अधूरी धुन

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शहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक छोटा सा कोना ऐसा था, जहाँ वक्त जैसे ठहर सा जाता था। 'रिदम कैफे'—पुरानी ईंटों की दीवारें, पीली मद्धम रोशनी और हवा में तैरती ताज़ा पिसी हुई कॉफी की खुशबू। यहाँ आने वाले लोग अक्सर अपनी थकान छोड़ने आते थे, लेकिन आर्यन यहाँ अपनी रूह को ढूंढने आता था। आर्यन पेशे से एक सफल आर्किटेक्ट था। वह कंक्रीट की इमारतों में जान फूंकने का हुनर रखता था, लेकिन उसका अपना दिल संगीत के तारों में बसता था। हर शाम, ऑफिस की फाइलों और ब्लू-प्रिंट्स से पीछा छुड़ाकर वह अपनी गिटार केस उठाए इस कैफे के एक अंधेरे कोने वाली मेज पर जा बैठता था। उसके लिए संगीत केवल शौक नहीं, बल्कि एक प्रार्थना थी।

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अधूरी धुन - 1

भाग 1: 'रिदम कैफे' और वो अधूरी शामशहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक छोटा सा कोना ऐसा जहाँ वक्त जैसे ठहर सा जाता था। 'रिदम कैफे'—पुरानी ईंटों की दीवारें, पीली मद्धम रोशनी और हवा में तैरती ताज़ा पिसी हुई कॉफी की खुशबू। यहाँ आने वाले लोग अक्सर अपनी थकान छोड़ने आते थे, लेकिन आर्यन यहाँ अपनी रूह को ढूंढने आता था।आर्यन पेशे से एक सफल आर्किटेक्ट था। वह कंक्रीट की इमारतों में जान फूंकने का हुनर रखता था, लेकिन उसका अपना दिल संगीत के तारों में बसता था। हर शाम, ऑफिस की फाइलों और ब्लू-प्रिंट्स से पीछा ...Read More

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अधूरी धुन - 2

भाग 2: सुरों और शब्दों का सफर' रिदम कैफे' की उस बारिश वाली शाम के बाद शहर का बदल सा गया था। आर्यन, जो अपनी इमारतों के नक्शों में खोया रहता था, अब अपनी घड़ी की सुइयों को शाम के पाँच बजने का इंतज़ार करते हुए देखता था। इशानी के उन चंद शब्दों ने आर्यन की दुनिया की खामोशी को एक ऐसी हलचल में बदल दिया था, जिसे वह खुद भी पूरी तरह समझ नहीं पा रहा था।अगले कुछ हफ़्तों तक, उनकी मुलाकातें एक नियम सी बन गईं। हर शाम, जब सूरज ढलने लगता और आसमान में गुलाबी-नारंगी ...Read More

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अधूरी धुन - 3

भाग 3: बिछड़न की कसककहते हैं कि जब खुशियाँ अपनी चरम सीमा पर होती हैं, तभी वक्त का मिजाज बदल जाता है। आर्यन और इशानी की दुनिया 'रिदम कैफे' के उस कोने और शहर की पुरानी गलियों तक सिमट गई थी। उनके लिए दुनिया का मतलब एक-दूसरे की मौजूदगी थी। लेकिन उस रात आर्यन के फोन पर आए एक संदेश ने सब कुछ बदल दिया।वह संदेश आर्यन के पिता का था। उनकी तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई थी और उन्हें तुरंत शहर से दूर अपने पैतृक गाँव वापस लौटना था। पिता की जिम्मेदारी और करियर का एक बड़ा फैसला ...Read More

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अधूरी धुन - 4

भाग 4: मुकम्मल सुर और शाश्वत प्रेमदो साल के लंबे अंतराल के बाद, जब आर्यन ने 'रिदम कैफे' के लकड़ी के दरवाजे को धक्का दिया, तो उसके दिल की धड़कनें किसी अनकही धुन की तरह तेज़ थीं। कैफे की वही पुरानी खुशबू—भुनी हुई कॉफी और पुरानी किताबों की महक—ने उसे घेर लिया। उसकी नज़रें सीधे उस कोने वाली मेज की ओर गईं, जहाँ कभी इशानी बैठा करती थी।लेकिन वह मेज खाली थी। वहाँ सिर्फ एक पुरानी फूलदान में कुछ सूखे गुलाब रखे थे।आर्यन का दिल बैठ गया। उसे लगा कि शायद वह बहुत देर कर चुका है। उसने काउंटर ...Read More