सब लोग इसी उलजन मे थे की अब आगे क्या किया जाये | बिना दुल्हन के बारात वापस जा नहीं सकती थी और मुस्कान शादी छोड़कर भाग गए थी |
" मुस्कान नहीं तो कोई और सही, किसी दूसरी लड़की को मुस्कान की जगह मंडप मे बैठना होगा, जिससे शादी भी पूरी हो जाये और बदनामी भी ना हो " अविनाश जी ने अपना फैसला सुनाया |
" अरे पर ऐसे कैसे किसी भी लड़की को हम अपनी बहु बना सकते है, और आखिर ये हमारे बेटे की जिंदगी का सवाल है हम ऐसे ही उसकी शादी किसी भी लड़की से नहीं करवा सकते, और जब उसे पता चलेगा की उसकी शादी मुस्कान से नहीं किसी और से........... " राधा जी आरव के लिए अपनी फ़िक्र जताते हुए कह रही थी
"उसे अभी कोई कुछ नहीं बताएगा "
अविनाश जी की बात सुनकर सब उनकी तरफ देखने लगे, अविनाश जी ने आगे कहना शुरू किया
"वो अभी प्यार मे है मुस्कान से मिला धोखा बर्दास्त नहीं कर पायेगा लेकिन हमें दिमाग़ से काम लेना होगा और हम उसकी शादी कोई ऐसी वैसी लड़की से नहीं करवाएंगे हमें कोई अच्छी लड़की देखनी होंगी, और वो भी जल्द से जल्द " अविनाश जी ने अपनी बात पूरी करी
" इतने कम वख्त मे अच्छी लड़की कहाँ मिलेगी हमें, है भगवान ये कैसा धर्मसंकट है??? " राधा जी ने अपनी परेशानी बताई | उनकी बात तो सच ही थी शादी का मुहर्त निकला जा रहा था सारे मेहमान आ चुके थे उधर मंडप मे आरव अपनी दुल्हन का इंतज़ार करते हुए सारी रस्मे कर रहा था, ऐसे मे किसी लड़की को ढूंढना और शादी के लिए कहना बहोत ज़्यादा मुस्केल था |
मनीष जी जो कबसे चुपचाप अविनाश और राधा जी की बाते सुन रहे थे उन्हें उनकी बातो से पिया का ख्याल आया | वो कपूर फॅमिली को अच्छी तरह से जानते थे अभी जो परिस्थिति पैदा हुई है उस हिसाब से उन्हें पिया के लिए ये रिश्ता ठीक लगा | ऐसा नहीं था की वो बस अपनी इज्जत बचाने के लिए पिया की बली दे रहे थे, वो जानते थे की कपूर फॅमिली बहोत अच्छी है उनके परिवार के सभी लोग अच्छे दिल वाले है पिया इनके साथ उनके घर मे बहोत खुश रहेगी |
सारी बाते सोचकर मनीष जी ने अविनाश जी के आगे अपना सुझाव बताया, मनीष जी की पूरी बात सुनकर अविनाश और राधा जी पिया को याद करने लगे |
वैसे तो वो लोग पिया को ज़्यादा जानते नहीं थे पर दो तीन बार उनकी पिया से मुलाक़ात हो गए थी और उन्हें वो बहोत प्यारी लगी | अविनाश जी के मुँह से पिया के रिश्ते की बात सुनकर वो लोग सोच मे पड़ गए |
उन्हें सोचता हुआ देख मनीष जी ने कहा " देखिये mr. Kapoor मे जनता हु मेरी बेटी की वजह से आज ये सब हो रहा है, लेकिन यकीन मानिए पिया भी मेरी बेटी जैसी ही है जबसे भाईसाहब की मौत हुई है वो मेरे साथ रही है मेने उसे मुस्कान के जितना ही प्यार दिया है, मेरी एक बेटी ने आपको निराश किया है लेकिन मेरी ये दूसरी बेटी आपको कभी निराश नहीं करेंगी मुझे अपनी बच्ची पर पूरा भरोसा है, अब आगे आप लोग जो भी ठीक समझें "
मनीष जी की पूरी बात सुनकर पिया के लिए अविनाश जी और राधा जी का विश्वास बढ़ गया |
" हमने पिया को देखा है, एक दो बार मुलाक़ात भी हुई है उससे, बहोत प्यारी बच्ची है, सबका ख्याल रखती है, आरव के लिए इससे अच्छी लड़की हमें और कही नहीं मिलेगी | तुम क्या कहती हो राधा " अविनाश जी ने अपनी बात रखते हुए कहा
" पिया मुझे भी पसंद है, लेकिन क्या वो आरव से शादी के लिए मानेगी??? और आरव....... जब आरव ये सब जानेगा तो वो क्या करेगा?? उसका गुस्सा आप जानते है ना " राधा जी परेशान होते हुए बोली
" आरव की फ़िक्र आप ना करें, हम उसे समझायेगे, वो हमारी बात नहीं टालेगा | पर इस वख्त हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है, हमें पिया से बात करनी होंगी " अविनाश जी ने कहा
पिया उन्हें पसंद है ये बात सुनकर मनीष जी बहोत खुश हुए, लेकिन कविता जी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वो कबसे बस चुपचाप सबकी बाते सुन रही थी | आखिर क्या कहती वो, गलती उनकी लाड़ली बेटी की जो थी |
तभी पिया कमरे के अंदर आयी अंदर सबको देखकर वो वही खड़ी रही |
" क्या हुआ चाचा जी आप सब इतने परेशान क्यों है?? निचे सब लोग इंतज़ार कर रहे है आपका " रूम मे मुस्कान को ना देख और वहा सबको परेशान खड़ा देखकर पिया को अंदाजा हो गया की कुछ तो हुआ है
मनीष जी ने पिया को सारी बाते बताई की मुस्कान शादी छोड़कर चली गए | जब पिया ने बात सुनी तो वो भी परेशान हो गए उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो इस वख्त क्या कहे |
मनीष जी पिया के पास गए और उसका हाथ अपने हाथ मे लेकर बोले " पिया बेटा, आज मे तुमसे एक विनंती करना चाहता हु"
पिया तुरंत कहने लगी " ये क्या कह रहे हो आप चाचा जी, आपने मुझे बड़ा किया अपनी बेटी के जितना प्यार दिया, आप ऐसे विनंती जैसे शब्दो का प्रयोग ना करें, आप बस हुक्म कीजिये "
" क्या तुम आज मुस्कान की जगह मंडप मे बैठकर ये शादी करोगी?? " अविनाश जी लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोले
उनकी बात सुनकर पिया को बहोत बड़ा ज़टका लगा वो हाथ छुड़ाकर 2 कदम पीछे हो गए | उसका मन किया की वो सीधे मना कर दे और यहाँ से चली जाये आखिर ऐसे कैसे वो एक अजनबी से शादी कर सकती थी लेकिन अपने चाचा जी के लिए प्यार की वजह से वो वही खड़ी रही लेकिन कुछ बोला नही | जब मनीष जी ने पिया को ऐसे ही शांत खड़े देखा तो फिर पूछा, " क्या हुआ पिया?? क्या तुम किसी और को पसंद करती हो?? देखो बेटा अगर ऐसी बात है तो तुम हमें बता सकती हो और मना कर सकती हो कोई जोर जबरजस्ती नहीं है "
" नहीं चाचा जी, ऐसी बात नहीं है मे किसीको पसंद नहीं करती, लेकिन...... मे....... "
" तुम्हारे मन मे जो भी है बेज़ीज़क बोलो बेटा तुम्हारी मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं होगा " राधा जी ने पिया की ज़िज़क काम करने के लिए कहा
" मे कह रही थी की ऐसे कैसे मे हा कह दू.... मे तो लड़के को जानती तक नहीं, और वो..... वो तो मुस्कान से प्यार करता हे ना तो वो मुझसे शादी क्यों करेगा?? " पिया ने अपनी बात कही
" हम उसे ये सारी बाते शादी के बाद बताने वाले है, क्यूंकि इस वख्त उसे ये सब बताना ठीक नहीं है वो टूट जायेगा " अविनाश जी ने पिया की बात का जवाब दिया
" क्या.... इसका मतलब यहाँ जो हुआ उस बात का उन्हें कोई अंदाजा तक नहीं है, ये तो गलत हे ना उनका दिल टूट जायेगा मे उनके साथ ऐसा नहीं कर सकती " पिया ने आरव की फ़िक्र करते हुए कहा
क्या पिया इस शादी के लिए मानेगी??? क्या उसे ये करना चाहिए???