अग्नि सम्राट ध्रुव - 1 in Hindi Adventure Stories by Novel Yoddha books and stories PDF | अग्नि सम्राट ध्रुव - 1

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अग्नि सम्राट ध्रुव - 1

ओहान साम्राज्य के मैसेडोरिया शहेर,

जब दो शक्तिदेबो के बीच लड़ाई खत्म हुआ, तब ध्रुव, ईरा और हिनीसा ने मैसेडोरिया शहेर में एक शानदार शादी का आयोजन किया। पूरे मार्कस के लोगों ने उनकी प्रेम कहानी अपनी आँखों से देखी। ये शादी जितना भव्य था, उतना ही रोमांटिक भी।

इसके बाद अफवाहें उड़ीं कि ध्रुव अपनी दोनों पत्नियों के साथ मार्कस की यात्रा पर निकल पड़ा हे और वो लोगों की नज़रों से ओझल हो गए हे। लेकिन कुछ गिने-चुने लोग ही जानते थे कि ध्रुव अकेले यात्रा कर रहा था, जबकि ईरा और हिनीसा शक्ति देब रैंक हासिल करने के लिए साधना में लीन थीं।

इस लड़ाई के बाद ओहान साम्राज्य का मैसेडोरिया शहेर सबसे बड़ाशहेर बन गया, और शौर्य दल ने भी तेज़ी से विकास किया।

लेकिन मैसेडोरिया की पहाड़ियो की चोटी पर, काले कपड़ो में लिपटा एक लड़का घास पर लेटा था। उसके होंठों के बीच एक तिनका था, जिसे वो हल्के से चबाते हुए उसके हल्के कड़वे स्वाद को महसूस कर रहा था।

"शायद यहीं से सब कुछ शुरू हुआ था, जब मैंने पहली बार आचार्य से मुलाकात की थी।" ध्रुव ने हल्की मुस्कान के साथ खुद से कहा।

ये लड़का कोई और नहीं बल्कि मार्कस का सबसे शक्तिशाली योद्धा था—वही जिसने प्रलयराज को हराकर मार्कस को खत्म होने से बचाया था।

समय बीत चुका था, और उस ऐतिहासिक युद्ध को कई साल हो गए थे।

जब ध्रुव ने प्रलयराज को हराया, तो पूरे मार्कस ने इस जीत का भव्य उत्सव मनाया। पहला उत्सव इस बात का था कि मार्कस मे अब भी ताकतवर योद्धाए तैयार होरहे थे, और दूसरा इस बात का की शक्ति देब रैंक का योद्धा प्रकट हुआ था!


"ये ऊर्जा? अब ये लगभग पूरी हो चुकी है... दशकों का वक्त सच में पलक झपकते ही बीत गया।" ध्रुव घास से उठकर खड़ा हुआ और सामने धुंदलाते हुए जगह को देखा।

अचानक, आयम में दरारें पड़ीं और एक खूबसूरत लड़की सामने प्रकट हुई। वो सुंदर लड़की मुस्कुराई और कोमल आवाज़ मे बोली ध्रुभ, 

एक प्यारी और मधुर आवाज़ गूंज उठी।

"क्या तुम कामियब हो गई ध्रुव ने मुस्कुराते हुए पूछा।

"हाँ! ये सब तुम्हारे द्वारा खोले गए रहस्यमयी आयामी दरवाज़े और वहाँ के शुद्ध ऊर्जा के कारण मुमकिन हो पाया। वरना मार्कस पर शायद ही कोई शक्ति देब रैंक तक पहुँच पाता।" ईरा ने अपनी चाँद जैसी चमकती आँखों से ध्रुव को देखा।

इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को कसकर गले लगा लिया। ध्रुव ने ईरा की कमर हल्के से थामते हुए कहा, "जब तुम्हारे पिता ने तुम्हें मेरे परिवार में भेजा था, तब मैंने सोचा भी नहीं था कि तुम हमेशा के लिए मेरे जीवन का हिस्सा बन जाओगी।"

"ध्रुभ तुम हमेशा से मेरे हीरो रहे हो, ईरा ने मैसेडोरिया की ओर देखते हुए कहा।

जैसे ही दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे, ध्रुव ने अचानक ईरा के कोमल होंठों की ओर झुकते हुए उसे चूम लिया। ईरा कुछ पल के लिए चौंक गई, लेकिन फिर उसने कोई विरोध नहीं किया। अचानक किसीकी ख़ासने की आवाज़ आई,

"क्या हमने गलत समय पर आकर तुम्हारी रोमांस में खलल डाल दिया?" दो मध्यम आयु के आदमी आयाम से बाहर निकले और हंसते हुए बोले।

"पिताजी, बुज़ुर्ग कनिष्क!" ध्रुव ने हल्की मुस्कान के साथ उनका अभिवादन किया।

"अरे कोई बात नहीं। ईरा अब तुम्हारी पत्नी है, और ये मेरे लिए गर्व की बात है।"

तभी आयाम में दोबारा हलचल हुई और नौ रंगों की रोशनी तेज़ी से चमकी। देखते ही देखते एक और बेहद आकर्षक लड़की सामने प्रकट हुई—हिनीसा!

"आखिरकार, इतने सालो के बाद मैंने भी सफलता हासिल कर ली।" हिनीसा ने मुस्कुराते हुए कहा।

"क्या हमारी बेटी ध्रुभीका ठीक है?" हिनीसा ने तुरंत ध्रुव से पूछा।

"हाँ वो ठीक है, आचार्य उसे ट्रेनिंग दे रहे हैं," ध्रुव ने जबाब दिया।

इसके बाद सभी लोग मैसेडोरिया की ओर चल पड़े।
"ध्रुव, तुम्हें अब जाना होगा!"

ध्रुव के पिता, जो फिरसे शौर्य दल के लीडर बन गए थे, उन्होंने ध्रुभ के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, "ये दुनिया तुम्हारे लिए बेहद छोटा है, तुम्हें आगे बढ़ना चाहिए मेरे बेटे।"

इसके बाद पाँचों शक्ति देब योद्धा मार्कस के उसी जगह पौहचे जहाँ सालो पैहले प्रलयराज और ध्रुभ के बीच जंग हुआ था। और दोनो शक्तिदेबो की ताकत के कारण वहाँ एक पहाड़ उभर आया था, जिसे लोग देब पहाड़ कैहके पुकारने लगे थे, जो आज भी एक रहस्यमयी स्थान था।

ध्रुव और उसके साथी पर्वत की चोटी पर खड़े हुए और उन्होंने आसमान में एक काले रंग की सुरंग को देखा। ये अँधेरी सुरंग जैसे किसी दूसरे दुनिया की ओर खुल रहा था।

ध्रुव ने चारों की ओर एक-एक नज़र डाली और गंभीर आवाज़ में कहा, "हम सबको ये आत्मा पत्थर रखना होगा, ताकि अगर हम बिछड़ जाए तो हमें एक-दूसरे का पता लगा सके।"

इसके बाद ध्रुव ने हिनीसा और ईरा का हाथ थामा और उछलकर उस काले अंतरिक्ष दरवाज़े में प्रवेश कर गया। उनके पीछे कनिष्क और महाबश भी उसी दरवाज़े पर चले गए।


"अग्नि सम्राट ध्रुव की जय!"

पूरे मार्कस पर ये जयकारे गूँज उठी।

यही अंत था और यही एक नए सफर की शुरुआत भी था,

"दूसरी दुनिया ध्रुव शौर्य आ रहा है!"