समय के परे: एक विज्ञान कथा in Hindi Science by Deepa shimpi books and stories PDF | समय के परे: एक विज्ञान कथा

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समय के परे: एक विज्ञान कथा

समय के परे: एक विज्ञान कथा

साल 2075 था। मनुष्य ने तकनीकी प्रगति के नए आयाम छू लिए थे। धरती से परे बसी "नियो-टेरा" कॉलोनी में जीवन स्थापित हो चुका था। लेकिन एक दिन, डॉ. अरुण शर्मा, जो समय यात्रा पर वर्षों से काम कर रहे थे, ने एक क्रांतिकारी खोज की घोषणा की।

"हमने समय में झांकने का दरवाजा खोल लिया है। न केवल अतीत, बल्कि भविष्य में भी जाना अब संभव है।" उनके शब्दों ने वैज्ञानिक समुदाय को हिला दिया।

डॉ. शर्मा की टीम ने "क्रोनो पोर्टल" नामक एक मशीन बनाई थी। यह एक विशाल, ऊर्जा से चमकती हुई अंगूठी थी, जो समय के प्रवाह को तोड़कर यात्रा करने का साधन बनाती थी। पहले परीक्षण में, एक रोबोट को 50 साल आगे भेजा गया। जब वह लौटा, तो उसके अंदर भविष्य की रिकॉर्डिंग मौजूद थी।

लेकिन असली चुनौती थी इंसान को भेजना। डॉ. शर्मा स्वयं इस यात्रा के लिए तैयार हुए। "अगर यह कामयाब हुआ, तो हम अपने अतीत की गलतियाँ सुधार सकते हैं और भविष्य की विपत्तियों को रोक सकते हैं।"

क्रोनो पोर्टल सक्रिय हुआ। तेज़ रोशनी के बीच डॉ. शर्मा गायब हो गए। वह 2125 में पहुंचे। वहाँ का दृश्य चौंकाने वाला था। पूरी धरती उजाड़ थी, कोई हरियाली नहीं, सिर्फ धूल और राख। उन्होंने पाया कि मानवता का विनाश एक बड़े युद्ध और पर्यावरण संकट से हुआ था।

वह वापस लौटे और अपनी टीम को सबकुछ बताया। "हमने जो देखा, वह डरावना है। लेकिन यह हमारी चेतावनी है। हमें अपने वर्तमान को बदलना होगा ताकि यह भविष्य न बने।"

इस खोज ने पूरी दुनिया को हिला दिया। सरकारों ने युद्ध रोकने के लिए कदम उठाए, पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त नीतियाँ बनीं। डॉ. शर्मा और उनकी टीम ने दिखा दिया कि विज्ञान केवल प्रगति का साधन नहीं, बल्कि मानवता का रक्षक भी हो सकता है।

लेकिन एक सवाल अब भी बना हुआ था—क्या हम वाकई अपना भविष्य बदल सकते हैं, या यह नियति पहले से तय है? यह सोच विज्ञान और दर्शन दोनों के लिए एक नया अध्याय लिखने वाली थी।समय के परे: एक विज्ञान कथा

डॉ. अरुण शर्मा के द्वारा बनाई गई "क्रोनो पोर्टल" ने समय यात्रा की अवधारणा को एक नई दिशा दी थी। जब उन्होंने 2125 में मानवता के विनाश के दृश्य देखे, तो यह उनके लिए केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी बन गई थी। उन्होंने अपनी टीम को बताया, "हमने भविष्य में जो देखा, वह केवल एक संभावना नहीं है, बल्कि एक निश्चित परिणाम हो सकता है यदि हम अपने कदम नहीं बदलते।"

डॉ. शर्मा और उनकी टीम ने सरकारों के साथ मिलकर तुरंत कार्यवाही की। सबसे पहले, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए तत्काल कड़े कदम उठाए। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नई तकनीकें विकसित की गईं। ऊर्जा उत्पादन के लिए नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग बढ़ाया गया। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए विशाल जलवायु नियंत्रण परियोजनाएँ शुरू की गईं।

लेकिन सबसे बड़ा बदलाव आया युद्धों के संदर्भ में। डॉ. शर्मा ने जो विनाश देखा था, वह एक बड़े युद्ध के परिणामस्वरूप था। इस युद्ध ने पूरी मानवता को विभाजित कर दिया था, और संपूर्ण पृथ्वी पर उथल-पुथल मचाई थी। डॉ. शर्मा की टीम ने युद्धों के खतरों को नकारते हुए शांति बनाए रखने के उपायों पर काम करना शुरू किया। देशों ने एकजुट होकर 'विश्व शांति संधि' पर हस्ताक्षर किए, जो भविष्य में युद्धों को रोकने का एक निर्णायक कदम था।

समय यात्रा के बाद की एक और जटिलता यह थी कि जब डॉ. शर्मा ने भविष्य में क्या देखा था, तो कुछ अप्रत्याशित घटनाएँ भी सामने आईं। हर बदलाव का अपना असर था—कुछ सकारात्मक, कुछ नकारात्मक। यह सिद्धांत कि "हर क्रिया का एक प्रतिक्रिया होती है," अब वास्तविक रूप से सामने आ रहा था। क्या वे वास्तव में भविष्य को सुधार पाए थे, या केवल उसकी दिशा बदल दी थी?

यह सवाल डॉ. शर्मा के लिए अब एक निरंतर पहेली बन गया था। क्या उन्होंने समय के साथ सही खेल खेला था, या फिर अपनी उम्मीदों में गलतियाँ की थीं? समय यात्रा के परिणामों को समझने के लिए उन्हें अभी और अधिक अनुभव की आवश्यकता थी।

वह जान गए थे कि समय में एक कदम उठाना केवल एक वैज्ञानिक चमत्कार नहीं था, बल्कि यह एक गहरी जिम्मेदारी का काम था—जिसे सही तरह से निभाने के लिए पूरी मानवता को एक साथ आना होगा।
दीपांजलि
दीपाबेन शिम्पी गुजरात