Adhuri Dhoon - 3 in Hindi Love Stories by Avinash books and stories PDF | अधूरी धुन - 3

The Author
Featured Books
Categories
Share

अधूरी धुन - 3

भाग 3: बिछड़न की कसक


कहते हैं कि जब खुशियाँ अपनी चरम सीमा पर होती हैं, तभी वक्त का मिजाज अक्सर बदल जाता है। आर्यन और इशानी की दुनिया 'रिदम कैफे' के उस कोने और शहर की पुरानी गलियों तक सिमट गई थी। उनके लिए दुनिया का मतलब एक-दूसरे की मौजूदगी थी। लेकिन उस रात आर्यन के फोन पर आए एक संदेश ने सब कुछ बदल दिया।

वह संदेश आर्यन के पिता का था। उनकी तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई थी और उन्हें तुरंत शहर से दूर अपने पैतृक गाँव वापस लौटना था। पिता की जिम्मेदारी और करियर का एक बड़ा फैसला अब आर्यन के सामने खड़ा था। उसे अपनी कंपनी के एक बड़े प्रोजेक्ट के सिलसिले में दो साल के लिए विदेश जाना था—एक ऐसा अवसर जो उसके करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता था, लेकिन इसके लिए उसे इशानी और अपने संगीत को पीछे छोड़ना पड़ता।
अगली शाम जब वह इशानी से कैफे में मिला, तो उसके चेहरे पर वो पुरानी चमक नहीं थी। इशानी ने एक ही नज़र में भाँप लिया कि कुछ बहुत गलत हुआ है।
"आर्यन, तुम्हारी खामोशियाँ आज शोर कर रही हैं। क्या बात है?" उसने उसकी मेज पर हाथ रखते हुए पूछा।
आर्यन ने उसकी आँखों में देखने की हिम्मत जुटाई और सब कुछ बता दिया—पिता की बीमारी और विदेश जाने का प्रस्ताव। "इशानी, मैं नहीं जाना चाहता। मुझे लगता है कि अगर मैं गया, तो यह धुन फिर से अधूरी रह जाएगी। मैं तुम्हें खोने से डरता हूँ।"

इशानी के चेहरे पर एक पल के लिए उदासी की लहर दौड़ी, लेकिन अगले ही पल उसने अपनी भावनाओं को संभाल लिया। वह जानती थी कि आर्यन के सपने और उसके परिवार की ज़िम्मेदारी कितनी बड़ी है। उसने एक गहरी सांस ली और कहा, "आर्यन, प्यार किसी को बांधने का नाम नहीं है। अगर मेरा प्यार तुम्हें तुम्हारे फर्ज से रोक दे, तो वह प्यार कैसा? तुम्हें जाना होगा।"
"लेकिन दो साल, इशानी! दो साल बहुत लंबा वक्त होता है," आर्यन की आवाज़ में बेबसी थी।
इशानी ने अपनी डायरी से एक कोरा पन्ना फाड़ा और उस पर अपना पता और कुछ पंक्तियाँ लिखीं। "हम एक-दूसरे को खत लिखेंगे। जब भी तुम्हें मेरी कमी महसूस हो, बस यह याद रखना कि हम दोनों एक ही चाँद के नीचे हैं। तुम्हारी धुन और मेरे शब्द कभी जुदा नहीं हो सकते।"
उनके बिछड़ने का दिन आ गया। रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ थी, लेकिन उन दोनों के लिए जैसे दुनिया ठहर गई थी। आर्यन ने अपना गिटार केस कंधे पर लटका रखा था। उसने इशानी को आखिरी बार गले लगाया। उस आलिंगन में हज़ारों बातें थीं जो वे कह नहीं पाए।

"मुझसे वादा करो आर्यन," इशानी ने अपनी भीगी आँखों से कहा, "तुम वहां जाकर अपनी धुन नहीं छोड़ोगे। चाहे कितनी भी भीड़ हो, अपने संगीत को ज़िंदा रखना।"
आर्यन ने सिर हिलाया, उसकी आँखों से एक आंसू टपक कर इशानी के हाथ पर गिरा। ट्रेन की सीटी बजी और वह एक झटके के साथ आगे बढ़ गई। आर्यन खिड़की से तब तक इशानी को देखता रहा जब तक कि उसका नीला कुर्ता भीड़ में ओझल नहीं हो गया।

शुरुआती कुछ महीने खतों और फोन कॉल्स के सहारे बीत गए। आर्यन विदेश में दिन-रात काम करता, लेकिन हर शाम वह अपनी बालकनी में बैठकर इशानी के खत पढ़ता। उन खतों में इशानी शहर की छोटी-छोटी बातें लिखती—कैफे का वो कोना अब भी खाली रहता है, बारिश अब वैसी नहीं लगती, और कैसे वह आज भी उसकी पुरानी धुन को गुनगुनाती है।
लेकिन धीरे-धीरे वक्त अपना खेल दिखाने लगा। आर्यन के काम का बोझ बढ़ता गया और उधर इशानी के घर पर उसके परिवार ने उसकी शादी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। इशानी ने बहुत कोशिश की कि वह आर्यन को अपनी परेशानियों के बारे में न बताए ताकि वह अपने काम पर ध्यान दे सके, लेकिन खतों की लंबाई छोटी होती गई और फोन कॉल्स की फ्रीक्वेंसी कम।
एक दिन, आर्यन ने इशानी को फोन किया, लेकिन उसका नंबर बंद आया। उसने खत लिखा, पर कोई जवाब नहीं मिला। महीनों बीत गए, सन्नाटा गहराता गया। आर्यन को लगा कि शायद इशानी ने उसे भुला दिया है, या शायद वह अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ गई है। उसे उस अधूरेपन का अहसास फिर से होने लगा, जो उसे 'रिदम कैफे' में मिलने से पहले था।

उसने गिटार बजाना छोड़ दिया। उसके कमरे के कोने में धूल जमा गिटार केस जैसे उसकी अपनी रूह की गवाही दे रहा था। वह सफल तो हो रहा था, लेकिन अंदर से वह बिल्कुल खाली हो चुका था। उसे लगने लगा था कि उसकी "अधूरी धुन" की नियति ही अधूरा रहना थी।
दो साल बीत गए। आर्यन वापस भारत लौटा, लेकिन वह सीधा अपने शहर नहीं गया। वह डरा हुआ था। उसे डर था कि अगर वह उस कैफे में गया और वहाँ इशानी नहीं मिली, तो वह खुद को संभाल नहीं पाएगा।
पर दिल कहाँ मानता है? एक शाम, बिना किसी योजना के, उसके कदम खुद-ब-खुद 'रिदम कैफे' की ओर मुड़ गए। बाहर वही बारिश थी, वही पुरानी ईंटों की दीवारें। लेकिन क्या अंदर वो पुरानी रूह बची थी?

क्या आप तैयार हैं इस कहानी के अंतिम भाग (भाग 4) के लिए? क्या आर्यन और इशानी फिर से मिल पाएंगे, या उनकी प्रेम कहानी एक दर्दनाक याद बनकर रह जाएगी?