Nafrat e Ishq - 49 in Hindi Love Stories by Sony books and stories PDF | नफ़रत-ए-इश्क - 49

The Author
Featured Books
Categories
Share

नफ़रत-ए-इश्क - 49

" एक बात बताइए आप के भाई रोज ऐसे ही रात रात भर घर से गायब रहते थे या ये स्पेशली हमारे लिए ही है???"... तपस्या का भड़कना जारी था। श्लोक को समझ ही नहीं आया क्या बोले वो खामोश ही रहा।

"आपके खामोशी का मतलब हम हां ही समझे ना देवर जी!!".. श्लोक को खामोश देखकर वो वापस से भड़क गई। "भाभी भाभी प्लीज आप शांत रहिए पहले और हां भाई वैसे भी कम ही घर आते थे लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वो हर बार उस छिपकली के पास ही जाते थे !भाई वर्कोहलिक है मुश्किल से दो-तीन घंटे ही सोते हैं। हां ये बात और है कि शादी आने के बाद उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए ।"....श्लोक उसे समझाते हुए बोला ।

"हर बार नहीं जाते थे लेकिन जाते तो थे ना उस छिपकली के पास??"... तपस्या की आवाज अचानक से रुआंसी हो गई ।श्लोक को भी समझ आया कि उसने कुछ गलत बोल दिया।

"अरे नहीं भाभी मेरा मतलब  वो नहीं था वो तो वही छिपकली ही थी जो  भाई को जबरदस्ती

"आपके भाई ने हमें शादी से पहले सच बता दिया है ।" वो धीमी आवाज में बोली तो श्लोक खामोश हो गया।

"शादी से पहले क्या था क्या नहीं उससे हमें फर्क नहीं पड़ता  श्लोक लेकिन हम ये कभी बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे की शादी के बाद भी विराट .....

तपस्या बोलते बोलते खामोश हो गई। श्लोक को समझ में आ रहा था कि  वो रो रही है ।

"ऐसा नहीं होगा भाभी भाई पर मुझे पूरा भरोसा है और आपके लिए उनकी मोहब्बत कितनी शिद्दत से है  वो भी मुझे अच्छी तरह से पता है....

" वो तो हमें भी पता है उनकी आंखों में दिखता है हमारे लिए बेपनाह मोहब्बत।" श्लोक को बीच में ही  टोक कर तपस्या ने कहा

"तो फिर हो गया ना फिर इतनी टेंशन क्यों ले रहे हैं भाई सचमुच कॉन्फ्रेंस में गए होंगे आप फिकर मत कीजिए।" श्लोक उसे समझाते हुए बोला

" वो हमारा दिल तो समझ गया है लेकिन इस दिमाग की क्या करें  ये समझने के लिए तैयार ही नहीं है। बस शक शक और शक ही कर रहा है।" तपस्या  झल्ला कर बोली ।

"तो ठीक है आपका शक दूर करते हैं एक कम कीजिए मैं पता करता हूं भाई कहां पर है फिर हम अभी के अभी उनका पीछा करते हैं फिर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा है ना!!"..... श्लोक कुछ यूं एटीट्यूड के साथ बोला जैसे उसने एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व कर दी हो। तपस्या भी कुछ सोच कर एकदम से खुश हो गई।

"हां यही करते हैं अगर उस छिपकली के साथ आपके भाई को हमने रंगे हाथ पकड़ लिया ना तो कसम खाते हैं वहीं के वहीं से रायचंद हवेली लौट जाएंगे और वापस कभी नहीं आएंगे। "तपस्या वापस से रुआंसी आवाज में बोली।"अब  रोइए मत और जल्दी नीचे आइए मैं भी फ्रेश होकर 2 मिनट में नीचे पहुंचता हूं।".... श्लोक ने कहा और एकदम से वॉशरूम में घुस गया और कुछ मिनट के बाद ही श्लोक और तपस्या की गाड़ी विराट की गाड़ी से बस कुछ ही मीटर की दूरी पर थी।

होटल द पैराडाइज

विराट की गाड़ी होटल के सामने  रुकी तो गार्ड ने आकर तुरंत दरवाजा खोल दिया । विराट गाड़ी से निकाला और गार्ड की तरफ चाबी बढ़ा कर पार्किंग के लिए बोल  तेजी से अंदर निकल गया ।उसके अंदर जाते ही तपस्या और श्लोक की गाड़ी विराट के गाड़ी के ठीक सामने रुकी। श्लोक गाड़ी से बाहर आया और गार्डन जाकर तपस्या की साइड का दरवाजा खोला तो तपस्या डरी सहमी बाहर निकली। जितने हिम्मत से वो विराट के पीछे जेम्स बॉन्ड बनकर आई थी उतनी ही तेजी से उसकी सारी हिम्मत हवा हो गई थी।

"तबीयत तो ठीक है ना भाभी  !!"....श्लोक तपस्या की माथे पर पसीने की बूंदे देख परेशान होकर बोला।

"अगर उन्हें पता चला तो ..... तपस्या एकदम सहमी हुई आवाज में बोली  "तो  आप का तो पता नहीं लेकिन मेरा शहीद होना पक्का है भाभी।"..... श्लोक  बेचारगी से बोल।

"सरफरोशी कि तमन्ना अब हमारे दिल में है देखने है जोर कितना बाजुएं कातिल में है।"तपस्या एकदम से सारी हिम्मत जुटा कर बोली और श्लोक की बाजुओं को पकड़ आगे बढ़ गई ।श्लोक के कदम वहीं पर ठहरे हुए थे ।

"क्या हुआ देवर जी जल्दी चलिए!!"... तपस्या उसे ठहरा हुआ देखकर बोली ।

"आपका और मेरा सफर यहीं तक था भाभी सरफरोशी की तमन्ना आपके दिल में है और आपको ही कातिल की बाजू की ताकत देखनी है मैं तो बस आपका हेल्प कर रहा था भाई के नजर में आप आ गए तो आपकी जान बच जाएगी क्योंकि आप उनकी जान हो लेकिन भाई मेरी टुकड़े-टुकड़े कर देंगे.... अब आप खुद  जाइए और अपने पति पर नजर रखिए मैं चला।"..... श्लोक बोलकर एकदम से  गाड़ी बैठ गया ।

"देवर जी अरे देवर जी सुनिए  तो ....आप ऐसे धोखा नहीं कर सकते हम तो एक ही टीम में थे ना ......."तपस्या आवाज देती रही लेकिन तब तक श्लोक जा चुका था।

थोड़ी रफ्तार से गाड़ी चला कर श्लोक होटल से बाहर निकाला और उसके होठों पर एक शैतानी मुस्कान थी।

"जानता हूं आप दोनों के बीच में सब कुछ उलझा हुआ है लेकिन फिर भी इस रिश्ते जितनी ज्यादा गहराई और किसी रिश्ते में नहीं है । ये भी मुझे पता है ....कम से कम में कोशिश तो कर सकता हूं कि जब तक आपके भाई के बारे में सब कुछ पता चले उससे पहले ही आप उनसे इतनी जुड़ जाएं की चाहकर भी उनसे अलग ना हो पाए। आप ही उन्हें संभाल लेंगी भाभी।"...... श्लोक ने सदी  हुई आवाज में कहां और गाड़ी अग्निहोत्री हाउस की तरफ ले गया।

तपस्या बड़ी मुश्किल से कछुए की कदम बढ़ाते हुए होटल के एंट्री डोर के अंदर घुसी ।मन ही मन वो श्लोक  को कोसे जा रही थी। उसे अब ऐसे विराट के ऊपर शक कर उसका पीछा करने पर अफसोस हो रहा था। लेकिन अब तो वो आ चुकी थी।हड़बड़ाहट में ना ही वो अपना फोन लेकर आई थी और ना ही साथ में कुछ पर्स तो रिटर्न जाना भी मुश्किल था । वो अंदर आई तो अचानक ही विराट पर उसकी नजर पड़ी जो कुछ लोगों के साथ लिफ्ट के पास ही खड़ा था। शायद लिफ्ट के आने का इंतजार कर रहा था ।विराट को देखते ही उसने खुद को पिलर के पीछे छुपा लिया ।सांस और धड़कन एकदम से तेज चलने लगी थी । फूल ऐसी में भी वो पसीने पसीने हुए जा रही थी। थोड़ी देर के बाद उसने धीरे से पिलर में से झांक कर लिफ्ट के तरफ देखा जहां इस वक्त कोई नहीं था । उसने अपने सीने पर हाथ रखा और एक गहरी सांस भरी।"ओह्ह्ह god अगर उन्होंने हमे देख लिया होता तो अब तक तो हम मर ही जाते ।"उसने खुद से ही कहा और एक  वहीं पिलर से टिक कर खड़ी हो गई।

"मैंने आपको बिल्कुल भी नहीं देखा है  प्रिंसेस आप पिलर के पीछे छिप कर मेरे ऊपर नजर रख रहे हैं ये बात तो मुझे बिल्कुल भी नहीं पता है और ये तो बिल्कुल नहीं पता कि आप मेरा पीछा करते हुए यहां तक आए हैं।"........ भारी भरकम  सर्द आवाज सुनकर तपस्या की तो जैसे सांस ही अटक गई थी। उसमें अब इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि वो पलट कर विराट का सामना करें। उसने अपनी आंखें कसकर  भींच लिए।विराट ने अफसोस से सिर हिलाया और पलट कर जाने लगा । तपस्या ने तेजी से उसकी कलाई थाम ली।विराट रुका लेकिन पलट कर तपस्या की तरफ नहीं देखा।

"सॉरी विराट हम वो हम आपके ऊपर शक नहीं करना चाहते थे और आपके पीछे यूं चोरी-छिपे आना तो बिल्कुल नहीं जाते थे ....

"लेकिन आपने मुझ पर शक किया और चोरी छुपे मेरे पीछे भी आए भी प्रिंसेस!".....विराट ने कहा और अपना हाथ छुड़ाकर पलट कर  तपस्या को घूरने लगा।तपस्या एक शरारती मासूम बच्ची की तरह नजर झुकाए खड़ी थी।

"सॉरी !!!"उसने बड़े ही मासूमियत से कहा नजरे अभी भी फर्श पर गढ़ी हुई थी। विराट ने कुछ पल उसे घूरा फिर होटल के स्टाफ को  इशारे से बुलाया।

" मैडम ने आज बहुत वर्कआउट कर लिया है थक गई होगी उन्हें मेरे रूम में ले जाइए और डिनर करवा दीजिए।"..... विराट ने अपने सामने खड़ी होटल के स्टाफ से कहा और जाने लगा।

"आपने भी डिनर नहीं किया आप कहां जा रहे हैं??"..... तपस्या हड़बड़ा कर पूछी ।

"जानवी के पास तो बिल्कुल भी नहीं जा रहा हूं और अगर अभी भी शक है तो  चलिए मेरे साथ कॉन्फ्रेंस ही अटेंड कर लीजिए ।".....विराट सख्त आवाज में बोला तपस्या एकदम से खामोश हो गई। विराट कुछ पल उसे अफसोस से देखा  फिर सामने खड़ी लड़की की तरह कुछ इशारा कर वहां से कॉन्फ्रेंस रूम की तरफ चला गया।

सुबह का बख्त

तपस्या की सुबह विराट के बाहों में हुई थी। होटल के उस आलीशान कमरे की कांच की खिड़की से आती सूरज की सुनहरी धूप तपस्या के चेहरे पर बिखर रही थी । और विराट उसके बिल्कुल करीब उसके चेहरे को न जाने कब से निहार रहा था। उसके होठों पर एक सुकून भरी मुस्कान थी। तपस्या की नींद हल्की खुली । और उसमें अपने चेहरे के एकदम करीब विराट की गर्म सांसे महसूस की।

" गुड मॉर्निंग माय हैंडसम हब्बी.... अगर ये ख्वाब है तो हमारे लाइफ की सब से खूबसूरत ख्वाब है और हम बिल्कुल नहीं चाहेंगे ये टूटे।".... तपस्या विराट के होठों के करीब बढ़ कर बहकी हुई निंदियती आवाज में बोली। और इससे पहले के उसके होंठ विराट के होठों को छु पाते विराट ने उसके होठों पर अपनी उंगलियां रख दी। तपस्या मुंह बना कर उसे देखने लगी।

"जाहां प्यार होता है जलन भी वहीं होती है ये कहावत अपने सुनी नहीं !! इसीलिए मुझे उसे छिपकली से जलन होती है ये सोचकर के कभी आप उसके साथ थे।"... तपस्या अपने होठों पर रख विराट की उंगलियों को अपनी उंगलियों में उलझा कर मुंह फुला कर बोली।

"और जहां प्यार होता है वहां शक नहीं होता ये कहावत आपने तो जैसे सुनी ही नहीं होगी।... जब उस छिपकली के साथ था तब था सब कुछ आपको बता दिया  था......लेकिन जिस दिन एयरपोर्ट पर आपसे  टकराया उसके बाद से दिल दिमाग ज़हन सब में बस आप ही है प्रिंसेस अब ये बात आप माने या ना माने या आप पर डिपेंड करता है।"कहकर विराट बेड से उठने लगा तपस्या ने उसकी शर्ट खींची और अपने सीने से सटा दिया।

"इतने ही नाराज है तो फिर रात को यहां पर आए क्यों और मुझे अपनी बाहों में भरकर सोए  भी क्यों??" तपस्या मासूमियत से भरी नाराजगी से पूछी।

"क्योंकि मैं जितना भी नाराज हो जाऊं ....आपसे दूर नहीं   रहा जाता... मेरे बस में ही नहीं है।"... विराट ने उसके माथे को चुनकर कहा तो तपस्या के होठों पर  खिली हुई मुस्कान आ गई लेकिन दूसरे ही पल विराट की बात सुनकर वो हंसी एकदम से सिमट गई थी।

"हमारे दरमियां ये पल न जाने कब गुम हो जाए प्रिंसेस इसलिए मैं नहीं चाहता कि आप इन पलों को शक या नाराजगी से बिताए ।"विराट ने  धीमी आवाज में कहा और एक टक गहराई से तपस्या को देखता रहा । तपस्या उलझन भरी नजरों से उसे देखने लगी ।"इसका क्या मतलब ???"

"Shhhh....  डोंट से एनीथिंग.... जस्ट फील मी..."तपस्या नाराजगी से कुछ बोल ही रही थी कि विराट ने उसके होठों पर उंगली रखी और अपने होंठ उसके गर्दन पर रख गहराई से चूम ने लगा।


कहानी आगे जारी है ❤️ ❤️