This is something more..... in Hindi Women Focused by Sarika Sangani books and stories PDF | ये जो कुछ ज्यादा.....

Featured Books
Categories
Share

ये जो कुछ ज्यादा.....

"अति सर्वत्र वर्जिते " आज कुछ ऐसी  औरतों की बात करनी है जो करती है कुछ ज्यादा। हांजी अपनी पहुंच से, अपनी मर्यादाओं से, अपनी क्षमताओं से कुछ ज्यादा। और फिर पछताती है, परेशान होती है, दुखी होती है वह भी कुछ ज्यादा।

कभी कभी जिंदगी हमे  बहुत उलझी सी लगती है। मन में हर तरह की उधेड़बुन चलती है। सब कुछ सही होते हुए भी कुछ सही नहीं लगता। रह रह कर एक ही बात ज़हन में आती है कि मैने किसीका क्या बिगाड़ा था जो यह मेरे साथ हुआ। मैं तो सब अच्छा कर रही थी फिर मेरे साथ इतना बुरा क्यों हुआ। फिर यह सिलसिला चलता रहता है और हम कभी किस्मत को दोष देते है तो कभी भगवान को कोसते है। कभी सारे हालातों के जिम्मेदार अपने करीबियों को ठहराते है। पर खुद पर  कभी ध्यान नहीं देते। खुद को कभी कसूरवार नहीं ठहराते। शायद मुझेही  थोड़ा बदलने की जरूरत है ऐसा खयाल  तो दिल को छूता भी नहीं।

ऐसाही कुछ मुझे हरबार महसूस हुआ है। और अब जब सहनशक्ति के सारे बांध टूट गए। हालात समझ के बाहर हो गए । तब थकहारकर मैने इस स्थिति की तह तक जाने का फैसला किया। मैने यह जानने की कोशिश की के आखिर ऐसा मेरे साथ क्यों होता है। और आखिरकार यही पाया के जिम्मेदार तो मैं ही हु क्योंकि कुछ ज्यादा जो हूं।

तो आइए जानते है कुछ ऐसी सखियों के बारे में जो करती है कुछ ज्यादा।

कभी किसी चीज चीड़ करती  हुई महिला को अगर आप ध्यान से देखो तो वह कुछ ज्यादा ही काम करती हुई नजर आएगी।या फिर परफेक्शन की इतनी आग्रही होगी है के उन्हें किसी और का छोड़ो कभी कभी खुदका भी काम पसंद नहीं आता। फिर ये खुद ही से हारकर चीड़ चिड़ी हो जाती है।

कभी कोई स्त्री कुछ ज्यादा ही प्यार कर बैठती है।प्रेम में इतना समर्पण कर देती है के प्रेमवश हो कर खुद को ही भुला देती है। अब जिसे खुद की सुध नहीं वह दूसरे को कब तक संभाल सकेगी। आपका प्यार अगर आपके साथी के लिए घुटन बन जाए तो वह ज्यादा देर नहीं टिकता। अंत में ऐसा प्यार बिखर जाता है। और ये कुछ ज्यादा प्यार करनेवाली औरतें अकेली पड़ जाती है।

कुछ औरतें बातूनी होती है, इतना ज्यादा बोलती है के अपने सारे राज़ खुद ही खोल देती है। ऐसी खुली किताब बन  जाती है,जिसे हर कोई पढ़ने लगता है।फिर यह अपने ही बोल वचनों से परेशान हो जाती है, किसी और का तो सुनती नहीं इसीलिए किसी और को समझ भी नहीं पाती। इसी तरह ज्यादा चुप रहनेवाली लड़कियां भी प्रायः परेशान रहती है।घुट घुट कर जीती है। अन्याय बर्दाश्त करती है , अंदरसे खोखली हो रही होती  है।पर चुप रहती है कुछ ज्यादा।

ज्यादा हसनेवाली लड़कियों को लोग आज़ाद समझ लेते है तो ज्यादा रोनेवालियों  को कमजोर। ज्यादा पढ़ीलिखी सबको घमंडी लगती है । तो ज्यादा मधुर बोलनेवाली चापलूस।और जब यह लेबल लग जाते हैं तब बिन कहे इन लेबलों की मुसीबत भी झेलनी पड़ती है।

कुछ औरतें तो दिल की इतनी साफ होती है कि हर किसी पे कुछ ज्यादा ही भरोसा कर बैठती है। कभी कभी अपना सब कुछ गंवाकर ही इन्हें समझ आती है।

इसीलिए हमे हमारी बोर्डर लाइन पता होनी चाहिए। ऐसी एक नहीं हजार बातें है जहां हम कुछ ज्यादा कर बैठती है। फिर पछतावे के सिवा कुछ नहीं बचता । पर ध्यान रहे  एक हद के बाद न कुछ सहना है, न चुप रहना है। और नाहीं  एक हद के बाद कुछ बोलना है। प्यार भी उतनाही करे जितना दिल टूटने के बाद आपसे सहन हो।

खुदको समय दे ।अपने आप में  खुश रहना सीखे।अपना खुदका मूल्य समझे।और खुदका ख्याल रखे जितना रखती है उससे कुछ ज्यादा।