थी। रुद्राक्ष अग्निवंशी उस खाई मैं एक निश्चित दिशा की तरफ बढ़ गया और और एक घंटे खाई मैं चलने के बाद वो दो छोटे पहाड़ो के बीच मैं गुफा थी उसके सामने खड़ा हो गया आकर। यह गुफा दिव्य गरुड़ गरुड़ के झेत्र मै खुलती थी। वो गुफा के अंदर घुस और अंदर जाने लगा उसको गुफा मै जगह जगह विशाल हड़िईओ के ढांचे देखने को मिले। मानो तिलसमी जानवरो को यंहा पर मार कर खाया हो। उसको कुछ मनुष्य के कंकाल मिले जो गुफा की दीवारों के सहारे पड़े हुए थे। उन कांकलो मैं दो मानव कंकाल ऐसे थे जिनकी हाथ की हडी मैं रिंग फंसी हुई। रुद्राक्ष समझ गया था यह स्टोरेज रिंग है। उसने दोनों रिंग को ले लिया और देखने लगा। वो रिंग किसी विशेष धातु से बनायीं गयी एक रिंग के ऊपर लाल और नीला दोनों हीरे से लग रहे थे आपस मैं जुड़े हुए थे दूसरी रिंग के ऊपर हरी और गुलाबी रंग थे। रुद्राक्ष को इतना तो समझ आ गया था यह आम रिंग नहीं थी उसने अब तक इनके बारे मै ना सुना था ना देखा था उसने उन दोनों को उन हड़ियों मै से निकाल कर अपने पास रख लिया था। अभी के लिए वो सिर्फ दिव्य गरुड़ और दिव्य नाग पर ध्यान देना चाहता था। उसकी अपनी योजनाए थी आगे बढ़ने के लिए। वो उस गुफा मै बढ़ना जारी रखता है। और कुछ देर मै गुफा के मुहने पर आ जाता है वो सामने देखता है बड़ा सा मैदान हर तरीके के पेड और पौधे और पहाड़ो की चोटी श्रृंखला. फैली हुई थी। उसमे एक छोटी सी झील भी था जिसका पानी दूर से देखने पर चमक मरता हुआ दिखाई देता था। रुद्राक्ष गुफा से बाहर निकल कर उस झील के पास जाता है और उसके पानी को एक नज़र देखता है और पहाड़ के पास जाकर एक पत्थर पर बैठ जाता है। थोड़ी देर मैं एक नार्मल आकर का एक दिव्या गरुड़ उसमे से निकल कर बाहर आ जाता. उस दिव्य गरुड़ से दिव्य ऊर्जा की आभा आ रही थी। वो सामने पत्थर पर बैठे हुए एक लड़के को देखता है जो शांति से बैठा हुआ था उसी को देख रहा था। हम्म्म्म वो लड़का बोलता है तो तुम हो दिव्य गरुड़. वो उसको कहता है मुझे दिव्य नाग के बारे मै बताओ वो कँहा है। वो लड़का उस से इस तरीके से बात कर रहा था जैसे उसकी कोई औकात ही नहीं हो। बहुत खूब लड़के तुम अच्छा मज़ाक कर लेते हो. कुछ काबिलियत तुम्हारी होंगी जो तुम यंहा पर आ गए हो। मैंने बडे बडे सुरमाओ को अपनी चौच और पंजे से फाड़ा है. तुम तो सिर्फ एक कम उम्र युवा हो और मुझसे बात इस तरीके से कर रहे हो जैसे मैं तुम्हारा नौकर हूँ। दिव्या गरुड़ अपनी आभा को प्रसारित करता हैं और उसका आकर देखते ही देखते विशाल हो जाता हैं। रुद्राक्ष कहता हैं तुम मुझसे युद्ध करना चाहते है तो यही सही हैं उसके बाद रुद्राक्ष अपनी आभा को खोल देता हैं उसका शरीर और आँखे अनोखे तेज़ से जगमगाने लगती हैं उसका शरीर परम् वज्र का बन जाता हैं उसके चारो तरफ नौ रंग की रोशिनी उसके शरीर को परत दर परत ढक लेती हैं उसके शरीर के चारो और नौ रोशिनी के गोल गोल सर्किल घूमने लगते हैं वो हवा मैं उड़ रहा था उसकी आँखों मैं हज़ारो सूरज का तेज़ समाया हुआ था उसकी आँखों का रंग हर पल बदल रहा था। उसका यह भयानक रूप को देख कर दिव्या गरुड़ पूछता हैं तुम कौन हो। वो कहता हैं तुमने बहुत देर कर दी और हवा की गति से दिव्या गरुड़ को एक लात मार देता हैं जिसके प्रभाव से दूर उड़ता हुआ पहाड़ो को तोड़ता हुआ जा कर गिर जाता है। एक लात से ही उसके शरीर की सारी हड़िया टूट गयी थी उसके पंख नस्ट हो गए थे. जिन वज्र के पंखो का उसको अभिमान था सारा टूट चूका था इस समय वो मरने के कगार पर था। उसकी मौत हैरत और विसमय मैं हो गयी थी रुद्राक्ष अपना एक हाथ उसके माथे पर रखता हैं और कुछ मंत्र पड़ता हैं वो उसकी यादो को देख रहा था और कुछ देर बाद वो अपना हाथ को उसके सर से हटा लेता हैं. और उसका सर काट देता हैं उसकी मणि को लेता हैं और निगल जाता हैं। उसकेशरीर को अपनी स्टोरेज रिंग मैं डाल देता हैं। वो वंहा कुछ देर बैठ कर साधना करता हैं और देखता हैं उसके शरीर पर वज्र पंख आ आगये थे वो एक बार उन पंखो से उड़ान भरता हैं और एक मैदान का चकर लगा कर. वापस आ जाता हैं। वो इन पंखो मैं तिलसमी गरुड़ की भी शक्ति भरने के लिए फिर दुबारा साधना करने लगता हैं। इस बार वो अपनी दिव्या ऊर्जा शक्ति को भी इसमें मिला देता हैं. और इसका चमत्कारिक लाभ उसको मिलता हैं। फिर ज़ब वो अपनी साधना से उठता हैं और अपने पंख देखता हैं तो उसके पंख परम् वज्र शक्ति के हो गए थे। उसके पंखो मैं नौ रंग देखे जा सकते थे. यह नौ रंग की धारिया अपने अपने रंग की रौशनी मैं चमक रही थी। इस फयदे के बारे मैं तो रुद्राक्ष अग्निवंशी नें सोचा ही नहीं था। अब अपनी इच्छा अनुसार गति से इन का प्रयोग कर सकता था। यह उसकी इच्छा से से शरीर से बाहर और अंदर हो रहे थे। इसके लिए उसे अपनी दिव्य ऊर्जा या साधना शक्ति खर्च करने की भी जरुरत नहीं थी। ज़ब वो अपने आप से संतुष्ट हो जाता हैं तो फिर वो दिव्या नाग की तरफ उड़ान भरता हैं कुछ ही देर मैं वो वंहा पहुच जाता हैं। रुद्राक्ष दिव्या नाग की गुफा मैं घुस जाता हैं और अंदर जाने लगता हैं कई किलोमीटर अंदर गुफा मैं जाने के बाद गुफा को पार कर खुले खड़ा हो जाता हैं उसको विष की गंध आ रही होती हैं वो देखता हैं उस विशाल मैदान मैं एक कई सौ फूट बड़ा नाग अपनी कुंडली बना कर बैठा हुआ था उसके कई मुँह थे रुद्राक्ष नें गिना तो पाया उसके 21फन थे। जैसे ही उस दिव्या नाग को एहसास होता हैं कोई उसके गुफा मैं आ चूका हैं उसके शरीर मैं हलचल होनी शुरू हो जाती हैं और वो अपने फनो को उठा कर अपनी आँखे खोलता हैं। तो तो देखता हैं सामने युवा उम्र का लड़का खड़ा हुआ मजबूत कद काठी का। उसके चेहरे पर भी उसको तेज़ की आभा महसूस होती हैं। मगर वो उसको नज़र अंदाज़ करता हैं. और उस लड़के को पूछता हैं तुम यंहा पर किसके साथ आये हो। तुम्हे मारने का डर नहीं लगता हैं। वो शांति से दिव्या नाग को कहता हैं मैं यंहा अकेला ही आया हूँ मेरा नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी हैं। मुझे तुम्हारी ही तलाश थी। पहले तो मैं तुमको मारना चाहता था। मगर अब नहीं अब मैं चाहता तुम मुझे वो दिव्या मणि ला कर दे दो जो शेषनाग के वंश की हैं। अब तुम मुझे यह मत बोलना मुझे नहीं पता हैं मुझको पता हैं वो तुमने कही नीचे पाताल लोक मैं छुपा रखी है। उसकी बातो को सुन कर दिव्या नाग गुस्सा हो जाता हैं और कहता हैं लगता हैं तुमको दिव्य गरुड़ नें मेरे राज के बारे मैं बताया हैं. ज़ब हमारा उसका समजोता हो चूका था फिर भी उसने इसको तोड़ दिया। मैं तुमको छोडूंगा नहीं दिव्या गरुड़। और वो गुसे मैं अपने आकर को लेकर आसमान मैं उड़ने लगता हैं उसके शरीर पर सर से लेकर पूछ तक कई जोड़ी पंख थे. जो शानदार शक्ति से भरे हुए थे। वो गुसे मैं उड़ता हुआ आसमान मैं चकर लगाने लगता हैं। जिसके कारण हवा का तूफ़ान उठा हुआ था.रुद्राक्ष अभी शांति से उसको देख कर बात कर रहा था। फिर वो उस दिव्या नाग से पूछता हैं तो तुम्हारा मेरी बात के बारे मैं क्या ख्याल हैं। दिव्या नाग कहता हैं अपने घमंड मैं तुम मुझको हरा दो मैं तुमको वो दिव्या मणि भी दूंगा और तुम्हारा गुलाम भी बन जाऊंगा। उसको लगता था पृथ्वी लोक पर कोई भी मनुष्य कितना भी ताकत पा ले मगर वो देवता की ताकत से मुकाबला कभी नहीं कर सकता हैं। रुद्राक्ष अग्निवंशी उसकी बात को सुनता हैं और फिर अपना औरा और दिव्या आभा को खोल देता हैं और अंगले ही पल वो उस दिव्या नाग के साथ अपने पंख की मदद से उड़ रहा था। दिव्या नाग अपना हमला बिना सोचे समझें कर देता हैं उसके फनो से भयंकर पांच तत्व को शक्ति फूट पडती हैं और रुद्राक्ष के शरीर को चीथड़े करने के लिए आगे बढ़ जाती हैंरुद्राक्ष कोई विरोध नहीं करता हैं और उसके हमले को अपने शरीर से टकराने देता हैं उसका भयानक हमला नौ रंग के सर्कल से टकरा कर नस्ट हो जाता हैं। यह देख कर दिव्य नाग को सदमा लग जाता हैं हैरानी से उसकी आँखे फट जाती हैं सामने वाले नें बिना विरोध के उसके हमले को नस्ट कर दिया था। इस बार रुद्राक्ष हमला करता हैं और उसके हाथो से नौ रंग की किरणे निकल कर उसके शरीर से टकरा जाती हैं किरण के टकराने के बाद वो दिव्या नाग जो हवा मैं उड़ रहा था धड़ाम से ज़मीन पर गिर जाता हैं। वो बुरी तरीके से घायल हो चूका था। अब अगर एक हमला और उसके शरीर को लगा तो खरबूजे की तरह फट जायेगा। भयानक मौत के मंज़र के एहसास से ही उसकी रूह काँप उठी थी इस समय वो धरती पर घायल पड़ा हुआ था। रुद्राक्ष नार्मल होकर नीचे उतरा और उस दिव्या नाग के पास जा कर खड़ा हो गया। उसने उस से पूछा तुमको मुझसे और लड़ाई करनी हैं क्या। दिव्य नाग बोला मैं अपनी हार मानता हूँ। फिर तुम्हारी बातो का क्या जो तुमने मुझे बोली थी दिव्य नाग समझ जाता हैं उसका क्या मतलब हैं.वो बोला मैं अपनी बातो पर अभी भी कायम हूँ। ह्म्म्मम्मयह हुई ना बात दिव्या नाग कहता हैं मैं अनुबंध करने को तैयार हूँ रुद्राक्ष दिव्या नाग के साथ अपना और उसका आत्मिक अनुबंध बनाता हैं जिसका मतलब था अब से रुद्राक्ष अग्निवंशी उस दिव्या नाग का मास्टर हैं। और अगर उसने अपने मास्टर के साथ धोखा देने की कोशिश की तो उसकी आत्मा नस्ट हो जाएगी। इसलिए कोई भी जानवर किसी के साथ जल्दी से अनुबंध नहीं करता हैं। अब ज़ब रुद्राक्ष उसका मास्टर बन गया था वो अपनी दिव्या ऊर्जा अपने हाथो से उसके शरीर मैं भेजता हैं जिसके परिणाम मैं उसके शरीर की शरीर चोटे ठीक हो जाती है। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी उस दिव्य नाग को पराजित करें उसको अपना गुलाम बना लेता हैं। और उसके शरीर के सारे जख्मो को ठीक कर देता। ज़ब उसका आत्मा अनुबंध हो जाता हैं तो उस नाग श्रेष्ठ दिव्या ऊर्जा की अनुभूति होती हैं. वो रुद्राक्ष से पूछता हैं मास्टर यह आपकी असली पहचान नहीं हैं क्या आप मुझे अपने बारे मैं बता सकते हो। उसकी बात को सुन कर रुद्राक्ष अग्निवंशी कुछ सोचता हैं फिर बोलता हैं मेरी असली पहचान त्रिनेत्रा हैं बैटल गॉड। त्रिनेत्रा का नाम सुनकर दिव्य नाग को चकर आ जाता हैं उसका मुँह हैरानी से खुला जाता हैं। वो बोलता हैं उनको तो करोडो साल पहले मार दिया गया था ज़ब कालकेतु और धूमकेतु नें स्वर्ग पर आक्रमण किया था। ऐसा मैंने अपने पूर्वजों के इतिहास मैं पढ़ा हैं। कोई कहता था की उनकी आत्मा को नस्ट कर दिया गया था। उसको सक का निराकरण करते हुए त्रिनेत्रा कहता है तुम नें जो सुना और पढ़ा है वो आधा सच हैं। पूरा सच नहीं मुझे मेरे अपनों नें ही धोखा दिया था उस युद्ध के समय। यह समझ लो एक अनंत काल के लिए मैं कैद हो गया था और अब मैं मुक्त हुआ हूँ। वो दिव्या नाग से कहता हैं कभी भी मेरे नाम के बारे मैं किसी से चर्चा मत करना और ना ही सच बताना अभी मुझे अपनी शक्ति बढ़ानी हैं इस पृथ्वी लोक पर ज़ब मैं पर्याप्त शक्तिशाली हो जाऊंगा तब मैं उन लोगो के खिलाफ जंग लड़ूंगा। रुद्राक्ष उस दिव्य नाग को कहता हैं चलो चलते हैं और वो दिव्या नाग छोटा हो जाता है और उस दिशा की तरफ जाने लगता हैं जँहा पर उसने दिव्या नाग मणि छुपाई थी। वो आगे जाके एक नदी दिखाई देती हैं उसमे उतर जाता हैं और उस नदी की गहरि तल की तरफ लगातार जाने लग जाता हैंउसको नदी के घेराई मैं एक तरफ गुफा दिखाई देती हैं जो पानी से भरी हुई थी वो उसमे घुस जाता हैं और एक घंटे के बाद वो उस गुफा के पानी से अपना मुँह वाहर निकलता हैं.रुद्राक्ष देखता हैं वंहा एक पत्थर का चबूतरा बना हुआ था जो ऊंचाई पर इस्तिथि था। उसके ऊपर एक मणि अलग अलग रंग मैं प्रकाश को निकाल रही थी जिस से वंहा रोशिनी हो रही थी। दिव्या नाग उस मणि को लेकर रुद्राक्ष को दे देता हैं। रुद्राक्ष कुछ पल उस मणि को देखता हैं और उसको मुँह मैं निगल जाता हैं। और साधना करने के लिए बैठ जाता हैं वो मणि उसके शरीर की दिव्या ऊर्जा के साथ मिल जाती हैं और ज़ब वो साधना से आँखे खोलता हैं तो बोलता हैं अब देखेंगे कामिनी देवी तुम्हारा हलाल विष मेरा क्या करता हैं पिछली बार तो तुमने मुझे धोके से विष दिया था। उसकी बात को वो दिव्या नाग भी सुन रहा था। अपने मास्टर के ह्रदय के क्रोध को वो समझ पा रहा था। उसे वास्तव मैं ख़ुशी महसूस हो रही थी एक स्वर्ग के अजय योद्धा के साथ था। जिसके चर्चे समस्त वृह्माण्ड और गैलेक्सी मैं थे। वो अपना भविष्य भी मास्टर के साथ देख रहा था आने वाला वक़्त वास्तव मैं प्रलय लाएगा स्वर्ग और दानव और दैत्य पर। रुद्राक्ष नें अपने आप को शांत किया। और उसने दिव्या नाग से पूछा तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो बताओ मुझे क्या बात हैं. जँहा तक मैं समझ पा रहा हूँ तुमको बात उतनी सीधी नहीं हैं जितनी मुझे दिख रही हैं। और यह तुम्हारी असली पहचान भी नहीं हैं। वो दिव्या नाग कहता हैं मेरा नाम राजकुमार दक्ष हैं शेषनाग लोक का राजकुमार हूँ। यह दिव्या नाग मणि मैं अपने लोक से लेकर भगा था अगर इसकी शक्ति कुधूम सर्प को मिल जाती तो वो पुरे शेषनाग लोक के नागो का विनाश कर देता.मेरा पिता शेषनाग लोक के सम्राट द्रोण हैं जो की कुधूम सर्प की कैद मैं हैंकुधूम सर्प कालकेतु का सेवक हैं और उसके जरिये कालकेतु महादेव के हालाहल को पाना चाहता था। मगर मैं यह मणि के लेकर अपनी जाना बचा कर लाखो सालो से यही रह रहा हूँ। किसी के पास भी इतनी शक्ति नहीं हैं जो उसका मुकाबला कर सके। महाराज द्रोण नें यह खबर की उनके मरते ही मणि नस्ट हो जाएगी वंहा के गुरूजी के द्वारा फैला दी गयी थी। और मैं पृथ्वी लोक पर छुपा हुआ था। तो वो ज़ब तक महाराज का वध नहीं कर सकता ज़ब तक की उसको यह मणि ना मिल जाय। इस तरीके से मैं भी बचा शेषनाग लोक के नाग भी और महाराज द्रोण के प्राण भी। उसके गुप्तचर हमेशा मेरी तलाश मैं रहते हैं। इसलिए मैं इस विष केतु जंगल मैं गुप्त रूप से रह रहा था. मगर कुछ समय पूर्व कुछ लोग यंहा पर आये थे उनको मेरी भनक लग गयी थी वो शायद किसी दूसरे लोक या फिर आयम से आए थे। मगर दिव्य गरुड़ नें उन लोगो को मार डाला था। दिव्या गरुड़ के साथ मेरा समजोता हुआ था मै उसको और शक्तिशाली बनने मैं मदद करूँगा। वो कौस्तुभ मणि पाना चाहता था। जो भगवान विष्णु पास रहती हैं। उसको पाने का तरीका और राज महाराज द्रोण को पता था। यही बात मैंने उसको बोली थी तुम मेरे साथ मेरे दुश्मन को मारने मैं मदद करो मैं तुमको वो मणि दिलवा दूंगा। कौस्तुभ मणि महादेव के हालाहल के प्रभाव को भी ख़तम कर देती है उसको धारण करने वाला किसी की भी ऊर्जा खींच सकता हैं और अपने दुश्मन को खतम कर सकता हैं। रुद्राक्ष दक्ष से पूछता हैं अभी हम कँहा हैं। तो दक्ष कहता हैं हम विष केतु जंगल के रहस्यमी केंद्र मैं हैं। इसका राश्ता किसी को भी नहीं पता। हम्म्म्मतो रुद्राक्ष अग्निवंशी कहता हैं तो क्या कहते हो क्या ना इस केंद्र को देख लिया जाये घूम कर। दक्ष कहता हैं मास्टर वंहा खतरा भी अधिक हो सकता हैं। रुद्राक्ष बोलता हैं कोई बात नहीं इस को भी आ गए तो देख लेते हैं। उसके बाद रुद्राक्ष और दिव्य नाग उस गुफा से वापस नदी की उसी दिशा मै आता है जँहा से उसने उसमे प्रवेश किया था। फिर वो दिव्य नाग नदी के दूसरे किनारे की तल की तरफ जाने लगता हैं। राकेश स्टोरी । दिव्य नाग रुद्राक्ष को लेकर इस समय नदी की घेराई मैं तल की दूसरे किनारे की तरफ बढ़ रहे थे काफ़ी देर चलने के बाद वो किनारे की दरार मैं घुस जाता हैं और और दोनों पानी के दरार मैं सफर करते रहते हैं। फिर उनको दरार मैं गुफा का मार्ग मिलता हैं और वो लोग उसमे प्रवेश कर जाते हैं तीन चार घंटे उस घूमवदार गुफा मैं उड़ते रहने का बाद वो लोग पानी से एक सुखी जगह पर निकल आये थे। पानी से वहार आने के बाद उनके सामने कई गुफा दिखाई दे रहे थे। वो लोग उन सब गुफा को बारी बारी देखते हैं दक्ष भी पहेली बार ही इधर आ रहा था। वो कहता हैं मास्टर मैं भी पहेली बार ही आया हूँ इधर उन गुफाओ मैं हलकी उस्मा से आ रही थी। उसके बाद रुद्राक्ष एक बड़ी गुफा मैं चलने का इशारा करता हैं और उसमे दोनों घुस जाते हैं। दिव्यनाग को अपना रूप छोटा करने को बोलता हैं और वो वो आध्यात्मिक शक्ति से अपने आप को छोटा के लेता हैं और उसके शरीर का को कुंडली मार कर लिपट जाता हैं। अब रुद्राक्ष अग्निवंशी के सर पर उसके 21फन आ रहे थे। वो पैदल पैदल ही उस गुफआ मैं अंदर जाता रहता हैं। वो अपने अंदाज़ से एक दिन की यात्रा करता हैं और ज़ब गुफा ख़त्म होती हैं तो उसको तापमान वडा हुआ लगता हैं। ज़ब वो बाहर खड़े होकर उस गुफा से निरिक्षण करता हैं तो तो देखता हैं लावा खोलता हुआ बह रहा लाल रंग का। उसमे खदक उठ रही हैं और वो पूरा विशाल झेत्र रोशिनो की किरण से प्रकाशित हो रहा था। इस प्रकाश का स्रोत वंहा तरह तरह के रंग के रत्न थे हीरा कई रंगों के थे मोती अलग अलग रंगों। पत्थर जिनमे से अलग अलग रोशिनी आ रही थी। कुल मिला कर वंहा अनमोल खजना था वो भी सीमा से रहित काले ग्रेनाइट के बडे बडे पत्थर जो लावा के बीच बीच मैं पड़े हुए थे शयाद उसी से उनका निर्माण हुआ था कुल मिलकर वो नज़र घूमता तो हर तरफ दिवार पर उसको ज़मीन पर खजाना दिखाई दे रहा था। वो राजकुमार दक्ष से पूछता हैं यह सब क्या हैं। तो कहता हैं मास्टर हम लोग जंगल मै नहीं पृथ्वी के केंद्र मैं आ गए हैं। मुझको तो यह पृथ्वी लोक का कोर लगता हैं तभी लावा का विशाल समंदर और यह हीरे मोती जो दुर्लभ है यंहा पर दिख रहे हैं। रुद्राक्ष अग्निवंशी फिर दिव्य नाग को कहता हैं तुम यंहा का अनमोल खजाना इकड़ा करो मैं जरा आगे का सफऱ करके आता हूँ एक राउंड लगा कर मै वापस आ जाऊंगा। वो उस से पूझता हैं तुम्हारे पास स्टोरेज रिंग हैं क्या। दक्ष कहता हैं मेरे पास मास्टर स्टोरेज रिंग हैं जो हमारे लोक की हैं उसमे मैं आधी पृथ्वी के जितना सामान रख सकता हूँ। रुद्राक्ष उसको पांच सौ स्टोरेज रिंग खाली करके और देता हैं और कहता हैं जो भी कीमती हो अनमोल हो सब ले लो बारबार आने का मौका नहीं मिलने वाला। रुद्राक्ष फिर अपनी शक्ति की सक्रिय करता हैं और अपने पंख से उड़ना शुरू कर देता हैं जँहा उसे जो दिख रहा था उसको अपने स्टोरेज रिंग मैं जमा करता हुआ जा रहा था उसको कई तरीके के फूल मिले जो औषधि निर्माण मैं दुर्लभ जड़ी बूटी थी. उनको भी भी तोड़ कर रख लेता हैं। वंहा उसको जितनी भी दुर्लभ पेड और वनस्पति मिली उसको उसने अलग से रख लिया। फिर वो लावा के समंदर पर उड़ता रहता है तभी उसकी नज़र कुछ दुरी पर बनी गुफा पर जाती है. वो उड़ते हुए उस गुफा मै घुस जाता है और अंदर जाता है उसकी दीवारों पर भी रत्न और अनमोल खजाने मिलते है। वो गुफा के अंत पहुंच जाता है तो उसको बडे हीरे जैसे पत्थर दिखाई देते है जो की एक आदमी के साइज जीतने बडे थे. उनमे से खुद ऊर्जा निकल रही थी। ऐसे वंहा पर दस हज़ार होंगे अलग अलग रंग। रुद्राक्ष अपनी आध्यात्मिक शक्ति को और दिव्या ऊर्जा को खोल देता है और अपने हाथो को आगे करके उन सबकी शक्ति ऊर्जा को सोखना शुरू कर देता है। एक घंटे की प्रक्रिया मै वो सब धूल बन जाते है। उसके बाद उसको कुछ काम का नहीं दिखाई देता है। और वो वापस उड़ता हुआ उधर आ जाता हैं जिधर उसने दिव्य नाग को बोला था अपना काम करने के लिए। एक घंटे के बाद दिव्य नाग भी उड़ता हुआ आ जाता है। रुद्राक्ष अग्निवंशी उसको पूछता है तुमने अपना काम कर लिया क्या। जी मास्टर जो मुझे अनमोल लगा सब मैंने स्टोरेज रिंग मैं रख लिया। सारी रिंग भर गयी है। वो कहता है अब आपसे ज्यादा धनबान मेरी नज़र मै कोई भी नहीं होगा पृथ्वी पर। उसके बाद दोनों दो दिन रात यात्रा करते है और वापस उस जगह पर आ जाते है जँहा पर दिव्य नाग मिला था। इस भाग दौड़ नें रुद्राक्ष को काफ़ी थका दिया था और दिव्य नाग भी थक गया था। रुद्राक्ष कहता है कुछ जानवरो का शिकार कर लो हम आज यही आराम करेंगे कल चलेंगे। दक्ष कुछ जानवरो का शिकार कर लाता है और रुद्राक्ष उनको पकाने की तैयारी शुरू कर देता है। झील के पानी मैं साफ करने बाद वो आग जला कर उन सबको भाले मैं फ़सा कर भूनना शुरू कर देता हैं। दिव्या नाग भी बिलकुल छोटा होकर उसके कपड़ो मैं घुस जाता है और उसके कंधे पर सर रख कर आराम करने लगता हैं. इस समय दिव्य नाग एक छिपकली की तरह लग रहा था जिसके शरीर पर नौ रंग की धारिया थी और जिसके 21फन थे। यह सब त्रिनेत्रा की ऊर्जा का कमाल था जिसके कारण उसमे यह परिवर्तन हुए थे। और हो रहे थे धीरे धीरे। रुद्राक्ष अग्निवंशी उसको सोने देता हैं और खुद उन जानवरो का मीट लाइन लगा कर पकाने लग जाता है। वो श्यामगढ़ के मसाले निकलता है और उन मीट पर डाल देता हैं। पके हुए मांस की खुश्बू उस झेत्र मै फैल जाती है। एक जगह बड़ी सी आग जलाता है और उसके पास आराम से बैठ जाता है। यह झेत्र दिव्य नाग का था तो उसे किसी भी जानवर का कोई डर नहीं था। मगर कहते हैं ना मानव से बड़ा जानवर कोई नहीं होता हैं। तभी उसको महसूस होता हैं कई शक्तिशाली लोग इधर आ रहे हैं तभी वो देखता हैं आसमान मै आगे वीस योद्धा उड़ रहे थे उनके पीछे तीस योद्धा थे बीच मैं आठ रथ थे जिनमे लोग सवार थे। उन रथो को कुछ योद्धा कबर किये हुए थे। जो आगे वीस लोग थे उनकी पोशक का रंग अलग थे यह चालीस साल के आस पास होंगे उनकी लम्बी ढाडी लटक रही थी सबने सीने पर कवच पहने हुए थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी अपने आप से बोला थोड़ा आराम का क्या सोचा अब यह लोग आ धमके। मगर उसने उनको नज़रअंदाज़ किया और जो मीट पक चूका था। उस पर कुछ और मसाले डाले। एक बार फिर खुश्बू सबकी नको से गुजर गयी। उन लोगो को एक लड़के को दिव्य नाग के झेत्र मै खाना पकाते हुए देख कर बड़ी हैरानी हुई। वो लोग सब नीचे उतरे मगर साबधान होकर। उनमे से आगे बाले एक आदमी नें पूछा कौन हो तुम और यंहा क्या कर रहे हो उसकी आवाज़ मैं गुरूर था। रुद्राक्ष बोला दिखाई नहीं देता क्या आंधे हो खाना बना रहा हूँ खाने के लिए। उसके इस तरीके से जवाब देने से सब हैरान थे। पूछने वाले को भी एक पल अजीब लगा। फिर भी उसने पूछा नाम क्या है तुम्हारा। वो बोला रुद्राक्ष अग्निवंशी नाम है मेरा। हम्म्म्म उसका नाम सुनकर पीछे से कुछ लोग आगे आ जाते हैं वो लोग उनको रोकने की कोसिस करते हैं तो रवि बोलता हैं कैसे हो दोस्त देखो हमारी मुलाक़ात फिर हो गयी. पीछे और राजकुमार और राजकुमारी भी आगे आ जाती हैं उसको देख वो भी हैरानी मैं थी इतने खतरनाक इलाके मैं वो मजे से खाना खाने जा रहा था। फिर मीट का टुकड़ा टेस्ट करते हुए कहता हैं अरे रवि भाई आप भी ना खाने के टाइम पर ही एंट्री मरते हो आजाओ काफ़ी खाना बनया हैं मैंने। उन दोनों की बातो को सुनकर सब एक दूसरे की शक्ल देख रहे होते हैं। फिर उन सब लोगो की तरफ देखता हैं जिनको वो जनता था उनको खाना खाने के लिए बोल देता हैं और जिनको नहीं जनता था उनके बारे मैं रवि से पूछता हैं यह लोग कौन हैं तुम्हारे साथ और तुम यंहा क्या करने आये थे। रवि कहता हैं यह सब लोग मेरे साम्राज्य से ही है पीताजी नें इनको दिव्या नाग की खोज मैं भेजा हैं। यह जो आगे सबसे अलग पोशाक मैं खड़े हुए हैं यह हमारे महा गुरूजी हैं इनको साधना से अग्नि का दिव्य अस्त्र प्राप्त हैं ह्म्म्मम्म। तो वो रवि को बोलता हैं यह तुम्हारे लोग है तो उन सबको भी खाना के लिए बुला लो बाकी बाते बाद मैं करते हैं। रवि सभी लोगो को बोलता हैं रुद्राक्ष भाई मस्त मीट पकाते आ जाओ आप लोग भी खा कर देखो। मैं तो जंगल मैं फैली खुश्बू को देख कर ही पहचान गया था। उनके महा गुरूजी और दूसरे लोग लगातार उसका शक्ति स्तर देखने मैं लगे हुए थे मगर किसी को भी कुछ पता नहीं चल रहा था। महा गुरूजी जी को अपनी साधना से केबल दिव्य ऊर्जा का अंश मात्र महसूस हो रहा था। जैसे की किसी नें अपनी मर्जी से सब कुछ छुपा रखा हो। उनके चेहरे की चिंता की लकीरो को देख कर जो दो लोग पहले जंगल मैं मिले थे वो उनको सारा किसा सुनाते हैं तो उनको आश्चर्य होता है। इस बार वो सभी से बात कर रहा था। उसका व्यवहार उन सभी लोगो को पसंद आया था। वो उन सबको अपने बारे मैं बताता हैं जो बताना चाइये था। खाना पानी होने के बाद वो लोग उस से पूछते हैं तुम्हे दिव्य नाग से डर नहीं लगता हैं क्या। हमारी किस्मत अच्छी थी हम सीधा यंहा पहुचे। नहीं राश्ते मैं तिलसमी गरुड़ और दिव्या गरुड़ का झेत्र था। सब लोग खाते हुए रवि और रुद्राक्ष की बातो को ध्यान से सुन रहे थे। रवि की बात को सुनकर रुद्राक्ष कहता हैं भाई डरना कैसा मैंने दोनों को मार दिया था रवि को लगा रुद्राक्ष उसके साथ मज़ाक कर रहा हैं फिर वो भी मज़ाक मैं बोला और दिव्य नाग क्या फिर तुम्हारा गुलाम बन गया होगा इस हिसाब से। रवि को हस्ता देख रुद्राक्ष हवा मैं अपना हाथो को घुमाता हैं और उसको शक्ति मणि दिखता है। रवि जो अब तक हंस रहा था उसकी हसीं उसके गले मैं ही अटक जाती हैं। उसको शक्ति मणि दिखाने के बाद उसको वापस रख लेता है। रवि और राजकुमार और राजकुमारी सदमे मैं थे यही हालत बाकी लोगो के भी थे सबको समझ मैं नहीं आ रहा था यह हैं कौन। रवि को इतना सीरियस होते देख रुद्राक्ष कहता है क्या हुआ दोस्त अब भरोसा हुआ मुझे पर। वो बोलता हैं हाँ। और तुम्हारा आखरी सवाल दिव्य नाग का तो चलो मैं तुमको जंगल की सेहर करवा कर लाता हूँ। उसके बाद वो दक्ष को बोलता हैं तुमको भूख लगी होंगी चलो शिकार करते हैं नहीं तो तुमको भूखा रहना पड़ेगा। तुम्हरा भोजन मित्रो नें खा लिया। उसके बाद दिव्या नाग उसकी पीठ से उठ कर हवा मैं उड़ जाता हैं और अपने रूप मैं आ जाता हैं। उसके विशाल रूप से आसमान ढक रहा था. वो उन लोगो को बोलता हैं वो मेरा गुलाम हैं मेरा उसके साथ आत्मा का अनुबंध हो चूका हैं इसलिए किसी को भी डरने की जरुरत नहीं हैं। रवि जो अभी भी सदमे मैं रुद्राक्ष को देख रहा था। वो रवि को कहता हैं चलो मित्र जंगल घूम कर आते हैं। उन दोनों को अकेला जाते देख कर राजकुमारी मोहिनी कहती हैं रुद्राक्ष क्या मैं भी तुम्हारे साथ चल सकती हूँ इस बात पर वो पहले रवि को देखता हैं फिर राजकुमारीको कहता हैं जी बिलकुल आप हमारे साथ चल सकती हैं। मोहिनी की बात को सुन कर सीता, गीता रीता, भी बोल उठती हैं. ज़ब सब लोगो को रवि और रुद्राक्ष के साथ देखता हैं तो रोहित रोहन और सोहन भी बोल उठते हैं, ठीक हैं फिर सभी लोग इस दिव्या नाग पर बैठ जाओ। हवा मैं उड़ता हुआ वो अपने मास्टर के पास आता हैं और रुद्राक्ष एक छलांग लगा कर उसके ऊपर आ जाता हैं फिर सबको बैठने के बाद वो जंगल की तरफ उड़ जाते हैं। वंहा रह जाते हैं केबल वो लोग जो अभी तक यह समझ नहीं पाए थे उनके सामने क्या हो रहा हैं। सभी की चिंता को दूर करते हुए वो दो महागुरु बोलते हैं कोई दिव्य आत्मा है यह लड़का। अपनी तरफ से किसी को भी पहले चोट नहीं पहुँचता हैं। इसका दिल नेक और साफआप लोगो नें देखा नहीं हमरा रवि कितना बड़बोला हैं और देख कर साफ पता लगता हैं रुद्राक्ष को रवि का व्यवहार पसंद आया हैं। वरना जो लड़का उतर के सम्राज्य के कुल को साफ कर सकता हैं अकेला उनके महागुरु के साथ वो क्या नहीं कर सकता। अब उन लोगो को यकीन हो गया था उस कांड मैं रुद्राक्ष का ही हाथ हैं। मगर इसने हिमांशु को जिन्दा क्यों छोड़ दिया। ओहह अब समझ आया हिमांशु का व्यवहार भी रवि जैसा था घमडी और अहंकार का नहीं.एक घंटे बाद सभी लोग आसमान मैं देखते हैं मजे से बाते करते हुए आ रहे हैं और दिव्या नाग के उड़ने से आंधी जैसी हालत हो रहे थे पास आते ही वो अपना रूप छोटा करता हैं और रुद्राक्ष के कपड़ो मैं घुस जाता हैं और उसके कंधे पर सर रख कर आराम करने लग जाता हैं। राकेश स्टोरी । वो सब आकर बैठ गए थे और पचास लोग भी उस लड़के की पहचान को लेकर विषमय मैं थे। उनके हिसाब से उसका भविष्य सभी साम्राज्य के भाग्य के फैसला करेगा। उन बुजुर्ग लोगो नें सबसे बातचीत करके निर्णय लिया ऐसी प्रतिभा हमारे साम्राज्य मैं होनी चाइये। सब लोग आराम करने लगे और सौ गए सुबह जब सबकी आँख खुला तो देखा सूरज निकलने वाला हैं। रुद्राक्ष भी उठ गया और उसने रवि को उठाया भाई उठ जा सुबह हो गयी कितना सोयेगा। उसकी बात को सुन कर रवि बोला यार तू भी सौ जा ना थोड़ी देर और. रुद्राक्ष बोला नहीं यार तू सौ मैं फ्रेश होकर आता हूँज़ब तक सब राजकुमारी और राजकुमार नींद मैं था वो झील के पानी मैं नहा कर अपने कपडे बदल चूका था जो और लोग थे वो भी झील के साफ पानी मैं नहा कर फ्रेश हो गएऔर चलने की तैयारी करने लगे। फिर उन लोगो नें रुद्राक्ष से पूछा तुम किधर जाओगे. रुद्राक्ष बोला सच बताऊंगा आपको मैं दुनिया घूमना चाहता हूँ। वैसे तो मेरा लक्ष्य अभी किसी साम्राज्य के गुरुकुल मैं दाखिला लेना हैं। फिर उनमे से एक बोला मेरा नाम महा गुरूजी माधव आचार्य हैं। मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ अगर तुम चाहो तो। तुम्हारा दाखिला हमारे साम्राज्य का जो गुरुकुल हैं उसमे हो जायेगा.उन लोगो नें राजकुमार और राजकुमारी को जगाया और बोले अब हम लोगो को चलना चाइये। उसके बाद वो सब लोग साम्राज्य की तरफ निकल गए उनका काम विष केतु जंगल मैं ख़तम हो चूका था। रुद्राक्ष भी एक रथ पर रवि और लोगो के साथ था और एक रथ पर राजकुमारी और बाकी के रथो पर और लोग सवार हो गए थे रथ मैं बंधे घोड़े हवा मैं बाते कर रहे थे उनके सफेद पर हवा को काटते हुए रफ़्तार पकड़ ली। और एक दिन की यात्रा के बाद वो साम्राज्य के किनारे दिखाई दिए। रवि और रुद्राक्ष की वाकी लोगो से भी अच्छी दोस्ती हो गयी थी। राजकुमारी मोहिनी की तो आँखों मैं अलग चमक थी। बाकी राजकुमारी भी उसके बदले मिजाज को देख रही थी वो जल्दी से किसी को भी भाव नहीं देती थी। और यंहा एक लड़का किसी को भी भाव नहीं दे रहा था। कुछ और समय यात्रा करने के बाद वो लोग साम्राज्य की राजधानी मै पहुच गए। सम्राट को आत्मिक सन्देश पहले ही भेजा जा चूका था। ज़ब वो राजमहल मै पहुंचे तो रुद्राक्ष नें देखा महल एक विस्तृत झेत्र मैं फैला हुआ था। वंहा की सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी कड़ी थी। अलग अलग जानवरो पर सवार योद्धा देखे जा सकते थे। फिलाल सारे रथ एक बडे महल के सामने के बगीचे मैं उतर गए। उस महल की चोटी पर सूर्य देव का झंडा लगा हुआ था। रथ से सभी लोग उतर गए रुद्राक्ष अग्निवंशी सबसे बाद मैं उतरा उन लोगो के चेहरे पर खुशी के भाव थे। मगर रुद्राक्ष की आँखों मैं कोई भाव नहीं था शून्य नजर आ रही थी। वो स्वर्ग का योद्धा था उसका वंहा अपना कहने वाला कोई था उसने ही उसको धोखा दे दिया था। अब बदला ही उसकी मंज़िल थी। रवि नें देखा की रुद्राक्ष खड़ा हुआ कुछ सोच रहा हैं तो वो बोला मेरे भाई तू वंहा क्यों खड़ा हैं हमारे पास आ जा यार रवि उसको लेकर सबके साथ महल मैं जाने लगे महल के एक विशाल सभा कक्ष मैं महाराज के साथ महारानी और कई लोग वंहा उपस्थिति मैं थे। सबने सबका स्वागत किया और कुशल पूछा। अभियान के बारे मैं जानकारी मांगी तो महागुरु नें महाराज को कुछ इशारा किया और वो चुप हो गए। उन सब मैं केबल रुद्राक्ष ही अलग था जिसने साधरण कपडे पहने हुए थे। मगर उसका औरा कुछ और ही कहानी कह रहा था मजबूत शरीर बलिष्ठ कद काठी और गोरा चेहरा लम्बे बाल कंधे तक आ रहे थे बिलकुल एक योद्धा की तरह आँखे शून्य बिना किसी भाव के। वंहा का कोई भी शख्स उस के अंदर देख पाने मै असमर्थ था चाहे किसी का कोई भी स्तर हो। रवि नें बोला पीताजी माँ यह मेरा मित्र रुद्राक्ष अग्निवंशी हैं। इसकी मेरी मित्रता विष केतु जंगल के समय हुई थी। कुछ दिन यह मेरे साथ यंहा पर रुकेगा। बाकी राजकुमारी और राजकुमार नें भी रुद्राक्ष की साफ दिल की प्रशंसा की थी। उसके बाद सभी लोग अपने अपने विश्राम कक्ष मैं चले गए वंहा केबल महाराज और महरानी और खास सुरक्षा अधिकारी और महागुरु रुक गए। फिर महागुरु माधव आचार्य नें जो उनके सामने हुआ सब कुछ महराज को बताया और उसके दूसरे महा गुरूजी जिनका नाम नन्द और आनंद नें भी उनको वो घटना क्रम बताया। उनकी बातो को सुन कर महाराज और महारानी के और वंहा जो लोग थे उनके होश उड़ गए थे। ज़ब उनको यह पता चला की उतर सम्राज्य के उन लोगो के मारने के पीछे भी रुद्राक्ष हो सकता हैं। जिसने एक झटके मैं सब साफ कर दिया था। वो लोग समझ गए की अब दुनिया मैं शक्ति का संतुलन और समीकरण बदलने वाले हैं। दिव्य नाग को जिसने गुलाम बना लिया जिसने दिव्या गरुड़ का वध कर दिया जिसने तिलसमी गरुड़ को मार दिया. वो कोई साधरण तो हो ही नहीं सकता अभी इसकी उम्र 12,13साल की होंगी। ज़ब यह जवान होगा तो क्या करेगा कौन इसका सामना करने योग्य होगा। उनकी अपनी अपनीयोजना बनने लगी थी। महाराज और महारानी बोले इसको अपने साम्राज्य मैं रोक लो। महा गुरूजी जी बोले राजन शक्ति से आप हम सब मिल कर भी नहीं जीत सकते उसको पूरा साम्राज्य एक तरफ भी हो जाये तो भी मुझे लगता हैं की वो कुछ समय मैं ही सब कुछ नस्ट कर देगा। वो राजकुमार रवि को अपना मित्र मानने लगा है आप प्रयास कीजिये की उनकी मित्रता पवित्र ही रहे हमारे राजकुमार रवि दिल के साफ हैं उनके पास घमंड और अहंकार नाम की चीज नहीं हैं यही उनकी मित्रता का आधार बिंदु हैं। वो यंहा हमारे सम्राज्य के गुरुकुल मैं शिक्षा लेने आया हैं यह प्रस्ताव मैंने खुद उसको दिया था। अगर उसकी प्रतिभा का किसी भी साम्राज्य को पता चलेगा तो वो तुरंत उसको अपने यंहा रख लेंगे। महाराज और महारानी नें आदेश दिया. की जाकर गुरुकुल महाप्रबंदक को सुचना भेजो और महा गुरूजी के आदेश के अनुसार कार्य हो। यंहा उसके बारे मैं बाते हो रही थीवंहा रुद्राक्ष रवि की हंशमुख मिजाज को देख कर ख़ुश था कुछ समय यंहा किसी के साथ अच्छा बीतेगा यह उसका विचार था। रवि उसको दुनिया दारी के बारे मैं बता रहा था त्रिनेत्रा भी आराम से दुनिया मैं आए हुए बदलव के बारे मैं सुन रहा था रुद्राक्ष के ज्ञान सीमित था वो एक दायरे मैं रहा था दुनिया बड़ी थी अब किसी कोयह तो बता नहीं सकता था की वो कौन हैं उसको इस शरीर के साथ ही अपना सफऱ आगे करना था अभी तक उसने 50%ही अपने शरीर को ठीक कर पाया था अगर वो अपने चर्म स्तर की शक्ति को इस शरीर के साथ प्रयोग करता तो डर था उसका शरीर नस्ट ना हो जाये। फिलाल ऐसा होने का चांस कम हो गया था उसने अपनी शरीर को दो बार बदलाव के दौर से गुजारा था परम वज्र शरीर भी बुरा नहीं था इस शक्ति के साथ वो पृथ्वी लोक की किसी भी शक्ति को नस्ट कर सकता था मगर ज्ञान अथक होता हैं। बहुत से लोगो की शक्ति सीमा अभी भी उसके बराबर या उस से ज्यादा होंगी। वो घमंड नहीं कर सकता था और ना ही किसी भी प्रकार का अहंकार पाल सकता था उसको पता था वृह्माण्ड कितना विशाल हैं कितनी विशाल आकश गंगा हैं जिनमे कितने वृह्माण्ड समाये हुए हैं। राकेश स्टोरी । रवि और रुद्राक्ष अग्निवंशी एक ही कक्ष मैं बाते करते हुए सो गए थे सुबह वो दोनों लेट उठे उनको रोहित नें आ कर उठाया। रोहित को देख कर रवि बोला भाई नींद ख़राब कर दी. रुद्राक्ष भी उठ गया फिर रवि को भी उठया रोहित बोला सब लोग तुम लोगो का इंतजार कर रहे हैं खाना खाने के लिए। रवि बोला तू चल भाई मैं आता हूँ स्नान करके। रवि और रुद्राक्ष दोनों ही फटाफट तैयार होकर महल के भोजन कक्ष मैं जा पहुंचते हैं। राजकुमार और राजकुमारी की नज़र रुद्राक्ष पर थी वो बोला मैं झमा चाहता हूँ की विलम्ब हुआ मेरी वजह से रोहित बोला रवि के साथ रहोगे तो तुम भी अलसी हो जाओगे उसकी बात पर सभी लोग हसने लगते हैंरवि रुद्राक्ष को देखता हैं और बोलता हैं इन लोगो की आदत हैं मेरी टांग खीचने की भाई तू टेंशन मत ले। महाराज और महारानी रुद्राक्ष से बात करते हैं और उसके घर परिवार के बारे मैं पूछते हैं वो सब कुछ उनको बता देता हैं. यह श्यामगढ़ राज्य और लाल राज्य यह तो हमारे प्रांतीय नगर मोहनगढ़ के अधीन आते हैं इनकी सीमा झेत्र दक्षिण सम्राज्य के अंदर आता हैं.वो सब लोग खाना खाते हुए बातचीत करते जा रहे थे महारानी अपनी बेटी मोहिनी की नजर देख लेती है ज़ब वो रुद्राक्ष को सबकी नज़र बचा कर देख रही थी। वो चुप चाप रहती है और उसके बाद रवि रुद्राक्ष को लेकर महागुरु के पास चला जाता है। फिर रवि कहता है हम लोग भी सूर्य गुरुकुल मैं शिक्षा लेते है अभी हम लोगो की छुट्टी चल रही है। इसलिए अभी तुम्हे खुद ही जा कर वंहा की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। महागुरु उसको एक पत्र देते है जिसके ऊपर मोहर लगा हुआ था और बोलते है इसको वंहा के महा प्रबंधक को दे देना। गुरुकुल की जानकारी और दिशा बता कर गुरूजी उसको जाने का आदेश दे देते है. वो भी बिना देर किये सूर्य गुरुकुल की तरफ निकल जाता है। थोड़ी ही देर मैं सूर्य गुरुकुल के सामने जा पहुँचता है। वो वंहा काम कर रहे अधिकारी से कहता है मुझे गुरुकुल महा प्रबंधक से मिलना है। वो अधिकारी एक नज़र उसको देखता है ऐसे ही कोई मुँह उठा कर उनसे नहीं मिल सकता है। रुद्राक्ष सोचता यार बड़ा बतमीज़ आदमी है। वो उसको वो पत्र निकाल कर देता है और बोलता है जा कर इसको गुरुकुल महा प्रबंधक को दे। ज़ब वो अधिकारी देखता है उस पर महराज की मोहर लगी है तो उसके पसीने आने लगते है वो बोलता है मेरी शिकायत मत करना तुम पहले ही बता देते मुझे। बात यह थी रुद्राक्ष नें कपडे बहुत ही सामान्य पहने हुए थे। ज़ब की यंहा ज्यादा तर राजकुमार राजकुमारी या बडे अमीर घराने के लड़के लड़कियां आते थे। प्रतिभा की कद्र अपनी जगह थी और अमीरी गरीबी का फर्क अपनी जगह थे। रुद्राक्ष चाहता तो पुरे साम्राज्य को खरीद सकता था. मगर फिलाल वो ऐसा कुछ करने की जगह सीखना चाहता था अपने ज्ञान को बढ़ाना था। वो सूर्य गुरुकुल मैं प्रवेश करता है और उसको भव्य गुरुकुल विस्तृत झेत्र मैं बना हुआ दिखाई देता है अलग अलग बिल्डिंग चोड़े ग्राउंड देखता है और फिर वो गुरुकुल के महा प्रबंधक के पास जा पहुँचता है वो उनके कमरे जा कर उनको वो मोहर लगा हुआ पत्र उनको दे देता है.उनको आत्मिक सन्देश प्राप्त हो चूका था उसके बाद वो उस पत्र को खोल कर पढ़ते है उनके चेहरे के भाव लगातार बदलते जा रहे थे। वो उस पत्र को पढ़ कर अपने पास रख लेते है। और एक नौकर बोलते है प्रबंधक को बुला कर लाओ। वो उसको बैठने के लिए बोलते है कहते है तुम्हारे पंजीकरण जुडी हुए सारे कार्य कुछ ही समय मै पुरे हो जायेंगे। प्रबंधक के आने के बाद वो रुद्राक्ष को उनके साथ भेज देते है उसको पंजीकरण टोकन मिल जाता है उसका टोकन स्वर्ण का बना हुआ था। प्रबंधक उसको उसकी बिल्डिंग और कमरा जो उसके नाम पंजीकृत किया था दिखाता है। उसकी सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रबंधक वापस उनके पास कमरे मै आता है। वो उनसे परेशान होने का कारण पूछता है तो वो पत्र उसको दे देते पड़ने के लिए। उसका मुँह खुला ही रहता है महा प्रबंधक बोलते है मुँह तो बंद कर लो अब। वो कहते है सब कुछ ठीक है मगर यह जो घमंडी राजकुमार, राजकुमारी, और लोग है इनको कैसे संभालेंगे। इस हिसाब से यह लड़का जलती फिरती मौत है। उनको एक विचार आता है और बो बोलते है सूर्य गुरुकुल मैं प्रतियोगिता का आयोजन रख सकते है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से हमारी समस्या हल हो जायगी। इधर रुद्राक्ष अपने कमरे मैं आ गया था यह लाल रंग के पत्थर से बनी हुई मजबूत और देखने मैं सुंदर दिखाई देती थी। उसने अपने कमरे का मुआयना किया और देखा कमरा काफ़ी बड़ा था अंदर से उसमे बेड पड़ा हुआ था उस पर गद्दा और जरुरत का सारा सामान था। उसके साइड मै एक और छोटा कमरा था जो साधना और ध्यान करने के लिए बनाया गया था. बडे कमरे की खिड़की से बिल्डिंग के बाहर का नज़ारा साफ दिखाई देता था। रुद्राक्ष नें सबसे पहले बेड पकड़ लिया और और दक्ष को बोला अब बताओ हमने केंद्र से क्या सामान इकड़ा किया हैदिव्य नाग नें सारी स्टोरेज रिंग रुद्राक्ष को दे दी। उसने अपनी आध्यात्मिक शक्ति को डाला और देखा सारी रिंग भरी हुई थी। उसमे अलग अलग हीरे मोती आध्यात्मिक पत्थर दुर्लभ जड़ी बूटी दुर्लभ फूल और पेड थे छोटे छोटे जो अलग अलग रंग रूप मै थे। उसने दक्ष की स्टोरेज रिंग देखी उसने वो पूरी भर रखी थी. उसने सारी स्टोरेज रिंग्स को अपने अपनी स्टोरेज रिंग मैं रख दिया। उस खजाने की कीमत नहीं लगाई जा सकती थी। उसने फिर दो स्टोरेज रिंग निकली। जो हरी नीली रत्न से बनी हुई थी और एक लाल और गुलाबी रत्न से बनी हुई थी। उसने इन रिंग को अभी तक नहीं देखा था। उसने अपनी चेतना को उसमे डाला दो वो नहीं खुली। फिर उसने अपनी दिव्य ऊर्जा को चेतना मैं डाला और उनमे प्रसारित कर दिया दोनों स्टोरेज रिंग खुल गयी। उसने एक मैं देखा तो उस मैं एक ग्रह जितनी जगह थी और उसमे बहुत सामान भरा हुआ था। उसमे तरह तरह के रत्न स्वर्ण मुद्रा किताब और हथियार रखे हुए थे। फिर उसने गुलाबी लाल को देखा उसमे चार पांच ग्रह जितनी जगह थी यह यह दोनों स्टोरेज रिंग तो उसकी सोच से भी ज्यादा विशाल थी। उसने उन दोनों रिंग को पहन लिया और पहनी हुई रिंग उतार दी और सारा सामान उन दोनों मैं ट्रांसफर कर दिया और उसके ऊपर सील लगा दी एक प्राचीन देवताओं की विधि की। अब केबल उसकी इच्छा से ही कोई कुछ देख सकता था या खोल सकता था। उसने दिव्य नाग से पूछा तुम्हारा कितना रैंक हुआ तो बोला मेरा रैंक दो हज़ार हो गया हैं। अब मैं आपके शरीर मै ऊर्जा रूप मैं रह सकता हूँ और आपकी इच्छा के अनुसार सब काम कर सकता हूँ। रुद्राक्ष नें कहा ठीक मगर अंदर जा कर डर मत जाना एक और दोस्त मिलेगा तुमको मेरे sea of soul यानि की आत्मा झेत्र मैं। उसके बाद दिव्या नाग किरण बन कर उसके शरीर मैं प्रवेश कर गया था। जितनी जल्दी गया उतनी जल्दी वापस आ गया था । उसको देख कर रुद्राक्ष नें कहा मैंने पहले ही कहा था डर मत जाना जाओ आराम करो। ज़ब जरुरत होंगी मैं बुला लूंगा। दिव्या नाग नें रुद्राक्ष के आत्मिक झेत्र मैं सौ मुँह वाले ड्रैगन किंग को देख लिया था। उसने अपनी चेतना से ड्रैगन किंग को पहले ही सन्देश दे दिया था। इसके बाद रुद्राक्ष साधना करने के लिए बैठ गया ध्यान लगाने लगा। उसने अपने आत्मीय झेत्र मैं कई रंग हज़ारो तारे देखे जो उसके अंदर चमक रहे थे। उसने अपनी परम दिव्या स्तर की ऊर्जा को अपने शरीर के चक्रो मैं डाला और उसको अभिनसी परम दिव्या स्तर पर ले जाने लगा। उसकी दिव्या ऊर्जा के प्रभाव से वो सारे तारे उसकी ऊर्जा मैं घुल गए और एक झटके मैं उसका परम अविनाशी दिव्य ऊर्जा का पड़ाव पार हो गया था। शरीर मैं अद्धभुत परिवर्तन हुए उसके उसके शरीर मैं खून की जगह नौ रंग की ऊर्जा बेहनी शुरू हो गयी थी। इस समय उसको ऐसा महसूस हो रहा था की अगर वो किसी ग्रह से टकरा गया तो वो नस्ट हो जायेगा। इतना भयानक परिवर्तन अब उसे समझ आया उसने पृथ्वी के केंद्र से जिन बडे बडे पत्थर की ऊर्जा अवसोसित की थी यह उसका कमाल था। उसने तो खून ही बदल दिया था और उसका एक स्तर पहेली ही बार मैं पार हो गया था। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी सूर्य गुरुकुल मैं आ जाता हैं और अपने कमरे मैं साधना करने लग जाता हैं साधना करते हुए उसके शरीर मैं परिवर्तन होना शुरू हो जाता हैं और उसके शरीर मैं खून की जगह नौ रंगों से मिला हुआ द्रव बहना शुरू हो जाता हैं। उसको ऐसा लगता हैं उसके खून मैं खून की दिव्या ऊर्जा दौड़ रही हो। उसने अपना परम अविनाशी दिव्या ऊर्जा स्तर को साधना करते हुए पार कर लिया था। रुद्राक्ष अग्निवंशी के पास अनमोल खजाना था जिसकी कीमत लगाना मुमकिन नहीं था। अंगले दिन रुद्राक्ष अपने दैनिक कार्य से निवृत होकर सूर्य गुरुकुल को घूमने का मन बनाता हैं. वो अपने कपडे पहनता हैं और अपने कमरे से बाहर घूमने के लिए निकल जाता हैं वो आस पास के झेत्र का मुयाना करता हैं। वो सभी रंग की बिल्डिंग को देखता हैं जिनमे हज़ारो लोग रुके हुए थे. सब लोग अलग अलग जगह से आये हुए थे। इसमें राजकुमारी, राजकुमार, और अमीर परिवार के लोग शामिल थे। रुद्राक्ष आज किसी भी क्लास मै नहीं जाता हैं और वो पुस्तक भवन मैं चला जाता हैं। पुस्तकालय भवन मैं वो अपना टोकन दिखाता हैं और उसमे उसको प्रवेश मिल जाता हैं पुस्तकालय भवन कई मंजिल मैं बना हुआ था। पहेली मंजिल पर इतिहास था दूसरी मंज़िल पर लड़ाई की युद्ध कौशल का ज्ञान था तीसरी मंज़िल पर औसधी और हकीम के लिए बनया हुआ था चौथी मंज़िल पर प्राचीन घेरे राज के बारे मैं जानकारी थी। रुद्राक्ष अग्निवंशी सबसे पहले नीचे वाली मंज़िल पर जाता हैं और देखता हैं बहुत से लड़के लड़कियां किताबों का अध्यन कर रहे हैं। वो भी एक किताब उन रैको मैं से निकलता हैं और एक कौने मैं बैठ जाता हैं। एक कौने मैं बैठ कर वो अपनी दिव्य दृस्टि को सक्रिय करता है और एक सूक्ष्म चेतना की लहर अपनी दिव्य ऊर्जा के साथ छोड़ देता हैं। वो लहर जिस जिस भी किताबों से टकरा रही थी उसकी सारी जानकरी उसके दिमाग़ मैं फीड हो जाती है। ऐसे करके एक एक मंज़िल से गुजरता हुआ वो पूरा भवन मैं जो जानकारी थी इस वक्त उसके दिमाग़ मै थीउसने कई दिव्या रोशिनी के बारे मैं पड़ा कुल मिलाकर नौ दिव्य रोशिनी थी जो पृथ्वी पर थी और जिनका प्रयोग हकीम और औसधी कार करते थेइनके भी रैंक होते थे दिव्य रोशिनी का प्रयोग दस रैंक का हकीम ही कर सकता था इनकी रैंक वीस तक जाती थी इनमे सबसे शक्तिशाली स्वर्ग की रोशिनी थी. लाल कमल की दिव्या रोशिनी. फिर नीले फूल की दिव्या रोशिनी। फिर हरे पेड की दिव्या रोशिनी, पीला आम की दिव्य रोशिनी, इस तरह अलग अलग रोशिनी थी। उसको यह भी उन प्राचीन किताबों से पता चला था यह अलग अलग पायी जाती हैं। फिर एक काल ऐसा आता हैं की सारी दिव्य रोशिनी कुदरती एक ही जगह पर आ जाती हैं। कहते हैं स्वर्ग की रोशिनी सबकी मालिक होती हैं और वो सबसे शक्तिशाली होती हैं उसके देवताओं को भी जल्दी नहीं मिलती हैं। पृथ्वी लोक पर इस समय दो चार ही ऐसे हकीम थे जिनके पास सबसे कम स्तर वाली रोशिनी थी मगर फिर भी वो जबरदस्त शक्ति रखती थी। ऐसे लोगो से राजा महाराजा अपने लिए शक्ति वर्धक गोलिया बनवाते थे। क्यों की त्रिनेत्रा एक स्वर्ग का सबसे शक्तिशाली योद्धा था उसने हर चीज सीखी थी. उसको लाखो युद्ध कलांए आती थी। वो हर तरीके के हथियार को चलाने मैं माहिर था। उसको भगवान धन्वंतरि की कृपा से उसने सभी तरीके के रोग उपचार के लिए काढ़ा और औसधी तैयार करना सीखा था। उसके पास भगवान धन्वंतरि की दिव्य कड़ाई भी थी जो उनोहने पहले ख़ुश होकर उसको दी थी। अब उसकी आत्मा देवताओं के स्तर को भी पार कर गयी थी मांगे जिस शरीर मैं था उसका स्तर तो समय के साथ ही बढ़ना था। उसको स्वर्ग की दिव्या आग को दुबारा प्राप्त करना पड़ेगा इस शरीर के साथ। उसने और दूसरी दिव्या रोशिनी की सारी जानकरी खागल डाली अपने दिमाग़ मैं। उसके बाद वो महा गुरु माधव आचार्य के निवास पर जा पंहुचाउसने उनके पास सन्देश भिजवाया और फिर कुछ देर मै एक नौकर आ कर उसको उनके पास ले गया आचार्य अपने कक्ष मै खड़े हुए टहल रहे थे। ज़ब उन्होंने देखा की रुद्राक्ष अग्निवंशी आ गया है तो उन्होंने उसको बैठने के लिए बोला और पूछा क्या कोई समस्या हुई है सूर्य गुरुकुल मै तुम्हे। रुद्राक्ष नें उनको प्रणाम किया और बोला मुझे गुरुकुल मै कोई परेशानी नहीं हुई है मै यंहा पर आपसे कुछ विचार विमर्श करने आया हूँ। मै कुछ जानना चाहता हूँ आपसे। आचार्य नें कहा बताओ क्या पूछना चाहते हो। रुद्राक्ष बोला मैंने दिव्या रोशिनी के बारे मै पढ़ा है नौ तरीके की होती है। मुझे यह पता करना था की यह स्वर्ग की दिव्या रोशिनी कँहा मिल सकती है उसका कोई पूर्ण विवरण नहीं था पुस्तक भवन मै। नहीं मिला मुझे। फिर लोगो मैं बातचीत होने लगीजितना गुरूजी को पता था उतना उन्होंने उसको बताया। उस विशेष काल समय के बारे मैं भी बताया। ज़ब दिव्य रोशिनी एक साथ होती हैं। अब रुद्राक्ष को यह पता चल चूका था उसको स्वर्ग की दिव्या रोशिनी की तलाश मैं हिमालय मैं पहाड़ो मैं जाना पड़ेगा उसको वंहा मानसरोवर कुंड को खोजना होगा. उस मानसरोवर कुंड मैं स्नान करने के बाद पूर्ण चाँद होने का इंतजार करना पड़ेगा. और ज़ब पूर्ण चाँद उस मानसरोवर पर अपनी किरण डालेगा तो मानसरोवर से पानी की किरण चाँद की रोशिनी के साथ एक निश्चित दिशा मैं जँहा टकरा जाएगी वंही उन दिव्या रोशिनी को पाने का द्वारा खुलेगा. वो द्वारा कुछ ही मिनट के लिए खुलता है। वंहा हिमालय के झेत्र मैं अंदर और वाहर दोनों ही जगह जान का खतरा रहता हैं। उस झेत्र मैं प्राचीन कबीले के लोग जो देवताओं की साधना करते है वो गुप्त रूप से रहते हैं वंहा कई कबीले उन पहाड़ो की घेराई मैं छुपे हुए हैं। सारी बातो को जानने और समझने के बाद रुद्राक्ष अग्निवंशी कहता हैं मैं वंहा जाना चाहता हूँ मैं कोसिस करूँगा की प्रतियोगिता से पहले वापस आ जाऊ। उस बात पर महा गुरूजी माधव आचार्य बोलते हैं तुमने पक्का मन बना लिया हैं वंहा जाने का तो मैं तुमको नहीं रोकूंगा। लेकिन खतरों से हमेशा बच कर रहना यह दुनिया हम लोगो की सोच से भी विचत्र हैं। वैसे मुझे तुम्हारी काबिलियत पर कोई सक नहीं हैं। साभदानी भी जरुरी होती हैं। मैं आपकी सभी बातो का ध्यान रखूँगा। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी महा गुरु माधव आचार्य से बातचीत करके सारी जानकरी प्राप्त कर लेता हैं. अभी पूर्ण चाँद होने मैं पंद्रह दिन का समय था। वो उनको बोल देता हैं की कल वो दिव्या रोशिनी की तलाश मै निकल जायेगा। और उसके बाद वो अपने गुरुकुल मैं वापस आने के लिए निकल पड़ता हैं. ज़ब वो गुरुकुल मैं प्रवेश करता हैं तो देखता हैं वंहा लोगो की भीड़ लगी हुई हैं। बहुत सारे छात्रों का समूह एक एक करके एक विशेष दिशा मैं जा रहा होता हैं। यह लोग सब राजकुमार और राजकुमारी और दूसरी रियासत के और बडे परिवार के लड़के लड़कियां होते हैं। वो सब लोग अखाड़े मैं जा रहे होते हैं जहाँ किसी मुकाबले की चर्चा चल रही होती है। आज राजकुमार पवन उसकी साधना नस्ट कर देंगे इन सब लोगो नें उसको साजिश करके अपने जाल मैं फसया था उसकी साधना शक्ति हम सब अच्छी हैं और उसका योद्धा कौशल भी बेहतरीन हैं मगर वो किसी राजघारने का या अमीर परिवार से नहीं हैं वो तो हिमालय से आया हुआ किसी कबीले का हैं। यह बात रुद्राक्ष सुनता हैं हैं उसे बहुत बुरा लगता हैं। यह लोग साम्राज्य के शक्तिशाली परिवार से हैं महाराज भी जल्दी से इन परिवार वालों को कुछ नहीं बोलते हैं। उसका साथ और राज्यों के भी लोग दे रहे हैं। वो सब उस लड़के भीम से डरते और जलते हैं। रुद्राक्ष भी अपने साधा कपडे पहने हुए अखाड़े मैं चला जाता हैं और एक तरफ खड़ा होकर माहौल को समझने की कोसिस करता हैं की वंहा क्या चल रहा है। अखाड़े मैं एक लड़का लहूलुहान खड़ा हुआ था वो कोई बार या बचाव नहीं कर रहा था वो सबकी तरफ जो लोग खड़े हुए था अपनी आँखो मैं अंशु भर कर देख रहा था। वो एक बार फिर कहता हैं जो कोई भी मुझे एक लाख स्वर्ण मुद्रा देगा मै जीवन भर उसकी गुलामी करूँगा। मगर कोई ट्स से मस नहीं हो रहा था। फिर पवन अपनी घमंड भरी आवाज़ मैं बोलता है अब मैं आज तेरी साधना नस्ट कर दूंगा और तुझे कचरे मैं फिकवा दूंगा। बहुत सोचने के बाद रुद्राक्ष दखल देने की सोचता हैं।इतने मैं पवन एक और अपनी शक्ति का बार उस लड़के पर करता हैं और वो अखाड़े मैं ज़मीन पर गिर जाता हैं उसके मुँह से खून की उलटी हो जाती हैं। ज़ब पवन उसकी साधना को नस्ट करने के लिए हमला करने वाला होता हैं तो एक आवाज़ आती हैं उसको छोड़ दो। सब लोग उस आवाज़ के मालिक की तरफ देखते हैं किसने उसको रोका था। वो देखते हैं एक लड़का सदा कपडे पहने हुए अखाड़े के मैदान मैं आ कर खड़ा हो जाता हैं और उस ज़मीन पर पड़े हुए लड़के को उठता हैं। इधर सब लोग उसको ही देख रहे थे हैरानी मैं। वो उस लड़के से पूछता हैं मुझे सच बताओ क्या बाते हुई थी। वो लड़का उसको सब कुछ बता देता हैं उसकी बातो को सुनकर उसकी आँखों की पुतली सुकड़ जाती हैं और वो बोलता हैं धोखा और जलन। ह्म्म्मम्म.फिर वो उस लड़के से पूछता तुम इसको क्यों मारना चाहते हो वो बोलता हैं अपनी स्वर्ण मुद्रा के लिए इसने दी नहीं तो अब यह मेरा नौकर है मैं नौकर के साथ कैसा भी सलूक करू तुम्हे क्या। तुम हो कौन क्या तुम मेरे बारे मैं नहीं जानते हो। वो बोलता हैं मेरा नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी हैं। रही बाते जानने की तो मुझे जरूरत नहीं हैं। वो अपना हाथो को हवा मैं घूमता हैं और अखड़े मैं एक लाख स्वर्ण मुद्रा का ढेर लग जाता हैं। रुद्राक्ष उसको बोलता हैं अपनी स्वर्ण मुद्रा उठा और निकाल जाओ यंहा से दुबारा इस लड़के को हाथ भी मत लगाना। सब लोग उसकी बातो को और स्वर्ण मुद्रा को देख कर हैरान थे। उस लड़के को तो रुद्राक्ष के रूप मैं भगवान मिल गया था। वो उस लड़के को लेकर अखाड़े से बाहर जाने को होता हैं तो पवन चिल्लाता हैं तूने मेरी बेज़ती की हैं अब तू भी मरेगा और यह लड़का भी उसके साथ के लोग भी उसको समर्थन करने लग जाते हैं। रुद्राक्ष कहता हैं अपनी मौत के मुँह नहीं लगते हैं मगर उन राजकुमार का घमंड और अहंकार सातवे आसमान पर था। रुद्राक्ष आखिरी बार कहता हैं जिसको अपनी जान प्यारी हैं वो यंहा से चला जाये और जो मारना चाहता हैं वो यंहा रुका रहे। वंहा से कई राजकुमार और राजकुमारी निकाल जाते हैं वो फालतू के लफड़े मैं नहीं पड़ना चाहते थे। वो सब लोग अपने योद्धा को बुलाकर उसके घेर लेते हैं और हमला करने की तैयारी करने लगते हैं। रुद्राक्ष अपना हाथ हवा मैं उठता हैं और एक तलवार आ जाती हैं वो उस लड़के को कहता हैं तुम छुप जाओ। वो अखाड़े मैं शांति से खड़ा हो जाता है और अपने हाथ को हवा मै घुमाता है उसके हाथ मै तलवार आ जाती है। अखाड़े मैं इस समय दो सौ तीनो सौ लोग थे। उन लोगो के हमला करने से अखाड़े मैं शक्ति के विस्फोट होना शुरू हो जाते है मगर तब भी रुद्राक्ष पलट कर हमला नहीं करता उन सब के हमले टकरा कर नस्ट हो रहे था और उसका कुछ बिगाड़ नहीं पा रहे थे अब वो लोग सोचने लगे यह इंसान हैं या शैतान। फिर रुद्राक्ष अग्निवंशी कहता हैं अब मेरी बारी। इतना कहते ही वो हवा की तेज़ी से आगे बढ़ता हैं और सबके सर को काट डालता हैं इस समय अखाड़े मैं लाश और खून ही खून पढ़ा हुआ था किसी नें भी नहीं सोचा था वो इतने लोगो को मार डालेगा। अपनी जान को बचा कर भागे लोग जल्दी से उनके परिवार वालो को खबर करते हैं और थोड़ी देर मैं आसमान मैं हज़ारो लोगो का झुण्ड आ जाता हैं छोटे बडे सभी योद्धा आ जाते हैं बुजुर्ग भी क्रोध से अपनी शक्ति को निकालते हुई खड़े थे। उन लोगो को लगा था किसी शक्तिशाली आदमी नें इतने राजकुमार और राजकुमारी को मार डाला होगा। रुद्राक्ष हवा मैं उड़ता हुआ उन वीसो हज़ारो योद्धा जो आ गए था उनसे बोलता हैं मेरी तुम्हारी कोई दुश्मनी नहीं हैं जिन लोगो नें गलत किया था और गलत का साथ दिया था उनको सजा मिल चुकी हैं तुम लोग मुझसे क्या चाहते हो। उन लोगो की घमंड और अहंकार मैं आंधे हो चुके थे. वो लोग कहते हैं हम तेरी बोटी बोटी काट कर कुत्ते को खिलाना चाहते है। हम्म्म्म इतना कहता ही दिव्या नाग उसके शरीर से निकलता हैं और अपना विशाल रूप लेता हैं और उसके ऊपर रुद्राक्ष अग्निवंशी बैठा हुआ था। आधे योद्धा तो खून की उलटी उसके दवाव से ही करने लगे थे उसका शरीर हीरे से भी मजबूत हो गया था उसके पुरे शरीर पर अलग अलग हीरे की तरह धारिया चमक रही थी उसके ऊपर रुद्राक्ष अग्निवाशी उन सबको साफ कर देता हैंवो लोगो को आसमान से खून की वारिश होती नजर आ रही थी लाशें नीचे गिर रही थी और उनके कटे हुए सर कही और गिर रहे थे। इतनी मौत हो जाने के बाद शक्ति का संतुलन बदल जाना था उस दक्षिण साम्राज्य मैं। महाराज के पास भी सुचना मिल गयी थी इस रक्तपात की इतना भयानक रक्तपात देख कर सबके मन और दिल मै भय की लहर दौड़ गयी थी। जो लोग अखाडा छोड़ दिया था अपने आपको खुसनसीब मान रहे थे। फिर कुछ देर मैं सम्राट अपने जानवर पर अपने योद्धा के लेकर वंहा आ जाते हैं। उनको आया हुआ देख कर रुद्राक्ष कहता हैं क्या आप लोग भी मुझसे युद्ध करना चाहते है। इस पर सम्राट कहते है हम तुमसे युद्ध करने नहीं आये हैं हमें सच पता चल चूका हैं। मगर फिर भी तुमने चार सौ राज्यों को ख़तम कर दिया हैं। इस पर रुद्राक्ष कहता हैं यह मेरी दुश्मनी हैं। इन सब राज्यों और इन सब परिवार पर और इनसे जुडी हर चीज पर मैं अपना नियंत्रण करूँगा. अब से यह सब मेरे अधीन होंगे। जो मानेगे वो जीवित रहेंगे और जो नहीं मानेगे वो मारेंगे। महाराज इस बात को सुन कर खुद भी हैरान और विसमय मैं था। जो कोई अधर्म और अन्याय करेगा उसको मेरी तलवार से गुजरना पड़ेगा। अभी मैं स्वर्ग की रोशिनी को ढूंढ़ने जा रहा हूँ आकर इनका पूरा हिसाब चुकया करूँगा। वो उनको बोलता हैं मुझे आपसे कोई दिक्कत नहीं हैं मेरे वापस आने तक सब कुछ संभाल लीजिये जो मुझे मारने के लिए आये उसको बोल देना मैं वापस उसको यही आकर मिलुंगा। तब तक सारा प्रबंधन मैं आपको सोपता हूँ। वो लड़का भीम उसको भी आप सीखा सकते हैं। मगर वापस आने तक उसको परेशान ना करें कोई। इतना बोल कर वो सबसे विदा लेकर हिमालय की दिशा मैं अपने पंख की मदद से गायब हो। इधर पुरे सम्राज्य मैं हाहकर मच गया था. यह खबर आग की तरह चारो महदीप के सम्राट तक जा पहुंची। की एक नौजवान योद्धा नें राज्यों के योद्धाओ को गज़र मूली की तरह ख़तम कर दिया था। इधर महल मैं बैठक बुलाई गयी चर्चा करने के लिए इस हालत मैं क्या फैसला लिया जाये जो साम्राज्य के हित मैं। उन लोगो के परिवार वाले भी आये हुए थे जिनके अपने मारे गए थे। उन लोगो नें महाराज और महारानी को सलह दी की उसको मार दिया जाये नहीं तो कल सम्राट राज सिंघासन के लिए भी खतरा खड़ा हो सकता हैं। सभी लोगो की अलग तरीके की बाते हो रही थी। कोई उसको मारने के लिए छल का सहारा लेने के लिए कह रहा था कोई कह रहा था बिना कारण उसने कुछ नहीं किया। इधर इन लोगो की रामधुन लगी हुई थी उधर रुद्राक्ष अग्निवंशी बिजली की गति से उड़ता हुआ हिमालय की पर्वत श्रृंखला मैं आ चूका था। वो अपने उड़ने की गति से संतुष्ट था उसने लाखो किलोमीटर का सफऱ मेहज एक दिन मै ही पार कर लिया था। इस समय वो हिमालय की पहाड़ो की चोटी पर खड़ा हुआ था उसके बाल हवा मैं लहरा रहे थे वो खड़ा होकर सामने मिलो दूर फैले झेत्र को देख रहा था। वो उतर कर उन पहाड़ो को चढ़ने और उतरने लगा और लगातार उस दिशा की तरफ चलता रहा जँहा पर मानसरोवर कुंड था. राश्ते मैं वो कई कबिलो की सीमा से होकर निकल गया था. बस वो थोड़ा राश्ता बदल लेता था। जिस कारण उसको कोई फालतू परेशान ना करें। और सफऱ करते हुए वो आखिर मैं मानसरोवर कुंड के झेत्र मैं जा पहुंचा। वो कुंड वास्तव मैं एक झील था जिसके सतह पर नीला पानी आसमान की तरह लग रहा थाउसने अपने रुकने के लिए झील का चारो तरफ देख कर एक पहाड़ी हिसे मैं रुक कर इंतजार करने का विचार बनया और एक छोटी सी गुफा मैं रुकने का इंतज़ाम किया। उसने दिव्या नाग को बोला खाने के लिए शिकार करने को और व्यवस्था करने को. दिव्य नाग नें एक घंटे के अंदर अपने मास्टर के हिसाब से उस जगह को बना दिया। रुद्राक्ष चाहे कभी तक वंहा रुक सकता था। जैसे पूर्ण चाँद के दिन पास आते गए उसको लगता रहा जैसे शक्तिशाली लोगो का समूह इस जगह को घेर रहा हैं. और पूर्ण चाँद के एक दिन पहले वो जंगली खरगोश को खाने के लिए भून रहा था आग जलाकर। वंहा हज़ारो की संख्या मैं अलग अलग कबीले के लोग आ कर जुड़ गए उस पहाड़ियों के झेत्र मैं। उसके खाने की खुसबू नें वंहा सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। और कुछ ही देर मैं उसको घेर लिया गया उन लोगो नें हाथो मैं भाले तलवार और हथियार पकड़ रखे थे। उन लोगो नें कवच पहने हुए थे उनके कवच के ऊपर उनके कबीले के निशान बने हुए थे। कुछ लोगो के कवच पर शेर का निसान था कुछ लोगो के कवच पर चील का निशान था कुछ लोगो के कवच पर हाथी का निशान था. कुछ लोगो के कवच पर पंचमुखी सांप का निशान था जिसके सर पर पांच मणि रखी हुई थी अलग अलग रंग की। उन लोगो से घीरा हुआ रुद्राक्ष अग्निवंशी आराम स्वागत भुना हुआ खरगोश खा रहा था। उन सबके दल का लीडर आगे आकर बोला तुम यंहा तक कैसे आ गए सबको चकमा दे कर। रुद्राक्ष अग्निवंशी नें बड़ी शांति से अपनी बाते उन लोगो के लीडर के सामने रखी देखो मैं कोई खून खराबा नहीं चाहता हूँ। मैं यंहा पर स्वर्ग की दिव्य रोशिनी को लेने आया हूँ तो तुम सब मुझे परेशान मत करो। एक लड़के के मुँह से यह बाते सुनकर सबको बहुत गुसा आ गया। मगर सभी कबीले का जो मुखिया था पंचमुखी नाग कबीले का था। उसने इस बार किसी को भी मारने से मना कर रखा था। इसलिए इन लोगो नें अभी तक रुद्राक्ष पर हमला नहीं किया था यह लोग उसको बहुत कमजोर समझ रहे थे.उनको लगा इसका दिमाग़ हिला हुआ हैं और ऐसे माहौल मैं खा रहा हैं। उनमे से एक हाथी के कवच वाला योद्धा बोला इसको मार कर खतम करो क्यों उनको परेशान करना है। यह लोग आपस मैं ऐसी बाते कर रहे थे। इतने समय मैं पंचमुखी कबीले का सरदार और उसका लड़का भी आ गया था लेकिन वो उस भीड़ मैं पीछे थे। रुद्राक्ष नें देखा की यह लोग मना करने पर भी नहीं समझ रहे हैं और ना ही मान रहे हैं। तो उसने आखिरी बार अपनी आवाज़ को भरी करते हुए बोला। मैं रुद्राक्ष अग्निवंशी तुम लोगो को आखिरी बार बोल रहा हूँ मेरे और मेरे लक्ष्य के बीच मैं मत आओ जो भी आएगा मारा जायेगा। मैं किसी को मारना नहीं चाहता मुझे मजबूर मत करो तुम लोग। उसकी यह आवाज़ वंहा के पहाड़ो मैं गूंज गयी थी। ज़ब उस मुखिया के लड़के नें वो आवाज़ सुनी तो वो पागलो की तरह चिल्लाया अपनी जान प्यारी हैं तो उन पर हमला मत करना और दौड़ कर भीड़ को चीरता हुआ सबसे आगे आया। ज़ब उसने देखा सामने रुद्राक्ष अग्निवंशी शांति से खड़ा हुआहैं उसको चैन आया की मास्टर को गुसा नहीं आया था नहीं तो यंहा लाशें उठाने वाले कम पढ़ जाते। वो लड़का सीधा जा कर रुद्राक्ष के पैरो मैं घुटने के बल बैठ गया था। रुद्राक्ष नें उसको पहचान नहीं पाया था उसकी पूरी काया बदल गयी थी उसके चेहरे पर तेज़ था मजबूत कद काठी का स्वामी बन चूका था उसके शरीर से रुद्राक्ष को पवित्र ऊर्जा महसूस हो रही थी। इतनी देर मैं उस लड़के का पिता भी उन लोगो के सामने आ गया था ज़ब उसने देखा की उसका बेटा किसी के सामने घुटने टेक कर बैठा हुआ। तो कुछ सोचने लगा। इधर रुद्राक्ष नें उसको उठया कंधे पर हाथ रखा और बोला कौन हो तुम मित्र। मैंने तुमको पहचाना नहीं. वो बोला मास्टर मैं कारण दिव्या नागवंशी हूँ यह जीवन आपका ही दिया हुआ हैं फिर वो आध्यात्मिक तलवार को दिखाता हैं जो उसने दी थी। ओहह कारण कैसे हो तुम मेरे भाई यार तुम तो बिलकुल बदल गए मैं तो दोखा खा गया था। रुद्राक्ष नें उसको अपने गले लगया। और उसको मित्र का हक दिया। इधर ज़ब उस मुखिया को याद आया तो वो बोला सब घुटने टेको यही वो महागुरु हैं जिनोहने उस काले आत्मिक वंदन को तोड़ा था। और वो खुद भी घुटने के बल बैठ गया और जो हुआ उसके लिए माफ़ी मांगी। सब लोग नीचे झुक चुके थे। रुद्राक्ष बोला कारण इन लोगो को उठने के लिए बोल दो। उसके बाद कारण सबको रुद्राक्ष से मिलवाता हैंसबकी आँखे सदमे और हरैत से फटी हुई थी. फिर वो अपने पीताजी से मिलवाता है। सब लोग बैठ कर बाते जीत करने लगते हैं और माहोल ख़ुश नुमा हो जाता हैं। कारण उसको सारी जानकारी देता हैं इन हिमालय झेत्र मैं क्या क्या होता हैं कितने शक्तिशाली लोग रहते हैं और कैसे गुप्त रूप से साधना करने वाले स्वर्ग की रोशिनी पाना चाहते हैं। वो रात उन लोगो की शांति से बीत जाती हैं वो दिन आ जाता ज़ब सारे ग्रह एक विशेष कूण बनाएंगे। शाम हो जाती हैंऔर पूर्ण चाँद के इंतजार करने लग जाते हैं तभी आसमान मैं दिव्य ऊर्जा का उचाल होता हैं और चार आकृति अपने अपने जानवरो पर दिखाई देती हैं उनके पीछे अन्य लोग भी थे जिनकी आभा भी शक्तिशाली थी। सबसे ज्यादा खतरनाक आभा उन चारो मैं से निकल रही थी जिन लोगो नें सोने के कवच पहने हुए थे। उन लोगो नें आसमान मैं से उन सबको तरिस्कार की नज़र से देखा और बोले चींटी का समूह। उन लोगो को देख कर रुद्राक्ष करण से बोला अपने लोगो को बोल देना उन लोगो पर हमला ना करें वरना वो मारे जायेंगे। उसकी बाते को सुनकर करण वैसा सबको बोल देता हैं। मेरे पास कोई मत आना सबको बोल कर रुद्राक्ष सामने मानसरोवर मैं स्नान करने के लिए कूद जाता हैं। जब आसमान मैं उड़ते हुए लोग देखते हैं तो उनको बहुत गुसा आता हैं। रुद्राक्ष स्नान करने के बाद मानसरोवर से वाहर आ जाता हैं। उन सोने के कवच पहने एक आदमी बोलता हैं इस लड़के की इतनी हिम्मत हो गयी हमारा अपमान करने की इसने अपनी मौत को खुद चुना है। उनकी बातो को सुनकर रुद्राक्ष शांति से बोलता हैं जो काम तुम लोग करने आये हो वो करो मेरे काम मैं रुकावट मत बनो। तभी वो कुछ इशारा करता हैं और एक योद्धा उड़ता हुआ जा कर रुद्राक्ष पर हमला कर देता हैं। उसके हमले का कोई अशर उसके शरीर पर नहीं होता हैं। वो यह मुका अगर पहाड़ को मार देता तो वो मिटी मैं मिल जाता मगर सामने वाला शांति से खड़ा हुआ था। उसके बाद रुद्राक्ष उसको एक हलके हाथ से थपड़ मार देता हैं वो उड़ता हुआ दूर पहाड़ो से टकरा जाता हैं। यह नज़ारा देख कर सब सदमे मैं चले जाते है। अच्छा तुमने अपनी शक्ति छुपा रखी थी। उसके बाद रुद्राक्ष दक्ष को बोलता हैं। दिव्या नाग बाहर आकर अपने विशाल रूप मैं आ जाता हैं और उसके ऊपर रुद्राक्ष बैठ जाता हैं उस भायनाक नज़ारे को देख कर उन लोगो की सांस लेने की भी आवाज़ सुनी जा सकती थी। ज़ब चारो लोग अपने हाथो मैं दिव्य अस्त्र प्रकट करते जिनका प्रयोग वो लोग दिव्या नाग को मारने के लिए करने वाले थे. यह देख कर रुद्राक्ष अपनी आभा को प्रसारित कर देता और अपनी दिव्या ऊर्जा को खोल देता है। उसके अलौकिक रूप को देखकर उन लोगो के मन मैं भी भय की लहर दौड़ जाती हैं मगर वो अपने दिव्या अस्त्र छोड़ चुके थेरुद्राक्ष अपनी आँख बंद करके कुछ मंत्र पड़ता हैं और अग्नि, वायु, जल, और धरती तत्व के दिव्य अस्त्र के सामने खड़ा हो जाता हैं वो सारे दिव्य अस्त्र उसके शरीर से टकराने के बाद उसके शरीर मैं है ऊर्जा बन कर प्रवेश कर जाते हैं। रुद्राक्ष अपनी तलवार सतरूपा का अवहन करता है वराहमंड मैं मानो प्रलय की इस्थिति बन जाती हैं। रुद्राक्ष अपनी दिव्या तलवार से उन लोगो के सर को काट डालता हैंकुछ है पल मैं सब लोग की लाशें ज़मीन पर पड़ी हुई थी उनके सर कही और पड़े थे। उस दिव्य तलवार नें और रुद्राक्ष के रूप नें सबको हिला कर रख दिया था। हर जगह हालचाल मची हुई थी। उसके बाद रुद्राक्ष नार्मल होकर ज़मीन पर आ जाता हैं और दिव्य नाग उसके शरीर मैं गायब हो जाता हैं। रुद्राक्ष उन लोगो की स्टोरेज रिंग ले लेता हैं जिस से उनके बारे मैं जानकारी मिल सके। इधर वो समय हो जाता हैं ज़ब चाँद पूर्ण होता हैं और जैसे है उसकी रोशिनी मानसरोवर के पानी से टकराती हैं पानी और रोशिनी की एक किरण निकल कर एक पहाड़ से जा लगती हैं। और वंहा एक ऊर्जा से बना हुआ दरवाजा प्रकट होता हैंरुद्राक्ष बिजली की गति से उस दरवाजे मैं प्रवेश कर जाता हैं और कुछ समय बाद वो दरवाजा गयाब हो जाता हैं। इधर कबीले के लोगो के लिए वो देवता बन चूका था। उनको करण पर गर्ब हो रहा था की उसको मित्र का हक मिला था। वो सब तो यही सोच रहे थे अगर करण नहीं होता तो वो सब मर गए होते। क्या रुद्राक्ष उर्फ़ त्रिनेत्रा स्वर्ग की दिव्य रोशिनी प्राप्त कर पायेगा? वो लोग कौन थे और कहा से आये थे जिनके पास दिव्या अस्त्र थे? उसकी दिव्य तलवार के प्रकट होने से उसका भेद तो नहीं खुल जायेगा और उसके दुश्मन उसको मारने का प्रयास करना शुरू कर देंगे?रुद्राक्ष अग्निवंशी बिजली की तेज़ी से उस दिव्य ऊर्जा द्वारा मैं प्रवेश कर चूका था। वो फिर ज़ब दूसरी तरफ दुनिया मैं जा पंहुचा था। इस समय रुद्राक्ष नें दूसरी दुनिया मैं एक नदी किनारे खड़ा हुआ था सामने विशाल जंगल था और उस जंगल के बीच मैं एक एक पहाड़ खड़ा हुआ था सुनहरे रंग की रोशिनी मैं चमक रहा था उस पहाड़ के ऊपर अलग अलग रंग की रोशिनी की किरण आसमान मैं जा रही थी.उसने रंग गीने कितने रंग की रौशनी की किरणे आसमान मैं जा रही थी। लालहरीनीलीपीलीकालीसफेदबैगनीगुलाबीसंतरीकेशरियाआसमानीभूरी। यह 12रंग की किरण रोशिनी की थी जंगल को देख कर रुद्राक्ष समझ गया वंहा तक पहुंचना आसान नहीं होने वाला. उसने अपनी शक्तिओं को जागरूक किया माध्यमस्तर तक और हवा मैं उड़ने लगा उस पहाड़ को लक्ष्य करके। अभी थोड़ी दूर ही वो उड़ा था उसके सामने दिव्य हिरन आ गया उसका आकर हाथी की तरह था उसके सीगो से आग निकल रही थी। उसके मुँह से ध्वनि तरंग निकल रही थीउसने अपनी आवाज़ मैं एक चीख मारी और वो हमला जो किया था उसका असर कुछ रुद्राक्ष पर हुआ जैसे कोई चींटी उसके शरीर को काटा हो। इस बात से ही उसकी शक्ति का अंदाज़ लगाया जा सकता था अगर उसकी जगह कोई और होता तो मारा जा चूका होता। रुद्राक्ष नें कुछ मंत्र पड़े और उसके हाथ मै आंग से बनी हुई तलवार आ गयी। इधर हिरन अपना हमला बेकार जाते देख कर अपने सींग आगे करके उसको टकर मारने के लिए दौड़ पड़ा था। रुद्राक्ष नें उसके आने आने का इंतजार किया और और वक़्त पर एक तरफ हो गया हवा की गति से उसका हाथ घुमा और उसने अपनी तलवार का बार हिरन की गर्दन पर कर दिया। तलवार लगते ही उसकी गर्दन कट गयी किसी मोम की तरहयह अग्नि दिव्या अस्त्र था जिसको तलवार मैं बदल दिया था रुद्राक्ष नें अपनी ऊर्जा की शक्ति से। उसने उस हिरन की दिव्य मणि उठा के स्टोरेज रिंग मैं डाल दी। और आगे उड़ने लगा बीच मैं उसको कई और दिव्या जानवर टकराये जैसे मगरमछ, कछुआ, भालू, हाथी, सांप शेर, मकड़ी, तेंदुआ, चील, गरुड़। इन सब जानवरो को मारते हुए वो आगे बढ़ता रहा अब वो पहाड़ के लगभग पास पहुच ही गया था.की तभी उसके पहाड़ के पास एक दिव्या यति मानव दिखाई दिया। दोनों मैं लड़ाई शुरू हो गयी पांच तत्व की शक्ति प्रलय मचाने लगी दोनों तरफ से ही भयंकर अस्त्र छोड़े जा रहे थे। क्यों की वो भी दिव्य. था। फिर दोनों मैं शरीर से लड़ाई करने लगेबस वो दिव्य यति यही मार खा गया. उसने रुद्राक्ष को घुसा मारा रुद्राक्ष चार कदम पीछे चला गया। था। वो सम्भला और उसने उस यति की छाती पर अपनी पूरी ताकत से घुसा मार दिया उस यति का शरीर चीथड़े चीथड़े हो गया उसका मांस भी पुरे जंगल मैं फैल गया था। उसकी दिव्य मणि वंही गिर गयी उसको उठा कर स्टोरेज रिंग मैं डाला जंहा और दिव्य जानवरो की मणि रखी हुई थी। उसके बाद वो बना किसी रुकावट के कुछ समय मैं उस पहाड़ की चोटी पर पहुच गया। पहाड़ के ऊपर देखा उसने तीन रोशिनी के प्लेटफॉर्म एक तरफ बने हुए थे एक प्लेटफार्म सामने की तरफ बना हुआ था। और आठ प्लेटफॉर्म एक तरफ बने हुए थे। बीच मैं एक प्लेटफार्म था जो शयाद बैठने के लिए थे उस व्यक्ति के लिए जो दिव्या रोशिनी को लेने यंहा तक आएगा। सामने उसके आसमानी रंग की रोशिनी थी। उसने अनुमान लगया यही स्वर्ग की दिव्या रोशिनी होनी चाइये। यह सबसे अलग हैं बाकी सारी अलग। त्रिनेत्रा अपने परम दिव्या रूप मैं आता हैं और पदम् असन लगा कर बैठ जाता हैं उसके बाद वो अपनी दिव्या ऊर्जा की चारो तरफ रोशिनी की तरफ छोड़ देता हैं. साधना करने के लिए अपनी आँखे बंद कार लेता हैं। क्या परिणाम निकलेगा यह तो वक़्त पर था जैसे ही उन दिव्या रोशिनी से टकराती हैं तो वो प्रतिरोध करना शुरू कर देती हैं वो सब मिल कर उसके ऊपर हमला कर देती हैं यही उन दिव्या रोशिनी से गलती हो जाती जैसे ही वो सारी उसके शरीर से टकराती हैं उसके शरीर की ऊर्जा उनको किसी ब्लैक हॉल की तरह खींचना शुरू कर देती हैं वो रोशिनीअपने लाख प्रतिरोध के बाद भी वो अपने आप को उस से छुड़ा नहीं पाती हैं। 12की 12 दिव्या रोशिनी उसके शरीर मैं समा जाती हैं। और सभी दिव्या रोशिनी उसके शरीर मैं बहने वाली ऊर्जा के साथ बहने लगती हैंउसके शरीर मैं खून की जगह ऊर्जा का वहाव और शुद्ध हो जाता हैं उसकी सम्पूर्ण शक्ति मैं अद्भुत परिवर्तन होता हैंमगर वो तो अभी भी अपनी आँखे बंद करके साधना की इस्थिति मैं था। उसे नहीं पता था कितना समय वो ध्यान की अवस्था मै रहा था। ज़ब वो अपनी आँखे खोलता है तो देखता है आसमान मै तारे चमक रहे है। उसके खुद की रौशनी से पूरा झेत्र मैं उजाला फैला हुआ था कई किलोमीटर तक रोशिनी जा रही थीवो अपनी शक्तियों को वापस लेता है और सामान्य होता है फिर उठ कर खड़ा होता है और अपने चारो तरफ देखता है। अजीब सी शांति चारो तरफ थी। साधना से उठने के बाद ज़ब वो उस प्लेटफार्म से नीचे उतराता है तो फिर एक बार वो दिव्य दरवाजा खुलता है और वो उसमे प्रवेश कर जाता है वो दरवाजा फिर से मानसरोवर झील पर खुल जाता हैउसमे से रुद्राक्ष अग्निवंशी बाहर निकलता है उसके बाल नीले हो चुके थे जो कंधे तक आ रहे थेउसके बाल हवा के झोंके के साथ लहरा रहे थे। वो ज़ब मानसरोवर झील के चारो तरफ नज़र घुमा कर देखता हैतो पाता है वो सभी लोग अभी वंही रुके हुए थे उसके वापस आने का इंतजार कर रहे थे। उसे नहीं पाता था अंदर कितना समय लगा था। वो लोग टेंट बना कर रुके हुए थे। सभी कबीले के लोग वंहा पर मोजूद थे। ज़ब योद्धाओ नें देखा तो चिल्ला कर सबको सूचित किया की मास्टर वापस आ गए है। जैसे ही सबने सुना मास्टर वापस आ गए है उन लोगो नें सब काम को छोड़ कर बाहर आ गए। रुद्राक्ष चल कर उनके पास है जा रहा था। इतने मै करण दौड़ता हुआ आया और रुद्राक्ष के आगे झुक गया उसने उसे बहुत मना किया पर वो नहीं माना। रुद्राक्ष अग्निवंशी करण को उठने के लिए बोलता हैं और कहता हैं मैं तुम्हारी निष्ठा से प्रश्न हूँ मेरे भाई. चलो उठो और अब चलने का समय हो गया हैं मुझे वापस दक्षिण साम्राज्य भी जाना हैं। इस पंचमुखी नाग कबीले और कबीले के लोगो के कहने पर वो वंहा कुछ दिन रुकने का मन वना लेता हैंरुद्राक्ष उन लोगो के साथ करण के कबीले मैं पहुच जाता हैं कबीला पहाड़ो और जंगल के बीच बसा हुआ था एक पहाड़ को काट कर पांच फन बनाएं गए थे जो की उस कबीला का सूचक थी। वो सभी लोग कबीले जा कर भोज का आयोजन करते हैंरुद्राक्ष उन लोगो के भोज मैं शामिल होता हैं और वो सभी लोग रुद्राक्ष अग्निवंशी को अपना मास्टर घोषित कर देते हैं एक एक दिन करके वो सभी पांच कबीले के भोज मैं शामिल होता हैं. पांचो कबीले के सरदार उसको अपना मास्टर घोषित कर देते हैं। रुद्राक्ष वापस करण के साथ उनके कबीले मै आ जाता है और फिर वो करन को कहता है वो कुछ समय साधना करना चाहता है. फिर वो एकांत मैं चला जाता हैं और कुछ प्राचीन देवताओं की विधि का अभ्यास करने लगता हैं वो बहुत जल्दी है फिर दुबारा से लाखो कौशल कालाओं मैं फिर निपुण हो जाता हैंइस बार वो समय और अंतरिक्ष की विघटन को पूरी तरह महारत हासिल कर लेता हैं। वो कंही भी और कभी भी समय और अंतरिक्ष द्वारा आ जा सकता था. अनंत काल समय की शून्य इस्थिति मैं रह सकता था वो पलक झपकए एक जगह से दूसरी जगह टेलीपोर्ट हो सकता था। वो अपने कवच को दुबारा बनने की विधि को आत्मसत करके उसके प्रयोग करना शुरू कर देता हैं वो अपनी प्राण ज्योति को इस बार अजर अमर परम अविनाशी परम् व्रह्म मैं लीन करने मैं कामियाबी पा लेता हैं। इधर वो साधना और ध्यान की असीम घेराई मैं उतरा हुआ होता हैं और फिर कुदरत अपना अपना भयानक रूप मै तभाई मचाना शुरू कर देती हैंआसमान मैं हो रहे इस विद्वान्शक नज़ारे को दुनिया मैं महसूस हो रहा था। जैसे किसी नई शक्ति का उदय हो रहा. पृथ्वी लोक पर प्रलय का वातावरण बना हुआ थाइधर रुद्राक्ष का शरीर नस्ट होकर दुबारा बन जाता हैं और उसके शरीर पर भी कवच आ जाता हैं जो उसकी आत्मा से जुडा हुआ था। इस बार उसका कोई काट या तोड़ नहीं था। उस कवच को त्रिदेव भी नहीं तोड़ सकते थे ना कोई अस्त्र और सस्त्र कुछ कर सकता था परम शक्ति की शक्ति ऊर्जा से बना था जिस से सबका निर्माण हुआ हैं। ज़ब उसका शरीर का निर्माण पूरा हो जाता हैं तो कोई रुद्राक्ष को देखे तो ऐसा लगता था 12रंगों मैं रंगा हुआ कोई आदमी बैठा हुआ हैं उसके कवच पर हीरे जैसे रंग की धारिया थी जिनमे ऐसा लगता था असीमित ऊर्जा भरी हुई हो करोडो सूर्य को उस कवच मैं बांध दिया हो। उसकी सुरक्षा की तीन लेयर बबन कर तैयार हो गयी थी पहला उसका प्राचीन कवच जो उसके शरीर मैं इच्छा से संचालित था। दूसरा उसकी परम दिव्या शक्ति की ऊर्जा की परत.तीसरा जो रिंग्स पहले नौ हुआ करती थी अब 12 सर्कल देखे जा सकते थे। फिर कुछ दिन मैं वो अपनी साधना समाधी से आँखे खोलता हैं और अपने आप को देखता हैं. अब वो अपने दुश्मनों से मुकाबले के लिए तैयारी कर ली थीथोड़ी कमी और बाकी थी वो भी जल्दी से जल्दी उसका पूरा करेगा। इतनी हलचल होने के बाद वो लोग उसकी तलाश मैं निकल चुके होंगे। उसको अमृत कलश से अमृत लेना और महादेव के हालाहल को पाना बांकी था। फिलाल के लिए उसने पंद्रह दिन अपनी एकांत मैं गुजरे थे। वो एकांत से वापस करण के कबीले मैं आया। कितना भी वो अपनी आभा को दबा ले फिर भी थोड़ी बहुत झलक रह ही रही थी। फिर भी सब कुछ कंट्रोल करता हैं उसके बाद बाद वो उन सब लोगो से विदा लेकर दक्षिण साम्राज्य की तरफ निकलता हैं वो कबीले के वाहर आ कर कुछ दूर पैदल पैदल चलता हैं और ज़ब वो लोग दिखना बंद हो जाते हैं तो दक्षिण साम्राज्य के लिए टेलीपोर्ट हो जाता हैं। करण समझ चूका था मास्टर अपनी शक्ति को हमेशा छुपा कर रखते हैं वो शायद और आश्चर्य मैं नहीं डालना चाहते थे हम लोगो को। उन सब लोगो को दिख रहा था पृथ्वी लोक पर बहुत जल्दी ही सब कुछ बदल जाने वाला हैं। रुद्राक्ष टेलीपोर्ट होकर राजधानी मैं आ गया था। उसकी आभा और शरीर बदल जाने के कारण जल्दी से लोगो नें उसको नहीं पहचाना उसके बाल नीले हो चुके थे। ज़ब लोगो नें देखा की राजधानी की सड़को पर कोई युवा योद्धा चल कर महा गुरूजी माधव आचार्य के निवास की तरफ जा रहा हैं। ज़ब उनोहने ध्यान से देखा तो पाया यह तो रुद्राक्ष अग्निवंशी हैं। उसके पहचान उजागर होते ही यह खबर आग की तरह पुरे साम्राज्य मैं फ़ैल गयी की रुद्राक्ष वापस आ गया हैं। जँहा कुछ लोग ख़ुश थे तो कुछ लोगो को चिंता नें घेर लिया था। उसके पीछे साम्राज्य मैं क्या हुआ था उसको नहीं पता था। वो महा गुरूजी के निवास पर जा कर नौकर को बोलता हैं उनको सुचना देने के लिए। एक बार तो वो ख़ुश होते हैं उसके आने की बात पर फिर कुछ सोच कर दुखी हो जाते हैं। रुद्राक्ष उनसे मिलता हैं उनको प्रणाम करता है उनसे सबके बारे मैं बातचीत करता है मगर यह नहीं बताता हैं की कोई रोशिनी उसको मिली या नहीं.उनसे बातचीत करते हुए रुद्राक्ष को कुछ गड़बड़ का सक हो गया था। ज़ब महाराज और महारानी को खबर मिलती हैं तो वो सब लोग भी और साबधान हो जाते हैं। वो लोग रवि को रुद्राक्ष को महल मै लाने के लिए बोलते हैं. रवि बे मन से उसको बुलाने के लिए आचार्य निवास चला जाता है। रुद्राक्ष ज़ब रवि को देखता हैं तो उसे वो बदला हुआ नज़र आता हैं. रवि कहता हैं कोई बात नहीं हैं चलो राजमहल मैं सब लोग तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। रुद्राक्ष अग्निवंशी रवि के साथ महल जा पहुँचता हैं सब लोग ख़ुश होकर उसका स्वागत करते हैं सम्राट से वो पूछता हैं कोई परेशान तो करने नहीं आया या किसी नें लड़ाई का कोई सन्देश तो नहीं भेजा। उन चार सौ राज्यों का क्या हुआ सब कुछ नियंत्रण मै तो हैं ना। इस तरीके से बाते हो रही थी सब कुछ बातचीत अच्छी चल रही थी। उसके बाद सब लोग कहते आज तुम यही हमारे साथ महल मैं रुक जाओ रवि के पास यह तुम्हे बहुत याद कर रहा था। फिर महाराज और महारानी कहते हैं हम शाम को भोजन सब साथ मैं ही करेंगे। रुद्राक्ष कहता है मैं थक गया हूँ थोड़ा आराम करना चाउंगा रवि। तो रवि उसको एक कमरे मैं छोड़ कर वापस आ जाता हैं। इधर सबके आत्मिक सन्देश इधर से उधर होने लगते हैं. चार सौ राज्यों के लोग परिवार के साथ आये हुए थे अपने दुश्मन की मौत का तामसा देखने के लिए। सब कुछ पहले से हीतय था बस रुद्राक्ष को कोई खबर नहीं थी। वो आराम से सौ कर शाम को उठा और फ्रेश हो गया. उसके बाद रवि उसको भोजन पर बुलाने आ गया। वो उसके साथ महल के विशाल कक्ष मैं मैं भोजन के लिए चला गया। भोजन शुरू हुआ सब लोग भोजन करने लगे रुद्राक्ष को थकान और ऊर्जा बढ़ाने के लिए स्पेशल खीर दी खाने के लिए। महाराज और महारानी भी भोजन करने मैं लगे हुए थे। उस खीर को सूंघ कर दिव्या नाग नें कहा मास्टर यह लोग आपको मारने की साजिस रच चुके हैं। मुझे इसमें विष की कचरा गंध आ रही हैं यह बाते मानसिक रूप से रुद्राक्ष और दिव्या नाग के बीच हो रही थी. यह बेवकूफ़ लोग हैरुद्राक्ष बोला जो दिख रहा हैं बाते उतनी नहीं हैं चलो मजे करते हैं इतना कह कर उसने उस खीर के कटोरे को उठाया और सारी खीर खा गया। वंहा सबकी आँखों मैं चमक देखी उसने रवि और महा गुरूजी को छोड़ कर। वो उदास दिख रहे थे। थोड़ी देर मैं रुद्राक्ष का शरीर वंही खाने की मैज़ पर गिर जाता हैं वो अपने प्राणो को अपने हिर्दय से खींच कर आज्ञा चक्र मै इस्थापित कर देता है. और अपनी दिव्य दृस्टि को सक्रिय कर देता हैं.अब जो भी देखेगा उसको रुद्राक्ष मरा हुआ ही नज़र आएगाफिर थोड़ी देर बाद सम्राट उठते हैं और उसकी नवज़ देखते हैं ज़ब सबको पूरा यकीन हो जाता हैं की वो मर गया हैतो वो उन सब लोगो को सन्देश भेज देते हैं आकर अपने दुश्मन की मौत को देख जाओ। उसकी लाश को उठा कर एक तरफ रखवा देते हैं। पुरे साम्राज्य मैं खबर फैल जाती हैं रुद्राक्ष अग्निवंशी ख़त्म हो गया हैं कल उसकी लाशजलया जायेगा। सभी राज्यों के परिवार वाले जिनके लड़के अखाड़े के यूद्ध मैं और बाद मैं मारे गए थे सब एक जगहही आ जाते हैं। रवि रो रहा था और महा गुरूजी की आँखों मैं अंशु थे। मगर कोई कुछ नहीं बोल रहा था। बांकी सब लोग खुश थे समशान घाट पर उन परिवार वालो के लोगो का और उनके योद्धाओ का जमघट लग जाता हैं एक विशाल ग्राउंड के बीच मैं उसको जलाने का प्रवंद किया हुआ थाउस ग्राउंड मैं सारे वही लोग थे पुरे साम्राज्य से जो उसको मरा हुआ देखना चाहते थे। कई लोग तो उसकी लाश को काट कर कुत्ते को खिलाने के लिए कह रहे थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी की लाश को लाया जाता हैं और उसको लिटा कर लकड़ियों मैं आग लगा दी जाती हैं वो लोग उसको गाली और बहुत सी बाते कर रहे थे। लकड़ी जल कर खतम हो जाती हैं वो उसके शरीर का कपड़ा भी नहीं जला पायी थी यह देख कर सबको थोड़ा टेंशन होने लगती हैं। उनकी टेंशन ज़ब और बढ़ जाती हैं ज़ब रुद्राक्ष उठा कर बैठ जाता हैं और अपने कपडे झाड़ते हुए खड़ा हो जाता हैं। सबको सदमा लग जाता हैं की मरा हुआ आदमी जिन्दा कैसे हो सकता हैं उन लोगो नें खुद भी चेक किया था। उसके बाद रुद्राक्ष अपनी थोड़ी सी शक्ति को खोल देता हैं उसके हाथो से आंग की किरणे निकलना शुरू हो जाती हैं जिस से भी वो टकरा रही थी वो धुंआ बनता जा रहा था पांच मिनट के कम समय मैं वो ग्राउंड लाशो का ढेर बना हुआ था जो भी वंहा था रुद्राक्ष नें सबको ख़तम कर दिया था। उसके बाद रुद्राक्ष अग्निवंशी महाराज से पूछता हैं मुझे धोखा देने का कोई उचित कारण बताएँगे आप. कोई कुछ नहीं बोलता हैं। महाराज रुद्राक्ष को मारने के लिए सूर्य अस्त्र का अवहन करते हैं जो तीर के रूप मैं उनके हाथ मैं आ जाता हैं और उसको रुद्राक्ष पर छोड़ देते हैं. रुद्राक्ष उसका कोई प्रतिरोध नहीं करता हैं ज़ब वो तीर उसके शरीर को को छूता हैं तो उसके शरीर मैं गायब हो जाता हैं.रुद्राक्ष अपनी एक अंगुली ऊपर उठता हैं उसकी अंगुली से सफेद रोशिनी की किरण निकलती हैं और वो बाकी बच्चे हुए लोगो से टकरा जाती.उस किरण के प्रभाव से सब धुआँ हो जाते हैं। उसने किसी को भी नहीं बक्शा था। केबल रवि और महा गुरूजी को छोड़ दिया था। जो एक कौने मैं खड़े हुए थे। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी नें उन सभी लोगो को उन परिवारों को ख़त्म कर दिया था बिना किसी से कोई बात किये। उसने महाराज और महारनी और अन्य राजकुमार और राजकुमारी थे उसने किसी को भी नहीं छोड़ा था. इस समय गुरूजी और रवि उसके सामने खड़े थे जिनको उसने नहीं मारा था। उनको राजमहल आने का बोल कर वो हवा मैं उड़ गया और दक्ष को बोला और फिर उसके ऊपर खड़े होकर एलान कर दिया आज से दक्षिण साम्राज्य का नया सम्राट रुद्राक्ष अग्निवंशी है। उसकी आवाज हर जगह गूंज गयी थी. सब लोगो को पाता चल गया था सभी लोग मारे गए है। किसी भी योद्धाओ नें कोई विरोध नहीं किया। इतने रक्तपात के बाद सभी को खबर लग गयी हर राज्यों के राजा और परिवार झुक गए थे जो नहीं झुकेगा उसको ख़तम कर दो. दिव्य नाग नें यह सन्देश पुरे पांच सौ राज्यों मै फैल गया। दिव्य नाग को बोलता देख कर और उसके 21 फनो को देख कर पहले ही सभी लोगो मै भय घर कर गया था। वो लोग सोचा की ज़ब यह रुद्राक्ष अग्निवंशी को अपना मास्टर कह रहा है तो वो खुद कितना शक्तिशाली होगा। एक महीने मै उसने पुरे साम्राज्य की बागडोर अपने हाथो मैं समाल ली थी। जिन परिवार को खतम किया गया था उनकी सारी सम्पति और कारोबार सीधे रुद्राक्ष के हाथो मै था उसने योद्धाओ और कुशल लोगो की टीम बनायीं और उसका लीडर भीम को बना दिया। सम्राट बनने के बाद उसने राजकोष को देखा कितना स्वर्ण मुद्रा अभी हैं अभी चालीस लाख हज़ार करोड़ मुद्रा था। उसने राजकोष को बढ़ाने के लिए उन परिवार और राज्यों की भी सम्पति मिला दी थी। तो यह बढ़ कर सौ लाख हज़ार करोड़ हो गया था। उसने अमीर और गरीब को मंच पर ला कर खड़ा कर दिया था। जितनी भी कमजोर रियासत थी गांव थे जिनके पास स्वर्ण मुद्रा का आभाव था उसके आदेश सभी गांव सेहर रियासत राज्यों को मजबूत बनने के लिए प्रणाली बनायीं उसका कोई भी हिस्सा बन सकता था काबिलियत के आधार पर। उसने साम्राज्य की सीमा को सुरक्षित करने के लिए योद्धाओ को भरपूर साधना और सादन दिए। कुछ ही महीनों मै उसने सब कुछ पलट कर रख दिया था. सब लोगो को पाता था रुद्राक्ष अग्निवंशी न्याय प्रिय लोगो के लिए जितना अच्छा है उतना ही बुरा वो दुस्ट लोगो के लिए है। दुस्ट लोगों के लिए बो किसी शैतान से कम नहीं था। सब कुछ फिर से शुरू हो गया था पहले जैसा चलने लगा थाबदला तो सम्राट था और उसने पूरी व्यवस्था ही बदल कर रख दी थी। राजधानी मैं सभी लोगों के काम बट गए थे सब अपने अपने काम की रिपोर्ट शाम को राजमहल मै जरूर जाते थे। दिव्य नाग से अब लोग डरते नहीं थे वो पुरे साम्राज्य मै आधे घंटे मै सबकी रिपोर्ट खबर ले कर आ जाता था। वो न्याय और धर्म का प्रतिक बन गया था। उसने एक दिमाग़ लगया और सारा राजकोष खाली कर दिया और अपनी स्टोरेज रिंग मै डाल दिया. और लोगों को हिसाब लगाने को कहा की देख कर बताओ कितने दिन मै हमारे राजकोष मै कितना स्वर्ण मुद्रा आता है। सभी खजाँची नें बात सुनी और बोला जैसा आप कहे सम्राट। उसके बाद आज उसका दिमाग़ शांत था वो रवि और गुरूजी के कक्ष की तरफ जाने लगा जँहा वो लोग रह रहे थे। उसने उनके पास जा कर पूछा आप नें और रवि नें क्या इन सबका विरोध किया था रवि बोला वो मेरे असली माँ बाप नहीं थे तो तुम समझ सकते हो हमारी कितनी बाते मानी जाती होंगी हम और यह सम्राट एक अनुबंध से जुड़े हुए थे ज़ब सम्राट खतम तो अनुबंध भी ख़त्म हो गया। रवि बोला मुझे रुद्राक्ष तुम पूरा भरोसा था की तुम सच जानने की कोसिस जरूर करोगे। रुद्राक्ष बोला तो सच क्या हैं मुझे सब कुछ सच सच बताओ रवि बोला मै इच्छा धारी गरुड़ सर्प लोक से हूँ. यह मेरे गुरूजी हैं. यह लोक दक्षिण दिशा मै जँहा विशाल समंदर हैं इसके अंदर हैं इसके अंदर कई दीप और टापू हैं ऐसे ही एक दीप से हमारे हमारे इच्छा धारी गरुड़ सर्प लोक का राश्ता जाता है। हमारे लोक पर धूमकेतु के सेवक अखंडा नें आक्रमण कर दिया था जिसके कारण बडे पैमाने पर हमारे लोक के लोग मारे गए। उसमे मेरे माता पिता भी मारे गए थे. उस से बचाने के चकर मै बे बुरी तरह से घायल हो चुके थे गुरूजी भी का हाल भी बुरा था और मै उस समय पांच साल का था। कुदरती महाराज का वंहा आना होता हैं उस टापू पर ज़ब वो देखते हैं तो अपनी शक्ति का प्रयोग करके उन लोगों को मार देते हैं अपने दिव्य सूर्य अस्त्र का प्रयोग करके। मेरे माँ बाप ज्यादा समय जीवित नहीं बचते हैं मगर मरने से पहले वो मेरा और गुरूजी का प्राण बचाने को बोलते हैं.मगर यह उनके सामने सर्त रख देता हैं की उसको इसमें क्या फयदा होगा तुम लोग इच्छा धारी गरुड़ सर्प लोक के राजा रानी हो। तो वो दोनों दिव्याशक्ति मणि देते हैं जो उनके लोक की थी यह मणि एक आदमी जितनी बड़ी और अंडकार थी। आज से तीस साल बाद तुम उसकी शक्ति को हासिल कर सकते हो। मग़र यह लोग सुरक्षित रहेंगे इसके लिए तुमको इनके साथ अनुबंध बनाना पड़ेगा। कोई एक दूसरे को धोखा नहीं दे सकता. अगर वो ऐसा करेगा तो उसकी आत्मा नस्ट हो जाएगी। इसलिए हम लोग कुछ नहीं कर सकते थे मगर कुदरत का खेल देखो उसके लालच और उसकी बेबकूफी नें उसको ही खतम कर दिया। रुद्राक्ष अग्निवंशी बोलता हैं हम्म्म्म। फिर यह बताओ वो दिव्या शक्ति मणि कँहा है। फिर महा गुरूजी बोलते हैं वो उसके प्राचीन मंदिर मै रखी हुई हैं जिसको केबल कुछ लोग ही जानते हैं। बाकी लोग पहले ही खतम हो चुके हैं बचे हम लोग। मुझे उसका गुप्त राश्ता पता हैं। रुद्राक्ष कहता हैं कहा से हैं उसका राश्ता तो रवि कहता हैं जिस कमरे मै महाराज रहते थे अब तुम उस जगह रहते हो. उसी जगह से एक गुप्त दरवाज़ा खुलता हैं जो हमें वंहा लेकर जाता हैं जँहा वो दिव्यशक्ति मणि को रखा गया हैं। वो फिर उन दोनों को अपने कक्ष मै बुलाता हैं और कहता हैं किस तरफ से। रवि एक शेर की मूर्ति के पास जाता हैं और उसके मुँह मै हाथ डाल देता हैं उसके ऐसा करने के बाद उन कमरे की दिवार एक तरफ खिसक जाती हैं और उसमे दो लोगों के जाने के लिए राश्ता बन जाता हैं। उसके बाद रवि आगे पीछे गुरु और उसके पीछे रुद्राक्ष अंदर घुस जाते हैं और उसके बाद वो दरवाजा बंद हो जाता हैं रवि मशाल जलाता हैं और फिर सारी मशाल जलने लग जाती हैं। उस राश्ते को देख कर ऐसा लगता था की विषेस परिस्थिति मै भागने के लिए या छुपने के लिए बनया गया हो। वो लोग उस गुप्त राश्ते को पार करते हुए मदिर के प्रांगण मै जा पहुंचते हैं. उस मंदिर मै भगवान शंकर की प्रतिमा और शिव लिंग बना हुआ था। उसके आगे लाल रंग का अंडा रखा हुआ था। रवि और गुरु बोलते हैं यह ही दिव्याशक्ति मणि हैं। रुद्राक्ष भगवान शिव को प्रणाम करता हैं और कर मणि के पास जाता हैं. वो उस मणि को हाथ मै लेने के लिए अपना हाथ आगे करता है उसके हाथ लगते ही वो मणि ऊर्जा मै बदल कर उसके शरीर मै चली जाती हैं। गुरु और रवि भी हैरान होकर उसको देखते है। रुद्राक्ष अग्निवंशी के शरीर मै उस दिव्याशक्ति मणि के जाने के बाद वो भी हैरान था उसने तो केबल उसको छुआ था।.उसके बाद वो लोग वापस महल मै आ जाते हैं. और कुछ विचार विमर्श करने लगते हैं। रुद्राक्ष कहता है ठीक हैं मै और रवि वंहा जायेंगे। और महा गुरु को साम्राज्य की देख रेख करने के लिए बोलता हैं। फिर वो कल एक सभा बुलवाता हैं और सबको बोलता हैं की वह कुछ दिनों के लिए वाहर जा रहा हैं। उन सब लोगों को काम की जिम्मेदारी सोप देता हैं और निरिक्षण के लिए महा गुरूजी माधव आचार्य को छोड़ देता हैं। उसके बाद वो अपना हाथ हवा मै घूमता हैं और अपने द्वारा मारे गए सभी जानवरो का ढेर लगा देता हैं और भीम को बोलता हैं यह दिव्य, तिलसमी जानवर अलग अलग रैंक के हैं हम इनका क्या प्रयोग कर सकते है तुम लोग अपने हिसाब से देखो। उसके बाद वो कुछ जानवरो की शक्ति मणि का ढेर लगा देता हैं। जिसमे तिलसमी, दिव्य और हाई रैंक के जानवरो की मणि होती हैं। वो कहता हैं मेरे विचार से मणि की नीलामी करवा देनी चईये। इतना सब कुछ देख कर सब लोग बोलते हैं महाराज इन सब चीजों से हमारा राजकोष सौ करोड़ लाख को भी पार कर जायेगा यह सब दुर्लभ और अनमोल हैं। यह चीजें हकीम और योद्धाओ के लिए अनमोल हैं हर साम्राज्य के लोग इन चीजों को पाना चाहेंगे। इन को पाने के लिए शक्तिशाली लोग आपस मै लड़ मरेंगे। वो बोला मै दक्ष को यही छोड़ जाऊंगा। सुरक्षा के लिए। मै इसको कभी भी कंही भी टेलीपोर्ट कर सकता हूँ। इस समय दिव्या नाग पांच हज़ार रैंक को पार कर गया था। उसकी शक्ति स्वर्ग के योद्धाओ जितनी हो चुकी थी. वो अपने सामने एक देवता को भी टकर दे सकता था। और यह सब उसको पता था त्रिनेत्रा की बढ़ती हुई शक्ति के कारण हुआ था। यह वो सपना था जो उसके लोक के लोग देखा करते थे और उसका वो सपना अपने मास्टर की वजह से पूरा हो चूका था.उसके बाद अगले दिन रुद्राक्ष अग्निवंशी रवि को लेकर उस विशाल फैले हुए गंगा सागर की तरफ अपने दिव्य नाग को लेकर निकल जाता हैं। वो जाने से पहले राजधानी के सभी योद्धाओ को आत्मिक सन्देश भेजनें के लिए बोल गया था। जिस से उसके साम्राज्य मै होने वाली हर घटना की खबर उसको लगती रहेगी। उसने पुरे साम्राज्य मै हर तरफ यह घोसणा करवा दी थी अगर किसी केसाथ किसी भी तरीके से कोई अन्याय करता है। तो वो सन्देश भेज सकता हैं और उसकी सुनवाई जल्द ही होंगी। आराम से यात्रा के लुफ्त उठाते हुए वो लग सागर के ऊपर यात्रा करते जा रहे थे. एक दिन की यात्रा करने के बाद उन लोगों के टापू दिखाई देना शुरू हो गए थे. उन टापू के समूह को पार करते हुए आ वो लोग आगे बढ़ते रहे फिर एक टापू के समूह की तरफ मुड़ गए। दिव्य नाग किरणे मै बदल कर उसके शरीर मै चला गया. वो और ड्रैगन दोनों ही उसके आत्मिक झेत्र मै अपनी साधना करते रहते थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी और रवि नीचे उतर कर अंदर जंगल की तरफ जाने लगे वो लोग उन टापू पर इस्थिति पहाड़ो को पार करके एक ऐसी जगह जा पहुचे जँहा पर तीन पहाड़ मिल कर किसी आकृति का निर्माण कर रहे हो। उस पहाड़ी जंगल की खाई मै उतरने के बाद वो ऐसी जगह पहुचे जँहा सुरंग बनी हुई थी जिसमे कोई भी खातरनक जानवर हो सकता था। उस सुरंग को देख कर रवि कहता हैं यह सुरंग ही हमें आगे राश्ता बताएगी और वो रवि दोनों उस सुरंग मै प्रवेश कर जाते हैं सुरंग मै जाने के बाद वो गोल गोल घूमती जा रही थी और यह लोग उसमे चले जा रहे थे अभी तक इनका सामना किसी भी खतरनाक जानवर से नहीं हुआ था। आधे दिन का सफर करने के बाद वो लोग उस सुरंग के अंत मै आ जाते हैं। उस जगह निकालने के बाद वो देखते हैं वंहा कई सारी गुफा बनी हुई हैं अंदर धूल मिटी जाले बने हुए हैं। ज़ब वो रोशिनी करते हैं तो चमकादड़ उड़ते हुए इधर उधर हो जाते हैं। उसमे से एक गुफा की तरफ रवि बोलता हैं हमको इसके अंदर जाना हैं। लेकिन अब खतरा भी हो सकता हैं। उसके बाद रुद्राक्ष रवि की बताई हुई गुफा मै घुस जाता हैं अब वो आगे आगे चल रहा था। रवि की शक्ति इतनी नहीं थी की वो किसी खतरनाक हमले को झेल जाता। वो लोग उस गुफा को पार करने मै पांच छे घंटे का समय लेते हैं उसके बाद वो उस गुफा के अंत मै जा कर थोड़ा दूर से देखते हैं तो उनको सामने बंद नज़र आती हैं उनको वंहा से पहाड़ की दिवार ही दिखाई दे रही थी। ज़ब वो पास आते हैं दिवार के पास तो देखते हैं एक छोटी सी दरार बनी हुई थी जिसमे दो लोग एक साथ चल कर निकल सकते थे। वो उस दरार को पार करते हैं पैड़ो के पीछे निकलते हैं यह दरार घने पेड पौधे होने के कारण दिखाई नहीं देती थी। वो उन पैड़ो को पार करते है और फिर जगह का निरिक्षण करते हैं तो उनके दूर गरुड़ सर्प लोक की ऊँची ऊँची इमारते बनी हुई दिखाई दे रही थी जैसे वो आसमान को चुम रही हो. जिस पहाड़ियों के बीच यह लोग उधर देख रहे थे उधर सामने घना जंगल दिखाई दे रहा था। रुद्राक्ष रवि से सारी जानकारी पहले ही ले चूका था उसको आगे आने वाले खतरों से बचाने के लिए वो रवि को वापस समय और अंतरिक्ष विघटन के माध्यम से महल मै भेज देता हैं। वो उसका बोलता हैं ज़ब वो यंहा सब ठीक कर देगा तो फिर तुमको और गुरूजी को बुला लेगा। रवि को भी खतरे के बारे मै पता था. वो भी अपनी जान का रिस्क नहीं ले सकता था यंहा पर सब लोग उस से जयदा ही शक्तिशाली थे। ऐसे मै वो रुद्राक्ष के लिए कोई मुसीबत नहीं खड़ी करना चाहता था। वो वापस महल मै आ जाता हैं और सारी बाते गुरूजी को बताता हैं। फिर वो दोनों रुद्राक्ष के दिए हुए काम को सँभालने लग जाता हैं। दक्षिण साम्राज्य के लिए जो अच्छे से अच्छा हो सकता था सारे अधिकारी कर्मचारी सैनिक और योद्धाओ का समूह वो सब करने मै लगा हुआ था। वो जो चीजें रुद्राक्ष अपने पीछे छोड़ गया था. उनको सेटल करने मै लगे हुए थे। इदर रुद्राक्ष उस पहाड़ी से नीचे उतरता हैं और वो सामने जंगल मै प्रवेश कर जाता हैं. उस जंगल मै जानवरो की आवाज़ आ रही थी यह तो स्वाभाविक था यह प्राणी साधारण या सामन्य तो बिल्कुल भी नहीं थे। वो शांति से जंगल मै बढ़ रहा था लेकिन उसको खबर थी कुछ छोड़ी आँखे उसका पीछा कर रही थी वो जिस राश्ते आगे बढ़ रहा था उसके सामने एक छोड़ा ग़ड़ा आ जाता है इस समय वो खढ़े के सामने खड़ा हुआ था आराम उसने उसको देखने के लिए जैसे ही आगे की तरफ छुका उसकी पीछे से हल्का धका लगा और उसका संतुलन ख़राब होने के कारण वो उसमे गिर गया। गिरते हुए उसने देखा की किस वजह से उसका संतुलन ख़राब हुआ था तो उसको आधा साप और आधा चीता से बना हुआ जानवर दिखाई दिया। रुद्राक्ष महसूस कर सकता था उसकी आँखों को देख कर की उसको दुख हो रहा है उसका शिकार उसमे गिर गया। रुद्राक्ष नें सोचा था यह थोड़ा बहुत ही गहरा होगा मगर थोड़ा नीचे जाते ही उसको किसी अनजान शक्ति नें अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया। उसको कुछ हो तो नहीं रहा था मगर वो अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं कर पा रहा था। रुद्राक्ष अपने मन मै ही बोला यह किस तरीके की मुसीबत है इसके बारे मै तो कुछ भी याद नहीं आ रहा है। उसको ऐसा लग रहा था अँधेरे गिरते हुए जैसे की वो रास्ताल मै गिरता जा रहा हो जिसका कोई अंत ना हो। क्या रुद्राक्ष उर्फ़ त्रिनेत्रा इस विचत्र जगह से बाहर निकल पायेगा??राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी उर्फ़ त्रिनेत्रा उस खढ़े मै गिर गए था उसकी कोई शक्ति उस काले भंवर मै काम नहीं कर रही थी। उसका शरीर दिव्या ऊर्जा का था इस कारण वो उस दवाब को सहने मै कामियाब हो रहा था। वो उस काले भंवर मै एक लम्बे समय तक अँधेरे मै गिरता जा रहा था। फिर एक समय आया वो ज़मीन से टकरा गया उसको कोई ज्यादा छोटे नहीं आयी थी। उसने उठ कर अपने चारो तरफ देखा की वो कँहा आ गया हैं उसने देखा आसमान मै लाखो गैलेक्सी दिखाई दे रही थी उसको वंहा अरबो खरबों वराहमंड दिखाई दे रहे थे उसके चारो और छोटे छोटे अरबो खरबों वृह्माण्ड हवा मै घूम रहे थेउसके पैरो के नीचे की ज़मीन की जगह अनंत गैलेक्सी थी जिन पर इस समय वो खड़ा हुआ था वो सोच रहा था यह कौन सा आयम हैं जिसमे वो आ गया हैं। उसने अपने चारो तरफ घूम कर निरिक्षण किया फिर उसको कुछ दुरी पर एक वृक्ष नज़र आया जो की सफेद रौशनी का बना हुआ था उसके ऊपर अलग अलग फल लगे हुए थे जो की अलग अलग रंग के थे वो फल भी रौशनी के बने हुए थे। देखने मै अजीब नज़ारा था वो पेड की चढ़े सभी वृह्माण्ड और गैलेक्सी मै फैली हुई था। इस अजीब सी जगह को देख कर एक बार तो त्रिनेत्रा को भी डर लगा वो बहुत समय एक जगह ही खड़ा रहा यह देखने के लिए की कोई हरकत होती हैं या नहीं। ज़ब उसने महसूस किया की कोई हरकत कंही से भी नहीं हो रही हैं तो वो उस पेड की तरफ जाने लगा और कुछ ही देर मै वो उस वृक्ष के नीचे खड़ा हुआ था। उसने हिम्मत करके कुछ फल उस वृक्ष से तोड़ने की कोसिस की तो वो टूट गए उसने वो फल को हाथ मै लेकर देखा मगर उसको कोई बुरी भावना महसूस नहीं हुई उसने तीन चार फल और तोड़ लिए और फिर हिम्मत करके उसने एक फल को खाना शुरू किया तो उसको वो फल अमृत की तरह मीठा लगा। फल खाने के बाद उसको ऊर्जा से महसूस हुई। फिर क्या था उसने अब देखा ना तब और उस पेड का सारे रंग के फल तोड़ डाले और खाने बैठ गया। उसने अब तक पंद्रह फल खा लिए थे हर रंग। मगर उसका मन और पेट भर ही नहीं रहा था उस वृक्ष पर अभी भी पंद्रह और फल लगे हुए थे। रुद्राक्ष नें उन फलो को भी तोड़ लिया और खाने लगा उसने सारे फल खा लिए थे। जैसे ही उसने आखिरी फल की आखिरी बिट को खाया वो ऊर्जा का पेड जो ऊर्जा का ही बना हुआ था उसकी सारी ऊर्जा उसके शरीर मै चली गयी। फिर कुछ समय तो सब कुछ सामान्य रहा. और फिर कुछ समय बाद उसको लगा की उसका शरीर मै बहुत अधिक ऊर्जा बह रही थी। और उस ऊर्जा के दवाब से उसका शरीर ना फट जाये इसलिए वो वंही फटाफट पदम् आसन लगा कर साधना की विधि मै बैठ गया और ध्यान करने लगा उसने तुरंत अपने प्राण को खींच कर ज्योति मै मिला दियाइस समय वो वाहर की दुनिया से कट गया था। लेकिन इस बार उसकी ध्यान समाधी मै अजीब बात हुई वो परम ज्योति यात्रा करने लगी और अनंत प्रकाश मै जा कर मिल गयी। वंहा अरबो खरबों सूरज का प्रकाश भी कम था मगर उसमे शीतलता थीइस समय वो प्रमानन्द की अनुभूति कर रहा था उसके ऐसा महसूस हो रहा था यही मोक्ष धाम हैं जिसके लिए सब लोग प्रयत्न करते हैं। फिर वो परम ज्योत वंहा से यात्रा करते हुए वापस आ जाती है. उसके बाद रुद्राक्ष अपने प्राण को उस से अलग करता हैं और वापस अपनी चेतना मै लौट कर आता हैं फिर वो वो अपनी आँखों को खोलता हैं तो उसको लगता हैं उसकी आँखे शुद्ध दिव्या ऊर्जा की बनी हुई हो उसको आपने शरीर मै खून की जगह शुद्ध परम दिव्या ऊर्जा बहती हुई दिखाई देती हैं उसका शरीर शरीर लाल पीले नील हरे गुलाभी काले सफेद बेगानी केसरिया संतरी रोशिनी निकाल रहा था। उसकी शक्ति अद्भुत रूप से बढ़ गयी थी उसका सम्पूर्ण कायाकल्प हो गया था। उसकी बाद वो खड़ा होता हैं और उसकी सारी शरीर की हड़िया चटक जाती हैं। और एक ध्वनि वहां पर गूंज जाती है जैसे उनको उनका रक्षक मिल गया हो.रुद्राक्ष के बालो का रंग भी भी बदल गया था अब उसके बालो मै बारा रंग के हो गए थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी उस आयाम मै बाहर निकलने का राश्ता खोजता हैं मगर उसको राश्ता नहीं मिल रहा था। फिर वो हर चीज पर गौर करना शुरू कर देता हैं फिर उसको एक अजीब पत्थर पर नज़र जाती हैं जो कई रंगों के पैटर्न से बना हुआ था। वो उस पत्थर पर अपना हाथ रख कर उसकी सतह को देखने लग जाता हैं कितना चिकना हैं.उसकी हाथ के स्पर्श से वो पत्थर एक दरवाजा बना देता हैं और जैसे ही रुद्राक्ष उस दरवाजे के अंदर जाता है वो बंद हो जाता है वो वंही वापस आ जाता है जिस जगह से वो गिरा था। लेकिन साथ मै वो पत्थर भी उसके हाथ मै आ जाता है। उसको कुछ जानकारी नहीं होती है इसके बारे मै वो इसलिए उसको अपनी स्टोरेज रिंग मै रख लेता है। बाद मै इसके बारे मै विचार करेगा यह क्या है। उसका शरीर लगातार दिव्या ऊर्जा उत्सार्जित कर रहा था। वो उसके बाद उस जंगल मै आगे जाने लगता है वो पूरा जंगल पैदल पैदल पार कर जाता मगर इस बार कोई भी जानवर उसके पास से भी नहीं गुजरा था। उसको समझ आ रहा था यह सब उसके शरीर से निकलती आभा के कारण था. वो फिर आभा नियंत्रण विधि का प्रयोग करता है और अपनी सारी आभा और ऊर्जा को छुपा लेता है। इस समय कोई भी उसको देख कर यही कहेगा रहस्यमी लड़का है। वो धीरे धीरे चल कर गरुड़सर्प के प्रवेश द्वार पर आ जाता है वो देखता है वंहा लोगों की लाइन लगी हुई है अंदर जाने के लिए। प्रवेश द्वार पर आधे आदमी और आधे सांप वाले कई लोग हाथो मै हथियार लेकर हुए थे। वंहा और भी कई जानवरो के और सांप के शरीर वाले लोग घूम रहे थे। सब कवच और हथियार से लेश थे। वो लोग सबकी पहचान देख रहे थे की कौन किस ग्रुप और कँहा से है। रुद्राक्ष के आगे आदमी खड़ा हुआ था उसके बाद उसका नंबर था। वो ज़ब वंहा पंहुचा तो पहरेदार नें पूछा कँहा से हो तुम और तुम्हारा कार्ड कँहा है। वो बोला मै जंगल से आ रहा हूँ मेरे पास कार्ड नहीं है उसने बोला क्या तुम लोगों के साथ शिकार करने गए थे जंगल मै। उसने कोई जवाब नहीं दिया। तभी पीछे सात आठ फूट के दो आदमी और एक लड़की आयी और रुद्राक्ष को बोली तुम कँहा रह गए थे हम लोग कबसे तुमको ढूंढ रहे थे। उसके बाद वो लड़की अपना कार्ड दिखाती है वो रुद्राक्ष को लेकर अंदर चली जाती है उसके पीछे वो दो आदमी भी आ जाते है। आखिर कौन थी वो लड़की? ऐसा कौन सा कार्ड दिखाया उसने? उसने रुद्राक्ष की मदद क्यों की?राकेश स्टोरी । वो लड़की और उसके आदमी रुद्राक्ष अग्निवंशी को लेकर उस साम्राज्य मै प्रवेश कर जाते है। उस लड़की की उम्र भी ज्यादा नहीं थी 15साल के आसपास होंगी.13साल का रुद्राक्ष होने वाला था. मगर मजबूत कद काठी के कारण वो पंद्रह साल का लगता था उसका गोरा चेहरा और लेहराते बाल उसको योद्धा का लुक देते थे। वो लड़की भी बला की खूबसूरत थी। ज़ब वो लोग काफ़ी आगे आ गए ज़ब उनको कोई सैनिक नहीं दिखाई दिया तो वो लड़की बोली तुम यंहा नये आये हो है ना। तुम यंहा के तो नहीं लगते हो। तुम्हारा नाम क्या है। उसकी बातो को सुनकर वो कहता है मेरा नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी है. वो उसको सच बता देता है वो बोलता है मै पृथ्वी लोक से आया हूँ। कुछ जरुरी काम से। वो उस लड़की से कहता है तुम्हारा नाम क्या है वो कहती मेरा नाम राजकुमारी सीमा है और मै गरुड़चील साम्राज्य से हूँ। यह तुम्हारे साथ कौन लोग है वो कहती है यह मेरे सुरक्षा कर्मी है। हम लोग यंहा से व्यापार करते है। मै यंहा कुछ सामानखरीदने आयी थी यंहा का राजा काली शक्ति का धारक है हम दोनों मै सन्धि हो रखी है इसलिए कोई जल्दी से सन्धि नहीं तोड़ता है। सीमा पूछती है तुम किस काम से आये हो वो कहता है यंहा के पुराने सम्राट का लड़का और महा गुरूजी जिन्दा है। यह सुनकर सीमा उसकी मुँह पर हाथ रख देती हैं और कहती है खुद भी मरोगे और मुझको भी मरवाओगे। चलो तुम साथ कमरे मै बैठ कर बाते करेंगे। उसकी बाद वो एक शानदार ईमारत के सामने जा पहुँचती हैं और अपना कार्ड दिखाती हैं उसको एक राजसि कमरा बुक हो जाता है रुकने के लिए। वो चारो अपने कमरे की तरफ चलने लगते हैं और अपने कमरे मै जा पहुंचते हैं। वो कमरा बहुत बड़ा होता हैं आगे सुरक्षा कर्मी के लिए जगह थी और पीछे राजकुमारी के लिए। रुकने की व्यवस्था थी। बीच मै दरवाजे थे। अंदर जा कर कहती है जो बाते तुमने मुझे बताई हैं यंहा किसी को भी मत बोलना वरना मारे जाओगे. उसको अपनी फिकर करते हुए ज़ब रुद्राक्ष देखता तो कहता है ठीक हैं राजकुमारी जी मै किसी को भी नहीं बोलूंगा। सीमा थोड़ी बातूनी लड़की थी वो बातचीत करते रहते हैं आखिर मै सीमा कहती है वो लोग कैसे है तो वो कहता हैं तुम मिलना चाहती हो उन लोगों से क्या बोलो। इस बात पर उसको लगता हैं रुद्राक्ष मज़ाक कर रहा है। वो कहती तुम्हारा मज़ाक अच्छा था। रुद्राक्ष कहता हैं अपने अंगरक्ष क को बोल दो तुमको तीन चार घंटे परेशान ना करें मै तुमको उन लोगों से मिलवा दूंगा.उसकी बातो को मज़ाक समझ कर वो अपने लोगों को बोल देती हैं कोई उसको परेशान ना करें। उसकी बाद वो कहती मिलवाओ मुझे उन लोगों से. रुद्राक्ष समय और अंतरिक्ष विघटन विधि का प्रयोग करता हैं और राजकुमारी सीमा का हाथ पकड़ कर उसमे प्रवेश कर जाता हैं वो सीधा अपने महाल मै पहुंच जाता हैं। राजकुमारी खुद को दूसरी दुनिया मै पा कर हैरान रह जाती हैं। दिव्या नाग को बोलता है सबको सुचना देने के लिए और कुछ समय बाद सब लोग आ जाते हैं। सब लोग रुद्राक्ष को सम्राट बोल रहे थे। सीमा चुपचाप खड़ी हुई सब देख रही थी वो अभी भी सदमे मै थी। वो छोटा सा 21फनो वाला सांप फिर उसकी शरीर मै किरण बन कर समा जाता है। छोटा रहने के लिए दक्ष को रुद्राक्ष नें ही बोला था उसने मानसिक संकेत भेज दिया था। फिर कुछ देर बाद रवि और महा गुरूजी माधव आचार्य आ जाते हैं. रवि रुद्राक्ष को बोलता है तुमने इतने महीने लगा दिए हम लोग तो डर ही गए थे। रुद्राक्ष रवि को बताता हैं वो किसी और आयाम मै चला गया था वंहा से उस जंगल मैइसलिए इतना टाइम लग गया मुझे, उसके साथ लड़की कोदेख कर रवि बोलता हैं यह कौन हैं। तो रुद्राक्ष राजकुमारी सीमा को अपना परिचय देने को कहता हैं। सीमा ज़ब अपना परिचय देती हैं तो महा गुरूजी माधव आचार्य ध्यान से सुन रहे थे। रवि सीमा से गरुड़सर्प लोक मै क्या हो रहा उस बारे मै जानकारी लेता हैं। जितना सीमा को अपनी उम्र के हिसाब से पता था वो सब बता देती हैं। फिर रवि सभी के लिए भोजन मांगबता हैं और उसको सब कुछ बताने लग जाता हैं गुरूजी भी उसको सब बात बताते है हमारा राजकोष दो सौ करोड़ लाख हज़ार मुद्रा हो गयी हैसभी जानवर और मणि की बोली लगवा दी थी नीलामी घर से। यह सुनकर रुद्राक्ष खुश हो जाता हैं। और साम्राज्य के सभी लोग और योद्धाओ की प्रगति कैसे चल रही हैं। सब कुछ जानने के बाद। वो रवि से पूछता हैं तुम बताओ वंहा क्या चाहते हो। वो कहता हैं मै अपने माँ बाप का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने दे सकता। वो सिंघासन मेरा हैं जिस पर वो दुस्ट पापी बैठा हुआ हैं। सीमा अब तक काफ़ी समझ चुकी थी वो कहती है उसके लिए रणनीति बनानी जरुरी है हम अकेले लड़ कर उस से नहीं जीत सकते। सीमा की बाते सुनकर वो रुद्राक्ष की तरफ देखता है तो वो मुस्करा देता है रवि और महा गुरूजी माधव आचार्य जी समझ जाते है रुद्राक्ष के बारे मै सीमा कुछ नहीं जानती है। फिर वो लोग भोजन करते है और रुद्राक्ष सीमा को लेकर वापस टेलीपोर्ट हो जाता है उसी कमरे मै। वापस अपने कमरे मै आकर वो बहुत खुश हो जाती है सीमा कहती है यह तो तुम्हारे पास कमाल की शक्ति है। आज वो एक नयी दुनिया मै घूम क़र आयी थी. मगर वो सोचती है अगर किसी को यह बाते बोलेगी तो वो उसको पागल समझ लेगा। राजकुमारी सीमा और रुद्राक्ष दोनों आराम करते हैं वो वंहा से कुछ जड़ी बूटी खरीद क़र रख लेती हैं और वो रुद्राक्ष से पूछती हैं तुम क्या करोगे अब. यंहा तुम्हारा यंहा रुकना खतरे से खाली नहीं हैं और तुम्हारे साथ कोई सुरक्षा के लिए भी नहीं हैं तुम मेरे साथ चलो हमारे साम्राज्य मै पीताजी से बाते करके कुछ मार्ग जरूर निकल क़र आएगा। वो कहता हैं ठीक हैं और उसके बाद वो गरुड़सर्प साम्राज्य छोड़ देता हैं और राजकुमारी के साथ गरुड़चील साम्राज्य की तरफ चल पड़ता हैं। वो लोग अपने रथ मै सवार होते है और उनका रथ आसमान मै उड़ता हुआ उस समाराज्य के दिशा मै चल पड़ता हैं। नीचे वो जंगल पहाड़ी झेत्र का लुफ्त उठते हुए जा रहा था आधे दिन की यात्रा के साथ वो लोग अपने साम्राज्य की राजधानी मै जा पहुचे थे। वो दोनों अंगरक्षक रथ को राजधानी मै राजमहल के बगीचे मै उतारते हैं। और राजकुमारी सीमा और रुद्राक्ष भी रथ से उतर जाता हैं। राजकुमारी सीमा उन दोनों का नाम लेकर कहती राधमाधव सिंह जा क़र पीताजी को बोलो हम जड़ी बूटी लेकर आ गए हैं। वो दोनों महाराज को खबर देने के लिए चले जाते हैं और राजकुमारी सीमा रुद्राक्ष को लेकर अपने साथ महल के अपने निवास इस्थान की तरफ ले जाती हैं। सभी नौकर और दासी देख रही थी यह किसको अपने साथ लेकर आयी हैंकुछ देर बाद एक नौकर आकर खबर देता हैं की महाराज और महारानी नें उनको बुलया हैं। वो रुद्राक्ष को वंही अपने कमरे मै छोड़ क़र वो महाराज और महारानी से मिलने चली जाती हैं। वो उनसे मिलकर उनको जड़ी बूटी देती हैं और उनसे गरुड़ सर्प के पुराने लोगों के बारे मै जानकारी लेती हैं वो गुरु का भी नाम लेती हैं। महाराज और महारानी दोनों हैरान रह जाते है वो उनसे कहती हैं मेरा एक दोस्त हैं जो मुझे वंहा मिला था उसने ही मुझे उन लोगों से मिलवाया था। वो वंहा का सम्राट हैउसकी बातो को सुनकर दोनों हैरानी मै और आश्चर्य मै थे। वो दोनों एक दूसरे की तरफ देखते हैं और बोलते हैं हमें भी मिलवाओ अपने दोस्त से। सीमा रुद्राक्ष अग्निवंशी को बुलाने के लिए चली जाती हैं और इधर वो दोनों लोग आत्मिक सन्देश भेजते हैं कुछ लोगों को जो तुरंत हाजिर हो जाते हैंराजकुमारी सीमा रुद्राक्ष को मिलवाने के लिए ले आती हैं रुद्राक्ष उस पूछता हैं क्या बाते हुए तो वो सब कुछ बता देती हैं। रुद्राक्ष कहता है गई भैंस पानी मै.और वो महाराज और महारनी से मिलने जा पहुँचता है वो लोग देखते है सामने से एक मजबूत कद काठी का लड़का जिसके बाल कंधे तक आ रहे थे और जिसके बालो का रंग चमकिला था हल्का हल्का बड़ी शांति से चल क़र आ रहा था उसकी उपस्थिति ही सबको रहस्यमी एहसास दे रही थी। रुद्राक्ष के अपना परिचय दिया और उनसे पूछा अगर कोई सक हैं तो आप लोगों को निवारण क़र लेना चाइये। वंहा शून्य और महा शून्य स्तर के योद्धा खढ़े हुए थे। राजकुमारी सीमा हैरान रह जाती हैं इतनी जल्दी इतने सारे लोगों को देख क़र सब एक से एक शक्तिशाली योद्धा साम्राज्य के वंहा आ गये थे। उसकी बाद महाराज बोलते हैं राधमाधव राजकुमारी सीमा को सुरक्षित जगह पर ले जाओ महल की। वो कहते है जो आदेश महाराज। रुद्राक्ष शांति से कहता हैं मै कोई मायावी दैत्य या दानव नहीं हूँ ना मैंने आपकी लड़की के ऊपर कुछ किया है। वो सब लोग महल के वाहर लेकर आते हैं रुद्राक्ष को जो उनके बीच शांति से चल रहा था। यह खबर आग की तरह फ़ैल जाती हैं की महाराज के महल मै कोई मायावी दानव या दैत्य पकड़ा गया हैं। देखते ही देखते वंहा आसमान मै लोगों का जमघट लग लगजाता हैं सब देखने को पागल हो रहे थे कौन हैं यह मायावी दानव या दैत्य। कोई उसकी बातो को सुनकर मान ही नहीं रहा था। राकेश स्टोरी । चारो तरफ से योद्धाओ के बीच घिरा हुआ रुद्राक्ष उन लोगों को फिर से समझाने की कोसिस करता हैं। कोई उसकी बाते सुन क़र राजी नहीं होता हैं.इतने तीन लोग आसमान मै उड़ते हुए आ जाते हैं जिनकी दाढ़ी सफेद हो चुकी थी वो लोग हवा मै उड़ते हुए महाराज और महारनी के पास आते हैं और सारी बाते पूछते है मगर उनको भी विश्वास नहीं होता हैं।सब लोग उसको मारने के लिए बोलने लगते हैं तो भारी आवाज़ मै वो कहता है मुझसे दूर रहो ज़ब तुमको मेरी बात सुननी और माननी नहीं हैं तो मै यंहा से चला जाता हूँ आखरी बार बोल रहा हूँ वरना परिणाम तुम्हारे सोच से परे होगा। उसकी बातो को सुनकर सब हसने लगते हैं उनमे से एक योद्धा उसको अपनी thunder punch कौशल का प्रयोग करके उसको मुका मारने के लिए आगे बढ़ जाता हैं उन सबको लगा था इस मुके के बाद उसका शरीर ज़मीन पर पड़ा होगा। मगर परिणाम उनकी सोच के विपरीत आता हैं रुद्राक्ष अपनी जगह शांति से ही खड़ा रहा और उसका मुक्का अपने शरीर से टकराने दिया टकराने के बाद वंहा चीख गूंज गयी उस योद्धा की हाथ की हड़िया टूट चुकी थी। सबने बोलना शुरू किया जल्दी मारो इसको यह कोई मायावी हैं। अब रुद्राक्ष अग्निवंशी को गुस्सा आ गया था उसने अपना औरा और अपनी आभा को खोल दिया था उस पर सब लोगों नें हमले करना शुरू क़र दिए थे मगर वो सबके हमले अपने शरीर पर ही ले रहा था। फिर वो बोला अगर तुम लोग मारना ही चाहते हो तो ठीक हैं उसकी बाद उसने दक्ष को बोला और फिर सब लोगों नें देखा की उसकी शरीर से एक रौशनी की किरण निकली और वो दिव्यनाग मै बदल गयी और उस दिव्या नाग का रूप देखते ही देखते दो सौ फूट से भी लम्बा और विशाल हो गया था उसकी आभा के दवाब से आधे लोगों के शरीर के चीथड़े उड़ गए थे। आसमान से खून और मांस नीचे गिर रहा था 21 फन उसकी अपनी ही दिव्यता की कहानी कह रहे थे। उसकी बाद रुद्राक्ष उस दिव्या नाग के फनो पर खड़ा हो गया सारे योद्धाओ को गाज़र मूली की तरह दिव्या नाग नें खतम क़र दिया था। उनके आये हुए महा गुरूजी नें ज़ब यह देखा तो उसने इंद्र के वज्र को अवहन करना शुरू क़र दिया रुद्राक्ष नें देखा की वो दिव्या अस्त्र के प्रयोग करने जा रहा हैं तो उसने अपनी आभा को और दिव्या ऊर्जा के औरा को खोल दिया इस समय दोनों स्वर्ग से आये हुए देवताओं के देवता लग रहे थे। जिन लोगों नें जीतने भी दिव्या अस्त्र चलए उसके शरीर मै आकर सारे समाते गए अब सबको सदमा लग गया था किसको नाराज़ क़र दिया. महाराज के और महारनी के और महा गुरूजी के जीतने भी अस्त्र और शस्त्र थे सबने उसके शरीर मै अपना स्थान ले लिया था। उसने भायनाक तभाई मचा दी थी उसने उसके बाद बोला घुटने टेको जो टेकेगा वो जिन्दा रहेगा जो नहीं टेकेगा वो मरेगा। उसकी आवाज़ कई किलोमीटर गूंज रही थी। सबने अपने घुटने टेक दिए। फिर वो नार्मल होकर दिव्या नाग से नीचे उतरा और दक्ष को बोला उन सबको ख़तम क़र दो जो घुटने नहीं टेकते हैं। दिव्या नाग बिजली की गति से पुरे साम्राज्य मै घूम गयाउसने दिव्या नाग को बोला एलान क़र दो इस लोक का नया सम्राट रुद्राक्ष अग्निवंशी होगा। अपनी सारी शक्ति और ऊर्जा के प्रयोग के बाद उन लोगों के चेहरे पीले पड़े हुए थे। वो लोग भी अपने घुटने टेक चुके थेफिर रुद्राक्ष बोला तुम दोनों को मै राजकुमारी सीमा की वजह से जिन्दा छोड़ रहा हूँ और तुम गुरूजी तुमको मै माधव की वजह से जिन्दा छोड़ रहा हूँ। उसके बाद वो हवा मै द्वार खोलता हैं और दिव्या नाग को बोलता हैं रवि और माधव को लेकर आ जाओ कुछ ही देर मै वंहा दिव्या नाग महा गुरूजी माधव आचार्य और रवि को लेकर आ जाता हैं और रुद्राक्ष ऊर्जा द्वार बंद क़र देता है। उसके बाद रुद्राक्ष कहता हैं यह साम्राज्य मेरे अधीन हैं यंहा का सारा काम तुम लोग सम्भालो मै जरा गरुड़ सर्प साम्राज्य मै होकर वापस आता हूँ एक दिन मै सब कुछ संभाल लो तुम्हारे सम्राट का आदेश हैं यह। इन लोगों का क्या करना हैं आने के बाद देखता हूँ। उसके बाद रुद्राक्ष और दक्ष दोनों टेलीपोर्ट होकर गरुड़सर्प साम्राज्य की राजधानी के ऊपर दिखाई दिए और थोड़ी ही देर मै आसमान मै खतरनाक योद्धाओ के साथ युद्ध शुरू हो गया सारे योद्धा काली शक्ति से सम्पन्न थे त्रिनेत्रा धूमकेतु का गुस्सा इन काली शक्ति वाले लोगों पर उतार रहा था। ज़ब उसने देखा उसकी काली सेना नहीं टिक पा रही तो वंहा का सम्राट काला शेर सर्प खुद अपने भायनाक रूप मै लड़ाई के मैदान मै उतर गयाआसमान मै से खून सर लाशें बारिस की तरह नीचे गिर रही थी त्रिनेत्रा के हाथो मै सतरूपा नें प्रलय ला क़र रख दी थी नीचे लोगों को लग रहा था आज पूरा साम्राज्य नस्ट हो जायेगा। और फिर रुद्राक्ष अग्निवंशी नें सतरूपा को उस काला शेर सर्प पर चला दिया उसकी काली शक्ति को चीरते हुए उसका सर ज़मीन पर उड़ क़र जा गिरा उसका धड नीचे गिर गयाऐसा नज़ारा बन गया था देखने वालों के लिए जैसे रूद्र तांडव हो रहा हो पांच तत्व और शक्तियां उसके इशारे पर नाच रही थी। सम्राट को ख़तम करने के बाद रुद्राक्ष नें नये सम्राट का नाम घोषित क़र दिया था। सारे काली शक्ति के योद्धा मारे गए थे जो जिन्दा बचे थे वो अपने प्राण को लेकर जंगल मै भाग गए थे। आम लोग वंही उसके काली शक्ति के सम्राट के मरने से खुश थे। रुद्राक्ष राजमहल मै जा क़र सिंघासन पर बैठ गया था उसने दक्ष को सफाई करने का आदेश दे दिया था कोई भी काली शक्ति का योद्धा नहीं बचना चाइये.और वो फिर नार्मल होकर सिंघासन पर बैठ गया। फिर उसके दिमाग़ कुछ विचार आया और वो रवि के पास टेलीपोर्ट हो गया। जैसे ही वो वापस टेलीपोर्ट होकर महल मै आया तो देखा सब लोग काम को सँभालने मै लगे हुए थे। उसने रवि को बोला रवि वो दुस्ट सम्राट मारा गया हैं मेरे हाथो चलो वंहा भी कोई काम देखने के लिए चाइये मुझे। उसकी बात को सुनकर माधव बोले सम्राट आप रवि और महाराज को ले जाये। साथ मै मेरे मित्र के दो यह सिस्य ले जाओ आप यह लोग सब कुछ संभाल लेंगे हम यंहा का काम महारानी के साथ और इनके साथ मिल क़र संभाल लेंगे। रुद्राक्ष कहता हैं ठीक जो आपको ठीक लगे यह लोक आप लोगों का ही हैं. और उसके बाद रुद्राक्ष उन सबको लेकर दुबारा महल मै वापस आ जाता है। राकेश स्टोरी ।। रुद्राक्ष अग्निवंशी रवि, सम्राट और दो गुरु को लेकर काला शेर सर्प के साम्राज्य मै आ गया था उसने रवि और उन सब लोगों को यंहा की सारी व्यवस्था को अपने हाथो मै लेने का काम दे दिया था। थोड़ी देर के बाद दिव्या नाग वापस आ गया और बोला आपके कहने के अनुसार सारा काम क़र दिया हैं. उसके बाद रौशनी मै बदल क़र वो रुद्राक्ष के शरीर मै गायब हो जाता हैं। अंदर से immortal ड्रैगन किंग मानसिक संकेत देता हैं और कहता है मास्टर आप मुझे कब मौका दोगे इन दानव और दैत्य को मारने के लिए. आप सारा काम इसको ही देते हो करने के लिए इस बात पर त्रिनेत्रा हस्ता हुआ कहता हैं यह जगह तुम्हारे लायक नहीं हैं ज़ब दूसरे वृह्माण्ड मै यात्रा करेंगे तो तुमको भी मौका ही मौका मिलेगा. वो कहता हैं ठीक है मास्टर। अगर किसी को यह बात पता चल जाये तो वो सदमे मै ही मर जायेगा। रुद्राक्ष रवि को कहता हैं मै विश्राम करने राजमहल के कक्ष मै जा रहा हूँ जरुरी ना हो तो परेशान मत करना। वास्तव मै आज धूमकेतु के लोगों को मारते वक्त उसको कुछ याद आ गया था इसलिए वो विश्राम करने चला आया था। रुद्राक्ष नें आने के बाद स्नान किया और भोजन के लिए नौकर को बोला उसने फटाफट रसोईये से रुद्राक्ष के लिए भोजन का प्रबंद किया। और फिर वो मखमल के विषटर पर नींद लेने लग गया। वो एक दिन रात चैन से सोया। ज़ब वो नींद से उठा उसने बोला भोजन का प्रबंद किया जाये। नौकर भोजन की व्यवस्था करने चला गया। और ज़ब वो नहा धोकर निकला और उसने महाराज वाले कपडे डाले अब उसका लुक अलग ही आ रहा था। उसके बाद वो भोजन करने लगा और फिर से एकांत मै चला गया। इस बार वो एकांत के लिए पहाड़ी पर टेलीपोर्ट होकर आ गया था। उसने वंहा फार्मेशन बनाया और कुछ जाप क्रिया करने लग गया। यह क्रिया स्वर्ग के देवताओं की क्रिया थी। ज़ब स्वर्ग के देवताओं को कोई जानवर उनको मिलता था तो वो लोग इस आत्मिक क्रिया के द्वारा अपना आत्मिक अनुबंध अपने पालतू जानवर से बनाते थे। उसको याद आ गया था ज़ब देवताओं और दानवो के युद्ध हुआ था जिसमे उसकी मृत्यु हुई थी यानि की उसका शरीर नस्ट हुआ था उसकी आत्मा फिर भी बच गयी थी। उस से पहले एक बार वो विष्णु लोक गया था जँहा भगवान विष्णु शेषनाग के ऊपर नींद मै थे। तो उसको वंहा एक हज़ार फनो वाला नाग जो झीर सागर मै था उसको मिला था.वो उसके साथ ही वापस आना चाह रहा था मगर वो उसके साथ अपना आत्मिक अनुबंद करके उसको वंही छोड़ आया था झीर सागर मै। उसने बोला था है प्रभु मै इसको बाद मै ले जाऊंगा आपकी अनुमति के हिसाब से मैंने अपना संबंध बना लिया हैं। उसके बाद युद्ध हुआ और उसकी मृत्यु की खबर फ़ैल गयी। अगर किसी जानवर का मास्टर मर जाता हैं तो वो भी ख़तम हो जाता हैं। अगर आज त्रिनेत्रा अरबो खरबों साल बाद वापस लौटा हैं तो क्या उसका वो स्वर्ग का जानवर भी लौटेगा या नहीं बस यही चीज के लिए वो क्रिया क़र रहा था। उसको जाप करते हुई कई दिन बीत जाते हैं फिर वो कुछ और दिन उस क्रिया को करता रहता हैं। उस क्रिया को करते करते वो गहन समधी की तरफ निकल गया था। और इधर कुछ दिन बाद वृह्माण्ड और गैलेक्सी को पार करती हुई रोशिनी की किरण तेज़ी से बढ़ती जा रही थी जैसे वो किसी को ख़ोज रही हो आखिरी मै वोगरुड़सर्प लोक के आयाम मै प्रवेश क़र गयी और कुछ ही सेकंड मै वो प्रकशित पुंज रुद्राक्ष के सामने खड़ा हुआ था जँहा पर वो समाधी की अवस्था मै बैठा हुआ था। ज़ब तक समाधी से रुद्राक्ष उठा नहीं तब तक वो प्रकाश पुंज वंही रहा। और कुछ समय बाद रुद्राक्ष नें अपनी आँखे खोली और साधना से वाहर आ गया। फिर वो उठा और उसने उस फार्मेशन को हटा दिया। उसके बाद रुद्राक्ष नें देखा की एक प्रकाश पुंज वंहा हवा मै रुका हुआ हैं जैसे उस पुंज मै से कोई उसको देख रहा हो। उसको जानी पहचानी अनुभूति महसूस हुई। त्रिनेत्रा बोला भुजंगा क्या यह तुम हो क्या तुम झीर सागर से आ रहे हो। ज़ब उसने अपना नाम सुना और वो कँहा से आ रहा हैं वो प्रकाश पुंज त्रिनेत्रा के पैरो मै गिर गया। उसमे से आवाज़ आयी मास्टर आप जीवित यह तो मुझे पता था। मगर मै आपको ख़ोज नहीं पाया था. उसके लिए मुझे आप माफ़ क़र दोत्रिनेत्रा बोला भुजंगा बहुत लम्बी कहानी हैं फिर कभी बताऊंगा। और त्रिनेत्रा नें उसके ऊपर अपना हाथ रखा और वो उसके शरीर मै समा गया। वो उस से मानसिक रूप से पहले ही जुडा हुआ था। भुजंगा के उसके आत्मिक झेत्र मै जाते ही हलचल मच गयी। त्रिनेत्रा नें उसको बताया मै इन लोगों का भी मास्टर हूँ। उसके अंदर जा क़र उसको परम दिव्या ऊर्जा मिलने लगी वो खुशी के मारे उसके आत्मीय झेत्र मै घूम रहा था। उसको परम दिव्यता का पता था और अब उसका मास्टर उस से कंही आगे जा चुके थे। उसके बाद रुद्राक्ष टेलीपोर्ट होकर वापस महल मै आ जाता है। उसको इस लोक के मशले भी हल करने थे जाने से पहले। वो महल मै वापस आकर अपने कमरे से बाहर निकलता हैं और सभा गार मै जाता हैं और सबको आने के लिए बोल देता हैं नौकर और सैनिक उसका आदेश तुरंत जा क़र सबको सुना देता है की सम्राट नें बुलाया हैं। इधर रुद्राक्ष को पूरा एक महीना हो गया था ज़ब वो साधना मै गया था। रवि और सभी लोग आ जाते हैं रवि पूछता हैं इतने दिनों कँहा चले गए थे आप। इस बात पर रुद्राक्ष पूछता हैं मुझे गए हुई कितना समय हुआ हैं। वो सब लोग हैरान होकर कहते हैं आपको पूरा एक महीना हो गया गयाब हुए। ह्म्म्मम्मकुछ जरुरी काम था उसको निपटा रहा था अब तुम लोग बताओ काम पूरा हो गया क्या। रवि बोला सब काम पूरा हो गया हैं काली शक्ति सभी लोग खतम हो चुके हैं अगर कोई बचा खुचा वो कंही जंगल मै छुप गए हैं ठीक हैं और यंहा का राजकोष कितना हैं। रवि कहता हैं आप खुद ही चल क़र देख लो सम्राट। उसके बाद वो लोग राजकोष देखने जाते हैं। राजकोष मै हीरे मोती मणि मानिक स्वर्ण मुद्रा का भंडारा लगा हुआ था। रुद्राक्ष रवि से पूछता है तुमको इस साम्राज्य को चलाने के लिए कितने कोस की जरुरत होंगी. रवि कहता हैं इस राजकोष के 25%राशि मै ही साम्राज्य अपनी आसमान की बुलंदी को छू लेगा। हम्म्म्म तो ठीक हैं उसके बाद रुद्राक्ष अपना हाथ हवा मै घुमाता हैं और 75%सामान गायब हो जाता हैं। उसके बाद रवि और लोगों को लेकर वो टेलीपोर्ट होकर माधव के पास पहुँच जाता हैं। उन सब लोगों को आया देख क़र माधव कहते हैं बडे दिन लगा दिए आपने आने मै सम्राट। इस बात पर रवि उनको बता देता हैं वंहा जो कुछ हुआ था। फिर रुद्राक्ष कहता हैं गुरूजी यंहा की व्यवस्था कैसी चल रही हैं। वो उन लोगों को राजमहल के सभागार मै आने को बोलता हैं सब लोग बैठ जाते हैंऔर वो सिंघासन पर जा क़र बैठ जाता हैं। फिर वो रवि और माधव जी से पूछता हैं आप बताये इन लोगों का क्या करना हैं मैंने यह फैसला आपके ऊपर छोड़ दिया. जो भी निर्णय लेना हैं आप मुझे बताओ। माधव कहते हैं सम्राट इनसे गलती तो हुई हैं और इन लोगों नें अपनी गलती को सुधार भी लिया हैं और फिर यह हमारे पुराने महाराज और महारानी के मित्र भी थे। इन सब बातो को सोचते हुए मै कहूंगा आप इनको एक मौका और दे। रुद्राक्ष कहता हैं ठीक हैं जैसी आप लोगों की मर्जी। मै कल यंहा से चला जाऊंगा यह सब तुम लोगों का हैं तुम लोगों को ही सम्भलाना हैं। रवि को उसका साम्राज्य दिलाना मेरा लक्ष्य था वो पूरा हो चूका हैं। यह साम्राज्य मै वापस इन लोगों को सोपता हूँ। फिर वो उन लोगों से कहता हैं इस साम्राज्य का राजकोष कँहा हैं. इस पर महाराज और महारानी उसके राजकोष दिखाने ले जाते हैं। वो पूछता हैं आप लोगों को इसमें से कितना चाइये। 50% ठीक हैं और रुद्राक्ष बाकी सब कुछ गयाब क़र देता है। फिर वो कहता हैं राजकुमारी सीमा कँहा है। वो लोग कहते हैं वो अपने कमरे मै हैं। वो उनके माता पिता से पूछता ही क्या मै उनसे मिल सकता हूँ। वो कहते है आप उन से मिल सकते वो ही तो आप को यंहा लेकर आयी थी. वो राजकुमारी सीमा से मिलता हैं। राजकुमारी सीमा उसको देख क़र कहती हैं सम्राट आप यंहा मुझे बुलाया होता। इस बात पर रुद्राक्ष कहता हैं मै कोई सम्राट नहीं हूँ मै तुम्हारा दोस्त हूँ जिस से मै पहले मिला था। उसके बाद वो राजकुमारी को लेकर उन सबके सामने आता है और कहता हैं मै एक सलह देना चाहता हूँ करना या ना करना वो आप लोगों के मन पर हैं रवि मेरा पहला मित्र बना था यह दोनों एक जैसे हैं दोनों बोलते बोलते नहीं थकतेआप लोगों का विचार बने तो दोनों को एक साथ क़र दीजिए। यह सुनकर सभी लोग हसने लग जाते हैं और रवि बोलता हैं क्या रुद्राक्ष भाई आप भी ना। पर वो भी शर्मा रहा था। जाने से पहले रुद्राक्ष रवि सीमा और सभी प्रमुख लोगो को एक आयाम से दूसरे आयम मै कैसे सन्देश भेज सकते है विधि सीखता हैं। और फिर वो वापस अपने पृथ्वी लोक पर अपने दक्षिण साम्राज्य मै टेलीपोर्ट हो जाता हैं। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी गरुड़सर्प लोक से वापस आ चूका था वंहा जाने का राश्ता जल्दी से किसी को नहीं मिलने वाला था बांकी वहां के लोग अपनी समस्या को सुलझा सकते थे। आपदा की परिस्थिति मै वो उनको बता क़र आया था कैसे सन्देश भेजना है। फिलाल वो टेलीपोर्ट होकर महल मै वापस आ गया था. उसके वापस आने की सुचना तुरंत प्रमुख और मुख्य लोगों दे दी गयी थी। वो सभी लोग अपने सम्राट का स्वागत करने के लिए महल मै आ गए थे उन सब लोगो का अभिबादन लेने के बाद वो अपने साम्राज्य का हालचाल पूछता हैं की सब काम कैसे चल रहे हैं. किसी को कोई परेशानी तो नहीं हो रही हैं. भीम को बोलता क्या सभी राज्यों मै सब कुछ ठीक हैं तो भीम जवाब देता हैं सब कुछ ठीक चल रहा हैं। हम्म्म्मफिर वो सभी राज्यों और रियासत और गांव मै मै सुचना जारी करवाता हैं जो भी बच्चे काबिलियत और प्रतिभा साली होंगे जो गुरुकुल की परीक्षा चयन प्रक्रिया मै मै अपना अच्छा प्रदर्शन करंगे उन सभी लोगों का खर्चा सम्राट के राजकोष से ज्यागा। एक महीने के अंदर यह सुचना साम्राज्य के कोने कोने तक जा पहुँचती हैं। गुरुकुल के वहार छात्रों की लाइन लग जाती और अब वो लोगो स्वर्ण मुद्रा की वजह से आगे प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे थे अब अपने आप मै सुधार क़र सकते थे। वो इसके लिए कुछ मापदंड तय करता हैं और उसको सभी गुरुकुल मै लागु करवा देता हैं। इस तरीके से साम्राज्य मै नये नये काबिल योद्धाओ को तैयार किया जा सकता था। जितनी जल्दी लोगो अपने सातों चक्र को जागरूक क़र पाएंगे उतनी ही जल्दी शक्ति मै इज़ाफ़ा होगा। उसने अपने समाराज्य मै हकीम मुख्यालय बनावया और सभी तरीके की सुबिधा दी उन औसदिकारो करो को.जड़ी बूटी विभग को उसने अलग लोगो नियुक्ति की। अब लोगो मै बदली हुई व्यवस्था और शासन प्राणली को देख क़र सब मै जोश और ख़ुशी थी। उसने अपने साम्राज्य से वाहर के दूसरे लोगों को भी सभी के बराबर समान अवसर दिया अपनी प्रतिभा को निखारने का। , उतर, पश्चिम और पूर्व से छात्रों और वायपारी लोगो नें दक्षिण को ज्यादा मेहत्व दिया। उसने गरुड़सर्प लोक के एक साम्राज्य का सारा खजाना इन जगह मै बाँट दिया था और इन सबका अलग से एक कोष बना दिया था राजकोष के अधीन था। सभी गुरुकुल के लिए अलग, हकीम और जड़ी बूटी विभाग के लिए अलग। राजधानी के योद्धाओ को सीधा साम्राज्य के आधीन ही रखा गया। सबको एक सिस्टम के तहत आगे जाने की पूरी सुविधा थी बिना किसी भेदभाव के। उसने अपने साम्राज्य के झंडे को भी त्रिदेव के प्रतिक से बनवाया और उसको हर जगह लागु करवा दिया। उसका यह कदम लोगों को भगवान से और आस्था और विश्वास से जोड़ता था। उसने बहुत से युद्ध कलाओं की तकनीक की किताबें गुरुकुल हुए योद्धाओ मै बाँट दी। जिससे वो और जल्दी शक्तिशाली हो जाये। वो यह काम इसलिए क़र रहा था उसको पता था वो यंहा हमेशा तो रहेगा नहीं मगर लोगो सक्षम होने चाइये। उसके इस शासन की तारीफ धीरे धीरे लोगो नें और साम्राज्य मै भी करनी शुरू क़र दी थी। कुछ लोगो खुश थे तो कुछ लोगो के दिल मै आग लगी हुई थी वो अवसर तलाश क़र रहे थे उसको मारने के लिए। कुछ लोगो उसके साम्राज्य को हड़पने की सोच रख रहे थे कुछ लोगो का मानना था वो एक जवान पंद्रह साल का लड़का ही तो है। और अभी तो उसकी उम्र उस से भी कम हैं। अलग अलग लोगों की अपनी योजना थी और इधर रुद्राक्ष अपने लोगों की शक्ति बढ़ाने मै लगा हुआ था। कहते हैं ना शांति ज्यादा दिनों तक नहीं रहती हैं और हर शक्तिशाली कमजोर को दबाने की कोसिस करता हैं। कोई एहम और वहम मै ही मर जाता है। इधर हिमालय की पहाड़ो के बीच कई दूर जँहा हज़ारो किलोमीटर तक जंगल और पहाड़ी ही नज़र आ रहे थे। एक छोटा पहाड़ विस्फोट के साथ फट जात है और उस जगह ज़मीन के नीचे से एक आकृति निकलती हैं जिसका शरीर वज्र की तरह सोने के रूप मै चमक रहा था उसकी लम्बी जटाए और सफेद वाल उसको कवर किये हुए था। हाहाहा वो ख़ुश होकर चिल्लाया आखिरी मै मैंने अपनी लाखो वर्षो की साधना से तुमको पा ही लिया। वो अपना हाथ घूमता है तो उसके बाल दाढ़ी सब एक रूप मै आ जाते हैं वो कुछ मंत्र पड़ता हैं और फिर उसके सामने एक आकृति जन्म लेती हैं। धीरे धीरे वो आकृति एक पचास से ऊपर फनो वाले विशाल नाग मै बदल जाती हैं वो नाग चार पांच पर्वत जितना विशाल और मजबूत था उसने शरीर पर सर्प सलक चमक रहे थे जो उसकी शक्ति की कहानी कह रहे थे। वो मनुष्य की आकृति हिमालय के ऊपर आसमान मै उड़ती हुई उन पर्वत श्रृंखला से वाहर अति हैं आसमान मै उड़ते हुए भी उसका दवाब नीचे के जानवरो पर पड़ रहा था। सबसे पहले उसके राश्ते मै उतर राज्य पड़ता था। उतर साम्राज्य के सम्राट नें ज़ब भयानक शक्ति को महसूस किया तो उसने अपनी हार मान ली वो अपने लोगों की जान नहीं गवाना चाहता था। वो दिव्या नाग गायब हो गया और हवा मै एक आदमी उड़ता हुआ नज़र आया जो चमक रहा था। हाहाहावो साम्राज्य की गदी पर जा क़र बैठ गया और बोला तुम बहुत समझदार हो सम्राट। अब से तुम मेरे खास आदमी हो मै लाखो सालो के बाद साधना से वाहर आया हूँ मुझे बताओ धरती पर कितना परिवर्तन हुआ हैं वर्तमान मै क्या हालत है। उतर का सम्राट उसको तोते की तरह सब कुछ बताना शुरू क़र देता हैं वो भोजन के साथ साथ उसकी बातो को सुनता जा रहा था। उसको सबसे ज्यादा दिलचस्पी दक्षिण के साम्राज्य के बारे मै जागी ज़ब उसको पता चला की उसका सम्राट कोई पंद्रह साल का लड़का हैं। कहते हैं विनाश काले विपरीत बुद्धि। वही इस अघोरा के साथ हो रहा था। अपनी नयी शक्ति घमंड मै वो अपने को दुनिया का भगवान समझने लगा था। वो चक्रवती सम्राट बनने का सपना देख रहा था अपने मन मै.वो सम्राट को बोलता हैं उनको अपने साम्राज्य को हमारे अधीन होने का सन्देश भेजो। उसको बोलो अपने घुटने टेके हमारे सामने. यह शब्द गर्व और अहंकार से परिपूर्ण थे। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अगिनवंशी अपने महल मै आराम से नींद ले रहा था सुबह के समय भीम आया और उसको उठाया और बोला उतर साम्राज्य के सम्राट की तरफ से हमें घुटने टेकने और अपने साम्राज्य के अधीन होकर काम करने को कह रहे. नीचे एक नाम और लिखा हुआ हैं अघोरा। हम्म्म्रुद्राक्ष कहता यार भीम तूने नींद ख़राब क़र दी जा के उसको बोल दे अपनी सेना को लेकर आ जाये हमें भी युद्ध करना आता हैं हमारे लोगो कमजोर नहीं हैं.साम्राज्य के वाहर युद्ध के मैदान मै लड़ने को तैयार हैं हमें किसी की गुलामी पसंद नहीं हैं। रुद्राक्ष के बताये अनुसर भीम उस दूत को सन्देश दे क़र भेज देता हैं। ज़ब अघोरा को यह पता चलता हैं की उन लोगों नें समर्पण के लिए माना क़र दिया हैं तो वो कहता हैं चलो अच्छा हैं इस बहाने मुझे सर्पधुमि की शक्ति का परिक्षण करने का मौका मिल रहा हैं। वो कहता हैं अपनी सेना को लड़ाई के लिए तैयार करो हम खुद उसको नेतृत्व करेंगे। अंगले दिन उतर साम्राज्य की सेना लाखो योद्धाओ को लेकर साम्राज्य पर आक्रमण करने के लिए आ जाती हैंज़ब दक्षिण साम्राज्य के योद्धाओ की नज़र इतनी विशाल सेना पर पडती हैं तो वो डर जाते हैं। रुद्राक्ष उनके चेहरे पर डर का भाव को देख क़र कहता हैं सामने कितने भी दुश्मन क्यों ना खड़े हो मगर एक वीर योद्धा का धर्म शत्रु का विनाश ही करना होता हैं। और यह लोगो का झुण्ड तो खुद ही चल क़र आया हैं। ज़मीन और आसमान मै लोगो का झुण्ड ही नज़र आ रहा था। उन सबको देख क़र अघोरा बोलता हैं तुम्हारा सम्राट कौन है। उसको बोलो मेरे सामने अपने घुटने टेके। उसकी बात को सुनकर रुद्राक्ष अग्निवंशी वाहर आता हैं औरहवा मै उड़ते हुए बीच मैदान मै खड़ा हो जाता है और फिर अपनी गंभीर आवाज़ मै बोलता है तुम लोगों को मै एक मौका दे रहा हूँ शांति से वापस चले जाओ और धर्म और न्याय पूर्वक शासन करो। उतर का सम्राट बोलता हैं मुर्ख तू हमारे महामहिम अघोरा के मुँह लग रहा हैं तुझे इसकी कीमत अपने प्राण दे क़र चुकानी होंगी। अभी तक तो वो तुझसे प्यार से बात क़र रहे थे मगर ज़ब तू खुद ही मरना चाहता है तो कोई क्या क़र सकता है। हम्म्म तो तुम लोगो नें सोच लिया हैं। अघोरा कुछ मंत्र पड़ता हैं और उसको मंत्र पड़ता देख क़र उतर का सम्राट की आँखों मै चमक आ जाता हैं। और फिर कुछ देर मै आसमान मै एक भयानक आकृति प्रकट हो जाती है। 51फनो वाला दिव्या नाग था सर्पधुमि. अघोरा उसके ऊपर बैठ जाता हैं और उसका आकर और बढ़ने लगता हैं। अघोरा नें अपनी आभा को खोल दिया था। ज़ब रुद्राक्ष देखता है की उसके योद्धा यह दवाब सेह नहीं पा रहे हैं तो वो बोलता हैं सारे लोगो पीछे हट जाओ कोई भी मेरे पास मत आना। रुद्राक्ष का आदेश सुनते ही सारी सेना पीछे हट जाती हैं। अब रुद्राक्ष अकेला उस लाखो की सेना के सामने शांति से खड़ा हुआ था। वो अघोरा को कहता है शक्ति के साथ जिम्मेदारी भी आती है तुम इस तरीके से धर्म का पालन करोगे। और उसके बाद रुद्राक्ष भी अपनी आभा छोड़ देता हैं और दिव्या ऊर्जा का औरा खोल देता है कुछ ही पालो मै वो स्वर्ग के देवताओं का भी देवता नज़र आ रहा था उसके शरीर से तीन रोशिनी निकलती हैं एक दिव्या नाग दक्ष जिस पर वो शान से खड़ा हो जाता है और दूसरी दिव्यनाग स्वर्ग के भुजंगा की थी ज़ब वो अपना विकारल रूप लेता हैं तो हाज़रो फन के साथ वो कई किलोमीटर का एरिया कवर क़र लेता है उसके दवाब से उस सांप और अघोरा को बड़ी तकलीफ हो रही थी आधे योद्धा तो दवाब के कारण ही उनके शरीर के चीथड़े हो गए थे ज़ब की कोई हमला भी नहीं किया गया था। सब के सब सदमे थे की किस प्रकार की शक्ति हैं तीसरी रोशिनी जो immortal ड्रैगन किंग की थी उसके सौ मुँह और और विशाल शरीर नें आधी से ज्यादा महादीप को घेर लिया थे हर तरफ भयानक दवाब था यह दवाब इतना था की दूसरे दो साम्राज्य भी महसूस क़र रहे थे। रुद्राक्ष के आदेश मिलते हैं भुजंगा नें कुछ पल मै ही उस नाग के शरीर को नस्ट क़र दिया इधर एक चक्कर लगा क़र वो विशाल ड्रैगन वापस रुद्राक्ष के शरीर मै चला गया। और फिर भुजंगा भी उसके शरीर मै वापस चला गयाउसके बाद अघोरा से कहता हैं बताओ तुम अब क्या चाहते हो। उसको कोई जवाब ना देते देख क़र रुद्राक्ष एक लाल रोशिनी की किरण छोड़ता हैं जो उसके शरीर से टकरा जाती हैं और कुछ ही देर मै उसका शरीर नस्ट हो जाता हैं।। वो नार्मल हो जाता हैं और दक्ष को सफाई करने के लिए बोल देता हैं। जो उसके सैनिक और योद्धाओ नें रुद्राक्ष की इतनी भयानक शक्ति को देखा तो उनकी आत्मा तक काँप गयी थी। कुछ ही समय मै वंहा लाशो का अम्बर लगा हुआ था। वो अपने योद्धाओ को बोलता हैं इन सबकी स्टोरेज रिंग ले लो तुम सब के काम आएँगी। उसके बाद वो साम्राज्य का काटा हुआ सर और उस नाग का सर लेकर उतर साम्राज्य की राजधानी के बीच मै डाल देता हैं साम्राज्य मै चारो तरफ हलचल हो जाती हैं की सम्राट मारे गए जो लड़ाई के लिए गए थे। और वो दिव्या नाग भी जो लोगो बच गाये थे उन लोगों नें पूरा सब कुछ अपने साथियो को बता दिया था। रुद्राक्ष अपने साथ आए हुए योद्धाओ को सारी चीजों पर नियंत्रण लेने के लिए बोल देता हैं और खुद उड़ता हुआ अपने पंख से राजमहल आ जाता है। वो अपने दिव्या नाग से कहकर पुरे साम्राज्य मै घोषित करवा देता हैं की अब से यह साम्राज्य रुद्राक्ष अग्निवंशी के अधीन हैं। वंहा के सभी राज्यों को खबर मिल चुकी थी की क्या हुआ हैं जो लोगो दक्षिण साम्राज्य मै होकर आये थे उनको रुद्राक्ष के बारे मै पता था वो न्याय प्रिय और धर्म प्रिय शासक हैं। उसके पद को सँभालते ही उसने वंहा पर भी चीजों को बदला और धीरे धीरे उसने अपने साम्राज्य जैसी व्यवस्था को लागु क़र दिया इन सब को करने मै उसको काफ़ी समय लगा था।। कुछ खास लोगों को यंहा के काम सम्भलने के लिए रोक लिया हुए बाकी सबको वापसी दक्षिण मै भेज दिया था। कुछ समय बाद उसको याद आया की हिमांशु भी तो यंहा का राजकुमार था उसने वंहा के गुरु और सभी खास लोगो को बुलाया और पूछा यंहा का राजकुमार हिमांशु कँहा हैं। वो सब सोचने लगे इनको कैसे पता हिमांशु के बारे मै। वो बोले हिमांशु को कैद खाने मै पड़ा हुआ। ज़ब रुद्राक्ष नें यह सुना तो उसको काफ़ी हैरानी हुई। उसने पूछा उसको कैद क्यों किया गया था। इस बात पर वो लोगो बोले हमें नहीं मालूम सम्राट का हुकुम था जो हमें पालन किया। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी नें अघोरा और वंहा के सम्राट को ख़तम क़र दिया था उतर साम्राज्य मै यह बात हर किसी को पता चल चुकी थी। जो लोग उसके जानते थे उनको अब भी समझ मै नहीं आ रहा था की वो इतने कम समय मै कितना ताकतवर हो गया हैं। यह खबर श्यामगढ़ राज्यों और लाल राज्यों तक भी जा पहुंची थी की कोई नया सम्राट बन गया हैं मगर जिनको यह पता चल रहा था की वो दो समाराज्य का सम्राट बन चूका हैं लोगों को थूक गटकने मै भी दिक्क़त हो रही थी। कुछ साल पहले पागल लड़का जो कचरा था वो अब सम्राट था। जो उसके साथ थे कुछ लोगों को खुशी भी थी और कुछ लोगो को यह सोच क़र शर्म आ रही थी की वो नज़र कैसे मिलाएंगे। इधर रुद्राक्ष नें हिमांशु को कैद से मुक्त करने का आदेश दिया और उसको कैद खाने से वाहर लाया गया। उसकी हालत मरने जैसी हो रखी थी। उसकी नज़रो मै थोड़ी उम्मीद की किरण चमकी ज़ब रुद्राक्ष को उसने सर उठा क़र देखा। उसने तुरंत आदेश पारित किया की इसका उपचार तुरंत शुरू किया जाए। और वो लोग हिमांशु को राजमहल दूसरे कक्ष मै ले गए और उसका उपचार शुरू क़र दिया। उसने सब लोगों को आदेश दिया की शाम तक सभी चीजों की जानकारी मेरे पास आ जानी चाइये। उसने दक्ष को इंसानी रूप मै वंहा छोड़ दिया और सभी कामो को सम्भलने को बोला और खुद अपने घर के लिए टेलीपोर्ट हो गया था। आखिर त्रिनेत्रा का इस शरीर के मालिक से कुछ जिम्मेदारी मिली थी जो वो जल्दी पूरी करने वाला था। रुद्राक्ष सीधा अपने रियासत के महल मै टेलीपोर्ट हुआ था. उसने देखा की महल को सजाया गया है और सब लोगो मै हलचल हैं। ज़ब उसने एक नौकर को आवाज़ लगा क़र पूछा की उसके पीताजी कँहा है। जैसे ही नौकर नें आवाज़ को सुना और पीछे मुड़ क़र देखा की रुद्राक्ष यंहा पर खड़ा है और उसके आने के बारे मै किसी को कोई खबर भी नहीं हुई हैं। तो वो अपनी खुशी के मारे चिल्ला पड़ा छोटे मालिक वापस आ गए हैं जैसे ही यह आवाज़ गुंजी की छोटे मालिक आ गए हैं सबके कान खड़े हो गएहम लोगों को तो आते हुए नहीं दिखाई दिए। पुरे महल मै सोर हो गया की रुद्राक्ष वापस आ गया है। ज़ब उसके पिता श्याम अग्निवंशी को पता चला तो वो जो क़र रहे थे उसको छोड़ क़र उस से मिलने चले आये। ज़ब सुनील गीता और उसके चाचा ताऊ के लड़के लड़कियों को पता चला की रुद्राक्ष वापस आ गया है तो वो यह समझ नहीं पा रहे थे उसके सामने कैसे जाँए। यह लोग उसको बहुत परेशान करते थे और वो अब दो साम्राज्य का सम्राट था। ज़मीन और आसमान का फर्क था। रुद्राक्ष श्याम अग्निवंशी से उनके कमरे मै जा क़र मिला। वो लोग अंदर ही बात चित करते रहे काफ़ी देर तक. फिर रुद्राक्ष बोला पिताजी मै चाहता हूँ आप मेरे साथ यंहा से चले। और इस खानदान की कुर्सी जिसको आप ठीक समझें उसको दे दो। वो दोनों लोग ज़ब अपने कमरे से वाहर निकले तो बाहर उनका पूरा परिवार खड़ा हुआ था आगे बडे लोगो का समूह था और पीछे वो लोग थे जो एक समय उसको दुखी करते थे। श्याम घोषणा करते हैं परिवार के सभी लोग मीटिंग हाल मै पहुचे। सब समझ गए बात कुछ मेहत्पूर्ण हैं। सभी लोग फटाफट वंहा पर एक जुट हो गए। रुद्राक्ष बोला आ पापा आप अपना काम ख़तम करो मै थोड़ी देर मै गुरुकुल वालो से मिल क़र आता हूँ। उसके बाद उसने ऊर्जा द्वार बनया और गयाब हो गया। सब लोग सदमे और हैरान रह गए थे यह कैसा जादू था। तभी उनको समझ आ गया वो उनको आते हुए क्यों नहीं दिखाई दिया। रुद्राक्ष अग्निवंशी टेलीपोर्ट हो जाता है वो शंकर नाथ गुरुकुल के सामने खड़ा था यह वही जगह थी जँहा से उसने अपने सफऱ की शुरुआत करी थी. वो अंदर जाने के लिए चल पड़ता हैं ज़ब कर्मचारी उसको पहचान क़र लेता हैं की रुद्राक्ष हैं वो तुरंत प्रमुख और सभी प्रबंधक को सूचित क़र देता हैं। वो चलता हुआ गुरुकुल के उस झेत्र जाता हैं जिस मै वोरहता था। वो वंहा उन सब छात्रों से मिलता हैं सब लोग उस से मिल क़र बहुत खुश होते है। उसका व्यवहार बिल्कुल पहले जैसा ही था। सभी लोगो नें अच्छी तरक्की की थी. उसके बाद वो आंतरिक विभाग की तरफ जाने लगता है वो सब लोग समान मै झुक जाते है क्यों की वो सम्राट था। वो उन सब लोगों को ऐसा करने के लिए मना करता हैं.थोड़ी ही देर बाद किशोरी लाल और राजकुमारी भी आ जाती हैवो दोनों भी सम्राट के सम्मान मै झुकते हैं। वो उनको बोलता हैं आप लोगों को ऐसा करने की कोई जरुरत नहीं हैं। बस आप लोग अपने काम को न्याय और धर्म से करते रहे।। उसके बाद वो वंहा और सभी छात्रों को मिलता है। उसके बाद वो वापस अपने घर के मीटिंग हाल मै आ जाता है। वो पूछता है पीताजी आपने अपना काम खतम क़र लिया क्या। उसके पीताजी नें अपने भाई को वो पद दे दिया था और सब कुछ आगे करना है बता दिया था। अपनी आने वाली पीड़ी के लिए सब खुश थे। उसके बाद वो कुछ स्वर्ण मुद्रा का ढेर वंहा छोड़ देता है और बोलता है इसको अपने लोगों की ताकत और तरक्की मै लगाओ। उसके बाद रुद्राक्ष अपने पिता को लेकर उतर साम्राज्य की राजधानी मै टेलीपोर्ट हो जाता है। ज़ब वो राजमहल मै वापस आता है तो सब झुक जाते है। वो उन लोगों को बोलता है यह श्याम अग्निवंशी आज से उतर साम्राज्य के सम्राट के रूप मै अपना काम देखेंगे। आप लोगों का काम है इनको सारी जानकारी और सुचना देना। जो बदलाब करने के लिए बोले है उनको तुरंत सभी राज्यों और सहरो और रियासतों पर लागु क़र दो। अपने पिता को वंहा छोड़ क़र वो हिमांशु को देखने चला जाता है। जिसका उपचार करने के लिए बोला था। वो हिमांशु से जा क़र मिलता है ओर पूछता है अब कैसा लग रहा है। वो कहता है अच्छा सम्राट। रुद्राक्ष कहता है सम्राट नहीं भाई बोलो। इस बात पर उसकी आँखों मै आँशु आ जाते है। और वो रोने लगता है। रुद्राक्ष उसको शांत करता है और मुझे सब कुछ बताओ मित्र क्या हुआ था तुम्हारे साथ। हिमांशु उसको बताता है हमारे पुरखो के समय से एक राज पीड़ी डर पीड़ी चलता आ रहा था उस राज को राज रखने के लिए हमारा सारा परिवार खतम हो चूका था। बचपन मै है मुझे इनके द्वारा गौद ले लिया गया था। मगर मुझे यह नहीं पता था किस कारण। फिर मुझे कुछ समय बाद एक लॉकेट मेरे गले मै कैसे आया मुझे नहीं पतामगर उस लॉकेट को देखकर इन लोगों नें मुझे महाराज के कमरे मै छोड़ दिया। उनोहने भी मुझे कुछ नहीं बताया। उनोहने मुझे उस लॉकेट को खोलने को कहा उसमे एक छोटा सा सोने का परचा था जिसमे लिखा था स्वर्ग आश्रम. स्वर्ग लोक का मार्ग और एक जगह का नाम था चारो साम्राज्य के बीच मै पडती है वंहा ज्वालामुखी है ज्वालामुखी है और लावा बेहता रहता है। ज़ब इनके लड़के ख़त्म हो गए तो कुछ सोच क़र मुझे कैद करवा दिया और वो पत्र फिर अपने आप गयाब हो गया. ह्म्म्मम्म रुद्राक्ष नें उसकी सारी बात ध्यान से सुनी थीउसको लग रहा था कुछ तो ऐसा है जो स्वर्ग लोक से जुडा हुआ है या फिर जोड़ रहा है। उसके बाद वो हिमांशु को लेकर अपने पीताजी से मिलवाया और सारे काम की जिम्मेदारी मिल क़र सँभालने के लिए बोला। उसने एक महीने मै सारी चीजें दक्षिण सम्राज्य जैसी क़र दी थी। दोनों साम्राज्य पर अपना झंडा लगाने के बाद। अपने आगे के सफर के बारे मै सोच रहा था। राकेश स्टोरी । त्रिनेत्रा उर्फ़ रुद्राक्ष अग्निवंशी के मन मै कंही ना कंही स्वर्फ के मार्ग को लेकर दिल मै हलचल मच गयी थी उसको कामिनी देवी का छल और अपने दोस्तों का बिश्वास घात याद आ गया था। मगर फिर कुछ लोग वंहा उसके अच्छे मित्र थे जिनके साथ उसका व्यवहार हमेशा विन्रम और प्रेम का रहता था। ऐसा है एक देवताओं मै देवता था जिसका नाम अग्निकंठ था। वो त्रिनेत्रा को बहुत मानता था। वो हमेशा से उसको कहता था जल्दी आँख बंद क़र के भरोसा मत किया करो। अपनी तीसरी आँख को हमेशा खोल क़र रखा करो। इन बातो मै और यादो मै उसको कब नींद आ जाती हैं उसको पता ही नहीं चलता हैं। थकान के कारण सोता रहता हैं कोई उसको नहीं उठाता है। ज़ब वो उठता है तो अपने आप को तरो ताज़ा महसूस करता। फिर वो कुछ देर बैठ क़र साधना करता है और अपने शरीर के अंदर देखता है तो उसको दिखाई देता है उसके अंदर बहने वाली ऊर्जा शक्ति का रंग और भी डार्क हो गया था दोनों दिव्या नाग और इमोर्टल ड्रैगन किंग सौ रहे थेउसके बाद वो साधना से बाहर आता है और फिर नहाने चला जाता है। उसके बाद वो नौकर को आवाज लगाता है कुछ समय मै भोजन आ जाता है भोजन करने के बाद वो राजमहल के सभागार की तरफ चलने लगता है। राजमहल के सभागार मै उसको हिमांशु और उसके पीताजी आये हुऐ लोगों से बात चित करने मै लगे हुऐ थे. ज़ब वो लोग रुद्राक्ष को देखते हैं तो श्याम अग्निवंशी कहते हैं तुम्हारी नींद कैसी रही बेटे। वो कहता हैं थकान उतर गयी पीताजी इतने दिनों से ठीक से आराम नहीं क़र पाया था। और यंहा सब कैसा चल रहा हिमांशु। रुद्राक्ष पूछता है वो कहता हैं सब कुछ ठीक चल रहा हैं भाई सब कुछ अपने नियंत्रण मै हैं। सारी योजना और व्यवस्था को लागु क़र दिया गया हैं किसी भी आम नागरिक को कोई परेशानी नहीं है सब ख़ुश हैं। हम्म. फिर वो पूछता हैं राजकोष मै मुद्रा की कमी तो नहीं पड़ेगी ना. वो कहता हैं नहीं अभी हमारे पास परियाप्त सब कुछ हैं। उसके बाद वो राजकोष के लिए गरुड़सर्प लोक की दूसरे साम्राज्य की सारी स्वर्ण मुद्रा और हीरे मोती मणि मानिक उन लोगों को दे देता हैं.इतना सब कुछ देख क़र श्याम और हिमांशु दोनों हैरान रह जाते हैं जो सामान उसने दिया था उस से राजकोष सो गुणा बढ़ जाना था। वो बोलता हैं कोई भी गरीब परिवार दुखी नहीं होना चाइये। सब के बच्चों को बराबर का हक मिलना चाइये। उन लोगों को योजना के माध्यम से बाँट देना। जिस से हमारे साम्राज्य की शक्ति और बढ़े। उसके बाद वो कहता हैं अब मै दुनिया को और नज़दीक से देखना चाहता हूँ इसलिए मै बाहर जाऊंगा मेरे पीछे तुम लोगों की जिम्मेदारी रहेगी सभी चीजों को सही से नियंत्रण करने की। यह चारो साम्राज्य एक भूखंड के हिसे पर बसें हुऐ पृथ्वी बहुत विशाल हैं यंहा और भी कितने कितने बढ़े महादीप होंगे जिनके बारे मै हमें कुछ भी नहीं पता हैं। उसके बाद वो एक दिन और रुकता है दोनों जगह के लोगों को सब कुछ बता और समझा क़र अपनी यात्रा के लिए निकल पड़ता हैं। इस बार वो अपने पंखो की सहायता से उड़ रहा था वो देखना चाहता था कितनी झमता विकसित हुई हैं। वो अपने मन के हिसाब से प्रकाश की गति से भी तेज़ उड़ सकता था। उसने काफ़ी समय तक आसमान मै उड़ान भारी और ज़ब संतुष्ट हुआ तो फिर वो उस जगह की तरफ उड़ चला जँहा पर जवालामुखी ही ज्वालामुखी थे उड़ते हुऐ उसे एक दिन हो गया था। फिर वो जवालामुखी से पहले उतर गया उसने देखा जवालामुखी के पहाड़ो का झेत्र काफ़ी विशाल दयारा था उन से ज्वालामुखी खड़कता हुआ वाहर निकल रहा था। वो उन पहाड़ो के अंदर घुस गया था.वो उन जवालामुखी के पहाड़ो को पार करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था वो अपने आसपास की हर चीज को देखता हुआ चल रहा था उसने वंहा लावा की बहती हुई नदी देखी वो उस नदी के किनारे चलने लगा और काफ़ी किलोमीटर का सफऱ तय किया था उसने। लावा की नदी के आये मोड़ो को पार करता हुआ वो एक ऐसी जगह जा पंहुचा जँहा पर वो लावा की नदी गिर रही थी। काफ़ी बढ़े भाग मै लावा का तालाव बन गया था मगर जिस गति से लावा बेहता हुआ आकर इसमें गिर रहा था. ऐसा लगता था जैसे वापसी वो फिर से धरती की कोर मै जा रहा हो। उसने देखा और दिशाओ से भी लावा आकर उसमे गिर रहा था। आम आदमी और योद्धा तो उस की भयानक गर्मी से ही जल जाता। मगर यह सब उस पर कोई भी प्रभाव नहीं डाल रही थी कंही से एक जोड़ी आँखे उसकी हरकत पे नज़र रखनी शुरू क़र दी थी। ज़ब वो उस जगह का मुयाना क़र रहा था। उसने सब तरफ घूम क़र देखा मगर उसको कुछ भी नहीं मिला जो उसको स्वर्ग आश्रम से झोड़ता हो। घूम फिर क़र वो वापस वंही आ गया। फिर वो एक चटान पर बैठ गया कुछ देर वो सोचता रहा और फिर वो उठा और लावा के तालाब मै कूद गया। देखने वाले को उसका यह कदम आत्महत्या से ज्यादा कुछ नहीं लगेगा। मगर वो उस लावा मै कूदने के बाद उसकी घेराई मै जाने लगा। वो लगातार उसकी घेराई मै जा रहा थाजिधर लावा का भाहब था वो उदर ही बढ़ता हुआ चला गयातीन चार घंटे उस लावा मै बीतने के बाद फिर वो लावा का झेत्र का फैलाव होने लगा। और वो नदी की तरह बहना शुरू हो गया. उसने अपना सर बाहर निकाला और देखा वो किसी झेत्र मै था जिसके पास यह लावा की नदी बहती हुई जा रही थी और उसके सामने जंगल पेड पौधे पहाड़ थे। हम्म्म्म बो वहार निकल क़र बोला। और नदी के किनारे खड़े होकर आगे देखने लगा की किस तरफ यह जा रही है। आगे खाई मै लावा गिरता हुआ देख क़र वो समझ गया की धरती की कोर मै जा रहा है. जँहा वो पहले जा चूका था। फिर उसने वापस जंगल की तरफ देखा उन पहाड़ियों को देखा और उधर जाने लगा उसको अजीब ऊर्जा के फैलाब सारे वातावरण मै लग रहा था। वंहा वर्फ की पहाड़ियों को देखा जा सकता था तो बिना वर्फ की पहाड़िया अलग थी। वो अंदर जंगल मै जा क़र एक पहाड़ की छोटी पर खड़ा हो गया और देखने लगा की किस तरफ वंहा पर क्या हैं। उसे दूर नीले और सफेद रंग का सूरज सा चमकता हुआ दिखाई दे रहा था वंहा की दुरी आदिक हैं उसने अंदाजा लगाया। उसने देखा की बीच मै कुछ एक शहर बने हुऐ हैं। वो उस वर्फ की पहाड़ी से नीचे उतरा और उस दिशा की तरफ चलना शुरू क़र दिया। तभी उसको लगा की उस पर कोई हमला करने वाला है। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी उस वर्फ के पहाड़ो और जंगल को पार क़र रहा था अभी उसने कुछ ही दुरी को तय किया था की उसको महसूस होता है की कोई उस पर हमला करने वाला। वो फिर भी शांति से आगे जलता जाता है। फिर वो पहाड़ से उतर क़र नीचे खाई जैसे राश्ते को पकड़ता है ओर आगे बढ़ना जारी रखता है। कुछ दूर चलने के बाद उस से भारी वर्फ के गोले तेज़ गति से टकरा जाते है। वो हलके शरीर से चल रहा था जिस कारण वो गोले उसको उड़ते हुए सामने पहाड़ पर दे मरते है सामने जिस पहाड़ से रुद्राक्ष जा टकराया था वो पहाड़ टूट जाता हैं पूरी तरह। और रुद्राक्ष उस पहाड़ मै कही गायब हो जाता हैं। तभी वंहा पर पांच लोग छुपे हुऐ सामने आते हैं रुद्राक्ष को लगता हैं इन लोगों नें हमला किया था मगर तभी वंहा पर दस यति मानव आ जाते हैं जो नरभक्षी लग रहे थे वो लोग बोलते हैं आज स्वर्ग आश्रम के छात्रों का मांस खाने को मिलेगा। वो पांच लोग जिनमे दो लड़की और तीन लड़के थे. आपस मै बात करते हैं हम लोग इन से जीत नहीं पाएंगे। हमारा स्तर इनके बराबर नहीं हैं यह बहुत शक्तिशाली हैं। वो लड़कियां कहती हैं बात तो ठीक हैं इन लोगों नें अभी एक लड़के पर हमला क़र उसको ख़तम क़र दिया हैं। यह लोग दिव्या स्तर के योद्धाओ मै से हैं। फिर वो दस विशाल काय यति जिनके सीने पर कवच होते हैं उन लोगों के सामने आ क़र कहते है हम लोगों नें तुमको कितने बार समज्या की हमारे इलाके मै आकर शिकार मत किया करो हमारे महाराज को पसंद नहीं हैं। आज तुम सब लोग मरोगे। और उन दस यति और उन पांच लोगों मै मुकाबला शुरू हो जाता हैं। वो पांचो कड़ी टकर दे रहे थे उनको आस पास का सारा झेत्र बर्बाद हो जाता है इन लोगों की लड़ाई मै। उन पांच मै से उनके दो साथियो को छोटे लग चुकी थी। अब उन दस लोगों का पलड़ा भारी होता जा रहा था ज़ब उन लोगों की ऊर्जा ख़तम हो गयी तो। यति लोगों नें अपना आखिरी हमला उन लोगो को ख़तम करने के लिए किया और वर्फ के खतरनाक भाले बना क़र उनके ऊपर छोड़ दिया। उन पांच लोगों का लगा की अब मरने वाले है और उन लोगों नें अपनी आँखे बंद क़र ली थी। उन लोगों नें अपनी आँखे बंद क़र रखी थी उनको अभी तक कोई भी वर्फ का भाला नहीं टकराया था। थोड़ी देर बाद ज़ब उन लोगों नें अपनी आँखों को खोला तो देखा एक लड़के नें उन दस को फूटबाल बनया हुआ था उसके एक एक मुक्के मै सभी के शरीर के चीथड़े उड़ रहे थे। लड़कियों का तो उलटी करने का मन हो गया था. वंही लड़के आँखे फाड़ क़र सामने चल रहे सीन को देख रहे थे। पांच मिनट मै रुद्राक्ष नें मैदान साफ क़र दिया था। उसके बाद रुद्राक्ष उन लोगो के पास पंहुचा और पूछा क्या तुम लोगो ठीक हो। रुद्राक्ष नें देखा था यह सब लोग काफ़ी अछि तरह से मुकाबला किया था। ज़ब वो लोग सदमे से बाहर आते है तो हैरान रह जाते हैं. उन लोगों को तो लगा था की वो मर चूका है। मगर वो तो जिन्दा खड़ा हुआ था। उन लोगों के कपड़े देख क़र अंदाजा लगया जा सकता था वो किसी आश्रम के छात्र थे। उनमे से एक लड़का पूछता हैं कौन हो तुम। वो कहता हैं मेरा नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी हैं मै यंहा पर नया हूँ मुझे यंहा की कोई जानकारी नहीं हैं।.तभी दूसरा लड़का बोला मै भी तो सोचु अकेला बंदा बिना टीम के यंहा क्या क़र रहा है। रुद्राक्ष उन लोगो से उनका परिचय पूछता हैं तो एक एक करके सब अपना परिचय देना शुरू क़र देते हैं। मोहित पांचाल। राजकुमार सफेद दीप.सोभित गर्ग। राजकुमार हरा दीपसौरभ नेगी। राजकुमार पीला दीपतान्या सिंह। राजकुमारी हरा दीपसौम्या राजपूत। लाल दीप राजकुमारी। हम लोग स्वर्ग आश्रम के बाहरी छात्र है रुद्राक्ष पूछता है यह स्वर्ग आश्रम क्या है। तो वो लोग बताते है की यंहा से स्वर्ग लोक का योद्धा बनने का अवसर मिलता है यंहा से कोई दो मूल सिस्य को आगे की ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है जो स्वर्ग लोक और हमारे पृथ्वी लोक के बीच मै है। उसके बाद हम लोग स्वर्ग मै ट्रेनिंग करने के लिए भेजे जाते है। यंहा पर पृथ्वी के हर दीप से उनके साम्राज्य से चुने हुऐ लोग गुप्त तरीके से आते हैं तुम कैसे आये हो। वो उन लोगों से सेहर की व्यवस्था के बारे मै समझता हैं सब के पास उनका टोकन होता हैं जो यंहा पर आने के लिए एक तरीके से लाइसेंस का काम करता हैं। दूसरा उनका आश्रम का पंजीकृत टोकन होता हैं। अगर कभी कोई घुसपैठियों को पकड़ लेता हैं तो यह लोग उसको जान से मार देते हैं। उनकी बातो को सुनकर रुद्राक्ष कहता हैं मैंने तुम लोगों की मदद की हैंवरना तुम सब अब तक मारे जाते। तो तुम लोग मुझे यंहा पर किसी की पहचान नहीं दिलवा सकते हो क्या?वो पांचो लोग अपना अपना दिमाग़ लगाना शुरू क़र देते हैं फिर मोहित कहता हैं कल मैंने अधिकारी को बात को करते सुना था की एक आदमी जो यंहा लाखो सालो से रह रहा था वो हमेशा मै एकांत मै रहता था वो गयाब हो गया इस झेत्र मै शयाद यति के राजा नें उसको मार डाला हैं। अगर हमें उसका टोकन मिल जाता हैं तो हम लोग उस टोकन पर रुद्राक्ष का नाम दर्ज करवा सकते हैं थोड़ी रिस्वत दे क़र। बहुत से लोग जो सफल नहीं होते है अपनी जगह पर किसी और को मौका दे देते हैं.वो उन लोगों से पूछता हैं यह यति का राजा कँहा मिलेगा मुझे तुम लोग बताओ मुझे। उन लोगों को लगता हैं की वो पागल हो गया हैं। सोभित मज़ाक मै कहता हैं पूर्व दिशा मै पंद्रह पहाड़ियों को पार करके वो वर्फ की खाई मै रहता हैं। उसके पास जल देवता की शक्ति और दिव्या अस्त्र हैं। आश्रम भी उस पर हमला नहीं करता हैं। उन लोगों की बातो को सुन क़र वो कहता हैं देखो तुम मुझेसहर से दस किलोमीटर पहले मिलना एक घंटे मै तुम लोगो को वंहा मिलता हूँ। वो पांचो एक दूसरे की सकल देखते हैं। और रुद्राक्ष अपने पंख से उड़ जाता हैं. उनमे एक लड़की कहती है यह उड़ भी सकता हैं। ह्म्म्मम्म। वो लोग सिटी की तरफ जाने लगते हैं उधर रुद्राक्ष उस वर्फ की खाई मै खड़ा हुआ था वो उन यति के अपने लातो और घुसे से ख़तम करता जा रहा था कोई भी उसके सामने खड़ा नहीं हो पा रहा था बढ़े दिनों बाद वो मर्शियल आर्ट की प्राटिस उन लोगों को मार मार क़र रहा था. जो भी यति की सेना थी सबको रुद्राक्ष नें खतम क़र डाला था। अपनी सारी सेना का नाश होता देख क़र एक लड़के के हाथो से यति के राजा को बहुत गुसा आ जाता हैं। वो रुद्राक्ष पर जल के दिव्या अस्त्र का प्रयोग करता हैं। उसके घातक बार को वो अपने शरीर लगने देता हैं और उसका जल का दिव्या अस्त्र उसके शरीर मै समा जाता है। रुद्राक्ष उस यति को मार क़र उन लोगो का सामान चेक करता हैं वो उन लोगों की स्टोरेज रिंग्स सभी की ले लेता है और चेक करता हैं उसके पास काम की क्या चीज हो सकती हैं। वो यति एक राजा था तो उसके पास खजाना भी होना चाइये। वो उसके रहने की जगह की तालशी लेता हैं तो उसको वर्फ के महल मै अंदर विशाल खजाना मिलता हैं हीरे मोती स्वर्ण मुद्रा और अन्य चीजों का एक दो किलोमीटर मै भरा हुआ था। रुद्राक्ष अपनी आध्यात्मिक शक्ति अपने हाथो से छोड़ देता हैं कुछ पल मै वो सारा समान रुद्राक्ष की रिंग मै होता हैं। उसको वर्फ का क्रिस्टल मिलता हैं वो उसमे अपनी ऊर्जा डालते ही वो ऊर्जा उसके शरीर की ऊर्जा से मिल जाती। उसके बाद रुद्राक्ष अपनी ऊँगली से चार किरण छोड़ता हैं जो पुरे वर्फ के झेत्र मै विस्फोट क़र देती हैं कई वर्फ के पहाड़ नस्ट हो जाते हैं और वो भयानक आग के कारण पिघल जाते हैं और पानी की झीले बन जाती चारो तरफ। वंहा केबल विस्फोट की आवाज ही सुनी जा सकती थी। उसने अग्नि वर्षा को करके जो बचे होते उनकी भी जिन्दा रहने की उम्मीद ख़तम क़र दी थी। इतनी तभाई की गूंज आश्रम और उन सहरो तक भी जा पहुंची थी। उसके बाद रुद्राक्ष उन लोगों की तरफ टेलीपोर्ट हो जाता है साथ मै वो उन यति के राजा और उनके सर को काट लाया था। रुद्राक्ष उस यति के राजा की रिंग मै टोकन निकलता है उसे एक डायमंड टोकन मिलता हैं. उस टोकन पर रुद्राक्ष अपना नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी लिख देता हैं जस कौशल का प्रयोग करके यह लोग आश्रम चला रहे थे ऐसे लाखो कौशल त्रिनेत्रा जनता था क्यों की वो खुद बैटल गॉड था। उन लोगों के पास जा क़र रुद्राक्ष अपना टोकन उनको दिखाता हैं। उन लोगों को हार्ट अटैक नहीं आता बाकी के सारे काम हो जाते हैं। वो लोग बोलते हैं यह टोकन पूर्वजो का हैं। रुद्राक्ष उनको यति का सर दिखाता हैं। वो पांचो लोग सोचते है यह हैं कौन वास्तव मै। वो लोग सिटी के प्रवेश द्वार पर आ जाता हैं और उन लोगों के अंदर जाने के बाद वो अपना टोकन दिखाता हैं। वो प्रवेश अधिकारी उसको प्रवेश की अनुमति दे देता हैं। उसके तुरंत बाद वो आश्रम के प्रमुख करियलय मै सन्देश भेजता हैं वंहा के महागुरु को। स्वर्ग आश्रम मै हलचल मच जाती है की कोई पूर्वज लाखो सालो बाद वापसी की हैं। उसका नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी है. सब लोग लिस्ट चैक करने मै लग जाते हैं कब कौन सा पूर्वज गायब हुआ था मगर रुद्राक्ष अग्निवंशी का नाम उनको कंही नहीं मिलता हैकुछ दिनों बाद ही स्वर्ग आश्रम मै देवता तो मूल सिस्यो को लेने आने वाले हैं. और इस वक्त यह घटना सब को हिला क़र रख देती हैं। सहर मै आने के बाद रुद्राक्ष अग्निवंशी सीधा आश्रम की तरफ चला जाता हैं और उस टोकन को दिखाता हैंडायमंड टोकन को एक युवा लड़के के हाथो मै देख क़र उसको कुछ सक होता है। वो इसकी सुचना देता हैं और आश्रम का प्रमुख और उसके साथ के सेह प्रमुख हवा मै उड़ते हुऐ जाते हैं। उन लोगों से शक्ति साली औरा निकल रहा था। रुद्राक्ष आराम से खड़ा रहता है वो लोग उसका टोकन चेक करते है वो टोकन ठीक होता है वो आश्रम के ही टोकन था मगर यह आश्रम लाखो सालो से चला आ रहा था। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी स्वर्ग आश्रम मै प्रवेश क़र गया था उसके पास पूर्वजो का डायमंड टोकन था। उसकी उम्र को देख क़र उन लोगों को भी कंही ना कंही सक हो रहा था। वो लोग उसको आश्रम के मीटिंग हाल मै ले जाते है। आश्रम के सभी बाहरी और आंतरिक छात्रों को पता चल जाता हैं कोई पूर्वजो मै से वापस आया हैं। दो दिनों बाद स्वर्ग का दरवाजा खुलेगा कौन जायेगा आगे ट्रैनिग के लिए इसी बता की चर्चा हो रही थी। इधर मीटिंग हाल मै रुद्राक्ष और आश्रम की मुख्य शक्तियां वंहा मौजूद थी थी सभी उसका लेवल चेक करने की कोसिस क़र रहे थे मगर किसी को भी कुछ नहीं पता चल रहा था। सब लोगों को किसी भी निर्णय पर ना जाते देख क़र रुद्राक्ष सभी को कहता हैं क्यों ना आप सभी महागुरु कल एक साथ मेरे से मुकाबला क़र ले। एक पंद्रह साल के लडके से चुनौती मिलना उनकी शक्ति पर प्रश्न चिन था बात ही ऐसी सभी के सामने बोल दी थी। रुद्राक्ष कहता हैं कल मुकाबले की घोसणा क़र दो जो आप लोगों का सबसे शक्तिशाली योद्धाहो मुझसे मुकाबला क़र सकता हैं मै किसी को ज्यादा चोट ना लगे पूरी कोसिस करूँगा। उसकी बातो को सुनकर सब लोग हैरानी मै रह जाते हैं अगर यह पूर्वज हुए भी तो क्या सब लोगों को एक साथ मुकाबला क़र पाएंगे। फिर शीर्ष गुरु का निर्णय आता हैं कल अखाड़े मै मुकाबला होगा। हमारे और रुद्राक्ष अग्निवंशी के बीच। पुरे सहर मै खबर आग की तरह फ़ैल जाती है हर कोई तज़ुब मै था कल एक के सामने बहुत सारे लोग मुकबला करेंगे।वो पांच लोग तो पागल हुऐ जा रहे थे सोच सोच क़र यह कौन सा बबाल आ गया इस जगह किसी को भी उसके बारे मै कुछ नहीं पता था। कल तक तो सहर मै प्रवेश के लाले थे आज सुनने मै आ रहा हैं स्वर्ग आश्रम की प्रमुख शक्तियों के साथ मुकाबला है। एक रात आश्रम मै वो आराम से सोता हैं और अंगले दिन मुकाबले के लिए अखाड़े की तरफ चला जाता हैं। वो देखता हैं अखड़े मै पंद्रह लोग आ जाते है जिन लोगो नें कवच पहन रखे थे और हवा मै उड़ रहे थे। सब लोगों नें अलग अलग कवच पहन रखे थे। वो सभी लोग अपने जानवरो को वाहर बुलाते हैं और उन पर बैठ जाते हैंरुद्राक्ष शांति से सब कुछ देख रहा था। अखड़े के वाहर लोगों की भीड़ लग जाती है सब लोगों को लग रहा था की मुकाबला रोमांचक होगा। अभी तक रुद्राक्ष अग्निवंशी नें अखाड़े मै कदम नहीं रखा था। ज़ब वो अखाड़े मै कदम रखता हैं और अंगले ही पल वो उन लोगों के सामने हवा मै उड़ रहा होता है अपने पंख के साथ। ज़ब वो लोग उसके उड़ता देखते हैं दिव्या गरुड़ परम् वज्र पंख के साथ तो थोड़ा हैरानी होती हैं मगर कोई बड़ी बात नहीं थी ऐसे साधना और साधन उन लोगों के पास भी थे यह उन लोगों का विचार थाउन लोगों को बस पंख का रंग विचत्र लगा। रुद्राक्ष कहता तुम सब लोग मुझ पर हमला क़र सकते हो एक को गुस्सा आ जाता हैं और वो हवा की गति से अग्नि मुका मारने रुद्राक्ष के पास आता हैं। रुद्राक्ष अपना हाथ हल्का हिला क़र उसको एक थपड मार देता हैं और वो अखाड़े के वहार उड़ता हुआ चला जाता हैं। फिर सब मिल क़र उसके ऊपर हमला क़र देते हैं वो लोग अपने दिव्या अस्त्र शस्त्र चला रहे थे जो सब उसके पास आकर निसफल हो जाते थे और उसकी ऊर्जा मै मिल क़र गायब हो जा रहे थे। वो उन लोगो को पूरा मौका देता हैं हमला करने का। और वो हर हमला काट देता था अब तक सब देख रहे थे वो केबल अपना वाचाव क़र रहा था ज़ब उनके हमले पचास से ऊपर हो जाते हैं तो वो बोलता है अब मेरी बारी। और वो उड़ता हुआ बिजली की गति से अपनी जगह से गायब होता हैं और चारो तरफ अखाड़े की दीवारे डेह जाती हैं लोगों को हवा मै उड़ती हुए परछाई ही दिखाई दी थी दो मिनट बाद मुकाबला ख़तम हो जाता हैंअखड़े मै केबल रुद्राक्ष अग्निवंशी ही खड़ा था हवा मै उड़ता हुआ। फिर वो गंभीर होकर कहता हैं क्या कोई और भी मुझसे मुकाबला करना चाहता हैं। सब महा गुरु उसका एक हमला भी नहीं झेल पाए थे उन सबको यकीन हो गया था की रुद्राक्ष अग्निवंशी कोई उनका पूर्वज हैं जो इतने समय के बाद साधना करके बाहर निकला हैं। धरती पर 12दीप थे जिनमे से एक दीप से रुद्राक्ष आया था। मगर रुद्राक्ष को इसकी जानकारी नहीं थी। हर दीप महाशक्तिशाली लोगों से भरा हुआ था। ऐसे बहुत से योद्धाओ को गुप्त रूप से तैयार किया गया था जो धरती की सुरक्षा दानव और दैत्य लोगों से क़र सके। धरती का एक राजा था जिसने देवताओं से अनुबंध किया था जिसके बारे मै हम बाद मै चर्चा करेंगे। वो राजा व्रह्म के वंश का था और उनके कहने पर ही धरती को सुरकाशित रखने की यह प्रक्रिया करोडो सालो से चली आ रही थी। त्रिनेत्रा तो अभी अभी जागरूक हुआ था अरबो खरबों के साल के बाद। उसको इन सब की जानकारी होना अभी बाकी था। वर्तमान मै उड़ता हुआ स्वर्ग आश्रम के अखड़े मै खड़ा हुआ था। उसके बाद वो नीचे उतरा। तब तक सभी लोग संभल चुके थे उनकी हड़िया तक चटक गयी थी अगर रुद्राक्ष ज्यादा तेज़ मार देता तो वो लोग कवच के साथ ही उनका शरीर फट जाता। सब लोगों नें औसधी गोली खाई जिसका नाम शरीर सुधारक गोली था यह रैंक दस की गोली थी। जिसने उन लोगों मै ऊर्जा का फिर से संचालक होना शुरू हो गया और जल्दी ही ठीक हो गए। महा गुरु नागेश आश्रम के करता धर्ता थे इस समय वो इज़्ज़त के साथ देख रहे थे। यही हाल उनके नीचे आचार्य को का था। उनोहने रुद्राक्ष के लिए आश्रम मै सबसे बेहतरीन जगह को उसके रहने के लिए दिया और सारी चीजों की व्यवस्था की। उसके बाद उसने उन लोगों से माफ़ी मांगी की आप लोगों को यकीन दिलाने के लिए यह कदम उठाना पड़ा। जो परेशानी हुई है उसके लिए मै आप सब लोगों से माफ़ी मांगता हूँ। उसका इतना विन्रम व्यवहार को देख क़र सब दंग रह गये। उसके अंदर कंही से भी घमंड और अहंकार नहीं झलक रहा था। नागेश इस बात से बहुत ख़ुश हुऐ।। इधर वो पांचो राजकुमार और राजकुमारी सपने मै थे उनको सब सपना सा लग रहा था। एक दिन के अंदर कोई वंहा जा पंहुचा जँहा लोग लाखो सालो से नहीं जा पाते हैं। फिर रुद्राक्ष अग्निवंशी नें यति के राजा का सर हवा मै हाथ घुमा क़र अखाड़े मै डाल दिया। यह सब देख क़र और लोग बहुत हैरान हो गए थे। की आते के साथ ही उन्होंने दुश्मन का नाश क़र दिया था। आश्रम से जो लोग वर्फ के पहाड़ो पर गए थे उन लोगों नें सारी जानकारी सभी गुरु को दी जो उन लोगों नें देखा था। रुद्राक्ष उन लोगों को बोला मुझे आप लोगो से जानकारी लेनी हैं मेरे पीछे यंहा क्या क्या हुआ हैं। वो सभी लोग नागेश जी के निवास पर चले गए। और वंहा भोजन के साथ चर्चा करने लगेफिर रुद्राक्ष को पता चला यह स्वर्ग आश्रम बारमुड़ा ट्रायआंग्ल के अंदर बना हुआ हैं इसलिए यह एक रहस्य हैं सभी धरती के लोगो के लिए। वो दो छोड़ी आँखे जो उसका लावा के समय पीछा क़र रही थी उसने भी सब कुछ देखा और सुना उसने अपनी गंध को दबा क़र रखा हुआ था। मगर यह बात रुद्राक्ष शुरू से जान रहा था उसने अपनी दिव्या दृस्टि को जागरूक किया था ज़ब वो लावा मै कूद रहा था। वो उसके खुद वाहर आने का इंतजार क़र रहा था। उसको कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा था उसके आसपास रहने। इस तरीके के कौशल काफ़ी उच्च श्रेणी मै आते हैं जिनमे सामने वाले नें खुद को ट्राइंड किया हुआ था। फिलाल तो उसकी चर्चा नागेश और अन्य लोगो के साथ चल रही थी जो सब कुछ बता रहे थे। उन लोगो नें बताया की कल स्वर्ग का दरवाजे के खुलने का समय हैं। स्वर्ग कभी कभी देवता यंहा के लोगों को छात्रों को देखने के लिए आते हैं कौन कितना प्रतिभाशाली हैं.हम लोगों नें हज़ारो वर्ष मै एक बार स्वर्ग की देवी कामिनी देवी को देखा था ज़ब वो धरती पर आयी थी उनको किसी चीज की तलाश थी वो हमें आज तक नहीं मिली। कामिनी का नाम सुनते ही त्रिनेत्रा की आवाज बदल गयी और उसके भाव बदल गए थे। उसने जल्दी से अपनी भावना पर काबू किया और पूछा वो क्या चीज थी जिसको स्वर्ग की देवी कामिनी को भी धरती पर तलाश थी। फिर नागेश नें एक पत्र पर कुछ बना हुआ दिखाया। वो मोहर वाला पत्थर था जिसमे उसको भागते वक्त उसकी आत्मा को कैद क़र दिया गया था और एक पत्र दिखाया वो उसकी तलवार सतरूपा की थी। ह्म्म्मम्मअभी तक धरती पर यह किसी को नहीं मिली हैं। जो भी कुछ उनको ढूंढ क़र लाकर देगा उनको कामीनी देवी की तरफ से स्वर्ग की दिव्या शक्ति की मर्शियल आर्ट्स कौशल मिलेंगे. और भी इनाम हैं जो बोले गए थे। तो कल अपने आश्रम से आगे स्वर्ग के दरवाजे के लिए कौन कौन सिस्य हैं. वो कहते हैं एक तो धरती के राजा की बेटी राजकुमारी मीरा हैं वो अभी 12दीपो मै सबसे होनहार प्रतिभागी है. दूसरा अभी तक विचार नहीं किया किसको भेजे। रुद्राक्ष कहता हैं यह धरती के राजा का क्या नाम हैं और कँहा रहता है. वो नागेश कहता हैं वो अपनी एक अलग दुनिया मै रहते हैं जो उन लोगो नें धरती पर ही बनायीं हैं मगर उसका पता कोई नहीं जनता हैं केबल दीपो के राजा को ही उनका पता होता हैंराजकुमारी मीरा वो कल तक आ जाएगी या हो सकता हैं आ चुकी हो मगर उनकी शक्ति ज्यादा हैं ज़ब तो वो खुद को सामने नहीं लती हम लोग पता नहीं लगा सकते हैं। हम्म। फिर नागेश और सभी आचार्य से कहता हैं कल मेरा नाम आप लोग आगे जाने के लिए चयनित क़र दीजिए। मै भी इस बहाने से व्योम लोक घूम आऊंगा। सभी राजी हो जाते हैं. इसमें उनके आश्रम की ही शक्ति बढ़ेगी अगर उनके पूर्वज और शक्ति शाली होते हैंभोजन पर अपनी बातचीत को ख़तम करने के बाद रुद्राक्ष अग्निवंशी अपने कक्ष मै आ जाता हैं। और विश्राम करने लगता हैंराकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी अपने कमरे मै आकर आराम करने लग जाता हैं और कल के बारे मै सोच क़र सो जाता हैं तभी कोई रहस्यमी आवाज़ अपने आप मै बात करती हुई कहती हैं आखिर तुम कौन हो अजनबी मै भी कब से तुम्हारे पीछे हूँ कुछ भी नहीं देख पा रही। उसके बाद वो आवाज़ गयाब हो जाती हैं। उस आवाज़ के जाते ही सोते हुऐ भी उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। वो सौ जाता हैं। अंगले दिन वो उठता हैं नहाता हैं और जरुरी काम करता हैं फिर भोजन करने के बाद वो नागेश के निवास पर जाने लगता हैं. वंहा जाकर देखता हैं सब लोग किसी की खातिर दरी मै लगे हुऐ थे। वो देखता हैं सामने एक बला की खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी जिसने राजसि कपडे पहने हुऐ थे उसकी कमर मै तलवार लटक रही थी. सुंदरता ऐसी कोई एक नज़र मै ही दीवाना हो जाये। ज़ब नागेश नें देखा तो आगे बढ़ क़र कहा आप आ गए फिर नागेश उन दोनों का परिचय करवाता हैं यह है राजकुमारी मीरा। रुद्राक्ष एक नज़र शून्य भाव के साथ देखता हैं और अपना परिचय देता हैं मै हूँ रुद्राक्ष अग्निवंशी। राजकुमारी मीरा उसके चेहरे पर कोई भी भाव को ना देख क़र आश्चर्य करती हैं कोई भी ऐसा नहीं था जो उसके सामने उसकी सुंदरता से प्रभाबित नहीं हुआ हो. सामने वाले नें बड़ी अनिच्छा के साथ उसको देख क़र बात चित को शुरू किया.नागेश उनको व्योम लोक के बारे मै जानकारी देने लगे उन्होंने बताया की वंहा एक से एक शक्ति शाली योद्धा हैं। अगर वो लोग वंहा पर शीर्ष दस मै आ जायेंगे तो उनको स्वर्ग लोक मै अवसर मिलेगा सीखने का। उसके बाद नागेश मीरा और रुद्राक्ष को लेकर उधर जाने लगते हैं जिधर नीले और सफेद रंग की रोशिनी मिल क़र चमक रही थी वो जगह सबसे ऊँचे स्थान पर इस्थिति थी। वंहा पर दो बड़े पत्थर थे एक सफेद रंग का और दूसरा नीले रंग दोनों आपस मै जुड़े हुऐ थे। वो सब लोग वंहा पर खड़े हो जाते हैं और इंतजार करने लगाते हैं। कुछ समय बाद वो पत्थर ऊर्जा द्वार मै बदल जाते हैं और उसमे दो आकृति बाहर आती है। यह आकृति एक लड़का और एक लड़की की होती है लड़की नें किसी परी की तरह लग रही थी उसने हाथ मै एक दंड पकड़ा हुआ था उसकी कमर पर तलवार लटक रही थी उसने सुनहरे रंग के वस्त्र पहने हुऐ थे जिस पर सोने की कड़ाई की गयी थी। रुद्राक्ष पहचान गया था की यह कामिनी देवी है. उसके चेहरे पर आये भाव एक दम से बदल गये थे उसको देख क़र मगर तुरंत वो सामान्य हो गया था। वो इस बात से अनजान था की एक नज़र उसके उसके चेहरे के भावो को ही देख रही थी। राजकुमारी मीरा उसको तिरछी नज़र से देख रही थी उसकी प्रतिकिर्या को। वो दोनों लोग चल क़र आते हैं और घमंड और अहंकार से बोलिए नागेश कौन से छात्रों को अपने चयनित किया हैं वो लड़का जो आया था वो व्योम लोक का प्रशिक्षण करता था। नागेश बोलते हैं आपको देखे हुऐ देवी कामिनी लाखो साल हो गए है। वो मुस्कराते हुऐ कहती हैं मै थोड़ी फ्री थी तो सोचा क्यों ना मै भी चल क़र पृथ्वी के योद्धा को देख लूँ उनकी बातो मै व्यंग और कटाक्ष था। नागेश कहते हैं आप लोगों के दिए हुऐ प्रशिक्षण को पाकर जरूर यह लोग काबिल बनेगे। वो दोनों लोग उनका स्तर देखते हैं कामिनी भी रुद्राक्ष का स्तर नहीं देख पा रही थी वो एक देवी थी उसके बाबजूद भी। उसके चेहरे पर आश्चर्य की एक रेखा आयी और उसने तुरंत उसको दबा दिया। मीरा का स्तर दिव्या स्तर पर थी. हम्म. कामिनी देवी नें बोला इस बार लगता हैं आपने काबिल लोगों को ढूंढा हैं प्रशिक्षण के लिए। उसके बाद वो नागेश को कहती हैं ठीक है मै आपके यंहा से यह दोनों छात्रों को ले जाती हूँ। और उसके बाद वो ऊर्जा द्वार खुलता हैं और वो चार लोग उसमे प्रवेश क़र जाते हैं। चारो के प्रवेश क़र जाने के बाद नागेश से और लोग पूछते है शीर्ष आचार्य आपको क्या लगता हैं। कामिनी देवी का रवैया बदला हुआ था। वो कहते हैं धरती के लोग उनकी नज़र मै ताकतबर नहीं हैं. इसलिए वो जल्दी चली गयी है दूसरे लोको से भी तो उनको और लोगों को लेना होगा। इधर वो ऊर्जा द्वार जिसमे चारो लोग नें प्रवेश किया था दूसरी दुनिया मै खुलता हैं जिसका नाम व्योम लोक था। व्योम लोक मै प्रवेश करने के बाद कामिनी नें बोला इन लोगों को तो तुम हॉल मै लेकर जाओ। उसके बाद कामिनी देवी चली जाती हैं व्योम लोक का वातावरण बहुत खूबसूरत था गणेश उनको व्योम लोक के हॉल का अंदर ले जाता है वंहा पहाड़ खाई और पेड पौधे एक विस्तृत भू भाग पर देखे जा सकते थे वो एक मार्ग को पार करते हुऐ हॉल मै गए थे। वंहा ऊँची ऊँची इमारते बनी हुई था। फिलाल तो वो व्योम लोक के हाल मै मीरा और रुद्राक्ष दोनों खड़े हो गए वंहा पर पहले से ही हज़ारो लोग आये हुऐ थे सब का पहनावा राजसि था। सब अपनी अपनी जगह की प्रतिभा थी। राजकुमारी मीरा की खूबसूरत लुक नें वंहा कई लोगों का ध्यान अपनी तरफ खीचा था वंही रुद्राक्ष गोरा मजबूत कद काठी कंधे पर लेहराते रंग बिरंगे बाल जो खुद चमक रहे थे हल्का हल्का. किसी योद्धा की तरह था जिसकी आभा सभी को रहस्यमी एहसास करा रही थी। बिना किसी हथियार के शांति से खड़ा हुआ था। उसने बहुत सी लड़कियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। ज़ब राजकुमारी मीरा नें देखा की सब लड़किया उसको ही देख रही हैं उसको अपने दिल मै अच्छा नहीं लगा। पता नहीं पर उसको थोड़ी जलन महसूस हुई उन लड़कियों से। कई लड़के और लड़कियों का समूह उन लोगों से बात चित करने की पहल की तो उन दोनों नें भी बातचीत करना शुरू क़र दिया जिस से उनको भी अशेज महसूस ना हो। सब लोगों का दोस्ताना व्यवहार था जो उसके पास बात क़र रहे थे। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष और मीरा वंहा पर हाल मै और लोगों से बातचीत क़र रहे थे. फिर वंहा एक आवाज़ आती हैं जो गूंज जाती है और हाल के मंच पर देखते हैं वंहा कुछ आदमी और औरते खड़ी हुई थी देखने से वो लोग सब जवान लग रहे थे मगर उनकी उम्र जायदा थी। वो लोग वंहा व्योम लोक के नियम और कार्य करने आये आये हैं उन लोगों को अपना पंजीयन करना होगा। पंजीकृत होने के बाद उनको एक सिल्वर रंग का टोकन नये लोगों को दिया जायेगा। पंजीकरण विभाग के बाद आपा लोगों को युद्ध कौशल विभाग मै जाना होगा। वंहा आप लोग अपना टोकन दिखा क़र पंजीकृत क़र दिया जायेगा। उसके बाद आपको निवास विभाग मै जाना होगा जँहा पर आपको टोकन दिखा क़र रहने का इस्थान पंजीकृत किया जायेगा। आप एक साथ चार लोग रह सकते हो अपनी समझ के हिसाब से। सभी लोग दिए गए दिशा निर्देश को सुनते हैं. फिर वो लोग बोलते हैं कल फिर दुबारा यही पर सबको आगे बताया जायेगारुद्राक्ष नें मन बना लिया था वो जल्द बाजी नहीं करेगा आराम से एक एक सीडी चढ़ क़र ऊपर जायेगा। रुद्राक्ष और मीरा भी सभी नियम का पालन करते हुऐ सभी विभागीय कार्य को पूरा करते हैं और अंत मै निवास विभाग की तरफ चलने लगते हैं उन लोगों को अपना अपना भवन मिल जाता हैं रहने के लिए। जिसका भुगतान आश्रम की तरफ से किया जाना था. वंहा स्वर्ण मुद्रा औरहीरे और मोती और किसी भी मूल्यांकन वाली चीज से हो जाता था। जो मुलभुत सुविधा थी उसको तो स्वर्ग आश्रम उसका भुगतान करता था। क्यों की वो लोग चुने हुए ही छात्रों को भेजते थे। जो वापसी आकर और लोगों को प्रशिक्षण का काम करते थे। जिसमे उनकी आश्रम की शक्ति मै वृद्धि होती थी। अभी तक ऐसे बहुत कम लोग थे जो व्योम लोक मै आगे ना बढ़ पाने के कारण वापस आकर यंहा छात्रों को प्रशिक्षण दिया करते थे जिस से वो मजबूत बन जाये शारीरिक और मानसिक तोर पर। रुद्राक्ष अग्निवंशी अपने भवन मै आने के बाद फ्रेश होता हैं और फिर भवन से वाहर देखता हैं भोजन की व्यवस्था किस प्रकार की जाती हैं। तो उसको पता चलता हैं की भोजन की व्यवस्था तो उसके भवन मै ही नौकर और अन्य कर्मचारी जो उसके भवन की देकभाल के लिए रखे गए थे उनका काम था। अभी उसके भवन के कर्मचारी और लोग आये नहीं थे। फिर थोड़ी देर बाद ही कुछ लोग अपना परिचय देते हैं और अपना टोकन दिखाते हैं इन साथ आठ लोगों को रुद्राक्ष के भवन के भवन के लिए नियुक्ति की गयी थी। उन सब लोगों से प्रेम से बात चित करता हैं और उन लोगों को अपना काम करने को कहता हैं। वो लोग रुद्राक्ष को राजकुमार बोल रहे थे। रुद्राक्ष उनमे से जो उनका मुखिया था जिसका नाम राम सिंह था उनको बोलता हैं काका मेरा नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी है। आप मुझे मेरे नाम से बुलाये कृपा करके आप मुझसे बहुत बड़े हो। उसकी बातो को सुनकर सभी लोग हैरान रह जाते हैं उन लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था वो क्या सुन रहे हैं। उनको यंहा पर काम करते हुऐ 50लाखो साल हो गए थे अब तक कोई भी ऐसा नहीं टकराया था जो इतना विन्रम और नेक दिल हो। हर राजकुमार और राजकुमारी सभी घमंड और अहंकार का ही वर्ताव करते थे। यह वो लोग थे व्योम लोक मै जो अपनी साधना के स्तर पर अटक गए थे किसी कारण बस। और इन लोगों नें अपनी साधना के साथ यह लोग काम करने लगे थे जिस से इनका भुगतान हो जाता था। यह भुगतान वो लोग करते थे जिनके नीचे यह काम करते थे जैसे अब यह लोग रुद्राक्ष के भवन मै काम करेंगे तो इनका भुगतान स्वर्ग आश्रम की तरफ से किया जायेगा। सब लोग उसके व्यवहार के कायल हो गए थे। वो कहता हैं काका आज आप लोग क्या बना क़र खिलाओगे। उसकी इस बात पर वो कहते हैं जो आप कहे वही बन जायेगा खाने मै रुद्राक्ष. उनको दिल मै बहुत ख़ुशी हो रही थी। फिर रुद्राक्ष कहता हैं काका आप मेरे साथ आओ मुझे आपसे बाते करनी हैं. राम सिंह बाकी लोगों को खाना बनाने और काम करने के लिए बोल देते है। वो और रुद्राक्ष दोनों अपने भवन मै आकर हाल मै आ जाते है। रुद्राक्ष हाल के सोफे पर बैठ जाता हैं रामसिंह खड़ा रहता हैं रुद्राक्ष ज़ब यह देखता हैं तो वो उनका हाथ पकड़ता और उनको कहता हैं काका आप यंहा बैठो। उनके मुँह से निकल जाता हैं राजकुमार रुद्राक्ष यह ठीक नहीं है हम लोग आपके बराबर मै बैठे। इस पर रुद्राक्ष कहता हैं क्या मै आपको अपने बेटे की उम्र का नहीं लगता हूँ। अब तो आप नाती पोते वाले होंगे काका। कुछ भी समझ लो मुझे और आराम से बैठो। यंहा किसी के ऊपर भी कोई पवन्धि नहीं हैं। रामसिंह की आँखों मै अंशु आ जाते हैं रुद्राक्ष उनको शांत कराता है और बोलता हैं मुझे पता हैं आप लोग क्यों एक ही स्तर पर रुके हुऐ हैं मै आप सब लोगों की रुकावट को हटा दूंगा आप मुझ पर भरोसा करो। ज़ब वो यह बात सुनते हैं तो सदमे और सकते मै रह जाते हैं। यह बात तो गुप्त थी जो जल्दी से किसी भी परम दिव्या स्तर के लोगों को भी पता नहीं चल पाती थी और रुद्राक्ष नें एक पल मै ही देख क़र बता दिया था। रामसिंह उस से पूछ ही बैठते है उत्तेजित होकर रुद्राक्ष तुम कौन हो हकीकत मै। इस पर रुद्राक्ष मुस्कराते हुए कहता हैंकाका मै वही हूँ जिसको दुनिया और वृह्माण्ड नें एक कहानी मान लिया था और अभी भी मानते है। राम सिंह का सारा अस्तित्व ही हिल जाता हैं। फिलाल आप बस इतना समझो आप लोगों की समस्या का सुधार हो जायेगा। और यह बात किसी को भी बताना मत मेरे बारे मै। फिर वो यंहा के छात्रों की परिषद के बारे मै जानकारी लेता हैं। राम सिंह उसके बताता हैं यंहा तीन परिषद है एक सिल्वर टोकन वालो की दूसरी परिषद गोल्डन टोकन वालो की और तीसरी परिषद हैं डायमंड टोकन वालो की। और इसके अलवा यंहा एक और दल हैं जिसको जेड डायमंड टोकन मिलता हैं। उन जेड डायमंड टोकन वालो मै मुकाबला होता हैं और जो दस लोग विजेता होते हैं उनको स्वर्ग लोक मै ट्रेनिंग के लिए भेज दिया जाता है। सब को अलग अलग सुविधा मिलती हैं। यह पूरा व्योम लोक व्रह्म ऊर्जा जाल से संरचित हैं। इसके वाहर भायनाक दानव और दैत्य और व्रह्म राक्षस रहते हैं। इनकी भी शक्ति का वर्गीकरण किया हुआ है। सबसे पहले आध्यात्मिक मंडलदूसरा आकाश मंडलतीसरा चाँद मण्डलचौथा सूर्य मण्डलऔर पांचवा व्रह्म मंडल। यंहा के सबसे शक्तिशाली योद्धाओ नें अब तक कुछ ही चाँद मंडल के दानव दैत्य और जानवरो को मार पाए हैं वो लोग शिकार के लिए दस दस का समूह बना क़र जाते हैं। अगर कोई चाँद मंडल के जानवरो का शिकार करता है और अकेले क़र लेता हैं तो उसको जेड टोकन दिया जाता हैं यंहा के महाराज के द्वारा। फिर वो उनसे पूछता हैं यह लोग किस किस दिशा मै मिलते हैं क्यों की लाखो किलोमीटर का एरिया था। वो सब जानकारी लेने के बाद वो पूछता हैं सिल्वर टोकन वालो को शिकार पर जाने के क्या नियमहै। तो वो कहता हैं उनको एक पत्र पर लिख क़र देना होगा की वो अपनी जीवन और मृत्यु के लिए खुद ही जिम्मेदारी लेंगे। हम्म्म्म। सारी चीजों को समझने के बाद वो सब लोगों को बोलता हैं तुम लोग भी साथ मै भोजन क़र लो पहले तो वो सब मना करते हैं मगर फिर मान जाते हैं सब लोग खुश नुमा माहोल मै भोजन करके रुद्राक्ष कहता हैं काका अब मै आराम करूँगा और वो अपने शयन कक्ष मै आ जाता है। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी अपनी परिषद के भवन मै आराम करने चले जाता है। और अंगले दिन उठता हैं और फ्रेश होकर भोजन करता है और भवन को छोड़ देता। जो जानकारी उसके चाइये थी वो काका से ले चूका था। वो अच्छी तरह समझ चूका था यंहा पर सिस्टम कैसे काम करता हैं। उसका लक्ष्य बड़ा था और उसको अपनी रफ़्तार आगे जाने के लिए और तेज़ करनी थी। वो व्योम लोक छात्र परिषद के विभाग मै जा पंहुचा और अपना सिल्वर रंग का टोकन उनको दे दिया आसपास और भी लोग खड़े हुऐ थे। रुद्राक्ष के लुक के कारण उन लोगों का भी ध्यान उधर खीच गया था। उस पंजीकरण अधिकारी नें उसका टोकन देखा और बोला तुम तो कल ही आये हो और आज शिकार पर जाना चाहते हो। रुद्राक्ष बोला मै जाना चाहता हूँ। उस अधिकारी नें कहा तुम्हारी टीम के और लोग कँहा है वो बोला मै अकेला ही जाना चाहता हूँ। उसकी बातो को सुनकर सभी हैरान थे सोच रहे थे इस राजकुमार का कोई दिमाग़ का पेच ढीला है या फिर पागल हैं। दूसरे दिन ही अकेला मरने जा रहा है। उसकी उम्र को देखते हुऐ एक बार फिर उस अधिकारी नें पूछा तुमने पक्का क़र लिया की तुम्हे जाना ही है। वो बोला मैंने फैसला क़र लिया हैं आप अपनी करवाई पूरी करो। वो उसको एक पत्र लिख क़र देने को कहता हैं वो उसको पत्र लिख क़र दे देता है। वो उसके टोकन पर एक एक मोहर लगा देता हैं अपनी आध्यात्मिक शक्ति से। सब लोग उसको मुर्ख समझ रहे थे वो सबको नज़रअंदाज़ क़र देता हैं और व्योम लोक के प्रवेश द्वार पर जा क़र अपना टोकन दे देता हैं वो लोग उसके टोकन को स्कैन करते हैं और मार्ग खोल देते हैं। ज़ब भी कोई शिकार करने के लिए व्योम लोक से वाहर जाता था तो उसकी सुचना व्योम लोक के महाराज को मिल जाती थी। कौन लोग और कितने लोग जा रहे हैं। जीवन ऊर्जा मोती अनमोल होते थे अपनी शक्ति स्तर के हिसाब से। उनको अपनी ऊर्जा शक्ति को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। व्योम लोक का नीलामी घर भी खरीद लेता था और उनको बेच देता था। रुद्राक्ष अग्निवंशी अपना टोकन स्कैन करवा देता हैं और प्रवेश द्वार खुल जाता है। वो व्योम लोक से बाहर निकलता हैं और दिशा का अनुमान लगाता हैं और और फिर अपने पंख से उड़ जाता हैं वो लोग अपनी आँखो के सामने से उसको गयाब होते देख रहे थे और कुछ ही सेकंड वो नज़र आना बंद हो जाता हैं। उनमे से एक कहता हैं इस लड़के की रफ़्तार तो कबीले तारीफ है। देखो यह जिन्दा वापस आ पाता है की नहीं। और उसके बाद वो लोग अपना काम करना शुरू क़र देते हैं। इधर राजकुमारी मीरा देखती है की रुद्राक्ष स्टूडेंट हाल मै नहीं है तो सोचती है कँहा गया होगा। फिर वो स्टूडेंट हाल को अटेंड करने के बाद वो कुछ सोचती हुए उसके भवन की तरफ चली जाती है। उसके भवन मै ज़ब रामसिंह देखते है कोई राजकुमारी आयी है तो वो बोलते है आप राजकुमारी मीरा हो ना.अपनी पहचान को उनके मुँह से सुन क़र वो हैरान होती है वो कहती है आपको कैसे पता तो रामसिंह कहता है रुद्राक्ष अग्निवंशी नें बताया था की आप यंहा आ सकती हो उनके बारे मै पूछने के लिए। हम्मतो आप मुझे बताओ वो कँहा है इस वक्त। इस पर रामसिंह कहता है वो सुबह ही भवन छोड़ क़र चले गए थे। मुझे इतना ही बोला था फिकर मत करना मै दो तीन दिन मै वापस आ जाऊंगा। फिर राजकुमारी मीरा नें अपना दिमाग़ लगाना शुरू किया की कँहा जा सकता है पहले तो कुछ समझ नहीं आया ज़ब चीजों को जोड़ना शुरू किया तो जो विचार सामने आया.उसके बारे मै सोचने मात्र से ही उसे पसीना आने लगा था। रुद्राक्ष उसके लिए एक पहेली बना हुआ था जितना सुलझाने की कोशिश करती उतनी ही उलझ जाती थी। इधर रुद्राक्ष अग्निवंशी बिजली की रफ़्तार से उड़ता हुआ व्योम लोक की उतर दिशा मै जा रहा था वो उड़ते हुऐ ज़ब तक नहीं रुका ज़ब तक उसको व्रह्म राक्षस उसके दिशा मै दिखाई देना नहीं शुरू हुऐ। उन राक्षसों की शक्ति भी बहुत तेज़ थी उन्होंने भी पता लगा लिया था कोई उनकी तरफ आ रहा है। उसने देखा की राक्षसों की पूरी फ़ौज है। वंहा लाखो की संख्या मै थे। कुछ ही पलों मै रुद्राक्ष उन लोगों के सामने था। हज़ारो किलोमीटर का झेत्र और उसमे एक महल बना हुआ दिखाई दे रहा था। रुद्राक्ष नीचे उतरा और उन राक्षसों को बोला तुम्हारा राजा कँहा है मुझे वो चाहिए। वो राक्षस हॅसने लगे उसकी बात को सुनकर उनमें से एक बोला आज तो कोमल स्वादिस्ट मानव खाने को मिलेगा। उसमे से एक राक्षस नें रुद्राक्ष को मारने के लिए अपने भाले मै शक्ति भर क़र फैक दिया। उसकी शक्ति भाले को अपने पास आता देख क़र रुद्राक्ष नें अपना हाथ आगे किया और अपने हाथ के प्रहार से उसको नस्ट क़र दिया था। रुद्राक्ष अग्निवंशी नें अपनी आभा को छोड़ दिया और फिर जैसे ही उसने साथ मै अपनी दिव्या ऊर्जा औरा खोल दिया अब वो खुल क़र खेलना चाहता था। उसका शरीर रौशनीयों से चमक उठा इस समय उसकी आकृति अलौकिक दिव्या पुरुष की तरह की लग रही कई तो उसके आभा के दवाब के कारण खून की उलटी क़र रहे थे कई लोग जो पास मै थे उनके शरीर के चीथड़े उड़ गए। इतनी भायनाक शक्ति को देख क़र सबको खौफ पैदा हो गया था। उसने अपना हाथ आगे किया और एक शक्तिशाली तलवार उसके हाथो मै आ गयी उसने उन लाखो व्रह्म राक्षसों को आधे घंटे मै खतम क़र दिया। इतना विनाश को देख क़र उनका राजा जिसके पास व्रह्म अस्त्र था रुद्राक्ष के आगे आ गया। ज़ब रुद्राक्ष नें देखा की वो व्रह्म की शक्ति अवहन क़र रहा है और उसने वो व्रह्म शक्ति अस्त्र को रुद्राक्ष पर चला दिया उसकी शक्ति सूर्यो का तेज़ लिए राश्ते मै सब कुछ नस्ट करती हुए रुद्राक्ष अग्निवंशी के शरीर से टकरा गयी एक भायनाक विस्फोट हुआ और वो अस्त्र फिर उसके अंदर गायब हो गया था। एक बार तो वो राक्षसों का राजा खुश हो गया की उसका शत्रु ख़तम हो गया हैं। वो अस्त्र अपराजिता था। मगर फिर सामने देखा की रुद्राक्ष खड़ा हुआ दूर से उसको ही देख रहा था। रुद्राक्ष नें अपनी तलवार के एक ही बार से। उसके सर को काट दिया था वंहा हज़ारो किलोमीटर के झेत्र मै भयानक तभाई हुई थी। इस लड़ाई की गूंज अन्य दिशाओ मै जा चुकी थी। रुद्राक्ष नें उन सभी व्रह्म राक्षसों को अपनी स्टोरेज रिंग मै डाल दिया था उसके पहले उसने सभी की स्टोरेज रिंग को निकाल लिया था और उनको अलग ऊर्जा झेत्र मै रख दियाउसके बाद रुद्राक्ष उसके महल मै जा पंहुचा और अपनी दिव्या दृस्टि से महल को देखना शुरू किया उसने महल के तहखाने मै विशाल खजाना देखा जिसमे अनमोल चीजें भी शामिल थी। रुद्राक्ष महल के तहखाने पर जा पंहुचा और उसने अपनी आध्यात्मिक शक्ति को छोड़ दिया. और देखते देखते ही सारा खजाना खाली हो गया। उसने उसके सारे खजाने को अपनी स्टोरेज रिंग मै रख दिया। वो लगातार शिकार करता रहा. कोई भी मंडल का हो चाहे चाँद मंडल, सूर्य मंडल, आकाश मंडल रुद्राक्ष सभी को ठिकाने लगता गया और उनके खजाने को अपने पास रखता गया तीन दिन मै उसने व्योम लोक की हर दिशा की सफाई क़र डाली थी। अब ना तो व्योम लोक को सुरक्षित रखने के लिए दानव और दैत्य से किसी भी चीज की जरुरत नहीं थी। अब उसका दयारा और बड़ा किया जा सकता था.इस समय रुद्राक्ष के पास करोड़ जीवन ऊर्जा मोती थे। इस समय उसके बराबर धनबान कोई ही होगा। उसकी स्टोरेज रिंग जिस मै चार ग्रह जितनी जगह थी वो एक तिहाई भर गयी थी। रुद्राक्ष अग्निवंशी वापस व्योम लोक के प्रवेश द्वार पर आता हैं और अपना सिल्वर टोकन दिखा क़र प्रवेश करता हैं। उसके तीन बाद जीवत वापस आते हुऐ देख क़र सबको हैरानी होती हैं फिर वो सोचते हैं अपनी जान को बचा क़र छुप गया होगा और मौका मिलते ही वापस आ गया हैं। उसको देख क़र लग नहीं रहा था की वो शिकार करके वापस आया हैं उन लोगों नें पूछ ही लिया कुछ शिकार भी किया या फिर ऐसे ही वापसी हो गयी उनकी बातो का मनताव्य वो समझ गया था। उसने बोला मेरी तरफ से आप लोगों को एक तौफा। और उसने अलग अलग मण्डल की पांच लाशें और उनके सिर उनके सामने डाल दिए। अपनी आँखों के सामने इतनी कीमती चीजों का पड़ा देख क़र वो सदमे मै चले गए और ऊपर से यह उनके लिए तौफा था। उनको हैरानी मै ही छोड़ क़र वो व्योम लोक के शिकारी परिषद मै चला गया और बोला मुझे अपने शिकार किया हुआ सामान बेचना है। अधिकारी बोला कितने जानवरो का शिकार किया हैं आपने दानव या फिर दैत्य का रुद्राक्ष बोला मुझे बड़ी जगह चाहिए आपको दिखाने के लिए उनको लगा रुद्राक्ष मज़ाक क़र रहा हैं वो बोला आपके सामने जो विशाल हाल हैं इसमें रख दो और हम लोगों को चैक करने दो। रुद्राक्ष अग्निवंशी बोला ठीक हैं। उसने हाल ग्राउंड जो भी जगह मिली सब भर दी थी पुरे परिषद मै जानवरो राक्षसों और दानव दैत्य, व्रह्म राक्षस ही नज़र आ रहे थे। जितने भी कर्मचारी अधिकारी थे सदमे मै चले गए थे कई लोगों को तो दिल का दौरा पढ़ने से बचा। तुरंत जंगल मै आग की तरह खबर फ़ैल गयी। सभी बड़े अधिकारी और योद्धाओ का समूह और खुद व्योम लोक का राजा मौके पर आ गयाजो देखता वो ही आँखों को फाड़ फाड़ क़र रुद्राक्ष और उसके हाथो से लगाए गए ढेर को देखता था। रुद्राक्ष की की रहस्यमाई आभा अलग ही कहानी कह रही थी। करोडो साल मै जो नहीं हुआ था वो सबके सामने हुआ पड़ा था। राजा नें तुरंत सब कुछ विशेष दर्जा के साथ रुद्राक्ष को मिला और उसने रुद्राक्ष को जेड प्लस डायमंड टोकन दिया। सभी परिषद के राजकुमार और राजकुमारी की भी भीड़ लग गयी थीवंहा पर सभी अनमोल लाशें पड़ी हुई थी। रुद्राक्ष नें बोला क्या इनकी नीलामी या कीमत कैसे तय होंगी व्योम लोक का राजा बोला कितनी होंगी यह राजकुमार रुद्राक्ष तो वो बोला एक करोड़ होंगी। ज़ब सबने यह सुना तो फिर सबको सदमा और हार्ट अटैक आ जायेगा। उसके बाद रुद्राक्ष बोला महाराज आपके लिए भी मेरे पास तोफा हैं। उसके बाद वो सभी राक्षसों और उनके समुदाय के नेता राजा के सर और शरीर उनके सामने रख देता हैं। ज़ब राजा देखता की व्रह्म राक्षस का राजा का काटा हुआ सर और शरीर उनकी आँखों के सामने पड़ा हैं जिस से पूरा व्योम लोक करोडो सालो से परेशानी मै था। कोई भी उसको ख़तम करने की झूंमता नहीं रखता था यंहा तक की स्वर्ग के योद्धा और देवता भी उससे युद्ध करने से कतराते थे। राजा सारंग व्योम लोक का दूसरा भव्य राजमहल को राजकुमार रुद्राक्ष के लिए तैयार करने का आदेश पारित करता हैं जल्द से जल्दी यह काम पूरा किया जाये. और राजकुमार रुद्राक्ष को सम्मान के साथ राजमहल लाया जाये।। राजकुमार रुद्राक्ष. राजा सारंग से कहता हैं क्या मै अपने पुराने भवन के कुछ लोगों को भी अपने साथ रख सकता हूँ। तो राजा कहता हैं आपको किसको रखना हैं और किसको नहीं यह आपका फैसला होगा और कोई भी इसमें दखल नहीं देगा। अपने भवन की तरफ जाने से पहले रुद्राक्ष कहता हैं इन सबके जीवन ऊर्जा मोती मेरे पास हैं। आप लोग पहले यह काम निपटा लो फिर मै आपको जीवन ऊर्जा मोती दे दूंगा वो इतनी ही संख्या मै होंगे। किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था रुद्राक्ष सबको झटका ही झटका दिए जा रहा था। राजा सारंग कहता है राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी आप आराम क़र ले हम लोग महल मै चर्चा करते हैं इस बारे मै। वो कहता हैं ठीक हैं महाराज मै अभी फिलाल अपने पुराने भवन जा रहा फिर मै अपने राजमहल मै आ जाऊंगा शाम को। उसके बाद रुद्राक्ष वो जगह छोड़ देता हैं सब लोग अपने आप ही राश्ता दे रहे थे। वो इस समय व्योम लोक का असली राजकुमार लग रहा था वो चलता हुआ अपने भवन मै पहुंच जाता हैं और बोलता हैं काका भोजन तैयार क़र लो फ्रेश होने के बाद मै भोजन करूँगा और वो अपने कमरे मै नहाने चला जाता है और कुछ देर बाद वो कपडे बदल क़र हाल मै आता हैं तो देख क़र हैरान रह जाता हैं कुछ छात्र हर एक परिषद से आये हुऐ थे और राजकुमारी मीरा सबको कह रही होती हैं बाबा थोड़ा रुको तो सही तभी तो मिलवाउंगी मै आप लोगों को राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी से। रुद्राक्ष थोड़ा खस्ता हुआ नीचे हाल मै आने लगता हैं लड़कियों की दिल की धड़कन बढ़ जाती हैं। रुद्राक्ष नीचे आकर कहता हैं कैसी हैं आप राजकुमारी मीरा। वो कहती हैं यह लोग आप से मिलना चाहते थे। इसलिए मुझे आपके पास आना पढ़ा। हकीकत मै तो वो खुद भी मिलना चाहती थी मगर यह बात बोल नहीं सकती थी। ज़ब भी वो रुद्राक्ष को देखती थी तो वो उसको हमेशा ही रहस्यमी लगता था। रुद्राक्ष सब लोगों से विन्रम होकर मिलता हैं और बातचीत करता हैं। इतने मै काका कहते हैं रुद्राक्ष भोजन तैयार हो गया हैं आपके लिए। उनकी बात को सुन क़र रुद्राक्ष कहता हैं काका मेरे दोस्तों को भी भोजन करना हैं थोड़ा मात्रा और बड़वा दो। सब लोग हैरान रह जाते हैं उसकी शालीनता को देख क़र. उसने सबके दिल मै घर बना लिया था। वो सब लोगों को भोजन करवा क़र विदा क़र देता हैं।। राजकुमारी मीरा कहती हैं क्या मुझे आप का कुछ समय अकेले मै बात करने के लिए मिल सकता हैं। रुद्राक्ष कहता हैं हम लोग अकेले जरूर साथ बैठ क़र बता भी करेंगे और भोजन भी पर कुछ दिन का समय मुझे आप से चाइये होगा राजकुमारी मीरा। उसकी इस शालीनता नें मीरा के दिल पर बार किया था। जितना शक्तिशाली उतना ही विन्रम भाव वो दिल ही दिल मै उसकी कायल हो चुकी थी। फिलाल तो मै विश्राम करूँगा और कल कुछ मुद्दे निपटाऊँगा। व्योम लोक मै नीलामीरुद्राक्ष अग्निवंशी राजकुमारी मीरा को भेजनें के बाद खुद विश्राम करने चला जाता हैं और जाते जाते कहता हैं काका आप से कल बात करूँगा मै थक गया हूँ। राम सिंह कहते है कोई बात नहीं रुद्राक्ष तुम आराम करो। और फिर वो लोग भी भोजन करके विश्राम करने जाने लगते तो उनमें से एक कहता हैं भाई रामसिंह आपको राजकुमार रुद्राक्ष कुछ रहस्यमयी नहीं लगते है उनकी बातो को सुनकर रामसिंह कहता हैं मुझे ऐसा लगता हैं वृह्माण्ड मै शक्ति का संतुलन और समीकरण फिर बदलने वाला जैसे हमारे महान पूर्वज त्रिनेत्रा के समय हुआ था। उनके सामने कोई खड़ा होने का हिम्मत नहीं करता था।.और उसके बाद वो लोग भी विश्राम करने लग जाते है। अंगले दिन की सुबह व्योम लोक जँहा राजा सारंग के आदेश से सबकी नींद उडी हुई थी वंही रुद्राक्ष आराम से सौ क़र उठा फ्रेश हुआ और भोजन के लिए काका को बोला. फिर उसने भोजन किया और रुद्राक्ष ज़ब भवन से जाने लगा तो वो बोला आप सभी लोग आज के बाद मेरे साथ राजमहल मै रहेंगे जो राजा सारंग के बराबर मै हैं। सभी को अनुमान था इतनी बड़ी घटना होने के बाद रुद्राक्ष इस भवन मै नहीं रुकेगा मगर वो उन लोगों को साथ ले जायेगा यह उनको भी पाता नहीं था। इतना कहकर वो उड़ता हुआ भवन से निकल जाता है। उसको उड़ता हुआ आसमान मै सब लोग देख रहे थे जिनको जानकारी थी वो समझ गए यह दिव्या गरुड़ पंख हैं मगर उनकी शक्ति अथाह लग रही थी यह वो लोग नहीं समझ पा रहे थे। रुद्राक्ष शिकारी परिषद मै उतरा सब लोगों नें उसको इज़्ज़त दी। और सम्मान से देखा। वो ज़ब उसके आने की खबर परिषद प्रमुख को लगी तो वो भगा भगा आया और बोला इनकी गिनती तो आपकी बताई हुई गिनती से ज्यादा हैं। इन सब के विसय मै आपको महाराज बताएँगे हम लोग भी वंहा पहुँच रहे हैं और नीलामी वाले भी वंही मिलेंगे।। उसके बाद रुद्राक्ष अग्निवंशी उड़ता हुआ राजमहल की तरफ जाने लगता हैं और कुछ समय बाद वो राजमहल के सामने उड़ता हुआ खड़ा हुआ था। उसके बाद वो अपने पंख अंदर लेता हैं और नीचे उतर क़र राजमहल के प्रवेश द्वार पर जाता है। उसको देखने के बाद योद्धाओ का समूह उसको इज़्ज़त के साथ अंदर लेकर जाते है। उसको महाराज सारंग के भव्य कक्ष जो हॉल नुमा बना हुआ था उसके पास छोड़ देते है। वो अंदर कक्ष मै जाता हैं तो देखता हैं सभी प्रमुख और मुख्य लोग आये हुऐ बैठे थे। उसको देख क़र महाराज सारंग कहते हैं आओ राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी हम लोग तुम्हारा ही इंतजार क़र रहे थे। उसके बाद रुद्राक्ष वंहा पर सभी लोगों को प्रणाम करता है और महाराज के साथ मै खाली जगह थी जँहा पर वो खुद उसको बैठाते है। फिर चर्चा शुरू करते हैंवो सब लोगों के विचार और बातो को ध्यान से सुनता हैं और कहता हैं जितना भी मुनाफा हम लोगों को होगा वो मै आधा अपनी तरफ से व्योम लोक के विकास और इसके विस्तार के लिए दूंगा। सभी लोगों के मुँह हैरत से खुले रह जाते हैं। इसका मतलब था वर्तमान से सौ गुणा ज्यादा कोष का होना। वो महाराज को कहता हैं यह नीलामी खत्म होने के बाद जीवन ऊर्जा मोती की भी नीलामी करवानी हैं। इस पर सभी लोग सहमत होकर सभी दूसरे लोको को सन्देश भेज देते हैं। जिसमे सबसे कीमती व्रह्म राक्षस के राजा का जीवन ऊर्जा मोती था. उसको तो देवता भी खरीदना चाहेंगे। क्यों की वो मोती एक तरीके से भगवान व्रह्म का वृदान होगा उसमे जो ऊर्जा होंगी उसको धारण करने के बाद कोई भी अगले स्तर पर चला जायेगा। यह खबर सभी लोको मै हलचल मचा देती हैंव्रह्म राक्षस के राजा के पास व्रह्म का व्रह्म अस्त्र था उसको मार दिया गया। स्वर्ग लोक मै भी हंगामा मचा हुआ था। बहुत सारे देवता अपनी अपनी योजना बनाने मै लग गए थे वंही कामिनी देवी खुद भी सदमे मै थी की वो कालकेतु को क्या जवाब देगी। सभी लोग व्योम लोक मै आना शुरू क़र देते हैं नीलामी का समय दस दिन बाद का रखा गया था. अंगले दिन से ही अन्य लोको के लोगों और प्रतिनिधि लोग आना शुरू हो गये थे। सबको रोकने और खाने पीने का भव्य बन्दोंवास्ट किया गया था। व्योम लोक जो लाखो किलोमीटर के झेत्र मै फैला हुआ था उसका हर होटल. धर्मशाला और सराय घर सभी भरे हुऐ थे मधुशाला मै लोगों का योद्धाओ का जमघट लगा हुआ थाहर किसी की जवान पर रुद्राक्ष अग्निवंशी का नाम था। हर कोई उसको देखना और मिलना चाह रहा था जिसने करोडो सालो का इतिहास पलट क़र रख दिया था। योद्धाओ के लिए वो देवता की तरह हो गया था। इधर अपने राजमहल मै रुद्राक्ष साधना करने मै लगा हुआ था उसने महराज सारंग को बोल दिया था वो साधना करने जा रहा है बाकी आप सब लोग मिलकर देख लो। धीरे धीरे नीलामी का भी दिन आ गया और रुद्राक्ष भी साधना से वाहर निकल आया। उसके सभी गुलाम जानवरो मै शक्ति का अद्भुत परिवर्तन हुआ था। वो अकेले ही दम पर पुरे वृह्माण्ड मै तबाही फैला सकता था। उसकी शरीर मै बहने वाली ऊर्जा दिन पर दिन और सुर्ख रंग की होती जा रही थी। आज नीलामी का दिन था रुद्राक्ष साधना से उठा कर फ्रेस हुआ और फिर कुछ भोजन किया और फिर नीलामी घर की तरफ निकल गया आसमान ज़मीन हर जगह योद्धाओ को सुरक्षा के लिए तैयार किया हुआ था। आसमान मै अलग अलग जानवरो पर योद्धा पुरे लोक का चक्कर लगा रहे थे। इन सब चीजों को देखता हुआ वो सड़क पर चलता हुआ जा रहा था अचानक से उसको एक आवाज़ सुनाई देती हैं कोई उसको बोलता हैं छोटे भाई यह नीलामी घर का राश्ता किधर हैं रुद्राक्ष कहता इसी सड़क पर आगे जाके मुड़ना पड़ेगा सामने नीलामी घर का विशाल झेत्र हैं। वो लड़का रुद्राक्ष से उम्र मै थोड़ा बड़ा होगा। वो बोला मै स्वर्ग लोक से आया हूँ यंहा नीलामी मै कुछ खरीदने मुझे पीताजी नें भेजा हैं मेरा नाम गौरीशंकर हैं तुम्हारा नाम क्या हैं। रुद्राक्ष को वो लड़का बड़बोला और साफ दिल का लग रहा था। वो बोला ठीक मत बताओ अपना नाम यह बताओ क्या तुम भी कुछ खरीदने जा रहे हो नीलामी घर मै। उसकी बात को सुनकर रुद्राक्ष हंस क़र बोला बड़े भाई देखता हूँ कुछ खरीद पाउँगा या नहीं मै कोई अमीर तो नहीं इतना यंहा बहुत धनबान लोग आये होंगे.गौरीशंकर कहता हैं छोटे भाई एक बार मै अपनी चीज खरीद लूंगा फिर जितना बचेगा वो मै तुमको दे दूंगा तुम अपना सामान खरीद लेना। रुद्राक्ष कहता हैं और मै अगर तुम्हारा ऋण नहीं दे पाया तो। कोई बात नहीं मै पीताजी को बोल दूंगा की मैंने अपने मित्र की मदद क़र दी थी वो मुझको थोड़ा डाटेंगे ही बस। रुद्राक्ष गौरीशंकर से बाते करता हुआ नीलामी घर के पास आ गया था। ज़ब उन लोगों नें देखा की राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी आ रहे हैं उन लोगों नें तुरंत दूसरा द्वार जो विशेष लोगों का था खोल दिया। ज़ब वंहा खड़े हज़ारो आदमी देखने लगे की एक लड़के को दूर से आता देख क़र ही सब सम्मान की मुद्रा मै झुक गए थे। वंही गौरीशंकर अपनी बातो मस्त था ज़ब वो प्रवेश करने लगे तो उसने इधर उधर नज़र घुमा क़र देखा। इतने मै एक अधिकारी बोल पढ़ा राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी नीलामी शुरू होने वाली हैं इस बार कुबेर देवता भी आये हैं और भी देवता हैं। फिर वो अंदर जाने लगता हैं और गौरीशंकर का हाथ पकड़ता हैं और बोलता हैं बड़े भाई चलो यही खड़े रहोगे क्या। जिन लोगों नें सुना वो अलग अलग चमकिले वालों रुद्राक्ष अग्निवंशी है सब लोग हैरानी से उसको ही देख रहे थे यह तो पंद्रह साल का युवा लड़का हैं। ज़ब यह जवान होगा तो फिर यह वृह्माण्ड पर राजा बनेगा. जीतने मुँह उतनी बाते शुरू हो गयी थी। गौरीशंकर खुद सदमे था। उसको यकीन ही नहीं हो रहा था जिसको वो पका रहा था वो कौन निकलेगा। रुद्राक्ष गौरीशंकर को एक अलग जगह बैठने को बोलता हैं और वंहा बैठ जाता और रुद्राक्ष महाराज के पास चला जाता हैं। वो और सारंग एक अलग इस्थान पर बैठ जाते हैं बोली शुरू होने का इसरा कर देते हैं और उसके बाद मंडल के हिसाब से और उनके शक्ति के स्तर के हिसाब को बता क़र सारी चीजें आगे बढ़ जाती हैं। और फिर कुछ ही देर मै वंहा पर स्टोरेज रिंग का ढेर लगना शुरू हो जाता है आधे दिन मै पहले चरण की नीलामी खत्म हो जाती हैं। सभी लोको से आये हुऐ लोगों नें अपने अपने मतलब का सौदा लिया था। आधे घंटे के बाद दूसरे चरण की नीलामी का दौर शुरू होता हैं और रुद्राक्ष खड़ा होता हैं और वंहा जीवन ऊर्जा मोती का ढेर लगा देता हैं। यह देख क़र जो लोग खरीदने आये हुऐ थे पागल हो जाते हैं। जीवन ऊर्जा मोती की बोली शुरू होती हैं और जैसे ही ढेर खतम होने को होता था फिर उठ क़र वो मोती का ढेर लगा देता था। लोगों को समझ ही नहीं आ रहा था कितने जीवन ऊर्जा मोती हैंसब लोग खरीदने मै लगे हुऐ थे। फिर वो इस बार व्रह्म राक्षस के जीवन ऊर्जा मोती का ढेर लगा देता हैं. नीलामी होते होते शाम हो जाती हैं और जीवन ऊर्जा मोती अभी भी बड़ी संख्या मै मौजूद थे। राजा सारंग उठ क़र कहते हैं कल फिर जीवन ऊर्जा मोती की नीलामी होंगी कोई भी निराश ना हो सबको खरीदने का मौका दिया जायेगा। कल व्रह्म जीवन मोती की भी नीलामी होंगी। उसके बाद सब लोग अपने अपने रहने के स्थान पर चले जाते हैं। व्यवस्था देखने और करने वाले लोग वंही रुके हुऐ थे रुद्राक्ष और सारंग भी वंही थे। महाराज सारंग कहते हैं राजकुमार रुद्राक्ष यह सब आपका हैं। जो भी हुआ हैं। उनकी बात को सुनकर वो मुस्कान लाते हुऐ कहता हैं ठीक महाराज सारंग आप हम तो फिर बाद मै भी साथ बैठ क़र बता क़र लेंगे। उसके बाद वो अपने हाथो से रोशिनी की अलग अलग किरण निकलता हैं जो वंहा रखे हुऐ स्टोरेज रिंग्स से टकरा जाती हैं और उसके बाद वो सारी गायब हो जाती हैं। ऐसी शक्ति महाराज सारंग नें अपने करोडो साल मै भी नहीं देखी थी. अगर रुद्राक्ष उनको कुछ देता भी नहीं तो भी उसके साथ उनका रिश्ता एक अलग ही पहचान बना रहा था और यह तो शुरुआत थी। जितना राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी का होगा साथ मै महाराज सारंग का होगा यह कीमत मुद्रा या किसी भी चीज अधिक थी। वैसे भी रुद्राक्ष नें खुद ही जानवरो और दानव और दैत्य से आयी हुई कीमत को व्योम लोक के विस्तार और विकास मै सभी के सामने लगाने का बोला था। तो कंही से भी सक या किसी भी चीज की गुंजाइश नहीं थी। सारे स्टोरेज रिंग को कलेक्ट करने के बाद वो और सारंग राजमहल मै आ जाते हैं। रुद्राक्ष अपने राजमहल मै आ जाता हैं और महाराज सारंग अपने राजमहल मै आ जाते हैं। फिर कुछ समय बाद स्वर्ग के देवता और अन्य लोग महाराज सारंग से मिलने आते हैं गौरीशंकर भी अपने पिता के आदेश के हिसाब से देवताओं के साथ आता हैं। महाराज सारंग सबका स्वागत करते हैं और उन लोगों के भोजन का प्रबंद करवाते हैं. फिर भोजन पर चर्चा शुरू होती व्रह्म जीवन ऊर्जा मणि को लेकर वो एक ही थीसारंग जी कहते उनके राजा की मोती एक ही हैं और राजाओं की भी जीवन ऊर्जा मोती हैंअभी राजकुमार रुद्राक्ष के पास पर्याप्त मात्रा मै मौजूद है फिर सभी मन ही मन सोचते हैं की कल की बोली मै ही पता चलेगा की क्या कीमत जाती हैं ऊर्जा मोती की। सब लोग भोजन के बाद अपने अपने निवास पर चले जाते हैं। अंगले दिन फिर नीलामी की प्रक्रिया शुरू होती है। राजकुमार रुद्राक्ष अपने समय से ही पहुच जाता है किसी को उसके कारण इंतजार ना करना पड़ेनीलामी घर आज भी लोगों से भरा हुआ था उसके बाद रुद्राक्ष पांच राजाओं की मोती को छोड़ क़र सभी का ढेर लगा देता है। आधे दिन मै सभी जीवन ऊर्जा मोती की नीलामी ख़तम होती हैं और फिर आधे घंटे के बाद दुबारा शुरू होती हैं और फिर वो उन मोती को भी भी वाहर निकाल क़र रख देता हैं। फिर शुरू होती हैं आगे की करवाई जिसमे व्रह्म स्तर की जीवन ऊर्जा मोती को कुबेर देव खरीद लेते हैं और एक स्वर्ग की टॉप क्लास की स्टोरेज रिंग देते हैं। नीलामी खतम हो जाती हैं और उसके बाद वो सारा सामान एक बार फिर उसकी स्टोरेज रिंग मै चला जाता हैं। उसके बाद सभी लोग अपने अपने निवास स्थान पर चले जाते हैं कुछ लोग अपने लोको को लौट गए थे कुछ लोग रुके हुऐ थे। फिर जो देवता स्वर्ग लोक से आये हुऐ थे उनको सन्देश आता है की व्योम लोक के योद्धा राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी को स्वर्ग लोक लेकर आये। यह सन्देश उनको ऊपर से हाई कमान से मिला था। वो इसको बिल्कुल भी नज़र अंदाज नहीं क़र सकते थे। राकेश स्टोरी । नीलामी ख़तम होने के बाद रुद्राक्ष अपने राजमहल मै वापसी क़र ली थी. महाराज सारंग भी वापस अपने राजमहल मै आ चुके थे रुद्राक्ष नें कँहा काका भोजन का इंतज़ाम करवाओ आज सब साथ बैठ क़र भोजन करेंगे तब तक मै फ्रेश होकर आता हूँ। यह कहकर रुद्राक्ष अपने कक्ष मै आ गया और फ्रेश होने लगा था। ज़ब वो नीचे आया तब तक भोजन का प्रबंद हो चूका था। उसने काका को कहा काका आप लोगों को कुछ औसधी की गोलिया बना क़र दूंगा उनको खाने का बाद आप लोगों को साधना करनी हैं आपके शरीर मै जो भी असुधी हैं वो दूर हो जाएगी और आप अंगले स्तर को पार क़र जाओगे। आपको थोड़ा समय और प्रतीक्षा करनी हैंउस नुकसे की सारी जड़ी बूटी मिल जाने के बाद मै आप लोगों के लिए वो गोलिया तैयार क़र दूंगा। इसी तरह की बाते होती रही और रुद्राक्ष नें सबके साथ भोजन ख़तम करके बोला काका मै विश्राम करने जा रहा हूँ.और वो अपने कक्ष मै आ गया। उसके बाद उसने व्योम लोक की नीलामी के सामान को एक अलग ऊर्जा झेत्र मै रखा हुआ था उसको देखने लगा। जानवरो दानवो और दैत्य से उसको जो स्वर्ण मुद्रा और हीरे और आध्यात्मिक ऊर्जा पत्थर नीलम मिले थे उसकी संख्या ही कई करोडो शंख मै थी। हम्म्म्म उसके बाद उसने जीवन ऊर्जा मोती की नीलामी को देखा कितने मै हुई। उसने देखा की खरबों शंख की मात्रा थी स्वर्ण मुद्रा और नीलम, हीरे जो दुर्लभ और बेसकमती थे। हम्म्म्म उसके बाद उसने लास्ट की स्टोरेज रिंग्स को देखा। उनमे लाख गुणा ज्यादा था सब कुछ जो उसके पास था। सबसे ज्यादा पसंद उसको कुबेर देव को रिंग आयी उसने देखा उसमे एक गैलेक्सी जितना स्पेस था। उसने वो रिंग पहन ली और उसको अपनी आध्यात्मिक शक्ति से सील क़र दिया उसके अलवा कोई ना खोल सकता था ना कुछ देख सकता था। उसको लगा कंही ना कंही कुबेर देव नें यह जानबूझ क़र दी हैं उसको। फिर उसने इस बारे मै ज्यादा नहीं सोचा और उसके बाद उसने उस व्रह्म राक्षस की रिंग को देखा उसमे भी आपार स्वर्ण मुद्रा और चीजें थी उसकी रिंग भी एक ग्रह का अपने अंदर रख सकती थी। इस समय रुद्राक्ष कई लोको को खरीद सकता था। इतनी सम्पदा का वो स्वामी बन चूका था। उसके बाद वो सो गया और अंगले दिन उठा और फ्रेश होकर भोजन करके राजमहल से बाहर निकल आया और फिर महाराज सारंग के महल की तरफ जाने लगा। ज़ब वो सारंग के महल पंहुचा तो देखा कुछ देवता लोग उनके साथ बातचीत क़र रहे थे वो रुक गए। फिर महाराज सारंग नें रुद्राक्ष का सबसे परिचय करवाया। फिर रुद्राक्ष नें एक दूसरे का अभिबादन किया। फिर कुबेर देव बोले राजकुमार रुद्राक्ष आपको हमारे साथ स्वर्ग लोक चलना होगा आपकी काबिलियत को देखते हुए आपको स्वर्ग लोक मै प्रशिक्षण के लिए चुना जा चूका हैहम लोग यही बात महाराज सारंग से क़र रहे थे। उन लोगों की बातो को सुनकर रुद्राक्ष कहता है मै चलने को तैयार हूँ मगर मुझे कुछ काम निपटाने हैं मुझे दो तीन दिन का समय चाइये। वो कोई बड़ी बात नहीं हैं राजकुमार रुद्राक्ष आप अपना काम ख़तम करो तब तक हम इनकी मेहमान नाबाज़ी का लुफ्त लेते है। उसके बाद रुद्राक्ष सारंग को आधी स्टोरेज रिंग देने लगता हैं मगर पाता नहीं क्यों सारंग लेने से मना क़र देता है। सारंग की जिद के आगे रुद्राक्ष को झुकना पड़ता हैं.सारंग नें रुद्राक्ष को अपना छोटा भाई बना लिया था। सारंग कहता हैं ज़ब मुझे तुम्हारी जरूरत हो तो अपने बड़े भाई के साथ खड़े रहना और मुझे कुछ नहीं चाइये। फिर रुद्राक्ष सारंग से विदा लेकर राजकुमारी मीरा के पास जाने के लिए निकल जाता हैं। उसके बाद महाराज सारंग कहते हैं आज मुझे करोडो सालो के बाद उम्मीद की किरण नज़र आयी हैं यह तुझे जला क़र राख़ क़र देगी बहुत जल्दी मै अपनी आकश गंगा मै लौटूंगा। इतना कह क़र वो शांत हो जाता है उसकी आँखों मै सुनहरी चमक आ गयी थी एक बार तो। इधर रुद्राक्ष राजकुमारी मीरा के पास जाने के लिए निकल चूका था वो मीरा के निवास की तरफ छात्र परिषद से होते हुए निकलने लगता हैपुराने नये सभी लोगों नें ज़ब उसको वंहा देखा तो घेर लिया उसने सभी लोगो से बातचीत की और मीरा के निवास पर जा पंहुचा था। उसने वाहर बोला राजकुमारी मीरा को बोल दो रुद्राक्ष मिलने के लिए आया है। ज़ब मीरा को पता चलता है तो वो खुद ही बाहर आ जाती है और उसको अंदर लेकर जाती है भवन मै। दोनों शांति से कुछ देर बैठे रहते है फिर रुद्राक्ष ही पहल करता हुआ पूछता है तुम मेरा पीछा क्यों क़र रही थी ज़ब मै ज्वालामुखी के लावा की नदी का निरिक्षण क़र रहा थाफिर तुमने स्वर्ग आश्रम मै भी मेरा पीछा किया क्या इसकी कोई खास वजह थी राजकुमारी मीरा नें उम्मीद नहीं की थी की उसको सब शुरू से ही पता था वो बस जानबूझ क़र चीजों को नज़र अंदाज़ क़र रहा था। उसकी बात को सुनकर राजकुमारी मीरा कहती है तुम उस वक़्त भी एक रहस्य थे और आज भी तुम मेरे लिए एक रहस्य हो। इसी गुती को सुलझाने की कोशिश क़र रही थी। हम्म्म्म रुद्राक्ष कहता है मै हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर के घीरा हुआ जो आर्यवत है वंहा के दक्षिण और उतर का सम्राट हूँ। इसके अलवा मै गरुड़सर्प लोक का चक्रवर्ती सम्राट हूँ राजकुमारी मीरा हैरान थी उसकी पहचान को जानकार। क्या तुम मिलना या देखना चाहोगी। तो बताओ मै तुमको लेकर जलता हूँ। लेकिन हम कैसे जायेंगे यह शब्द उसके मुँह से अनायास ही निकल गए। वो बोला अपने लोगों को बोल दो कोई तुमको चार पांच घंटे तक कोई परेशान ना करें। राजकुमारी मीरा वैसा ही करती है जैसा वो कहता है। उसके बाद वो मीरा को लेकर टेलीपोर्ट हो जाता है और उतर साम्राज्य के महल दिखाई देता है ज़ब नौकर देखता है सम्राट रुद्राक्ष आ गए है वो तुरंत सब को सूचित करता है। इधर रुद्राक्ष को अपने दिव्या नाग को कहता है पुरे साम्राज्य की खबर ले क़र आओ। दक्ष कहता है ठीक है मास्टर.उसके बाद उसके पताजी और हिमांशु आ जाते है। वो कुछ देर बातचीत करते है और सारे काम की रिपोर्ट उसको दे देते है। फिर रुद्राक्ष कहता है मेरे पास समय कम अगर कोई परेशानी हो तो मुझको सन्देश भेज देना। इतनी देर मै दिव्या नाग पुरे साम्राज्य का चक्कर लगा क़र वापस आ गया था और आकर रोशिनी मै बदल क़र उसके शरीर मै चला जाता है। उसके बाद रुद्राक्ष टेलीपोर्ट होकर दक्षिण साम्राज्य मै आता है। और भी सब कुछ ठीक पाता है सब लोगों को मिल क़र वो वापस व्योम लोक आ जाता है मीरा को लेकर। अब और कुछ जानना है मेरे बारे मै। राजकुमारी मीरा कहती है तुम सामान्य मानव नहीं हो। ऐसा मेरा दिल कहता है। त्रिनेत्रा सोचता लड़कियों का सिक्स्थ सेंस तेज़ होता है। फिर वो मीरा को बोला मै स्वर्ग लोक जा रहा हूँ तुम मेरे महल मै रह सकती हो। वंहा काका और सभी लोग बहुत अच्छे है। महराज सारंग को मै बोल दूंगा। मगर वो मना क़र देती है। उसके बाद फिर वो वापस अपने राजमहल मै टेलीपोर्ट हो जाता है। राजकुमारी मीरा की तो दुनिया है हिली पड़ी थी। यंहा से वापस वो गरुड़ सर्प लोक मै टेलीपोर्ट हो जाता है और एक दिन वंहा रुक क़र वापस व्योम लोक आ जाता है.अंगले दिन वो उन लोगों को बोलता है की वो चलने के लिए तैयार है स्वर्ग लोक मै। राकेश स्टोरी । सभी कामों को पूरा करके रुद्राक्ष अग्निवंशी स्वर्ग से आये हुए देवताओं के साथ जाने की तैयारी क़र लेता हैं वो बोलता हैं हम लोग कल चलेंगे। जाने से पहले वो महाराज सारंग से मिलता है और उनको नीलामी का मुनाफा देने की कोसिस करता है मगर उसके बदले मै वो उससे मदद मांग लेते हैं की जरुरत के समय वो अपने बड़े भाई के साथ रहे। रुद्राक्ष अग्निवंशी इस बात पर उनको हाँ क़र देता हैं। आँगले दिन वो व्योम लोक को छोड़ देता हैं और स्वर्ग लोक के लिए वो कुबेर देव, गौरीशंकर और अन्य लोगों के साथ ऊर्जा द्वार के माध्यम से स्वर्ग की तरफ चल पड़ता है। वो सभी लोग स्वर्ग लोक मै आ जाते हैं. ज़ब रुद्राक्ष अग्निवंशी स्वर्ग लोक की धरती पर कदम रखता हैं तो उसको अरबो खरबों सालो की बाते और यादे ताज़ा हो जाती हैं। आज वो वापस आया था नये रूप मै। यंहा जो लोग देवता बन जाते थे उनकी उम्र की सीमा बढ़ जाती थी काल चक्र का प्रभाव उन पर कम हो जाता था। इसके लिए यंहा कई परीक्षा होती थी और जो अमृत पी लेते थे वो भी एक तरीके से अमर हो जाते थे मगर इनकी मृत्यु का भी रहस्य होता था जो की आज त्रिनेत्रा जानता था। उसकी साधना और शक्ति इस वक्त परम अविनाशी परम व्रह्म के स्तर की थी। फिलाल तो अपने यादो को बाहर करते हुए वो वंहा का नज़ारा देखना शुरू करता है की क्या क्या बदलाव आये हुए। स्वर्ग लोक अपनी भव्यता से हवा के बीच लटका हुआ था। जैसा हमेशा से था इसकी दिव्यता अपनी ही थी इसके लिए हमेशा देवता और असुर मै युध होता था जहरने पहाड़ नदिया और खाई की वो ही घेराई अभी भी थी अनंत काल के बाद भी बड़े बड़े महल और अटरिया सब कुछ सिस्टम के हिसाब से व्यवस्था मै थाजो लोग स्वर्ग के योद्धा बनने आये थे उनकी अलग दिशा मै रहने और प्रशिक्षण के लिए जगह थी सबसे ऊँचे पर पांच तत्व को नियंत्रण करने वाले देवता थे अग्नि जल वायु पृथ्वी आकाश। इसके अलवा तत्वों को संयोजक करने वाले देवता थे। सबसे शक्तिशाली देवता स्वर्ग मै भामाशाह था। त्रिनेत्रा के समय भामाशाह की हिम्मत भी उसके साथ लड़ाई करने की नहीं होती थी। त्रिनेत्रा स्वर्ग मै एक लीजेंडरी गाथा था। उसकी मौत की खबर नें बहुत कुछ बदल दिया था। स्वर्ग के ऊपर विष्णु लोक, रूद्र लोक, व्रह्म लोक थे यंहा पर हर कदम पर अपनी शक्ति और काबिलियत को निखारना पड़ता था। कुबेर देव उसको नये छात्र के रूप मै अग्नि देव रामी से मिलवाते है। वो कहते हैं राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी यंहा से आगे अभी तुम्हारा मार्ग दर्शन रामी देव करेंगे यह तुम्हे यंहा की चीजों और कार्य प्रणाली के बारे मै बताएँगे। रामी देव का अभिवादन करता हैं और कुबेर देव जी से कहता हैं जैसा आप को ठीक लगे और उसके बाद कुबेर देव वंहा से चले जाते है। रामी देव उसके एक तरफ बसें हुए विशाल विस्तृत झेत्र को दिखाते हुए कहते हैं हम लोग इधर रहते है और दूसरी तरफ जो तुम देख रहे हो ना वंहा पुराने देवताओं का निवास हैं। जिन लोगों नें देवासूर संग्राम लड़ा था। हम्म। उसको लेकर रामी देव एक विशाल महल की तरफ चलने लगते हैं। वंहा पर जाने के बाद वो देखता हैं विशाल भवन और अलग अलग केंद्र बने हुए सभी पर नये और पुराने प्रशिशु बैठे हुए है। केशव यह हैं राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी इनको कुबेर देव और अन्य लोग व्योम लोक से लाये हैं। केशव देव और रामी देव रुद्राक्ष को बताते हैं यंहा पर नये और पुराने देवता लोगो मै प्रतियोगिता होती हैं जीतने पर इनाम भी शानदार मिलता हैं। यंहा पर वृह्माण्ड के हर लोक से कोई ना कोई मिल जायेगा। नये आने वाले लोगों का मुकाबला भी होता यंहा पर पुराने लोगों से जिस से सामने वाले के स्तर का पता चल सके। फिर उसको डायमंड टोकन उसको पंजीकरण करके दे दिया जाता हैं। और उसको रहने के लिए एक महल दे दिया जाता हैं जिसमे सभी तरीके की सुख और सुविधा उपलवध थी। रामी देव कहते हैं की स्वर्ग के वाहर का जो झेत्र हैं इसमें अलग अलग किस्म के राक्षस दानव और दैत्य और खतरनाक जानवर घूमते रहते हैं जो मौका मिलते ही यंहा के देवताओं पर हमला क़र देते हैं. सभी बहुत शक्ति शाली होते है। कहते है की यह लोग कालकेतु और धूमकेतु के कहने पर स्वर्ग मै प्रशिक्षण ले रहे लोगों को ज्यादा शिकार करते है जिस से स्वर्ग के पास उनके योद्धाओ की फ़ौज तैयार ना हो पाए। इसलिए बाहर जाते वक़्त अपने साथ किसी को साथ लेकर चलो जिस से जीवित रहने का अवसर बना रहे। उन लोगों की बातो को सुनकर वो कहता हैं ठीक हैं मै समझ गया हूँ। और अपना टोकन लेकर वो अपने महल को आता हैं अपना टोकन स्कैन करता हैं और वो उसके नाम से अंकित हो जाता हैं। महल के अंदर दास दासी नौकर यह सब लोग थे। वो सब लोग महल के वाहर हाल मै खड़े होकर अपने नये मालिक का ही इंतजार क़र रहे थे। जो रुद्राक्ष अग्निवंशी आता हैं तो वो सब लोग अपना परिचय देते हैं फिर वो अपना परिचय देता हैं कहता हैं मेरा नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी हैं।। फिर वो उन लोगों से बातचीत करके जानकारी लेता है। काफ़ी कुछ समझ मै आ जाता हैं उसको यंहा स्वर्ग के बारे मै पहले से अब तक बहुत परिवर्तन हुए थे। मगर कद्र और कीमत हमेशा शक्ति की थी और आज भी हैंउसके बाद वो विश्राम करने अपने कक्ष मै चला जाता हैं। वो फिर अंगले दिन का इंतजार करने लगता है ज़ब शक्ति परिक्षण होना था। अंगले दिन वो उठा और फ्रेस हुआ और फिर स्वर्ग लोक के करियलय मै जा पहुँचता हैं। रामी देव से मिलता हैं सभी लोगों नें रुद्राक्ष का नाम सुना था उसके हाथो से व्रह्म राक्षस के राजा के वध के बाद वो चर्चा मै था। केशव देव और रामी देव के साथ मै वो प्रशिक्षण भवन मै चला जाता हैं उस पंद्रह साल के लड़के को देख क़र कई लोग भ्रमित हो जाते है। उनको लगने लगता हैं हो सकता हैं इसकी मदद किसी और नें की हो और अपनी पहचान को गुप्त रखा हुआ हो। इस समय वंहा पर हज़ार से ज्यादा लोग मौजूद थे सभी लोग अपने नए साथी की परख करना चाहते थे की वो कितना शक्ति शाली है। राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी वंहा जा के उनके अखड़े मै खड़ा हो जाता हैं। वो रामी देव को कहता है ऐसा नहीं हो सकता की हम लोग राक्षस और दानव का शिकार करने के लिए जाये उसमे शक्ति का परिषन भी हो जायेगा और कुछ दुश्मन भी कम हो जायेंगे। उसकी बाते भी उन दोनों को उचित लगाती हैं। फिर वो खड़े होकर बताते हैं क्या हम रुद्राक्ष की शक्ति का परिषन शिकार के माध्यम से भी क़र सकते हैं। वो बात कुछ लोग गलत तरीके से ले जाते है वो सोचते है वो उनको कमजोर समझ रहा हैं यह उनकी बेज़ती थी। वो शांति से खड़ा हुआ सबकी बातो को सुनता रहा ज़ब देखा की यह लोग नहीं मान रहे हैं। तो वो गहरि आवाज़ मै कहता हैं अब यंहा से आगे होने वाले नुकसान के दायटिव तुम लोगों का खुद का होगा। तुम सब सब जो मुकाबला करना चाहते हैं एक साथ आजाओ मै अपनी शक्ति का पांच प्रतिशत ही प्रयोग करूँगा। उसने वंहा पर खड़े हुए हज़ार लोगों को एक साथ चैलेंज क़र दिया था। काफ़ी बातो का आदान प्रदान होने के बाद वो सभी लोग हवा मै उड़ते हुए अखाड़े मै खड़े हो जाते हैं. यह दिलचस्प था एक बनाम हज़ार। कुछ लोग समझदारी दिखा क़र पीछे हट गए थे। रुद्राक्ष अपने पंख की मदद से उन लोगों के सामने खड़ा हो जाता हैं वो किसी अमर देवताओं की तरह लग रहा था। उसके सामने यह लोग चींटी जैसे थे। वो उन लोगों को पहला हमला करने का बोलता हैं। कहता हैं अगर मै हमला करूँगा तो तुमको मौका नही मिलेगा हमला करने का। उसके बाद वो लोग उसके ऊपर अपने हमले करने लगते हैं वो उन सबके हमलो से बच जाता हैं और कहता हैं अब मेरी बारी। और उसके बाद वो अपनी जगह से बिजली की गति से गयाब हो जाता हैं वंहा पर केबल लोग उड़ते हुए दीवारों और महल से टकराते हुए दिखाई दे रहे थे पांच मिनट मै लड़ाई ख़तम हो जाती हैं जो भी नया पुराना आया सबको उड़ते हुए भेज दिया गया. केबल रुद्राक्ष नें अपने हाथो और पैरो का प्रयोग किया था ज्यादा तर लोगो की हड़िया टूट गयी थी और वो उपचार के बाद ही उठने के काबिल होने वाले थे। रामी देव और केशव अपनी आँखों को फाड़ फाड़ क़र उन लोगों को उड़ते हुए टकराते हुए देख रहे थे। जो नहीं गए थे वो ईश्वर का सुक्रिया क़र रहे थे वरना उनकी इज़्ज़त भी मिट्टी मै मिल जाती। सब यही सोच रहे थे यह किस प्रकार का राक्षस हैं। लड़ाई शुरू भी नहीं हुई और ख़त्म भी हो गयी. सब लोगों का घमंड और अहंकार नस्ट क़र दिया था रुद्राक्ष नें। अब उन लोगों का देखने का नज़रिया ही बदल गया था यह तो पक्का था कोई भी उस से दुश्मनी नहीं करना चाहेगा। पांच प्रतिशत मै यह हाल किया हैं तो सौ प्रतिशत मै क्या करेगा। सोच क़र ही रूह काँप जा रही थी। उसके बाद वो अखड़े मै नीचे उतर क़र खड़ा हो जाता हैं अपने पंख अंदर क़र देता हैं। फिर वो कहता हैं क्या कोई और मुकाबला करना चाहता है मुझसे। किसी के भी मुँह से आवाज नहीं निकलती है। बड़ी मुश्किल से अपने पर काबू पाते हुए रामी देव और केशव देव कहते हैं यह मुकाबला खतम हुआ अब। यह खबर एक बनाम हज़ार की जंगल की आग की तरह स्वर्ग लोक मै फ़ैल जाती हैं कई लोगो को उसकी बढ़ती हुई रफ़्तार को देख क़र डर लगने लग जाता है। इस मुकाबले के बाद उसको टॉप रैंक दे दिया जाता हैं और उसका वो महल को छोड़ क़र राजमहल दे दिया जाता हैं। इस समूह मै रुद्राक्ष अभी तक सबसे मजबूत था। सभी लोग उसको इज़्ज़त देना शुरू क़र दिए थे जिन लोगों के हाथ पैर की हड़िया टूटी थी वो अपने निवास मै उपचार ले रहे थे। इस समय राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी टॉप रैंक प्रतिभा था। और वो कुछ हफ्ते बाद होने वाली देवताओं की प्रतियोगिता का प्रबल दबेदार था.। उसने वंहा कही लोगो को अपना दोस्त बनाया उसके व्यवहार विन्रम और शालीनता वाला था उसमे कंही भी घमंड और अहंकार की झलक नहीं थी। यशराज एक काबिल योद्धा था उसकी और रुद्राक्ष की बनने लगी थी। वो लोग घंटो बैठ क़र बाते करते थे। यशराज नें उसको स्वर्ग की बहुत सी जानकरी दी थी। उसके ऊपर रूद्र सेना, विष्णु सेना और व्रह्म सेना थी इनके नेता ताकत वर और शक्तिशाली थे। यंहा पर कई देवता थे जो अभी भी वंहा तक नहीं पहुचे थे। तो आगे क्या होने वाला हैं?राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी अपने स्वर्ग लोक के राजमहल मै आ जाता है और साधना करने लगता है साधना करते हुए उसको शाम हो गयी थी. वो उठता है फ्रेश होता है और भोजन करता है और दुबारा से अपने विश्राम घर मै चला जाता है जाते वो सभी को बोल देता है वो साधना मै बैठने जा रहा है कुछ समय कोई उसको परेशान न करें। और फिर वो अंदर कक्ष मै प्रवेश क़र जाता है वो वंहा महाकाल देव से पूछता है क्या तुम तैयार हो अपने लोक का मशला हल करने के लिए। वो कहता है मास्टर जैसी आपकी मर्जी मै तैयार हूँ। तो रुद्राक्ष अपने मन को उसके मन से जोड़ता है और वो दिव्य नाग लोक मै टेलीपोर्ट हो जाता है.वंहा से वो उड़ता हुआ प्रवेश द्वार पर जाता है जँहा काली शक्ति से युक्त सर्प और सरपलोग पहरा दे रहे थे। अजीब लड़के को देख क़र जो रंग बिरंगी लाइट्स मै चमक रहा था। उनको लगता है किसी नें उनके ऊपर हमला क़र दिया है। रुद्राक्ष उन पहरे दारों को मारता हुआ दिव्य नाग लोक मै प्रवेश क़र जाता है और यह सुचना जल्दी ही पुरे दिव्य नाग लोक मै फैल जाती है कोई योद्धा काली शक्ति वाले सैनिको को मरता हुआ अंदर बढ़ रहा है। धीरे धीरे उन काली शक्ति वाले लोगों की संख्या बढ़ती जाती है उतनी ही जल्दी रुद्राक्ष उन लोगों की सफाई करता जाता जल्दी ही खबर दिव्य नाग लोक का राजा नागासूर को पता चल जाती है। वो अपनी काली शक्ति से युक्त खतरनाक सेना को भेजता है। रुद्राक्ष उसकी सारी सेना को नस्ट क़र देता है। सारे दिव्य नाग लोक मै इस खबर नें आग का काम किया था कोई सोचने लगा था शायद नागसूर के अत्याचार से मुक्ति मिल जाये। मगर उन लोगों नें उसकी काली शक्तियों को देखा था कितनी भयानक थी.ज़ब दिव्य नाग लोक मै नागासूर को खबर मिली की सभी योद्धाओ की मृत्यु हो चुक्का हैं तो वो अपने महल को छोड़ क़र अपनी बची हुई सारी सेना के साथ युध करने को आ गया था। ज़ब उसने हवा मै उड़ रहे रुद्राक्ष का भयानक रूप देखा तो एक बार को वो भी हिल गया था उसने अपनी समस्त काली शक्तियों का अवहन किया और लड़ाई करने लगा। धीरे धीरे उसकी सारी सेना नस्ट हो गयी थी आसमान से बिजली आग हवा धरती के भूखंड वर्फ की शक्ति तभाई मची हुई थी उसने अपने आखिरी अस्त्र काळचक्र का प्रयोग किया जिसमे से भयानक काली ऊर्जा का लगातार छोड़ रहा था। वो हज़ारो चक्र तेज़ी से आकर रुद्राक्ष से टकराने लगे उसके शरीर को काटने के लिए। मगर फिर कुछ ऐसा हुआ जो रुद्राक्ष नें भी नहीं सोचा था उसकी काली दिव्य रौशनी नें उन सारे चक्र ऊर्जा को अपने अंदर सोख लिया था और उसके बाद वोसब काल चक्र गायब हो गए थे। ज़ब नागासूर नें यह देखा तो सदमे मै ही रह गया था। उसके बाद उन दोनों मै तलवार से युध होने लगा. नागासूर के पास काली तलवार थी और रुद्राक्ष के पास उसकी पुरानी तलवार सतरूपा थी। एक तेज़ हमले से उसकी काली तलवार टूट गयी और उसका सर कट क़र नीचे गिर गया। था उसके मारे जाने के बाद जो बचे खुचे लोग थे भागने लगे। तभी रुद्राक्ष नें दिव्य नाग को बोला वो रौशनी की गति से प्रकट हुआ और उन लोगों को खतम करने लगा जो भाग रहे थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी किसी देवता की तरह आसमान मै खड़ा हुआ चमक रहा था जैसे कई सूरज निकल रहे हो प्रकाश करने के लिए। फिर थोड़ी देर मै वो नार्मल होकर महल की तरफ उड़ गया था। महाकाल देव भी अपना सारा काम खत्म करके सीधा महल मै आ गया था। दिव्य नाग लोक के लोग राजकुमार को देख क़र खुश भी थे और हैरान भी थे। सभी लोग राजकुमार का जयकारा क़र रहे थे। महाकाल देव नें सबको रोका और बोला इस चीज के असली हक़दार मेरे मास्टर है। ज़ब सब लोगों नें सुना तो बड़ा अजीब लगा मगर सच जानने के बाद। उनकी नज़रो मै उसका कद और बढ़ गया था। फिर सारी चीजों को महाकाल देव को सँभालने के लिए बोला और कहा अपने पिता को रिहा करो सारे काम निपटा क़र फिर हम लोग चलेंगे। महाकाल देव नें कहा ठीक हैं मास्टर तब तक आप विश्राम करो। रुद्राक्ष विश्राम करने चला गया और महाकाल देव नें दिव्य नाग लोक की राजा की गद्दी की सम्भलने की करियवाई तेज़ क़र दी। महाराज को आज़ाद करके उसने अपने पिता को दुबारा राज गद्दी पर बैठा दिया था। इधर रुद्राक्ष नें जो नागसूर की रिंग ली थी वो उसको अजीब सा एहसास करवा रही थी जैसे की कोई कंही उसको बुलाया जा रहा हैंउसके संपर्क सूत्र उसको नागासूर की स्टोरेज रिंग मै मिलेगा उसने उसकी स्टोरेज रिंग को खोला और देखा तो उसमे कई हज़ार गैलेक्सी का स्पेस था। उसको देख क़र रुद्राक्ष को एक बात कन्फर्म हो गयी थी यह रिंग नागासूर की नहीं थी। यह किसी घायल योद्धा को मार क़र ली गयी थी फिलाल वो उसको देखने के लिए थोड़ी ज्यादा आध्यात्मिक शक्ति डाल देता है और अपनी दिव्य दृस्टि को सक्रिय क़र देता है जो किसी गैलेक्सी के पार भी देख सकती थी। उसमे उसके कुछ ग्रन्थ और स्वर्ण मुद्रा, मोती, हीरे, नीलम, आध्यात्मिक ऊर्जा पत्थर इन सबका चार पांच ग्रह के बारबार भरा हुआ था। इसके बाद जो ध्यान खींचने की बात जो थी वो काले ऊर्जा पथर थे जो असीमित मात्रा मै थे। कई गैलेक्सी का स्पेस इन पत्थर से भरा हुआ था कोई तो राज था इनका। उसने कुछ सोचा और फिर साधना की अवस्था मै बैठ गया उसने काली दिव्य रोशिनी को अपनी ऊँगली से उसके अंदर गुज़ार दिया। काली दिव्य रोशिनी प्रकाश की गति से उन पत्थर की ऊर्जा को सोखना शुरू क़र दिया था वो चार पांच घंटे तक ऊर्जा को सोखता रहा था वो देख पा रहा था वो सारी ऊर्जा उसके शरीर मै समा क़र परिवर्तन क़र रही थी वो ज़ब तक नहीं रुकता ज़ब तक काली दिव्य रोशिनी ऊर्जा खींचना बंद नहीं क़र देती। जिसका मतलब था की अंदर सब काली ऊर्जा के पत्थर ख़त्म हो गए है। वो अपनी दिव्य दृस्टि से देखता है तो सच मै सारे ऊर्जा पत्थर ख़तम हो चुके थे। फिर वो अपनी अंदर देखता है तो पाता है काली दिव्य रोशिनी का रंग और सुर्ख काला हो गया जिसके परिणाम स्वरूप सभी की शक्तियों मै बढ़त हुई थी वो अपने आप को पहले से भी ज्यादा ताकतबर महसूस क़र रहा था। उसके शरीर मै बहने वाले ऊर्जा कण और ठोस हो रहे थे। उस रिंग को वो लेफ्ट हैंड मै पहन लेता है और अपनी आध्यात्मिक शक्ति से सील क़र देता है। फिर वो उठता है तो उसके शरीर की हड़िया चटकने लगती है वो अपने शरीर को इधर उधर थोड़ा स्ट्रेच करता है और फिर विश्राम कक्ष से बाहर निकल आता है। वो देखता है महाकाल देव नें सब कुछ संभाल लिया था। इस समय पुराने महाराज गद्दी पर बैठे हुए थे। और अपनी प्रजा को सम्बोधित क़र रहे थे। रुद्राक्ष को आता हुआ देख क़र सब लोग सम्मान के साथ सर झुका क़र उसका स्वागत करते है। महाराज खुद उठ क़र उसको बेटा कहकर बुलाते हैं वो कहते रुद्राक्ष बेटे जो उपकार तुमने हम लोगों पर किया हैं हम इसका ऋण मरते दम तक भी नहीं चूका सकते। वो कहते हैं मेरा बेटा तुम्हारे साथ है इसका ख्याल रखना बड़े भाई के नाते। रुद्राक्ष कहता हैं आप चिंता न करें महाकाल देव मेरे लिए भी भाई की तरह ही है हम लोगों मै बेसक अनुबंध बन गया मगर मेरी वजह से उसको कभी कोई नुकसान नहीं होगा। आप चिंता ना करें बिलकुल भी। वो देख रहे थे उनके बेटे की रैंक दो हज़ार को भी पार करने वाली थी। उसकी शक्ति शाली आभा किसी को भी पल भर नाग लोक को खत्म क़र सकती थी। वो अपने बेटे की बढ़ती हुई शक्ति को देखकर बहुत ख़ुश थे। महाकाल देव नें सब कुछ अपने पिताजी को बता दिया था। बस त्रिनेत्रा का राज राज ही रखा था। महाराज कहते हैं कल हमारे कुल देव भगवान शेषनाग की पूजा का दिन रखा है आज तुम लोग रुक जाओ कल चले जाना कुलदेवता का आशीर्वाद लेकर। वो मान जाता हैं और फिर वापसी अपने कक्ष मै आ जाता हैं। उसके बाद वो ध्यान साधना करने लग जाता हैं। उसकी आँखे ज़ब खुलती हैं ज़ब नौकर उसको पूजा के लिए बुलाने आता हैं। वो फातफत तैयार होकर पूजा के लिए चल पड़ता हैं। वो देखता हैं विशाल भगवान शेषनाग की मूर्ति रत्नो से बनी हुई और उनके फनो पर दिव्य मणि रखी हुई थी जो प्रकश निकल रहा था। वो पूजा स्थल पर जाता हैं और भगवान शेषनाग को प्रणाम करके पूजा करने लगता हैं वो खड़े होकर उनका ध्यान करते हुए झीर सागर वाली आकृति उसके मन मै आ जाती हैं। उसको खड़े हुए ही समाधी लग गयी थी। उसको महसूस हो रहा था की वो उनके पास खड़ा हुआ हैं भगवान शेषनाग की आवाज़ उसको सुनाई देती है बेटा त्रिनेत्रा मुझे खुशी हैं तुम वापस आ गए हो अनंत काल की तपस्या के बाद। तुम्हारा लक्ष्य और तुम खुद अब सभी से आगे निकल चुके हो तुम्हे ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है.मेरा आशीर्वाद भी अब तुम्हारे साथ हमेशा रहेगा। फिर उसको लगता हैं उसके शरीर मै कुछ प्रवेश क़र गया हैं रोशिनी बन क़र। ज़ब ढ़ोल नागाड़ो की आवाज़ से उसका ध्यान टुटा तो देखता हैं सब लोग उसको देख क़र नाच रहे थे वो देखता हैं भगवान शेषनाग की दिव्य मणि अब उनके फनो पर नहीं थी उनका विष कुंड भी सूख गया था। वो उनको प्रणाम करके नीचे उतरता हैं और महाकाल देव से पूछता है क्या कुछ मेरे पूजा करने के कारण अनिस्ट हो गया हैं। इस बात पर वो कहता है मास्टर आप महाराज से ही पूछ लो। वो कहते हैं बेटा ऐसा आशीर्वाद बाद भगवान शेषनाग नें कभी भी किसी को नहीं दिया हैं। उनकी दिव्या मणि ऊर्जा रूप मै तुम्हारे शरीर मै समा चुकी हैं उनके फनो से निकलने वाल भयानक विष तुम्हारे शरीर मै दौड़ रहा हैं वो तुम्हारी ऊर्जा के साथ मिल चूका हैं मुझे नहीं लगता सांसर का कोई भी विष तुमको हानि पंहुचा पायेगा। तुम इसको हथियार की तरह अपने दुश्मन को खत्म करने के लिए प्रयोग क़र सकते हो। ज़ब सारी बात समझ आ जाती है तो वो बोलता हैं महाराज अब आप हम लोगों को जाने की आज्ञा देनी होंगी। उसके बाद महाकाल देव सभी लोगों से विदा लेकर अपने मास्टर के शरीर मै चला जाता है। और रुद्राक्ष टेलीपोर्ट होकर वापस स्वर्ग लोक मै अपने राजमहल मै आ जाता हैं। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष टेलीपोर्ट होकर वापस स्वर्ग लोक के राजमहल मै आ चूका था वो तीन दिन से अपने राजमहल से बाहर नहीं निकला था रामी देव और केशव देव को लगा था की वो साधना क़र रहा है। एकांत मै जाने से पहले भी उसने यही बात बोली थी। तीन दिन बाद वो अपने राजमहल से निकल क़र नये देवताओं की परिषद मै घूमता हुआ पहुंच जाता है।। सब लोग देखते है शांत रहते हुए भी उसका औरा खतरनाक लग रहा था। उसकी आभा और भी रहस्यमी हो गयी थी ज़ब रामी देव उसको वंहा परिसद मै देखते है तो कहते है राजकुमार रुद्राक्ष tum👌एकांत से बाहर आ ही गए हो। सब लोगों को तुम से बहुत सी उम्मीद हैं इस प्रतियोगिता को लेकर। इतने मै केशव देव भी आ जाता हैं और पूछता हैं राजकुमार रुद्राक्ष कैसे हो। वो कहता हैं मै ठीक भाई आप सुनाओ क्या चल रहा हैं। वो कहता है सब लोग प्रशिक्षण ले रहे है इस बार कमसेकम वीस प्रतिभागी एक तरफ से उतरेंगे। इस बार मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है हम्मइस पर रुद्राक्ष कहता है इन लोगो को आपस मै लड़ने की वजय इनको कोई मिशन क्यों नहीं दे देते है इनकी शक्ति की रैंकिंग के अनुसर जो अपना मिशन क़र पायेगा पूरा वो विजेता बन जायेगा। उसकी बात उन लोगों को भी समझ आती हैं वो भी समझ रहे थे की यह और लोगों के हाथ पैर नहीं तोडना चाहता हैं। उसके कहने पर यह बात शिर्ष नेतृत्व तक जा पहुँचती है। उन लोगों को भी उसकी बात मै बजन लगा। इसके दो फायदे होने वाले थे उनका जीवन मृत्यु का अनुभव बढ़ेगा और दूसरा उनके दुश्मन कम होंगे। । उन लोगों नें इन नये और पुराने देवताओं को सभी कंटक लोक को दैत्य दानव और जानवरो से मुक्त करने का निर्णय लिया। इस सभा मै कामिनी देवी और अन्य देवता जो शिर्ष मै थे शामिल हुए थे। जितने भी योद्धा वंहा जायेंगे उनको एक जादुई पत्थर दिया जायेगा जिसको मुसीबत के वक़्त तोड़ने पर वो लोग वापस स्वर्ग लोक मै आ जायेंगे। यह खबर आग की तरह फ़ैल गयी स्वर्ग लोक मै सभी लोग अपनी अपनी तैयारी करने मै लगे हुए थे। वो वंहा ज्यादा से ज्यादा राक्षसों को मारना चाहते थे। प्रतियोगिता का दिन भी आ गया और ग्राउंड मै सौ देवताओं को खड़ा पायासबको एक एक जादुई पत्थर दे दिया गया और उनको नियम समझा दिए गए। रुद्राक्ष शांत होकर खड़ा हुआ थाउसने कामिनी देवी के चेहरे पर कुटिल मुस्कान देख ली थी वो समझ गया था यह सब लोग मारे जाने वाले हैं कालकेतु और धूमकेतु को खबर पहले ही मिल चुकी होंगी। इस बात को सोचते ही उसके भाव बदल गए और वो बोला पुराने दुश्मनो से मिलने का समय आ गया है। उसने सोच रखा था की इन लोगों को धीरे धीरे करके वर्वाद क़र देगा। सबसे कम उम्र का राजकुमार रुद्राक्ष ही लग रहा था. उसको कई लोगों नें तिरछी नज़र से देखा था। उसके बाद देव इंद्रा नें सबको जादुई पत्थर दे दिए जो सबके पास उड़ क़र चले गए थे। रुद्राक्ष नें भी वो पत्थर को पकड़ लिया था। ज़ब देव इंद्रा की नज़र से नज़र रुद्राक्ष से टकराई तो अनायास ही रुद्राक्ष के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी थी. वो जितनी जल्दी आयी थी उतनी ही जल्दी गयाब हो गयी उसकी जगह रह गया शून्य भाव। वो एक नज़र देव इंद्रा को अंदर तक हिला गयी थी और उनको त्रिनेत्रा की याद आ गयी उस समय। यह अंदाज़ कुछ अलग था। फिर वो सम्भले और एक ऊर्जा द्वार खोल दियासभी योद्धा उसमे जाने लगे मगर रुद्राक्ष अभी खड़ा हुआ था उसको सभी लोग देख रहे थे वो कुछ विचार क़र रहा था। उन लोगों नें सोचा की शायद वो प्रतियोगिता मै भाग नहीं लेना चाहता हो। इतने मै कामिनी देवी बोली राजकुमार रुद्राक्ष क्या हुआ तुम प्रवेश नहीं क़र रहे हो. डर तो नहीं लग गया तुमको। कामिनी देवी की बात को सुनकर रुद्राक्ष बोला। वो वीर ही क्या जो मौत के मुँह मै खड़े होकर विजय गान न करें और क्या शान हैं उस योद्धा की जिसका अभिषेक रक्त से धरती और आसमान ना करें। यह यह पंक्ति तो तो। उन करोडो सालो से जो देवताओं मै खास थे जो त्रिनेत्रा के साथ थे। उनको पता था यह लाइन त्रिनेत्रा हर युद्ध पर जाने से पहले बोला करता था। उसकी बातो को सुनकर शिर्ष मै बैठे सभी के अंदर तूफ़ान उठ गया था कामिनी देवी का मुँह तो खुला का खुला ही रह गया था यही हाल उसके विश्वास घती दोस्तों का था। उनको सदमे मै ही छोड़ क़र रुद्राक्ष उस द्वार मै कूद गया थानये लोगों को कुछ नहीं पता था ज़ब सोर हुआ की रुद्राक्ष चला गया हैं उसके परिषद के लोग बोल रहे थे। उस सोर को सुन क़र सभी की तंद्रा भाँग हुई ज़ब देखा तो रुद्राक्ष गायब था। देव इंद्रा का सक अब गहरा हो गया था। जो बात अरबो खरबों सालो से दबी हुई थी उसको कोई वैसा का वैसा कैसे बोल सकता हैं। कामिनी देवी और अन्य लोगों के चेहरे पर झलक रही परेशनी को देव इंद्रा देख चूका था। अब उन लोगो को वंहा बैठ क़र इंतजार करना था कौन कौन पहले आता हैं। इधर कंटक लोक मै चारो तरफ हाई लेवल खतरनाक जानवर दानव और दैत्य घूमते हुए दिखाई दे रहे थे। रुद्राक्ष अदृश्य होकर शांति से आसमान मै उड़ रहा था। जो योद्धाओ की टोली आयी हुई थी वो इस समय लाखो की संख्या मै राक्षसों दानवो और दैत्य के बीच फांसी हुई थी वो लोग जीवन और मृत्यु के बीच लड़ रहे थे। इतने लोगों का यंहा पर होना सभी के अंदाज़े के बाहर था फिर उसने देखा की कालकेतु का भाई राहुकेतु और धूमकेतु का भाई धुम्रलोचन कंटक ग्रह के असुर कालनेमी के साथ बैठे हुए मदिरा पान क़र रहे थे। वो लोग कह रहे थे इन लोगों मै से कोई भी बच क़र नहीं जा पायेगा यह सब यही मारे जायेंगे यही सबक होगा देवलोक को। वो तो वक़्त पर सुचना मिल गयी नहीं तो यह लोग समस्या खड़ी क़र देते। वो लोग अपनी चर्चा मै लगे हुए थे। वंही अब एक एक करके सारे योद्धा अपना जादुई पत्थर तोड़ क़र वापस हो रहे थे वो अपने हाथो से मारे हुए लोगों की लाशें और सर ले जा रहे थे। जीवन जरुरी हैं लड़ाई तो फिर भी लड़ लेंगे. सब लोग ज़ब कंटक लोक से बाहर चले गए उसने देखा तो फिरवो दिखने लगा और नीचे उतर आया। उसने लाखो की संख्या की फ़ौज के सामने खड़े होकर बोला मै तुम सब को अभी मारना नहीं चाहता हूँ मुझे तुम्हारे लीडर का सर चाइये बदले मै तुम सबको अभी छोड़ दूंगा मेरे राश्ते से हट जाओ एक पंद्रह साल के लड़के के मुँह से यह बात सुनकर सब लोग हॅसने लगे। एक बोला तेरा मांस कोमल होगा खाने मै मजा आ जायेगा। उधर सारे प्रतिभागी वापसी क़र चुके थे और अंदर के हालत की जानकारी दे रहे थे। वो लोग जिन लोगों को मारा था उनकी लाशो को वंहा सामने मैदान मै डाल दिया था। रुद्राक्ष अभी वापस नहीं आया था सब लोग उसका भी इंतजार क़र रहे थे। जो हालत इन लोगों नें बताये है उसके हिसाब से तो उसको वापस आ जाना चाइये था। आधे घंटे के बाद कोई टेलीपोर्ट होकर सीधा मैदान मै प्रकट हो जाता है। ज़ब सब लोग ध्यान से देखते है तो रुद्राक्ष खून से सना हुआ खड़ा था और उसके बाद वो अपने हाथ को हवा मै घुमाता है और मैदान को दानव दैत्य राक्षसों और जानवरो की लाशो से भर देता है जिनकी संख्या लाखो मै थी उसके बाद वो खून से सना हुआ उन लोगों के सामने जाता हैं और तीन काटे हुए सिर और उनके धड उनके सामने डाल देता हैंसब पुराने लोग देखते हैं यह तो कालकेतु का भाई राहुकेतु है दूसरा तो धूमकेतु का भाई धुम्रलोचन है तीसरा कालनेमी हैउन लोगों को सदमा लग जाता है कई लोगों को हार्ट अटैक आते आते बचा था। किसी को तो आधे घंटे तक समझ ही नहीं आया कैसे प्रक्रिया दे। स्वर्ग लोक इस समय सदमे मै था जिस से उबरने मै उनको समय लगना था। ज़ब काफ़ी देर शांति रहती है तो रुद्राक्ष कहता हैं शिर्ष देव इंद्रा मेरी तरफ से स्वर्ग लोक को तौफा। उसके बोलने के बाद सब होश मै आते हैं देव इंद्रा नें सुन लिया था जो रुद्राक्ष अग्निवंशी नें कहा था उसके चेहरे पर एक बार फिर कुटिल मुस्कान कुछ पल के लिए आयी और गायब हो गयी थी। अब एक और देवासूर संग्राम तय था क्यों की दोनों के भाई के सर काटे हुए पड़े थे स्वर्ग लोक मै। कामिनी देवी और लोगों का चेहरा पीला पड़ गया था। त्रिनेत्रा के मुक्त होने की खबर कालकेतु और धूमकेतु नें उन पांचो को दी थी। कामिनी देवी का हाल ऐसा था काटो तो खून नहीं। इस घटना नें पुरे स्वर्ग लोक और देवलोक को हिला क़र रख दिया था। रुद्राक्ष अग्निवंशी अपने राजमहल आ चूका था उसने सबका घमंड और अहंकार को चूर चूर क़र दिया था। कुछ लोगों की तो उस से आँख मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी जो उसका मज़ाक और कमजोर समझ रहे था कोई भी कुछ नहीं बोला रामी देव और केशव देव नें इस परिणाम की कल्पना अपने सपने मै भी नहीं करी थी। वो अपने राजमहल वापस आ गया था नहाने और फ्रेश होने के लिए। तो आगे क्या होगा?और ऐसा क्या किया था उसने कंटक लोक मैसबसे बुरा हाल तो कमल, मनीष विकास, रोहन, कामिनी का था। अगर सच मै त्रिनेत्रा को कोई शरीर मिल गया है। वो आज़ाद कैसे हो इतने अनंत काल के बाद। ऐसे बहुत से प्रश्न थे मगर जवाब नहीं था। क्या रुद्राक्ष अग्निवंशी ही त्रिनेत्रा हैं। दोनों दानव राजाओं के भाइयो के कट सारे आने वाले देवासूर संग्राम का आगाज़ है। ज़ब उनको पता चलेगा की दोनों मारे गए हैं तो जाहिर सी बात है वो शांत तो बैठेंगे नहीं। इधर रुद्राक्ष अग्निवंशी अपने राजमहल मै आने के बाद नहाने चला गया और विश्राम करने लगा था। वो लेटा हुआ अपनी थकान मिटा रहा था। स्वर्ग लोक और देवलोक मै हंगामा मचा हुआ था। हर किसी की जवान पर रुद्राक्ष अग्निवंशी की चर्चा हो रही थी। किसी को भी उसका स्तर नहीं पता था की वो किस स्तर का योद्धा है। यह बात सबको और सदमे मै डाले हुई थी। जिन लोगों को उसने मारा है उनसे शिर्ष के देवता भी मिल क़र नहीं मुकाबला क़र पाते थे। जो घटना हो चुकी थी उसको बदला तो नहीं जा सकता था मगर आने वाले घटना के लिए तैयारी तो की जा सकती थी। शिर्ष देवताओं का सन्देश स्वर्ग लोक के देवताओं के पास आया की राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी को सम्मान के साथ देवलोक मै लेकर आये। बदलाव तो होना था मगर इतनी जल्दी यह बात रामी देव और केशव देव की समझ से बाहर थी। इधर राजकुमार अग्निवंशी अपने राजमहल मै नींद ले रहा था और उसका हॉल देवताओं से भरा हुआ था जो उस से मिलने आये हुए थे। मगर किसी नें भी उसके विश्राम मै खलल नहीं डाली। वो ज़ब उठ गया तो नहा क़र फ्रेश होकर नीचे हॉल मै आने के लिए निकल आया अपने कक्ष से। ज़ब उसने हॉल का नज़ारा देखा तो सभी का अभिनन्दन किया। और लिया। फिर सबको भोजन के लिए बोला और खुद भी भोजन किया। उसने सब लोगों से बड़ी ही विन्रम होकर बातचीत करी। रुद्राक्ष को स्वर्ग लोक का श्रेष्ठ योद्धा का दर्जा दिया गया था। उसको स्वर्ग लोक की तरफ से एक डायमंड टोकन उसके नाम और मोहर के साथ दिया गया था। यह सब कुबेर देव नें खुद अपने हाथ से उसको दिया। उसके बाद उन लोगों नें बताया की तुमको देव लोक बुलाया गया हैं और हम लोगों को बोला है की आपको वंहा तक छोड़ क़र आये। रुद्राक्ष नें बोला ठीक मुझे बताओ कब जाना हैं। रुद्राक्ष नें उन लोगों से पूछा की जीवन ऊर्जा मोती उन सब लोगों के मेरे पास हैं इनका क्या हो सकता हैं। ज़ब उन लोगों नें यह सुना की जीवन ऊर्जा मोती राजकुमार रुद्राक्ष के ही पास है। तो सभी लोग पागल हो गए। उनोहने इसकी सुचना तुरंत सन्देश के माध्यम से स्वर्ग लोक की प्रबंधक लोगों को दी। रुद्राक्ष बोला सभी जीवन ऊर्जा मोती को नीलामी मै लगवा दो, जिसको जरुरत होंगी लेता जायेगा। इन जीवन ऊर्जा मोती का स्तर उस व्रह्म राक्षस के स्तर से ऊपर था। यह खबर तुरंत जंगल की आग की तरह हर तरफ फैल गयी की पचास लाख जीवन ऊर्जा मोती की नीलामी स्वर्ग लोक क़र रहा है। वृह्माण्ड के लाखो लोको के लोग उन राक्षसों के जीवन ऊर्जा मोती लेने आये हुए थे। यह मोती शक्ति और उम्र को दोनों को बढ़ाते थे। इसलिए हर कोई इनको ढूंढ़ता रहता था। कुछ हाई रैंक के ऊर्जा मोती को छोड़ क़र उसने विशाल भवन के हॉल मै ऊर्जा मोती का ढेर लगा दिया जिम्मेदारी सारी स्वर्ग लोक की थी। वो शांति से एक कौना पकड़ क़र बैठ गया था। नीलामी शुरू हुए और एक आदमी उठा और बोला यह सारे जीवन ऊर्जा मोती मुझे चाइये सब लोग उसकी बात को सुनकर हैरान रह गए। नीलामी वाला देवता बोला आपको बोली लगानी होंगी. वो बोला एक करोड गैलेक्सी जितना स्वर्ण हीरा पन्ना नीलम और आध्यात्मिक ऊर्जा के पत्थर. उसकी बोली को सुनकर किसी नें भी बोली नहीं लगायी. पता नहीं सामने वाला पागल था या क्या उसने अपनी स्टोरेज रिंग जिसकी झमता हज़ार अरब गैलेक्सी की होंगी स्वर्ग लोक के अधिकारी को पकड़ा दी। उसने उसको देखा तो वो खुद भी हैरान था। उसके बाद उसने राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी को बुलाया और वो रिंग उसको दे दी। रुद्राक्ष की आँखों से रौशनी की किरण निकल क़र उस स्टोरेज रिंग से टकरा गयी. रुद्राक्ष बोला ठीक है उसकी इस शक्ति को देख क़र सब आश्चर्य मै थे। जिसने ख़रीदा था उसकी भी दिलचस्पी जग चुकी थी। फिर उसके हाथो से कुछ किरण निकल क़र उन जीवन ऊर्जा मोती से टकराई और वो सारे उस आदमी की रिंग मै चले गए। उसने पूछा और भी हैं क्या। फिर रुद्राक्ष नें हाथ को घुमाया तो तो तीन ऊर्जा मोती और आ गए।। उनको देख क़र सबकी आँखे चमक उठी। उस आदमी नें बोली लगा दी बिना किसी संकोच के सौ करोड गैलेक्सी जितना सब कुछ। उसने फिर हवा मै हाथ घुमाया और एक स्टोरेज रिंग जेड ब्लैक डायमंड की थी उसको दे दी। इस रिंग का स्पेस एक करोड़ खरब गैलेक्सी का था। यह स्टोरेज रिंग और यह आदमी इस वृह्माण्ड और गैलेक्सी का नहीं था यह तो सब लोग समझ गए थे मगर वो नीलामी क़र रहे थे तो चीज भी उसको ही मिलेगी जो ज्यादा कीमत देगा। रुद्राक्ष नें उस रिंग को लिया और फिर से वही किया और बोला ठीक है। उसके बाद वो आदमी तुरंत वंहा से निकल गया था। वो ज्यादा देर तक नहीं रुका था स्वर्ग लोक मै। और बाकी आये हुए लोग निराश होकर जाने लगे तो उसने कुछ लाख और ऊर्जा मोती उन लोगों के लिए दे दिए और बोला इसका सारा मुनाफा मेरी तरफ से स्वर्ग लोक के लिए। स्वर्ग लोक सभी देवता हैरान थे क्या आदमी है यह। वैसे भी अभी जो उसको मिला थाउस से वो कई स्वर्ग लोक खड़े क़र सकता था। मगर स्वर्ग लोक के शिर्ष देवता और लोगों नें विचार किया नीलामी ख़त्म होने के बाद। और फिर जिस दिन रुद्राक्ष स्वर्ग लोक को छोड़ क़र देव लोक जाने के लिए निकला तो सभी उसको विदा करने आये थे। कुबेर देव नें आगे बढ़ क़र उसको एक स्टोरेज रिंग दी और बोला बड़े भाई की तरफ से एक छोटा सा तौफा है। रुद्राक्ष मना ही नहीं क़र पाया और उसको वो लेनी पड़ी उसने वादा किया ज़ब मेरे भाई को जरुरत होंगी रुद्राक्ष अग्निवंशी उसके साथ खड़ा मिलेगा। कुबेर देव का व्यवहार शुरू से ही उसको अलग लगा था। उसके बाद देव इंद्रा नें देवलोक जाने के लिए द्वार खोला और वो लोग उसमें प्रवेश क़र गए। कौन था वो आदमी? क्यों इतनी जल्दी मै था?राकेश स्टोरी । स्वर्ग लोक मै सब काम को ख़त्म करके राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी को देव लोक से बुलावा आया था उनके साथ ऊर्जा द्वार से चला गया था। इधर स्वर्ग लोक मै और अन्य लोको के लोगों राजकुमार, राजकुमारी, सम्राट, राजा, व्यापारी सबको पता लग चूका था रुद्राक्ष अग्निवंशी सबसे अमीर और सबसे भयानक योद्धा था मगर उतना ही विन्रम और शालीन था अपने व्यवहार मै। कई लोको के लोग तो अपने बेटी का व्याह उस से कराने के सपने भी देखने लगे थे। इस समय वो उन लोगों के दिलो पर भी राज क़र रहा था जिनको वो जनता तक नहीं था। इधर रुद्राक्ष अग्निवंशी नें प्रवेश द्वार से बाहर निकला और देवलोक को देखा। फिर उसने एक अह भरी और खुद से ही बोला अनंत काल बाद मै आखिर वापस आ ही गया अपने घर पर। देव इंद्रा नें उसकी यह बात सुन ली थी। क्यों की उन्होंने अपनी श्रवण शक्ति को जागरूक क़र रखा था। वो देखना चाहते थे की ज़ब राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी देवलोक मै कदम रखेगा तो कैसे प्रतिक्रिया करेगा। ज़ब की रुद्राक्ष और उन लोगों के बीच मै दुरी थी ज़ब वो चल रहे थे। अब देव इंद्रा को विश्वास हो गया था त्रिनेत्रा वापस आ गया है और इस समय वो इस लड़के के शरीर मै है। जिसका नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी है। अपने दोस्त को देख क़र उनकी आँखों मै खुशी के आँशु आ गए थे उनके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी। वो बोले ठीक हैं त्रिनेत्रा देखता हूँ तुम कब तक मुझसे सचाई छुपा क़र रखते। हो। वो लोग देवलोक के नज़ारों का लुफ्त उठाते हुए देव लोक की भूमि पर चल रहे थे. जल्दी ही वो लोग देवलोक के दरवाजे पर खड़े हुए थे। इतने देवताओं को एक साथ देखकर पहरे दार नें द्वार खोल दिया। उन लोगों नें अंदर देखा और सामने जाने लगे। कुछ ही देर मै वो लोग देव लोक के मुख्यालय थेरुद्राक्ष से मिलने वंहा कई देवताओं का समूह था। शिर्ष देवताओं मै वायु देव, अग्नि देव, सूर्य देव, जल देव, बिजली देव, वज्र देव, चाँद देव,। आदि लोग थे। एक समूह मै कामिनी देवी, विकास देव, कमल देव, मनीष देव, और रोहन देव, खड़े हुए थे। पंद्रह साल के लड़के को देखकर जिसके बालो मै 12रंग के रंगों मै चमक रहे थे। हलके हलके। कंधे तक लंबे बाल हवा मै लहरा रहे थे मजबूत कद काठी वाला शरीर लग रहा था उन लोगों। इसके अलवा उन लोगों को कुछ भी खास नहीं लगा। उन सब लोगों नें फिर प्रयास किया उसकी शक्ति स्तर को देखने का मगर उनको कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था कौन सी विधि के दवरा उसने अपनी शक्ति को छुपया हुआ हैं। अग्नि देव फिर सबको राजकुमार रुद्राक्ष का परिचय करवाते हैं और बोलते हैं शिर्ष नेतृत्व की तरफ से त्रिदेव की तरफ सेराजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी क्यो देवलोक का एक रक्षक घोषित किया जाता हैं और उनको एक देवताओं की श्रेणी मै रखा जा रहा हैं। कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा था वंही देव इंद्रा रामी देव केशव देव बहुत खुश थे। रामी देव और केशव देव को वापसी स्वर्ग लोक मै जाना पड़ा। देव इंद्रा वंही रह गए थे। वो खुद भी देवता था और स्वर्ग और देवलोक दोनों के काम देखता था। उसकी उम्र कुछ पुराने देवताओं के साथ की थी। बांकी तो सब लोग नये आये हुए थे। फिर उसको रहने का राजमहल सभी सुविधा से भरपूर आराम करने के लिए सब चीज मौजूद थी। रुद्राक्ष अग्निवंशी नें ज़ब सभा ख़तम हुई तो अपने राजमहल की तरफ जाने लगा। वो बोला आज थोड़ा विश्राम और साधना करने के बाद। भाइयों कल आप लोगों के साथ मिलते है। इधर ज़ब खबर दानव राज कालकेतु और दैत्यराज धूमकेतु को मिली की कंटक लोक मै उनके भाई की हत्या क़र दी गयी हैं जो की किसी स्वर्ग के योद्धा रुद्राक्ष अग्निवंशी नें की है वो लोग पागल हो गए थे। उन लोगों नें देवलोक और स्वर्ग लोक को सन्देश भिजवा दिया की अगर दुबारा देवासूर संग्राम नहीं चाहते हो तो हमेंराजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी को सौंप दों। अपने भाई के कत्ल की सजा हम लोग उसे खुद देंगे। उसका यह सन्देश उसके दूतो नें स्वर्ग लोक और देवलोक को पंहुचा दिया था। इस खबर नें सभी जगह आग लगा दी थी सब लोग उसी विसय पर बात चित कर रहे थे क्या अब दुबरा देवताओं और असुरो मै युद्ध होगा। कोई भी किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पा रहा था अगर उनकी मांग को मान क़र उन लोगों नें आज रुद्राक्ष को उनको सौंप दिया तो स्वर्ग लोक और देवलोक की गरिमा ख़तम हो जाएगी। योद्धाओ का मनोबल नस्ट हो जायेगा वो लोग सोचेंगे आज रुद्राक्ष के साथ ऐसा हो रहा है कल हमारे साथ भी ऐसा ही होगा। सभी देवताओं नें स्वर्ग लोक और देव लोक के मिल क़र तिरदेवो से सलह मांगी की भगवान इस विकट परिस्थिति से कैसे निकला जाये। त्रिदेब नें उनको बोला इस परिस्थिति से तुमको राजकुमार रुद्राक्ष निकाल सकते है अपनी बात को उनके सामने रखो। इधर उड़ती हुई खबर रुद्राक्ष को भी उसके राजमहल मै पता चल गयी थी। वो खुश था की उसको उसके दुश्मन को ख़तम करने का ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अंगले दिन रुद्राक्ष अपने राजमहल से देवलोक परिसर मै गया सभी लोग उसको अजूबा की तरह देख रहे थे। वो वंहा देव भवन मै देव इंद्रा से मिला और पूछा क्या खबर सच है की धूमकेतु नें मुझे बुलाया है। देव इंद्रा उसको ही देख रहे थे। वो बोले तुमको वंहा सजा देने मतलब तुमको मारने के लिए बुलाया जा रहा। ना की पार्टी का निमत्रण दिया हैं उसने। जो इतना खुश हो क़र पूछ रहे हो। फिर उसने पूछा की सबने क्या फैसला किया है। देव इंद्रा बोला वो लोग त्रिदेव के पास अपनी समस्या लेकर गए हैअसुरो के साथ युद्ध किया जाये या फिर क्या।। वो दोनों लोग बाते क़र रहे थे तभी वंहा उड़ते हुई देवता आ जाते हैं। सभी लोग उनको देखने लगते हैं क्या फैसला लिया गया है। वो लोग कहते राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी हमारे सामने यह समस्या खड़ी हुई हैं इसका निर्णय और निराकरण भी तुम ही क़र सकते हो। उन लोगों नें सब कुछ तुम्हारे ऊपर छोड़ दिया हैं। ह्म्म्मम्मराकेश स्टोरी । ज़ब रुद्राक्ष अग्निवंशी नें यह बात सुनी तो बोला इसमें परेशानी क्या है वो मुझे अकेला अपने वृह्माण्ड मै बुला रहा हैं तो मै जा क़र मिल आता हूँ उससे अगर मेरे भाइयों को कोई दिकत ना हो। मै अपने साथ किसी को भी नहीं ले जाना चाउंगा। तुम लोग मेरा इंतजार करना आने के बाद साथ मै बैठ क़र मदिरा पान करेंगे। उसकी बातो को सुनकर देव लोक और स्वर्ग लोक के लोगों नें अपने दांतो तले अंगुली दबा ली थी। उस बन्दे का प्रतिक्रिया करने का तरीका ऐसा था जैसे किसी को उसका मन पसंद खिलौना मिल गया हो। राजकुमार रुद्राक्ष को लेकर देव इंद्रा एक तरफ ले क़र गए और बोले त्रिनेत्रा मुझे मालूम है यह तुम हो राजकुमार रुद्राक्ष के शरीर मै। मेरे भाई अनंत काल के बाद तुझे महसूस किया हैं मैंने. तू मैने या ना माने। मगर मै यह कहूंगा तुझे वंहा अकेला जाने की कोई जरुरत नहीं है। राजकुमार रुद्राक्ष देव इंद्रा की बातो को सुन क़र एक दम उसके भाव बदल गए और फिर वो बोला अपने मित्र पर भरोसा करो इंद्रा मैंने इस पल के लिए अनंत काल तक इंतजार किया हैं। और फिर वो सबको बोलता हैं यह धूमकेतु नें मुझे कँहा बुलाया हैं सूर्य देव कहता हैं उसने अपने वृह्माण्ड धूमगाती मै बुलाया है। और यह किधर हैं। रुद्राक्ष कहता हैं उसकी जानकारी मुझे भेजो अपनी मानसिक शक्ति से। सूर्य देव कहता है ठीक हैं और जानकारी आने के बाद वो देव इंद्रा को कहता हुआ जाता है मेरे लिए खरगोश के मीट और वाइन अपने हाथ से तैयार रखना इंद्रा। मै एक महीने मै वापस आ जाऊंगा। इतना कहकर राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी टेलीपोर्ट हो जाता है उनके सामने से। एक महीना होने को आता हैं किसी को भी उसकी कोई खबर नहीं मिलती हैं स्वर्ग लोक और देव लोक के देवता उदास हो जाते है और सोचते है की। उसको दानव राज कालकेतु और और दैत्य राज धूमकेतु नें ख़त्म क़र दिया होगा। अभी महीना पूरा नहीं हुआ था की देव लोक और स्वर्ग लोक को अपने गुप्त चरो से पता चलता हैं धूमगाती वृह्माण्ड मै कुछ बड़ा कांड हुआ हैवंहा से दानव राज को खून से लटपट हालत मै अपने वृह्माण्ड काल रूप मै भागते हुई देखा गया। उसने अपने वृह्माण्ड की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए बाहर से सहयोग भी माँगा हैं। उसके काले समाराज्य के राजा की तरफ से काली ऊर्जा मिली हैं जिसको भेद क़र जाना उसके वृह्माण्ड मै नामुमकिन हैं किसी भी देवताओं के लिए। जँहा भी अंधेरा होता हैं वृह्माण्ड और गैलेक्सी और आकाश गंगा मै उस का राज किसी ब्लैक होले की तरह चलता हैं जो हर उजाले को निगल जाता है। यह लोग तो उसके छोटे मोटे सेवक हैं जो उसके साम्राज्य को बढ़ाते हैं। इस खबर को सुन क़र सब के कान खड़े हो जाते हैं ऐसा कौन सा कांड हो गया हैं। वो कहता जो लोग भेस बदल क़र जासूसी क़र रहे थे उन लोगों नें बताया हैं की एक ड्रैगन जिसके हज़ार मुँह थे एक ही बार मै ग्रहो को नस्ट किया है और एक दिव्य नाग उसके भी हज़ार फन थे एक ही बार मै ग्रहो को नस्ट क़र रहे थे एक आदमी जिसको यह लोग अपना मास्टर कह रहे थे उसका चेहरा कोई भी नहीं देख पाया। उसके आसपास ऐसा लग रहा था करोड़ सूरज उग आये हो वो सूरज भी 12तरीके के थे.इतना भयानक व्रणन सुनने के बाद देव लोक और स्वर्ग लोक के लोगों की तो रूह तक काँप गयी थी। सबने उसके सामने जो जीवित थे घुटने टेक दिया था। धूमकेतु का कुछ पता नहीं चल रहा हैं। उधर अपने मन मै भरी क्रोध की अग्नि से रुद्राक्ष नें सब कुछ तहबाहा क़र दिया था। इस समय त्रिनेत्रा के सामने मरने की हालत मै धूमकेतु सामने पड़ा हुआ था वो बारबार मांफी मांग रहा था त्रिनेत्रा से। काफ़ी सोचने के बाद त्रिनेत्रा कहता है तुझे यह सब देवलोक और स्वर्ग लोक के देवताओं को बताना होगा की पिछले देवासूर संग्राम मै त्रिनेत्रा के साथ क्या हुआ था। और एक बात का ख्याल रखना यह बिलकुल भी नहीं बताएगा की मै ही त्रिनेत्रा हूँ। धूमकेतु अपने प्राण बचाने के लिए उसकी सारी बाते मान लेता हैं।और फिर उस वृह्माण्ड मै अपना शासन लागु करके वापसी के लिए धूमकेतु को लेकर टेलीपोर्ट हो जाता हैं। ज़ब इधर वो देवलोक मै सही सहलामत धूमकेतु को लेकर आता हैं तो हंगामा मच जाता है। राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी को देख क़र देव इंद्रा ख़ुश हो जाता हैं. सभी देवताओं की भीड़ लग जाती है सभी लोको के देवता आते हैं इस खबर को सुनकर। फिर वो उसको सच बताने के लिए कहता हैं धूमकेतु सब कुछ सच बता देता हैं कैसे देवी कामिनी, विकास देव, कमल देव, मनीष देव, और रोहन देव उसकी मृत्यु के सडयंत्र मै शामिल थे। ज़ब उस महान योद्धा के साथ हुई धोके के बारे मै उन लोगों को पता चलता हैं तो सभी बहुत क्रोधित होते हैं। देव इंद्रा अपने हाथ से धूमकेतु का सर काट देता हैं। इधर ज़ब इन लोगों को पता चलता हैं की उनका भेद खोल दिया हैं धूमकेतु नें। और स्वर्ग लोक और देवलोक की सेना उनको बँधी बनने के लिए आ रही हैं पांचो अपनी जान को बचा क़र भाग जाते हैं। उनका कोई भी निशान उनके रहने की जगह पर नहीं मिलता हैं। सब लोग रुद्राक्ष से पूछते हैं त्रिनेत्रा के बारे मै कैसे जानते हो इतना। वो बोलता हैं उसके पूर्वजो नें उसको स्वर्ग के योद्धा की कहानी सुनाई थी। देव इंद्रा समझ जाता है अब यह सब लोगों को बरगला रहा है। देव इंद्रा फिर सबको कहता हैं राजकुमार रुद्राक्ष एक लंबे सफऱ से वापसी हुई हैं इसलिए इनको अभी आराम करने दो कल फिर हम लोग विस्तार से चर्चा करेंगे की वंहा क्या क्या हुआ था। उसके बाद वो त्रिनेत्रा को लेकर अपने राजमहल मै आ जाता हैं। वो उस कहता हैं साले यह क्या बबाल हो गया हैं तू। त्रिनेत्रा कहता कुछ नहीं यार अरबो खरबों साल इन कमीनो नें मुझे आत्मा सील से बंद क़र दिया था एक पत्थर मै। यह लोग तो मेरी आत्मा को भी नस्ट करना चाह रहे थे मगर मौत के मुहने पर तेरा भाई बच निकला। बैसे तो तू हमेशा सही कहता था इतनी जल्दी सब पर भरोसा मत किया क़र। साला मुझे क्या पता था की जैसे मै प्रेम करता हूँ वो ही मेरी जान ले लेगी। वो कमीने दोस्तों के कैसे भूल सकता हूँ। अगर कोई देख लेता गलती से दोनों को तो पागल हो जाता एक पंद्रह साल का लड़का और एक खरबों साल के देवता एक दूसरे को गाली देकर बाते क़र रहे थे। रुद्राक्ष बोला तूने भी इनकी बातो को सच मान लिया था क्या। बो बोला मुझे तो सक शुरू से ही था ज़ब इन लोगों नें कहानी सुनाई थी। फिर हमारे पास कोई सबूत भी नहीं था। लेकिन तेरी मौत को लेकर सक काफ़ी लंबे समय तक चलता रहा था। वो दोनों वाइन के साथ मीट का सवाद लेते हुए बात चित करने मै मस्त थे। कुछ दिनों तक दोनों मै से कोई भी दिखाई नहीं दिया था। यह राज का राज़दार केबल देव इंद्रा था। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी और देव इंद्रा नें दोनों नें साथ मै अच्छा समय बिताया था। उसके बाद रुद्राक्ष अपने राजमहल मै वापसी आ गया था। आने के बाद उसने धूमगाती वराहमंड की धन सम्पदा को देखा तो किसी प्रकार से कम नहीं कहा जा सकता था। बस उसको अब अपने विस्तार और विकास के लिए प्रयोग करना था। एक महीने तक रुद्राक्ष अग्निवंशी नें शांति से देवलोक मै गुजारें और सबसे अपने सम्बन्ध मधुर किये। कोई किसी भी लोक का हो वो उसकी शालीनता और विन्रमता से प्रभाबित था। फिर एक दिन रुद्राक्ष टेलीपोर्ट होकर कालरूपा वृह्माण्ड के सामने खड़ा हुआ था उड़ता हुआ। वो देख रहा था उस वृह्माण्ड को भयानक काली ऊर्जा नें घेर रखा था वो ऊर्जा इतनी भायनाक थी की उसका प्रभाव रुद्राक्ष को भी महसूस हो रहा था। उस ऊर्जा नें काले रंग के गोल सर्कल बनाएं हुए थे जो हार जगह फैले हुए थे। उसने कहा कालकेतु नें सुरक्षा तो मजबूत की हैं मगर यह रुकावट मुझे रोक नहीं पायेगी। रुद्राक्ष नें अपनी पूरी परम अविनाशी दिव्य आभा को प्रसारित किया और अपनी उसी स्तर की दिव्या ऊर्जा को खोल दिया देखते ही देखते उस काली ऊर्जा के सामने सूर्य की तरह हाथों मै तलवार को पकड़े हुए कोई आलौकिक योद्धा खड़ा हुआ था फिर वो उस ऊर्जा झेत्र मै घुस गयाउस काली शक्ति की ऊर्जा नें उसको पूरा ढक लिया रोशिनी की एक किरण भी बाहर नहीं दिखाई दे रही थी। कालकेतु को पता चल चूका था की त्रिनेत्रा यंहा आ चूका है वो अपने जादुई पत्थर से वंहा का नज़ारा देख रहा था। वो बोला कितना भी कोशिश क़र ले इस से बाहर नहीं निकल सकता यह ऊर्जा के काट केबल त्रिदेव के पास हैं। कुछ एक घंटे के बाद वो काली ऊर्जा बिजली की रफ़्तार से ख़त्म होनी शुरू हो जाती हैं ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो किसी ब्लैक होल मै जा रही हो। फिर ज़ब कालापन ख़तम होता है तो उसको सामने त्रिनेत्रा खड़ा हुआ दिखाई देता हैंवो खड़ा हुआ अपने हाथ और पैरो को स्ट्रेच क़र रहा था। कालकेतु कहता हैं यह असम्भव हैं ऐसा नहीं हो सकता। और उसके बाद त्रिनेत्रा देखता हैं अपनी दिव्य दृस्टि से की कालकेतु कहा हैं। और फिर वो सीधा कालकेतु के सामने टेलीपोर्ट हो जाता हैं। काल केतु को पता चल चूका था की वो अब मरने वाला हैं। लेकिन उसके चेहरे पर फिर भी मुस्कान थी वो बोला त्रिनेत्रा मुझे और धूमकेतु को मार क़र ज्यादा ख़ुश मत होना तेरी मौत का तो जन्म होने वाला होगा राक्षसों के गुरु नें हमारा अंश लिया था शक्तिशाली राक्षस को जन्म देने के लिए जिसको त्रिदेव भी नहीं हरा पाएंगे। मै आज मर जाऊंगा और तुम लोग आने वाले समय मै मारे जाओगे। जिस दिन धूमकाल का जन्म हो जायेगा वो इस वृह्माण्ड क्या ऐसी अनेको आकश गंगा पर राज्य करेगा तुम देवता लोगों को खतम क़र देगा। त्रिनेत्रा कहता हैं चल अच्छा हैं तूने मुझे बता दिया वरना मै ग़लतफहमी मै रहता। और उसके बाद वो अपनी तलवार सतरूपा से उसकी गर्दन काट देता हैं। और फिर अपनी दिव्य शक्ति भुजंगा और इमोर्टल गोल्डन ड्रैगन किंग को बोलता हैं इस वृह्माण्ड की सफाई का काम तुम दोनों करो और वो दिव्य नाग महाकाल देव को कहता हैं जो भी कीमती मिलेगा उसको तुम मेरे पास लाओ। साथ इन दोनों का हाथ भी बटाते जाना। और उसके बाद वो जिस ग्रह पर कालकेतु रहता था वंहा जानकारी और चीजों का मुआयना करना शुरू क़र देता हैं.इस ग्रह का नाम काल ग्रह था काल ग्रह से वो हर दानव को खतम क़र देता हैं। यह ग्रह भी करोडो मील मै फैला हुआ था। वंहा दानवो नें जिन लोगों को बंदी बनाया हुआ था उनको खोल क़र मुक्त देता हैं। वंहा उसको अलग अलग प्रजाति के लोग और जानवर दिखाई देते हैं जो बोल सकते थे। लाखो लोगों को मुक्त करने के बाद रुद्राक्ष अग्निवंशी कहता हैं यह काल ग्रह और काल रूपा वृह्माण्ड मेरा हुआआज से तुम सब आज़ाद हो अपनी मर्जी के मालिक हो अगर तुम लोगों को यंहा रुकना हैं रुक सकते हो। वो सभी अरबो सालो से कैद मै थे। अब जा क़र उनको आजादी मिली थी। इस ग्रह को अपने और मेरे रहने लायक बनाने का काम तुम सब लोगों का हैं। वो कहता हैं तुम लोग जा क़र नहा क़र फ्रेश होकर भोजन करो आराम करो। तब तक मै जरा दूसरे लोको को भी देख आता हूँ। उसके बाद वो काल ग्रह से निकल क़र उस वृह्माण्ड मै अपनी दिव्य दृस्टि से देखता है उन लोगों नें दानवो पर कहर वरपा रखा था। दक्ष हर लोक मै गुलामो के आज़ाद और नये मास्टर का नाम बताता हुआ जा रहा था जिसकी मर्जी हो वो रुके और जो जाना चाहे जा सकता हैं। उन लोगों नें किसी भी प्रजाति के बंदको को परेशान नहीं किया मगर दैत्य और दानव और राक्षस इन पर कोई रेहम नहीं किया। पुरे कालरूपा वृह्माण्ड मै राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी का नाम हो गया था। उसने कुछ महीने कालरूपा वृह्माण्ड मै रुकने की निर्णय लिया और कुछ बदलाव किये वंहा विकास के लिए उसने पृथ्वी के गर्वह ग्रह से पाए थे उनसे उसने हर लोक मै एक दूसरे से झोड़ने के लिए टेलीपोर्टेशन गेट का निर्माण किया और उस वृह्माण्ड के सभी लोको को एक दूसरे से जोड़ दिया। सभी अच्छे योद्धाओ को उन सारी व्यवस्था की जिम्मेदारी दे दी थी फिर उसने धूमगाती वृह्माण्ड मै भी टेलीपोर्टेशन गेट का निर्माण किया और उनको एक दूसरे वृह्माण्ड से जोड़ दिया। सारी चीजों को उसी तरीके से किया जैसा उसने कालरूपा वृह्माण्ड मै किया था। उसने वंहा के खजाने को उन लोगों के विकास मै प्रयोग किया। एक महीने के भीतर उसने सारी चीजों को सुनुयोजियत तरीके से पूरा किया था। उसको अपनी खुद की एक सेना चाइये थी। और यह उसका पहला कदम था। देवलोक और स्वर्ग लोक को भी पता चल चूका था राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी नें दोनों वृह्माण्ड पर अपना साशन इस्थापित क़र दिया हैं। अब वो दो वराहमंदो का राजा था। उसके बाद वो वापस देव लोक आया और उसको भी टेलीपोर्टेशन गेट का निर्माण किया और और उनको दोनों वृह्माण्ड के मुख्य केंद्र से जोड़ दिया था। यही काम उसने स्वर्ग लोक के साथ भी किया था। वो सब लोगों को एक दूसरे से जोड़ता हुआ चल रहा था। जिस से उन लोगों को भी देखने का मौका मिलेगा। उसने स्वर्ग आश्रम मै भी टेलीपोर्टेशन गेट का निर्माण किया और उनको स्वर्ग लोक, देव लोक और मधुगाती और कालरूपा वृह्माण्ड से जोड़ दिया। एक सिस्टम के तहत सब एक दूसरे से जुड़ चुके थे। सबको टोकन, पहचान, और सारी चीजों को नियंत्रण किया गया. सब लोगों को भुगतान के अलग अलग भागो मै बाँट दिया था। उसके दिमाग़ को देखकर सब आश्चर्य चकित थे। यही काम उसने दिव्य नाग लोक और गरुड़सर्प लोक के लिए किया। फिर उसने अपने दीप आर्यव्रत को भी टेलीपोर्टेशन के सिस्टम से जोड़ दिया था। उसके दक्षिण और उतर साम्राज्य दोनों को जोड़ दिया गया था। काबिलियत का परिषन और आगे बढ़ने का मौका सभी के पास था। यह प्रणाली को देख क़र हर तरफ तहलका मच गया था। अब दोनों साम्राज्य का काम और बढ़ गया था पूर्व और पश्चिम का साम्राज्य के योद्धा और लोग उतर और दक्षिण साम्राज्य से जुड़ गए थे। रुद्राक्ष अग्निवंशी की शासन प्रणाली कमाल की थी। ज़ब यह खबर अन्य दीपो के सम्राट को मिली तो वो भी अपने यंहा पर लोगों को भेजनें के लिए टेलीपोर्टेशन गेट को लगवाना चाहते थे। ज़ब यह बात स्वर्ग आश्रम के माध्यम से रुद्राक्ष अग्निवंशी के पास पहुंची तो उसने उन दीपो मै आने का निमंत्रण को सुविकार क़र लिया था। उसने व्योम लोक के महाराज सारंग को भी टेलीपोर्टेशन के साथ अपने वृह्माण्ड के साथ जोड़ दिया था। अब सब लोग एक दूसरे से जुड़ गए थे। किसी को भी किसी का इंतजार करने की जरुरत नहीं थी। सब लोग अपनी योगिता के अनुसार आगे बढ़ सकते थे। ज़ब रुद्राक्ष वापस स्वर्ग आश्रम मै आया तो वो उन सब दीपो के सम्राट से मिला और उन सबको भी एक दूसरे से जोड़ दिया इस काम के लिए जो भी खर्चा हुआ उन लोगों नें खुद ही भुगतान किया था। इस समय पृथ्वी लोक के सभी दीप एक दूसरे से जुड़ने के साथ साथ आगे वृह्माण्ड के राजा के साथ भी जुड़ चुके थे। एक साल के अंदर उसने हर जगह सरभोमिक विकास किया था. लोगों को नयी चीजों का नये लोगो का अनुभव हुआ. उन लोगों नें जाना की सांसर कितना विशाल है उसने जो देवता उसके साथ काम करना चाहते थे उन सब लोगों को अपने वृह्माण्ड मै महत्व पूर्ण जिम्मेदारी के पद दे दिए थे। उसका राजकोष कुबेर के खजाने की तरह बढ़ने लगा था। एक साल मै उसने करोडो योद्धाओ की सेना को तैयार क़र दिया था। उन लोगों को बेहतर लड़ाई के कौशल और विकास के लिए जीवन ऊर्जा मोती और आध्यात्मिक पत्थर और औसधी की गोलिया जो उसने बनायीं। थी अलग अलग रैंक के हिसाब से। करोडो योद्धाओ को बाँट दी थी उचित मूल्यांकन के साथ। शिकार विभाग और हकीम औसधी विभाग को बना दिया था। जिस से किसी को कोई परेशानी ना हो। दो सालो मै उसने दो करोड़ से ऊपर के योद्धाओ को तैयार क़र दिया था अपने वृह्माण्ड मै यह योद्धा हर लोक का निरिक्षण करते थे और काम को नियम के अनुसार होने मै मदद करते थे। लेकिन कहते हैं शांति के दिन ज्यादा नहीं होते हैं। एक दिन एक जानवर मानसिक सन्देश देता हैं रुद्राक्ष को। की उसे कुछ मिला है जिसको उसे देखना चाइये। रुद्राक्ष वंहा से टेलीपोर्ट होकर कालरूपा वृह्माण्ड के काल ग्रह पर प्रकट होता। फिर उसके सामने एक उड़ने वाली छिपकली आती जिसका आकर हाथी से भी बड़ा था। मजबूत खाल और पंख। वो कहती है महाराज मै और कुछ जानवर इस ग्रह पर शिकार करने के लिए लाखो मील दूर निकल गए थे। हम पहाड़ियों और खाइयो को पार करके आगे जा रहे थे। फिर हमें एक पहाड़ी की खाई मै नीली मख्खी का झुण्ड दिखाई दिया। हम लोग उस खाई मै उतर गए और उन मख्खी का शिकार करने लगे वो माखीईया उड़ती खाई के भीतर चलती गयी और हम लोग उनके पीछे रहे। फिर वो मख्खी एक गुफा मै घुस गयी। हम लोगों नें उनका पीछा किया की यह गुफा मै फंस गयी है अब कँहा जाएगी। मगर ज़ब हम उनका पीछा करते हुए गुफा के अंत मै जा पहुचे। वंहा हमने देखा की एक भी मख्खी नहीं थी। उसके अंदर एक तालाब था जिसमे पीला पानी भरा हुआ था और बीच मै एक चमकता हुआ बड़ा सा नीला पत्थर था। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष अग्निवंशी उस छिपकली जानवर से सारी बातो को ध्यान से सुनता है और फिर अपना मन बनाता है इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए। वो अपने सभी लोगों को सन्देश पहुँचता है की वो कुछ काम से कुछ समय के लिए एकांत मै जा रहा हूँ इसलिए सब लोग अपनी जिम्मेदारी से काम करें। उसके बाद वो कुछ जरुरत की चीजें पूरी करता है। वो अपने राजकोष से 75%सभी अपने आधीन लोको से लेता है और फिर उस छिपकली जानवर के साथ उस दिशा मै चल पड़ता है वो लोग एक दिन की यात्रा के बाद पहाड़ी की खाई के पास जा पहुंचते है। वो जानवर फिर आगे उसको राश्ता दिखता है मगर इस बार उनको कोई भी नीली मख्खी नहीं दिखाई देती है। तीन चार घंटे के बाद वो दोनों उस तालाव के पास खड़े होते है। रुद्राक्ष उस गुफा को घूम क़र देखता है कुछ निशान या कोई सुराख़ मिल जाये जो समझने मै आसानी हो मगर ऐसा कुछ नहीं दिखाई देता है। फिर वो उस छिपकली जानवर को कहता है यह मार्ग शायद दूसरे आयाम मै खुलता है मुझे भी नहीं पता कौन सी जगह खुलेगा। हो सकता है मुझे वापस आने मै कुछ समय लगे तब तक तुम लोग जिम्मेदारी से काम करना। और उसको भेज देता है। फिर रुद्राक्ष उस पीले पानी को गौर से देखता है वो पानी नहीं था वास्तव मै वो ऊर्जा की सघनता थी जो पीले रंग की थीउसके बीच मै वो नीला पत्थर था. रुद्राक्ष कुछ सोच क़र अपना हाथ उस तालाब के अंदर डालता है। कुछ नहीं होता है। फिर वो उस तालाब के अंदर उतर जाता है ज़ब वो तालाब के अंदर उतर क़र उस नीले पत्थर के पास पहुंचने वाला था तभी वो पीला पानी उसके शरीर सोखने लगता है। कुछ ही पल मै तालाब सूख जाता है। वो आगे बढ़ता है और उस नीले पत्थर को अपने हाथ से पकड़ने की कोशिश करता है वो पत्थर ऊर्जा मै बदलता है और उसके शरीर मै गायब हो जाता है। उसके साथ ही रुद्राक्ष भी गायब हो जाता है। रुद्राक्ष अग्निवंशी वंहा से टेलीपोर्ट होकर एक नये ग्रह पर जा पहुँचता हैं। वो जँहा पर टेलीपोर्ट होकर आ गया था वो एक ऐसी जगह थी जँहा पर भायनाक लड़ाई लड़ी जा रही थी। पीले कपडे पहने वाले लोग हरे कपडे वाले लोगों से युद्ध क़र रहे थे। पीले कपडे पहने आदमी जो रथ पर सावर था और एक रथ पर एक लड़की सवार थी। दोनों के हाथो से शक्तियां निकल रही थी और सामने हरी सेना के लोगों को ज्यादा से ज्यादा मारने की कोशिश क़र रही थी। मगर हरी सेना के योद्धा जो रथ पर सवार थे उनके हाथो से हरे रंग की शक्ति बहुत मात्रा मै निकल रही थी और वो पीली सेना को नस्ट करती जा रही थी। दोनों तरफ से लाखो लोग मर रहे थे। रुद्राक्ष जँहा पर टेलीपोर्ट होकर आया था यह एक ऊँची पहाड़ी की छोटी थीहरी सेना वाले आदमी नें हरे रंग का कवच जो चमक रहा था और हरे रंग का भाला पकड़ रखा था उसके साथ जो लड़का था उसके हाथ मै हरे रंग की तलवार थी। और इधर पीले रथ वाले का कवच पीला और हाथ मै पीली रंग की तलवार थी ऐसी ही तलवार उस रथ वाली लड़की के पास भी थी। दोनों पक्ष बराबरी का मुकाबला क़र रहे थे। ज़ब कोई नतीजा ना आता देख क़र पीले रथ वाला आदमी अपनी और शक्ति छोड़ने लगता हैं लड़की उसको ऐसा करने से मना करती हैं मगर वो नहीं मानता है। और वो अपनी पीली शक्ति को अधिकतम प्रयोग करते हुए। पीले चक्र का निर्माण करता हैं। ज़ब हरे रथ वाला योद्धा देखता है की सामने से शक्तिशाली हमला होने वाला हैं तो वो फिर हारे रंग की शक्ति को अधिकतम संचालित करता है। और उसके साथ उस लड़के की हरी शक्ति भी जुड जाती हैं और उसका हमला पीले चक्र की तुलना मै ज्यादा शक्तिशाली बन जाता हैं। हरे रंग से जो पानी की बुँदे गिर रही थी वो जिसको भी लग रही थी वो तुरंत गल जा रहा था। दोनों चक्र के हमले भयानक गति से टकरा जाते हैं उनके टकराने से हुए शक्ति विस्फोट के कारण कई किलोमीटर तक का झेत्र साफ हो गया था। पीले रंग का योद्धा और वो लड़की उड़ती हुए अनजान दिशा मै चली गयी थी और गिर क़र वेहोस हो गयी थी। इधर पीले रथ वाल आदमी भी उड़ता हुआ कुछ दूर जा क़र गिरा था। उसका चेहरा पीला हो चूका था धीरे धीरे सफेद हो रहा था। जो इस बात का संकेत था की उसने अपनी सारी ऊर्जा का प्रयोग करके लड़ाई को लड़ा था। उन हरे सैनिको नें उस आदमी को बंदी बना लिया था और उस लड़की की तलाश क़र रहे थे युद्ध मैदान मै। वो उनको कंही नहीं दिखाई दी थी।. हरे रंग वाले आदमी नें कहा राजकुमारी को ढूंढना जारी रखो वो घायल है कंही भाग नहीं पाएगी। उसके बाद जिन्दा बचे हुए पीले लोगों को बंदी बना लिया जाता हैं। और उस ग्रह पर अब यह हरी शक्ति वाले लोग राज करने लग जाते हैं। इधर रुद्राक्ष उस घायल हुए लड़की जो उड़ती हुई गिरी थी वो रुद्राक्ष से ज्यादा दूर नहीं गिरी थी। वो उस लड़की को उठता है और एक सुरक्षित जगह की तलाश करता है वो फिर उड़ता हुआ उन खाई मै घुस जाता हैं और एक गुफा को देखकर उसमें चला जाता है। वो उस गुफा को अपनी शक्ति से साफ करके रहने लायक बनाता हैं और उस झेत्र मै एक फार्मेशन का निर्माण करता है जिस से उसके होने का किसी को भी सुराक ना मिलेगा। फिर वो उस लड़की को लिटा देता हैं और उसके शरीर की जाँच करता हैं वो लड़की अंदुरनी तोर पर ज्यादा घायल हुई थी। उसके शक्ति बिंदु को बहुत नुकसान हुआ था। वो उसका उपचार करना शुरू करता हैं और उसने जो औसधी की गोलिया अपने लोगों के लिए बनायीं थी उसमें से एक गोली वो पहले खिलता हैं उस लड़की को फिर देखता हैं कितना प्रभाव हुआ उसके शरीर पर उस औसधी का। फिर वो कुछ गोलिया और खिलाता हैं और फाइनली उस लड़की को होश आता हैंतो वो अपने आपको एक गुफा के अंदर पाती है जिसमे रोशिनी हो रखी थी। फिर ज़ब वो धीरे से अपनी आँखो को खोल क़र देखती हैं तो थोड़ी दुरी पर एक लड़का किसी जानवर का मीट बना रहा होता हैं खाने के लिए। कौन थे पीली सेना वाले?हरी सेना वालो नें क्यों आक्रमण करके उन पर अपना कब्ज़ा किया था?राकेश स्टोरी । गुफा मै वेहोश पड़ी हुई लड़की को होश आने लगा था होश मै आने के बाद वो सामने देखती हैं तो उसको एक सतरह साल का लड़का बैठा हुआ किसी जानवर के मीट को आग पर भून रहा था। वो लड़की अपने शरीर को देखती है तो पाती हैं उसके सारे झाकम भर चुके थे और उसके शक्ति बिंदु भी ठीक हो गए थे। वो समझ चुकी थी सामने वाले नें ही उसकी जान बचाई है और उसका उपचार भी किया है। रुद्राक्ष नें मीट पर मसाले डाल क़र उसको भून लिया था उसकी खुश्बू फ़ैल रही थी। ज़ब वो उसमे से खाने के लिए शुरू करने वाला होता है तो उसकी नज़र उस लड़की पर जाती हैं जो उठ क़र बैठ गायी थी। रुद्राक्ष उस से पूछता है की अब कैसी हो तुम क्या पहले से अच्छा महसूस हो रहा है और वो खाना शुरू क़र देता हैं उस लड़की नें भी इतने दिनों से कुछ नहीं खाया था। उसको भी भूख लगी हुई थी। ज़ब उसने देखा की वो उसको ही देख रही हैं तो उसने पूछा क्या तुमको भूख लगी है। उसकी बाते सुनकर उस लड़की का गुस्सा फूट पड़ता हैं वो कहती हैं कितने बेशर्म वो तुम अकेले अकेले खा रहे हो मै इतने दिनों से भूखी हूँ और मुझको पूछा भी नहीं तुमने। रुद्राक्ष कहता ठीक ठीक है लो पहले खा लो फिर बात करते हैं वो लड़की उठ क़र उसके पास जाती हैं और मीट को खाने लगती है आधे सा ज्यादा वो मीट को खा जाती हैं और कहती हैं तुम बहुत अच्छा बनाते हो। तुम्हारा नाम क्या हैं.वो कहता है मेरा नाम रुद्राक्ष अग्निवंशी हैं। ओह्ह लेकिन तुम्हारे कपडे देख क़र लगता है तुम यंहा के नहीं हो। वो कहता हैं मै यंहा का नहीं हूँ ज़ब तुम लड़ाई के दूरआन घायल और वेहोश गयी थी तो मैंने तुमको यंहा पर छुपा लिया था अपने साथ वो हरे रंग वाले सैनिको की टुकड़ी तुम्हे ढूंढ रही थी। रुद्राक्ष उस से पूछता हैं तुम्हारा नाम क्या है वो कहती हैं मेरा नाम राजकुमारी रीना राय है। हम्म। वो कहता है क्या तुम मुझे बता सकती हो यह कौन सी दुनिया है। उसकी बाते सुनकर राजकुमारी रीना राय कहती है तुम इस समय पीला चाँद ग्रह पर हो जो सूर्य आकश गंगा के अंदर पीला पत्थर वृह्माण्ड के अंदर हैंवो लोग कौन थे जो हरे रंग के योद्धा थे। उसकी बात को सुन क़र राजकुमारी रीना राय कुछ देर शांत हो जाती हैं। रुद्राक्ष से पूछती है क्या तुमने उस पीले रथ वाले आदमी को भी देखा था। वो कहता है नहीं मगर वो लोग किसी को बँधी बना क़र लेकर जा रहे थे। शायद राजा हो और उसकी हरी हुई सेना। वो कहती हैं वो पीला ग्रह के राजा मुकुल राय मेरे पिताजी हैं। जिन लोगों नें हम पर हमला किया था वो भी हमारे रिश्तेदार ही. उनमें से एक मेरा चाचा हैं और दूसरा उसका लड़का है। वो लोग हरा विष पत्थर वृह्माण्ड से हैं। यंहा हर वृह्माण्ड मै लाखो लोक हैं। यंहा हर वृह्माण्ड को चलाने के लिए उस वृह्माण्ड की कोर ऊर्जा जो दिव्या ऊर्जा होती हैं उसको धारण करना पड़ता हैं।। हम्म यह दिव्या ऊर्जा बहुत भायनाक और खतरनाक होती हैं यह किसी को भी पल मै जला क़र नस्ट क़र देती है। मेरे पिताजी अपनी साधना शक्ति से उस ऊर्जा का कुछ ही अंश धारण क़र पाए थे। मेरा चाचा अपने लड़के को वृह्माण्ड का राजा बनाना चाहता हैं इसलिए वो पीली दिव्या मणि को हासिल करके उस ऊर्जा को धारण करने की कोसिस करेगा। मगर वो मणि पीताजी नें युद्ध से पहले मुझे दे दी थी सुरक्षित रखने के लिए। रुद्राक्ष कहता हैं तो राजकुमारी अब अपने क्या सोचा हैं करने के लिए। वो कहती हैं मै कोशिश करना चाउंगी उस दिव्या रोशिनी की ऊर्जा को पाने के लिए जो की एक सुनसान ग्रह पर बिना शक्ति वाला आदमी कोई भी उसके अंदर प्रवेश नहीं क़र सकता हैं। क्या तुम मेरे साथ चलना चाओगे। मै अपनी शक्ति से तुम्हारे ऊपर कवच बना दूंगी जिस से तुम सुरक्षित रहोगे। फिर हम पीताजी को छुड़वाने की योजना बनाएंगे। तो राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी कहता हैं ठीक हैं मै तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूँ। वो दोनों खाना खा क़र विश्राम करते है रीना कहती हैं हम लोग रात को सफऱ करेंगे. वो कहता हैं ठीक हैं। उसके बाद रीना रुद्राक्ष को लेकर सबसे बचती हुई अपने ग्रह के एक खास जगह पर जा पहुँचती हैं। जो गुप्त थी। रुद्राक्ष कहता हैं यह हम लोग कँहा पर आ गये हैं यंहा तो चरो और अंधेरा ही अंधेरा हैं हालांकि उसको कोई दिक्कत नहीं हो रही थी देखने मै फिर भी वो बोला। राजकुमारी रीना कहती हैं हम लोग ग्रह की ज़मीन के नीचे हैं यंहा पर गुप्त द्वार का राश्ता हैं वंहा जाने के लिए। और फिर कुछ देर बाद राजकुमारी रीना राय एक जगह पर हाथ रखती है और एक दरवाजा खुल जाता है। फिर वो अंदर जाती हैं और पीछे पीछे रुद्राक्ष अग्निवंशी जा रहा था। काफ़ी देर के बाद वो एक जगह रुक जाती हैं और एक पीली मणि को हाथ डालकर निकाल लेती हैं। फिर वो दूसरे पीले ऊर्जा पत्थर पर रख देती हैं। तो एक ऊर्जा द्वार खुल जाता है। रीना उसमे प्रवेश करती हैं और पीछे से रुद्राक्ष भी उसके अंदर प्रवेश क़र जाता हैं। और वो ऊर्जा का दरवाजा गायब हो जाता है। वो लोग एक सुनसान ग्रह पर प्रकट होते हैं जो पूरी तरह से पीले रंग की दिव्या ऊर्जा से घीरा हुआ था। राजकुमारी रीना राय को इतनी जल्दी थी उस दिव्या ऊर्जा को पाने की वो फटाफट उस झेत्र की तरफ चली गयी जँहा पर वो प्रचंड ऊर्जा पुरे ग्रह को रोशन क़र रही थी। राजकुमारी रीना नें उस दिव्या मणि को उस ऊर्जा के संपर्क मै जोड़ा और साधना करने लगी. और उसको अपनी आध्यात्मिक शांक्ति से अपने शरीर के अंदर खींचने लगी। मगर ज़ब उस ऊर्जा नें प्रतिरोध किया तो वो परेशानी मै पड़ गयी। उस ऊर्जा को अवसोसित करने का परिणाम उसकी सोच से ज्यादा खतरनाक निकला था। बीच मै वो उठ नहीं सकती थी उसका शक्ति स्रोत नस्ट हो जाता। और वो ऊर्जा के झेल नहीं पा रही थी तो कुछ समय बाद उसका शरीर फट जाता। रुद्राक्ष यह सब दूर से खड़ा हुआ देख रहा था। ज़ब उसने अपनी दिव्या दृस्टि से देखा की अब राजकुमारी की जान को खतरा हैं वो कभी भी मर सकती है तो उसने अपनी आध्यात्मिक शक्ति को उसमे मिला दिया। जैसे ही उस दिव्या ऊर्जा को अपनी ब्लड लाइन ऊर्जा के रेखा मिली। पुरे ग्रह की दिव्या ऊर्जा रुद्राक्ष के शरीर मै जाने लगी बिजली की गति से। एक घंटे के बाद उस ग्रह पर दिव्या ऊर्जा के नामोनिशान नहीं था। ग्रह का मौसम शांत और प्रकृति तोर पर सुन्दर हो गया था। वंहा पर जीवन था मगर ऊर्जा की अधिक मात्रा के कारण कोई भी उस जीवन बिंदु केंद्र तक नहीं पहुंच पाया था। इधर कुछ देर बाद राजकुमारी रीना को होश आता हैं तो वो पूछती हैं हम कौन से ग्रह पर हैं तो वो कहता हैं हम उसी जगह पर हैं जँहा पर आये थे। बस वातावरण बदल गया हैं। उसकी आँखों को विश्वास नहीं हो रहा था जो वो देख रही थी। उसको उस विशाल ग्रह पर दिव्या ऊर्जा का अंश भी महसूस नहीं हो रहा था। वो बोली उस दिव्या ऊर्जा के क्या हुआ कँहा गयी वो बोला वो सब मैंने अवसोसित क़र ली तुम्हारे प्राण संकट मै थे। मुझे कुछ समझ ही नहीं आया उस वक़्त। उसकी बाते सुनकर राजकुमारी को सदमा लगा और वो आधे घंटे तक कुछ नहीं बोली। मानो उसने कोई अजूबा देख लिया हो। राकेश स्टोरी । उस सुनसान ग्रह पर जँहा राजकुमारी रीना राय रुद्राक्ष को लेकर गयी थी। वंहा पर वो शक्ति को हासिल करते वक़्त जीवन और मृत्यु के पथ पर आ गयी थी। रुद्राक्ष नें उस रीना राय को तो बचाया ही था साथ मै उसको अभूत पूर्व शक्ति को हासिल करने का मौका मिला। उसको पीली दिव्या रोशिनी का पूरा भंडारमिला था। यब सांसर की रचना उसकी सोच और समझ से भी विशाल था। उसको लगा की वह अभी कुए का मेढ़क ही हैं। शक्ति और रचना के रह्यासमय चीजें भरी हुई पड़ी हैं। उसने राजकुमारी रीना को अपने साथ लिया और उस ग्रह को देखने लगा की कुछ काम तो नहीं मौजूद हैं। फिर उनको लाखो मिलो तक देखने के बाद एक जगह उनको किसी चीज का आभास हुआ। उसने राजकुमारी रीना को सुरकाशित करके खुद उसकी छानबीन करने लगा उसको थोड़ी देर मै एक जगह पर फार्मेशन लगा हुआ दिखाई दिया। यह उच्च कोटि का फार्मेशन था जो किसी अमर देवताओं को कैद और सील करने के लिए प्रयोग किया जाता था जिनकी मृत्यु नहीं हो सकती थी मगर उनको अनंत काल तक कैद किया जा सकता था। उसने परम व्रह्म आयम की विशिष्ट विधि के प्रयोग करना शुरू किया और उसको उस फार्मेशन को तोड़ने मै दो दिन लग गए थे। आखिरी चरण को किसी परम दिव्या हथियार से ही नस्ट किया जा सकता था। उसने फिर अपनी तलवार सतरूपा को बाहर निकाला और आखिरी बार उस फार्मेशन पर क़र दिया था। जैसे ही फार्मेशन टुटा एक बार फिर सारा ग्रह रोशिनी से भर उठा था। फिर वो रोशिनी धीरे धीरे एक मानव आकृति मै बदलने लगी जो की पीली दिव्या ऊर्जा की बनी हुई थी। उसने रुद्राक्ष को अपनी पीली जलती हुई आँखों से देखा और फिर चुपचाप ऊर्जा रूप मै उसके अंदर प्रवेश क़र गयी। रुद्राक्ष को उस से कोई खतरे का आभास नहीं हुआ था। क्यों की वो दिव्या ऊर्जा थी। उसके बाद वो उस जगह की तालशी लेने लगा उसको वंहाकरोड़ों दिव्या हथियार वंहा पर रखे हुई मिले। उसकी तलवार गलती से एक हथियार से टच हो गयी और वो हथियार उसकी तलवार मै गायब हो गया। और सतरूपा की चमक और धार और भी बढ़ गयी थी। ज़ब उसने यह देखा तो बोला इसका मतलब इसका स्तर अभी और भी बढ़ाया जा सकता मगर कितना यह जवाब समय काल चक्र के पास था। उसने सतरूपा को अपनी शक्ति से नियंत्रण किया और सतरूपा मै सभी दिव्या ऊर्जा के हथियार समा गए थे। उसको महसूस हो रहा था जैसे यह सब उसकी चेतना मात्र से संचालित होने को तैयार हो। उसकी तलवार कई हमलों के एक साथ क़र सकती थी। उसके बाद वो राजकुमारी रीना राय के पास जा पंहुचा जँहा पर उसको छुपाया था। इधर इन सब बातो को दस दिन बीत चुके थे मुकुल राय को प्रतिदिन प्रताड़ित किया जाता था जिस से वो जानकरी दे दे. रीना राय का चाचा और उसका लड़का सभी लोको पर अपना कब्ज़ा जमा चुके थे अपनी सेना के साथ। जो भी पीला पत्थर वृह्माण्ड मै उनके खिलाफ जा रहा था उन लोगों को मार दे रहे थे। हालत बहुत ख़राब हो गए थे वंहा पर। राजकुमारी रीना और रुद्राक्ष चुपचाप उस ग्रह मै प्रवेश किया और फिर रीना नें अपने भरोसे के लोगों को खोजना शुरू किया गुप्त रूप से रहकर। काफ़ी दिनों की मशक्त के बाद उनको एक गुप्तचार मिला जिसने उसको सारी जानकारी दी। वो बोला आप यंहा से चले जाओ उनको अगर खबर लग गयी तो वो तुमको जान से मार देंगे। रीना राय हताश हो चुकी थी उसको कोई भी उपाय नहीं नज़र आ रहा था। इधर रुद्राक्ष अपनी साधना करने मै लगा हुआ था। वो अंगले स्तर की पहेली सीड़ी पर कदम रख चूका था। उसके अंदर जो दिव्या आकृति थी वो पीला सोता था दिव्या ऊर्जा से बना हुआ अमर देवता। था। वो इस समय रुद्राक्ष के साथ आत्मिक अनुबंध मै जुड़ चूका था। रुद्राक्ष का स्तर हर तरीके से बहुत ज्यादा था। पीला सोता को अगर वो नस्ट करना चाहे तो क़र सकता था। इस स्तर की शक्ति दुर्लभ होती हैं। दिव्या नाग, भुजंगा, और इमोर्टल गोल्डन ड्रैगन की शक्ति मै भी अद्भुत परिवर्तन हुआ था। उसको अपने शरीर मै बहने वाली ऊर्जा कुछ संघन होती हुई लगी थी। वो अपनी ध्यान साधना से वाहर निकला और फिर उठ क़र सभी चीजों का जायजा लिया क्या चल रहा हैं। उसने राजकुमारी रीना से पूछा तुम्हारा चाचा और उसका लड़का कँहा पर मिलेगा। उसने बताया की वो लोग उसके पापा के राजमहल पर मिलेंगे सभी गतिविधि को वंही से नियंत्रण मै रखा जाता था। रुद्राक्ष अग्निवंशी राजकुमारी रीना को बोलता हैं एक घंटे के बाद तुम अपने राजमहल आ जाना और फिर वो वंहा से गायब हो जाता है। एक घंटे बाद ज़ब वो अपने राजमहल की तरफ जाती है तो देखती हैं भयानक रक्तपात हुआ था हर तरफ काटे हुई लाशें सर खून ही खून नज़र आ रहा था। पीले कपडे वाले सैनिको को आज़ाद किया जा चूका था। और सिंघासन के ऊपर रुद्राक्ष अग्निवंशी बैठा हुआ था. उसके सामने रीना का चाचा और उसका लड़का मरने की हालत मै पड़े हुए थे। यह सब देख क़र उसकी आँखे फटी रह जाती है। रीना को देख क़र रुद्राक्ष कहता है जा क़र अपने पीताजी को लेकर आ जाओ। कुछ ही समय बाद मुकुल राय को आज़ाद करवा दिया जाता हैं और एक दिन के उपचार के बाद मुकुल राय ठीक हो जाते हैं। उसके बाद रुद्राक्ष के पास आ जाते हैं रुद्राक्ष उनकी व्यवस्था को थोड़ा बदलाव करता हैं। और उनको अपने प्रतिनिधि रूप मै सिंघासन पर बैठा देता हैं। मुकुल राय भी सब समझ जाते हैं। क्यों की काफ़ी जानकारी तो उनकी लड़की नें पहले ही दे दी थी रुद्राक्ष के बारे मै। उसके कुछ देर बाद तीन आकृति वंहा राजमहल के भवन मै प्रकट होती हैं। यह पीला सोता था दूसरा दिव्या नाग दक्ष और तीसरा भुजंगा था। वो आकर कहते हैं मास्टर इस वृह्माण्ड मै से सभी हरे सैनिको और उनके लीडरो को ख़तम किया जा चूका हैं सभी लोको को पहेली की तरह काम को करने के लिए बोल दिया गाया हैं। सभी लोगों को उसकी ताकत का अंदाजा हो चूका था। वो मुकुल राय के भाई और उसके लड़के को उनके हाथो सौंप देता है। और उनसे पूछता हैं इनके साथ क्या करना है। मुकुल राय इसका फैसला रुद्राक्ष के ऊपर डाल देते हैं। तो रुद्राक्ष कहता हैं आप लोग अपने वृह्माण्ड की व्यवस्था को देखो तब तक मै इनके साथ इनके वृह्माण्ड मै जा रहा हूँ। यह बात को सुनकर सब उसको पागलो की तरह देखने लगते हैं। रुद्राक्ष उनके माथे पर अपनी दो ऊँगली रखता है और फिर टेलीपोर्ट हो जाता हैं उन लोगों को लेकर वो हरी विष वृह्माण्ड मै आ जाता हैं। उन दोनों को सबके सामने खतम क़र क़र वो अपनी शक्ति को दिखाता हैं और जीतने भी दुस्ट लोग थे सभी का खात्मा क़र देता हैं। उस वृह्माण्ड मै उसको हरी दिव्या ऊर्जा का लाभ मिला था जिसमे विष भी शामिल था जो हमले को और भी खतरनाक बनाता था। जिसको भी इस हमले का सामना करना पड़ेगा उसको विष और हरी दिव्या ऊर्जा दोनों का मुकाबला करना पड़ेगा। विष की एक बूंद ही साधरन योद्धा को गला देगी। अगर वो शक्ति के अच्छे स्तर पर नहीं हुए तो। इस वृह्माण्ड मै उसको मोटा खजाना हाथ लगा था उसने उन सब चीजों को और स्टोरेज रिंग्स को अपने स्टोरेज रिंग मै डाल दिया था। वो सभी लोको को एक दूसरे से जोड़ देता हैं और बाद मै वृह्माण्ड से वृह्माण्ड को जोड़ देता हैं और उन सबको वो अपने आकाश गंगा के वृह्माण्ड से जोड़ देता हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी घटना थी। वो पत्थर जो उसको अमृत वृक्ष से मिला था उसके शरीर के अंदर एक क्रिस्टल के रूप मै चला गया था। उसी से उसको आकाश गंगा को खोलना और एक दूसरे से जोड़ना पता चला था.वो क्रिस्टल ऐसा लगता था उसके अंतर्मन के समुन्दर मै जैसे वो रचना के समय मौजूद था। हर द्वार और दरवाजा खोलने मै सक्षम था। ज़ब देवलोक और स्वर्ग लोक को पता चला की राजकुमार रुद्राक्ष अग्निवंशी नें अपने वृह्माण्ड को दूसरी आकाश गंगा के वृह्माण्ड के साथ जोड़ दिया है। उन सब लोगों नें उसकी शक्ति और सामर्थ्य का लोहा माना था। उसने अपने नाम का टोकन लागु करवा दिया था जिस से किसी को कोई भी असुविधा ना हो। सबकी रैंकिंग अलग अलग क़र दी थी। इस से सबको लाभ मिलने वाला था हर तरीके का। कुछ साल के अंदर ही उसने तीस करोड़ योद्धाओ की सेना खड़ी क़र थी उसका व्यापार भी अपने चर्म पर चल रहा था आधी गैलेक्सी जितना मुनाफा कमा लिया था। बहुत काम समय मै ज्यादा प्रगति लोगों को खटक जाती हैं। यही हॉल रुद्राक्ष के साथ हुआ था। कुछ उसके दुश्मन जो पहले ही बच क़र भाग गए थे किसी अनजान जगह पर छुप गए थे वो इस रुद्राक्ष अग्निवंशी को दिन प्रतिदिन शक्तिशाली होता देख मरे जा रहे थे। इधर कुछ दुश्मनों नें अपने गुप्तचर भेष बदल क़र उसके साम्राज्य मै प्रवेश करा दिए थे। लेकिन त्रिनेत्रा का दिमाग़ अपने दुश्मन से दो कदम आगे चल रहा था। उसने सभी वृह्माण्ड जो उसके अधीन थे उनको अदृश्य अस्तकोंड फार्मेशन लगा दिया था। जिसको केबल परम दिव्या स्तर का योद्धा ही देख सकता था तोड़ वो भी नहीं सकता था वो उन लोगों की जान की सुरकक्षा क़र क़र चल रहा था जिन लोगों नें उस पर भरोसा किया था। राकेश स्टोरी । रुद्राक्ष नें सारी सुरक्षा व्यवस्था को अपने हिसाब से दुरस्त क़र दिया था। उसके बाद उसको सुचना मिली की आर्यव्रत मै कुछ गड़बड़ हो रही हैं वो टेलीपोर्ट होकर वापस अपने साम्राज्य आया और सारे मामले को समझा। हर साम्राज्य से लड़कियों के गायब होने की खबर कोई आम बात नहीं थी और कोई भी योद्धा उसका पता नहीं लगा पा रहा था। फिर उसको अन्य बारह दीपो से भी भी यही सुचना मिली सब शक्तिशाली सम्राट भी मिल क़र पता नहीं लगा पा रहे थे कुछ ही दिनों मै लाखो लड़कियों को गायब किया गया था। किसी को कुछ भी नहीं पता चल रहा था। सब लोग और आम जनता परेशान हो रखी थी ऐसा काम कभी नहीं हुआ था। रुद्राक्ष अग्निवंशी नें सबको बोला जितना जल्दी होगा मै इस समस्या की जड़ का पता लगाऊंगा। उसने हर जगह की सुरक्षा और बड़वा दी थी। मगर कोई नतीजा हासिल नहीं हुआ घटना क्रम ऐसी ही चलता रहा। फिर त्रिनेत्रा नें कुछ सोचा और पृथ्वी लोक के वाहर उड़ता हुआ खड़ा हुआ था उसकी आँखे बंद थी वो कुछ मंत्र जाप क़र रहा था और ज़ब उसका मंत्र जाप पूरा हुआ तो एक प्रकशित किरण नें पुरे पृथ्वी लोक को ढक लिया और अदृश्य हो गयी। और उसके बाद त्रिनेत्रा दुबारा कुछ मंत्र पढ़ के खुद भी गयाब हो गया। एक दिन गायब रहने के बाद वो इस समय तीनो महासागर के बीच मै एक जगह पर खड़ा हुआ था जो तिरभुज के रूप मै बन रही थी। उस त्रिभुज पर अदृश्य कवच लगा हुआ था जो की किसी गठन का निर्माण क़र रहा था। रुद्राक्ष अग्निवंशी नें उस गठन मै प्रवेश किया इस समय वो गायब था उसकी आभा की गंध भी किसी को नहीं मिल सकती थी। वो उस पानी के ऊपर से जँहा पानी चक्रवत बना रहा था उसमें प्रवेश क़रगाया थोड़ी देर मै वो पानी के नीचे एक छोटे शहर मै खड़ा हुआ था जिसको चरो तरफ से शक्तिशाली ऊर्जा की रेखाऊं के दवारा सुरक्षित किया हुआ था। रुद्राक्ष बिना किसी परेशानी के उस शहर मै जा पंहुचा था। वंहा लोगों नें भूरे रंग के कपडे पहने हुए थे। रुद्राक्ष नें अपना रूप बदला और उन जैसे ही बन गया उसको कोई देख क़र नहीं बता सकता था की वो उनमें से नहीं है। वो वंहा की मधुशाला मै जा पंहुचा और एक कोने मै बैठ गाया। लोगों की बाते सुनने लगा की क्या चल रहा है यंहा। कुछ लोग बाते क़र रहे थे की इस बार धरती के राजा को किसी का साथ मिल गया हैं और वो जल्दी ही इस वृह्माण्ड और फिर आकाश गंगा मै राज करेंगे। कुछ देर बाद सैनिको का ग्रुप आता हैं वो लोग मदिरा पीने लगते हैं और बाते करते हुए कहते हैं महदीप वालो नें सुरक्षा को मजबूत क़र दिया है अब लड़कियों को लाने मै और भी साबधानी वरतनी पढ़ रही। इतनी लड़कियों की बली देकरवो कोई शैतानी शक्ति को हासिल करने की कोसिस कर रहे है। अंदर की खबर यह हैं की हो सकता है कुछ दिनों मै वो कामियाब भी हो जाये। इस समय बाप बेटी मै लड़ाई हो रखी है उसने अपनी लड़की को भी कैद मै डाल दिया हैं। जिस से यह खबर वाहर ना जा पाए। हम्म। रुद्राक्ष वंहा तीन चार घंटे वितता हैं और उसको अपने काम की जानकारी मिल जाती हैं उसको समझ आ जाता हैं की आम लोग और सैनिको के बीच का अंतर क्या हैं। उसके बाद वो अदृश्य होकर केंद्र मै बने नीले रंग के महल मै प्रवेश क़र जाता है और अपनी दिव्या दृस्टि से सब कुछ देखता है तो उसे महल के अंदर एक विशाल मूर्ति बनी हुई थी जो काले रंग की थी उसके चार मुँह खुले हुए थे। उसके सामने बना हुआ बड़ा कुंड खून से भरा हुआ था वो सारा खून उस मूर्ति के अंदर जा रहा था पतली रेखा को बनाते हुए। कुंड के बराबर मै उन लड़कियों की लाशें पड़ी हुई थी जिनकी बली दी गयी थी। एक आदमी जिसने नीले कपडे पहने हुए थे मंत्र जाप क़र रहा था। ज़ब कुंड का खून खाली होने लगा तो वो लोग और लड़कियों को लेकर आ गए थे उनकी बली देने के लिए। ज़ब उसने यह सब देखा तो उसके क्रोध की सीमा ना रही। वो उस जगह प्रकट हुआ और उन लोगों के सर कट क़र ज़मीन पर गिर गए। कुछ ही सेकंड मै वंहा के सभी सैनिको को मार दिया था। कोई भी किसी भी स्तर को हो उसने कोई रेहम नहीं दिखाया। ज़ब उस आदमी नें देखा की उसके शक्तिशाली लोग भी उस लड़के का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे है तो मज़बूरी मै उसको उठना पड़ा। इस समय रुद्राक्ष क्रोध मै था उसने पीला सोता, भुजंगा को बोला सब कुछ नस्ट क़र दो कोई भी दुस्ट मुझे जीवित नहीं चाइये। उसने दक्ष को बोला पूरा शहर साफ क़र दो और इन लोगों की लाशो और सरो को महल के बाहर टांग दो। एक घंटे मै उस शहर का काया पलट क़र दिया गाया सभी बची हुई लड़कियों को उनके घर भेजनें की तैयारी करवा दी गयी। धरती के राजा की मृत्यु की खबर आग की तरह फैल गई। हर कोई जान चुका था कि अब इस धरती का नया शासक रुद्राक्ष अग्निवंशी था। उसकी शक्ति ने पूरे साम्राज्य को भय से भर दिया था। अब कोई भी अन्याय करने के बारे में सोचने से भी डरने लगा था। लेकिन अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के बाद भी रुद्राक्ष ने राजकुमारी मीरा को स्वतंत्र कर दिया। उसने उसके भविष्य का निर्णय उस पर छोड़ दिया था।रुद्राक्ष ने उस शहर का नाम "जल शहर" रखा और उसे अन्य साम्राज्यों के साथ जोड़ दिया। उसने योग्य योद्धाओं की नियुक्ति की और फिर से व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने की योजना बनाई। जल शहर के लोग पहली बार बाहर की दुनिया को समझने और देखने के लिए स्वतंत्र हुए। इससे उन्हें अपनी क्षमताओं को और निखारने का अवसर मिला।राजा की मृत्यु के बाद, रुद्राक्ष को उसकी स्टोरेज रिंग मिली। जब उसने उसे खोला, तो वह चौंक गया। रिंग में विशाल स्पेस था। इतना कि उसमें चार से पाँच ग्रहों जितनी जगह समाई हुई थी। यह साधारण स्टोरेज रिंग नहीं थी। वह पूरी तरह स्वर्ण मुद्राओं, दुर्लभ रत्नों और अनगिनत बहुमूल्य वस्तुओं से भरी हुई थी।लेकिन इन सबसे अधिक, दो रहस्यमयी ग्रंथों ने उसका ध्यान आकर्षित किया।एक ग्रंथ काले रंग का था, और दूसरा सफेद रंग का।इन ग्रंथों से एक अजीब-सी ऊर्जा निकल रही थी, जैसे वे किसी गहरे रहस्य को समेटे हुए हों। रुद्राक्ष ने उन्हें उठाया और ध्यान से देखने लगा। उसके मन में कई सवाल उठने लगे। क्या इन्हें खोलना सुरक्षित था?राकेश स्टोरी ।