Nafrat e Ishq - 50 in Hindi Love Stories by Sony books and stories PDF | नफ़रत-ए-इश्क - 50

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नफ़रत-ए-इश्क - 50

विराट बालकनी में खड़ा फोन पर किसी से बात कर रहा था जब तपस्या ने उसे पीछे से बाहों में भरा । वो लोग अभी भी होटल के उस कमरे में थे ।विराट जो बेहद संजीदगी से किसी के साथ कुछ डिस्कस कर रहा था अचानक तपस्या के हाथ अपने सीने पर महसूस कर खामोश सा हो गया।

"मैं अभी होटल में ही हूं आधे घंटे में यहां से  निकलूंगा तुम पेपर्स यहीं भेज दो ।"....विराट कुछ संभल कर बोला और फोन काट कर पलट कर तपस्या को देखने लगा। तपस्या एक खुली हुई मुस्कान के साथ उसे ही देख रही थी।

"रेडी हो जाइए प्रिंसेस आप के पग फेरे केलिए  चलना है।""... विराट उसे बाहों में भर कर बोला। तपस्या ना समझी में उसे देख ने लगी।"कल ही तो आप ने कहा था पग फेरे केलिए नहीं जाना है!! फिर आज अचानक??"

" मना नहीं किया था प्रिंसेस बस यही कहा था कि तय वक्त पर जाना है और जो वक्त तय हुआ था वो आज और अभी है।"....विराट उसे बाहों में थाम कर कपबोर्ड की तरफ लेकर गया । और कपबोर्ड खोलकर उसके हाथों में एक पैकेट  थमा कर बोला ..."ये लीजिए और रेडी हो जाइए ऑफिस जाने से पहले मैं आपको आपके घर छोड़ जाऊंगा और शाम को वापस लेने चला जाऊंगा।".. विराट बेहद आराम से बोला  और खुद रेडी होने क्लोजेट की तरफ चला गया। तपस्या वही खड़ी उसे शॉक्ड नजरों से देखती रही ।

"मुझे देखने के लिए पूरी जिंदगी पड़ी है प्रिंसेस लेकिन अभी अगर मेरा मूड बदल गया तो फिर मुझे दोष मत दीजिएगा कि मैने पग फेरे के लिए आपको आपके घर नहीं भेजा।".... विराट क्लोसेट के अंदर घुसते हुए ही बोला और उसकी बात सुनकर तपस्या एकदम से पैकेट लिए वॉशरूम में घुस गई।

विराट रेडी होकर आया तो सोफे पर पड़ा उसका फोन रिंग कर रहा था । उसने झट से फोन उठाया जैसे वो उसी कॉल का इंतजार कर रहा था और बात करते हुए ही दरवाजे के पास चला गया ।दरवाजा खोला तो वही आदमी जो थोड़ी देर पहले उसके साथ बात कर रहा था हाथों में कुछ पेपर लिए खड़ा था।

"यशवर्धन रामचंद्र को विराट अग्निहोत्री की तरफ से पहला तोहफा है सर।"..... वो आदमी विराट की तरफ कुछ पेपर्स बढ़ा कर विनिंग स्माइल के साथ बोला।

"नो नो कबीर विराट अग्निहोत्री का नहीं वीर कश्यप का।".... एक-एक पेपर्स पर नजर डालकर  विराट सर्द आवाज में बोला।

"आपने जो सामान मंगवा  था गाड़ी में रखवा दिए हैं..... और ये मैडम का पर्स और फोन घर से मंगवा लिया है ।"....उस आदमी ने कहा और पर्स विराट को दे कर वहां से चला गया।

"सॉरी प्रिंसेस आपकी फेयरी टेल लव स्टोरी यही तक थी.... आज से कुछ जिंदगी की हकीकत से रूबरू करते हैं। मुझे मिली हर घावों हर दर्द के बाद भी मेरे दिल में आपके लिए प्यार बढ़ता ही चला गया अब बारी आप की है देखते हैं आपकी इस फेयरी टेल लव स्टोरी में कितनी ताकत है????"विराट हाथ में  पकड़े उन पेपर्स पर नजर डालकर खुद से ही बोला और एक नजर वॉशरूम की तरफ  देखा जहां से तपस्या विराट की दी हुई करे रंग की साड़ी पहने बाहर निकल रही थी।

हल्के भीगे बाल जो चेहरे और गर्दन के पास चिपके हुए थे बिना कोई साज सजावट सादगी भरी खुबसूरती की मूरत बनी तपस्या जब मिरर के पास खड़ी हुई विराट का दिल मानो बगावत पर उतर आया था।

"अब आप को देर नहीं हो रही!!"... तपस्या मिरर में से ही विराट के गहरी नजर को देख बोली।

"अब अगर आप सुबह सुबह यूं भीगी भीगी सी खूबसूरती समेटे मुझे रिझाएंगी तो वक्त का एहसास थोड़ी ही रहेगा मुझे प्रिंसेस।".... विराट मिरर के पास आ कर तपस्या को पीछे से बाहों में भरकर उसके भीगे गर्दन पर अपने होंठ रख दिए। तपस्या की पलकें खुद ब खुद ही इस एहसास से बोझल हो गई थी।

"देर हो जाएगी विराट।" वो बहकी सी आवाज में बोली तो विराट होश में आया और उससे दो कदम दूर हटा।

"चलें??".. वो प्यारी सी आवाज में बोली।

"हम्ममम चलते हैं बस एक मिनिट।" वो फाइल में से कुछ पेपर्स उठाया और तपस्या के ओर बढ़ा दिया।

"ये क्या है??"तपस्या पेपर्स पर एक नजर डाल कर बोली।

"रायचंद की प्रॉपर्टी अग्निहोत्री ग्रुप्स के नाम कर ना है और उस के लिए आप के सिग्नेचर चाहिए.. ।".... विराट बिना किसी एक्सप्रेशन बोला। नजर तपस्या के नजरों पर टिकी थी।उसके बात पर तपस्या खुल कर हंस पड़ी।

"वो तो वैसे भी आप की ही है। ".... वो बेफिक्री से बोली और पेन उठा कर बिना कुछ कहे जहां जहां क्रॉस के निसान थे अपने नाम की मोहर लगाती चली गई। विराट कुछ पल उसे भारी पलकों से देखता रहा लेकिन फिर अचानक ही अतीत के कुछ दर्दनाक लम्हों याद कर उसकी आंखों में सर्द पन उतर आई थी।

कुछ वक्त बाद दोनों ही रायचंद हवेली के तरफ रवाना हो चुके थे। विराट चुपचाप ड्राइव कर रहा था और तपस्या बस उसे ही देखे जा रही थी। जब से वो फोन कॉल आया था तभी से विराट कुछ अजीब तरीके से उलझा हुआ था ये तपस्या बखूबी महसूस कर पा रही थी।

"क्या हुआ विराट कोई प्रॉब्लम है हम देख रहे हैं सुबह से आप अजीब तरीके से उलझे हुए हैं। आप ठीक नहीं है तो हम घर चलते हैं रायचंद हवेली बाद में भी जा सकते हैं।"... तपस्या परेशान होकर बोली।

"कुछ नहीं प्रिंसेस आई एम फाइन।".... विराट बिल्कुल  ठंडे लहजे से बोला और चुपचाप गाड़ी चला ने लगा ।15- 20 मिनट के बाद गाड़ी  रायचंद हवेली के सामने रुकी।

"अगर घर आने का मन करे और मेरी याद आए तो कॉल कर दीजिएगा प्रिंसेस तब तक आपका इंतजार करूंगा।".... विराट गाड़ी  रोक कर अजीब भाव से बोला। तपस्या ना समझी मैं उसे देखने लगी। विराट के बार-बार बदलते भाव उसे समझ में नहीं आ रहे थे। वो उलझ सी गई थी।

"अगर  मन करे !!!! इसका क्या मतलब हुआ विराट ???आपने तो कहा कि शाम को हमें लेने आएंगे फिर ऐसे क्यों बात कर रहे है??हमने तो आपको कहा भी नहीं कि हमें पग फेरे के लिए आना है!!"... तपस्या का  दिल अजीब तरीके से बेचैन हो रहा था जैसे कुछ बुरा बहुत बुरा होने वाला है।

"कोई बात नहीं है प्रिंसेस बस आप मुझसे दूर चली जाती है तो बेचैन सा हो जाता हूं।".... विराट उसके चेहरे को थाम कर बोला और मुस्कुरा दिया। तपस्या भी एक जबरदस्ती की मुस्कान अपने चेहरे पर लाए विराट को देखने लगी। उसका दिल अजीब तरीके से धड़क रहा था।

"पीछे कुछ गिफ्ट  है । मां ने कहा था कि शादी के बाद आप पहली बार अपने घर जा रही हैं तो सबके लिए कुछ ना कुछ लेकर जाना है।" विराट पीछे की तरफ इशारा करते हुए बोला जहां पर ढेर सारे गिफ्ट रखे हुए थे।  तपस्या खुलकर मुस्कुरा दी।

"इतनी सारी शॉपिंग आपने कब किया?? ".. वो गिफ्ट पैकेट्स के तरफ देख खुश होकर बोली।

"आप शायद भूल रहे हैं  प्रिंसेस आपका हस्बैंड इंडिया की सबसे बड़ी माल का ओनर है मुझे शॉपिंग करने के लिए कहीं जाने की जरूरत है क्या ???"... वो एटीट्यूड के साथ बोला तो तपस्या ने मुंह बनाकर उसे दिखा ।

"लेकिन आपको सब की चॉइस पसंद ना पसंद कैसे पता??? अगर गिफ्ट किसी को पसंद  नहीं आया तो ??"... वो मासूम सी बोली।

"आपकी जिंदगी से जुड़ी  किसी के बारे में मुझे पता ना हो उनकी पसंद और नापसंद के बारे में मुझे पता ना हो ऐसा हो नहीं सकता ।डोंट वरी सबको अपनी अपनी गिफ्ट पसंद आएंगे।".... विराट  पूरे कॉन्फिडेंस के साथ बोला। तपस्या वही गाड़ी में बैठी बैठी एक-एक गिफ्ट देखने लगी।  सभी गिफ्ट्स पैकेट पर उनके नाम लिखे गए थे।

"आपने  दादू के लिए तो कुछ लिया ही नहीं ??"तपस्या हर्षवर्धन जी के नाम का गिफ्ट पैकेट को ढूंढते हुए बोली। विराट के चेहरे पर एक शातिर और शैतानी मुस्कान आ गई।

"उनकी गिफ्ट तो आप है ना !!!आप जा रही हैं इससे बड़ी गिफ्ट उनके लिए और क्या हो सकता है??"...  वो बिना  भाव के बोला। तपस्या मुंह बनाकर उसे देखने लगी।

" ऐसे अच्छा थोड़ी ना लगेगा!!सबके लिए गिफ्ट लेकर जाए और उनके लिए नहीं!! "... वो नाराजगी से बोली। विराट फीका सा मुस्कुरा दिया ।

" डोंट वरी प्रिंसेस आप अंदर जाइए उनकी गिफ्ट कुछ खास है । आप के साथ साथ ही पहुंच जाएगी।".... तपस्या को कुछ समझ में तो नहीं आया लेकिन घर जाने की खुशी में वो सर हिला कर बाहर निकल आई।

"प्रिंसेस!!"" विराट ने पीछे से आवाज दिया। तपस्या पलट कर उसपर एक हसीन नजर डाला। विराट का दिल धक से रुका। हाथ एक पल को कांपे।"ये कुछ अर्जेंट कॉन्फिडेंशियल पेपर्स है... अपने पास रखना। में शाम को ले लूंगा।"... विराट उसके ओर एक फाइल बढ़ा कर बोला।तपस्या एक पल को सोची फिर मुस्कराए उसके हाथ से वो फाइल ले ली। "शाम होने का इंतजार करूंगी।"वो विराट की तरफ देखकर बोली और उसकी दोनों गाल बारी बारी से चूम कर सारे गिफ्ट्स लेकर हवेली की तरफ बढ़ी।

हवेली के गॉड्स ने उसे देखा तो भाग कर आए और उसके हाथ से सारे गिफ्ट लेकर उस के पीछे-पीछे ही  हवेली के अंदर चले गए।विराट वहीं पर कुछ पल  खड़ा उसे देखता रहा फिर गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ गया था। चेहरे के भाव अभी भी कोरे ही थे। उसके दिमाग में क्या चल रहा है ये समझना  अभी भी नामुमकिन ही था।

अग्निहोत्री इंडस्ट्रीज

विराट इस वक्त अपनी केबिन में शांत बैठा था उसकी नजर दीवार पर टंगी घड़ी के सुई पर थी। वो एक टक घड़ी की बढ़ती सुई के तरफ ही देख रहा था।

"घड़ी में क्या देख रहे हैं भाई यही ना की गुजरता एक-एक पल कैसे आपको भाभी से दूर ले जा रहा है यही सोच रहे हैं ना कि रायचंद हवेली में इस वक्त क्या हो रहा होगा??? क्या  वो पेपर्स भाभी के साथ भेजना  जरूरी था!!! भाभी इस वक्त अपनी  पग फेरे के लिए गए हैं भाई!! दो ही दिन हुए है आप दोनों की शादी को!! कुछ पल तो उन्हें खुशी के दे देते उनके साथ कुछ वक्त तो उनके पति की तरह गुजार देते... क्या पता भाई ये पल कभी दुबारा मिले ना मिले !!! चंद घंटे के  बाद मीडिया में भी ये न्यूज़ आ जाएगी भाई के रायचंद इंडस्ट्रीज के 50% शेयर्स जो तपस्या रायचंद के नाम पर थे वो अग्निहोत्री इंडस्ट्रीज में शामिल हो चुके हैं!!  वो पेपर्स भी पुलिस और लीगल ऑथोरिटीज़ के हाथ लग लाएंगी..... और साथ ही साथ भाभी को भी ये पता चल ही जाएगा के ये सब आप ने किया... फिर सोचा आप दोनों के रिश्ते का क्या होगा???"".....श्लोक अंदर आने के साथ-साथ ही विराट पर बरस पड़ा था। विराट की नजर अभी भी बिना किसी भाव घड़ी के सुई पर ही थी।

"अभय रायचंद ने मेरी बहन को जीते जी एक जिंदा लाश बना दिया और मैं उसके बहन के साथ एक हैपिली मैरिड लाइफ जिऊं???"...  वो तंज से मुस्कुराया।

"लेकिन भाई

"इस शादी का मकसद  आज भी वही है श्लोक....विराट श्लोक को टोक कर बोला।

"भाई!! लेकिन भाभी  ये  डिजर्व नहीं करती! और ये बात आप भी अच्छी तरह से जानते हैं वो मासूम है आपसे प्यार करती है आपका धोखा बर्दाश्त नहीं कर  पाएंगी।"श्लोक लगभग गिड़गिड़ाते हुए विराट के सामने बोला।

"परि दी भी मासूम थी वो भी अभय रायचंद से बेहद प्यार करती थी और वो भी धोखा बर्दाश्त नहीं कर पाई।... इसके बाद भी प्रिंसेस को कभी  वो झेल ना नहीं पड़ेगा जो परी दी को अभय  की वजह से झेलना पड़ा है श्लोक।"... वो बोल कर वहां से जाने लगा।

"भाभी आकर आपसे सवाल  पूछेंगी भाई कि ये सब कुछ आपने क्यों किया??? क्या जवाब देंगे उन्हें???".... श्लोक के सवाल  ने विराट के कदम दरवाजे के पास ही रोक लिए।

.........................

रायचंद हाउस

रायचंद हाउस में वापस से खुशियों का माहौल था बीते दो दिनों में जो भी कुछ हुआ उसके बाद मातम सा छा चुका था लेकिन आज तपस्या को घर पर देखकर और वो भी इतनी खुश सब के चेहरे पर रौनक सी आ गई थी। तपस्या भी सबके साथ बैठी अनुपमा जी श्लोक और पीहू के तारीफों के पुल बांधे जा रही थी।

"अच्छा लगा आपको खुश देखकर प्रिंसेस... उस लड़के को तो पहली नजर में ही हम पहचान गए थे कि वो कितना खानदानी है और उसमें कितना पोटेंशियल है। एक बार को जब विराट ने बहु को मना कर दिया कि वो पग फेरे के लिए आपके घर नहीं भेजेंगे तो हम भी भड़क गए थे लेकिन उनकी भी बात सही थी यूं अचानक जैसे शादी हुई और आप वहां पर किसी को जानती पहचानती भी नहीं थी तो यूं अचानक से सुबह वापस घर आ जाना थोड़ा ठीक नहीं लगता। बिल्कुल सही फैसला किया था विराट ने।"यशवर्धन जी उसके माथे पर हाथ रखकर प्यार से बोले तो तपस्या खुश होकर उनसे लिपट गई।

"हमें थोड़ा काम है हम खत्म करके आते हैं।"... यशवर्धन जी बोले और अपनी स्टडी रूम की तरफ  चले गए। वो थोड़े परेशान दिख रहे थे।

"Ahhh हमसे हमारा कमरा बहुत मिस किया।"... तपस्या एकदम से अपने बेड पर फैल कर बोली।

"सफेद झूठ बोल रही है आप दी ...आपके चेहरे की  ग्लो देखकर हम बता सकते हैं की जीजू ने तो आपको एक सेकंड के लिए भी किसी को मिस नहीं करने दिया होगा। बल्कि इस वक्त तो आपको देखकर ऐसा लग रहा है जैसे आप जीजू को ही मिस कर रहे हैं। कहो तो हम बुला लें उन्हें!!".. तनु शरारत से उसके पास ही लेट कर बोली।

"चुप! बड़े छोटे का तो कुछ लिहाज ही नहीं है आपको।" सरगम  जो तपस्या के लिए नाश्ता लेकर कमरे के अंदर ही आ रही थी तनु की बात सुनकर उसे फटकार लगाते हुए बोली ।तनु मुंह बनाकर उन्हें देखने लगी।

"बात करने दो सरगम डांट क्यों रही हो !!अपनी बहन से तो मजाक कर रही है और वैसे भी शक तो वैसे  हमे भी है अचानक जैसे सिद्धार्थ की असलियत सामने आना फिर विराट जी का ऐसे शादी के लिए मान जाना फिर एक अजनबी इंसान से शादी करके सिर्फ एक दिन में ही तपस्या के चेहरे पर इतनी खुशी इतना कुछ एक साथ हजम ही नहीं हो रहा है हमें ।"....चित्रा जी कहते कहते वही तपस्या के पास ही बैठ गई  और उनकी बात सुनकर तपस्या एकदम से हड़बड़ा गई।

"आप अभी जेम्स बॉन्ड मत बनी मां बस यही सोचकर ही खुश हो जाइए कि उस बेवकूफ सिद्धार्थ से आपकी प्रिंसेस की शादी नहीं हुई। और  जिससे भी शादी हुई है आपकी बेटी उनके साथ बहुत खुश है।"... अभय जो तपस्या से मिलने उसके कमरे में आ रहा था तपस्या को हड़बड़ाते  हुए देखकर उसके बचाव में बोला।

"भाई हम आपको बहुत मिस कर रहे थे ।"अभय को देखकर ही तपस्या ने एक  राहत की सांस ली और उसके सीने से लग गई।

"आपके चेहरे पर ही लिखा है के आपने किसी को मिस नहीं किया है छोटी ! विराट जी के लिए प्यार आपके चेहरे पर साफ झलक रही है तो सबका यूं शक करना जायज भी तो है।"....  अभय धीरे से उसके कान में बोला तो  वो झेंप गई।

"विराट जी की एक बहन भी है ना क्या उनसे मिली है आप ??"अचानक से अभय को विराट की कही हुई बात याद आई तो उसने सवाल पूछा  ।

"अ वो.. शी इज नॉट मेंटली स्टेबल। विराट ने कहां के वो अननोन लोगों को देखकर डर जाती हैं इसलिए अक्सर अकेले ही रहते हैं ।लेकिन विराट ने कहा कि कुछ दिनों बाद वो उन्हें हम से मिलवा देंगी। लेकिन उनकी बेटी है पीहू बहुत क्यूट है उन्हें देखकर तो हमें हमारा बचपन याद आ जाता है ।"...तपस्या एकदम खुश होकर बोली।

"आपको उनका नाम पता है??? पूरे घर में उनकी कोई तस्वीर तो होगी ना ??"" अभय को पता नहीं बेचैनी सी हो रही थी। उसे  तपस्या के किसी  और बात से कोई मतलब ही नहीं थी।

"नहीं भाई एक्चुअली हमने पता करने की कोशिश भी नहीं की अब  बख्त ही कितना हुआ है हमें उस घर में गए?? लेकिन आपको क्या हुआ है आप क्यों इतने परेशान है???"तपस्या अभय की परेशान चेहरे को देख बोली।

" क कुछ नहीं छोटी बस अचानक ही ऐसे सरकमस्टेंसस में आप की शादी हुई ना तो घबरा गया था आप खुश हो ये देखकर अच्छा लगा।"... अभय अपनी परेशानी छुपाते हुए बोला।

"हम खुश हैं भाई इन फैक्ट बहुत खुश है विराट के साथ.... आप फिकर मत कीजिए।"... वो चहक कर बोली अभय मुस्कुरा दिया .... दिमाग में अभी भी विराट के कहे हुए हर लफ्ज़ गूंज रही थी।

"भाई आपको पता है डॉक्टर प्रिया विराट की बहन का ट्रीटमेंट कर रहे हैं ।हमें तो शादी के पहले दिन ही वो विराट के घर पर मिल गई थी।उस  दिन विराट के बहन को अटैक आया था  तो डॉक्टर प्रिया उन्हें देखने आई थी।"

"प्रिया!!!... तपस्या की बात सुनकर अभय को जैसे कुछ याद आ गया।

"ओके छोटी आप  मां चाची और तनु के साथ बात कीजिए हमें निकलना होगा हमारी जरूरी मीटिंग है।" अभय जल्दी-जल्दी में वहां से निकल रहा था।

" वो..छोटे  साहब..नीचे पुलिस इंस्पेक्टर आए हैं आपको सब नीचे बुला रहे हैं।" सर्वेंट हड़बड़ा कर  अभय से बोला।

"पुलिस!!!"

कहानी आगे जारी है ❤️ ❤️