" तेरे लिए दो रास्ते है दक्ष। एक जो मैंने तुझे पहले बताया था। दूसरा तुझे दोबारा परी साधना करनी होगी और परी को अपने के जाल में फसाना होगा और इस बार तुझे उसके साथ संभोग करना होगा। दक्षराज हैरान होकर कहता है-->" क्या कहा बाबा आपने संभोग ? वो भी परि के साथ। दक्षराज बाबा के बात से हैरान था क्योंकी बाबा ने अभी कहा परि के साथ संभोग करने से श्राप लगा है और बाबा अब अचानक से परि के संभोग करने को कह रहे है । अधोरी दक्षराज से कहता">

श्रापित एक प्रेम कहानी - 33 CHIRANJIT TEWARY द्वारा Spiritual Stories में हिंदी पीडीएफ

Shrapit ek Prem Kahaani by CHIRANJIT TEWARY in Hindi Novels
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थ...