Adhuri Dhoon - 2 in Hindi Love Stories by Avinash books and stories PDF | अधूरी धुन - 2

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अधूरी धुन - 2

भाग 2: सुरों और शब्दों का सफर'


     रिदम कैफे' की उस बारिश वाली शाम के बाद शहर का मिजाज बदल सा गया था। आर्यन, जो अपनी इमारतों के नक्शों में खोया रहता था, अब अपनी घड़ी की सुइयों को शाम के पाँच बजने का इंतज़ार करते हुए देखता था। इशानी के उन चंद शब्दों ने आर्यन की दुनिया की खामोशी को एक ऐसी हलचल में बदल दिया था, जिसे वह खुद भी पूरी तरह समझ नहीं पा रहा था।अगले कुछ हफ़्तों तक, उनकी मुलाकातें एक नियम सी बन गईं। हर शाम, जब सूरज ढलने लगता और आसमान में गुलाबी-नारंगी रंग घुलने लगते, इशानी उसी कोने वाली मेज पर अपनी डायरी के साथ बैठी मिलती। आर्यन अब अपना गिटार सिर्फ अभ्यास के लिए नहीं, बल्कि इशानी के लिखे अल्फाजों को धुन देने के लिए उठाता था।

एक शाम, कैफे में भीड़ कम थी। बाहर हल्की ठंडी हवा चल रही थी। आर्यन ने गिटार के तारों को बहुत ही कोमलता से छेड़ा।"इशानी, क्या तुमने कभी सोचा है कि हम दोनों कितने अलग हैं?" आर्यन ने गिटार बजाते हुए अचानक पूछा। "मैं पत्थर और कंक्रीट से घर बनाता हूँ, और तुम कोमल शब्दों से जज्बात।"इशानी ने अपनी कॉफी का घूंट भरा और खिड़की के बाहर देखते हुए मुस्कराई। "शायद हम उतने अलग नहीं हैं, आर्यन। तुम पत्थर में रूह फूंकते हो ताकि कोई उसे 'घर' कह सके, और मैं शब्दों को पिरोती हूँ ताकि कोई अपनी 'पीड़ा' को ज़ुबान दे सके। हम दोनों ही तो खालीपन को भरने की कोशिश कर रहे हैं।"उसकी बातें सुनकर आर्यन दंग रह गया। उसने महसूस किया कि इशानी के पास न केवल शब्दों का जादू है, बल्कि वह इंसानी जज्बातों की उन परतों को भी देख सकती है जिन्हें अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं।जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उनकी बातचीत कैफे की दीवारों से बाहर निकलने लगी। अब वे सिर्फ संगीत और कविता पर बात नहीं करते थे। वे एक-दूसरे के बचपन की कहानियाँ, अपनी छोटी-छोटी नाकामियां और अपने सबसे बड़े डर साझा करने लगे थे। आर्यन ने उसे बताया कि कैसे उसके पिता चाहते थे कि वह एक इंजीनियर बने, लेकिन उसकी माँ ने उसे उसका पहला गिटार छिपाकर दिलाया था।

इशानी ने अपनी उन कविताओं के बारे में बताया जो उसने कभी किसी को नहीं दिखाईं, क्योंकि उसे डर था कि लोग उसकी संवेदनशीलता को उसकी कमज़ोरी समझ लेंगे।एक रविवार की दोपहर, आर्यन उसे शहर के पुराने हिस्से की एक जर्जर लेकिन खूबसूरत हवेली दिखाने ले गया। वह उसे उस हवेली की वास्तुकला (Architecture) समझाना चाहता था, लेकिन इशानी की नज़रें वहाँ की टूटी हुई खिड़कियों और उन पर चढ़ी बेलों पर टिकी थीं।"देखो आर्यन," उसने एक सूखी हुई दीवार की तरफ इशारा करते हुए कहा, "वक्त ने इस पत्थर को तोड़ दिया है, लेकिन प्रकृति ने फिर भी इसे अपनी गोद में ले लिया है। प्यार भी ऐसा ही होता है न? वह हमारी कमियों को ढंक लेता है।"आर्यन ने रुककर उसे देखा। दोपहर की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी, जिससे उसकी आँखें और भी गहरी लग रही थीं। उस पल, हवेली की पुरानी दीवारों के बीच, आर्यन को अहसास हुआ कि वह अब सिर्फ उसकी धुन की कमी नहीं थी, वह उसकी ज़िंदगी की भी ज़रूरत बनती जा रही थी। उसने धीरे से इशानी का हाथ थाम लिया।

इशानी ने हाथ छुड़ाया नहीं, बल्कि उसकी उंगलियों को अपनी उंगलियों में फंसा लिया। उस स्पर्श में कोई हवस नहीं थी, सिर्फ एक गहरा 'यकीन' था।"इशानी," आर्यन की आवाज़ थोड़ी भारी हो गई थी, "मुझे लगता है कि मेरी अधूरी धुन अब पूरी हो चुकी है। लेकिन अब मुझे डर लगता है कि कहीं यह संगीत फिर से थम न जाए।"इशानी रुकी और उसकी आँखों में झाँका। "संगीत कभी नहीं थमता आर्यन, बस कभी-कभी उसकी आवाज़ धीमी हो जाती है ताकि हम उसे और ध्यान से सुन सकें। जब तक हम एक-दूसरे के सच के साथ हैं, हमारे बीच की यह लय कभी नहीं टूटेगी।"उस शाम उन्होंने शहर के सबसे ऊँचे पार्क की ढलान पर बैठकर ढलते हुए सूरज को देखा। वे घंटों चुप रहे, लेकिन वह खामोशी बोझिल नहीं थी। वह ऐसी खामोशी थी जिसमें हज़ारों बातें हो रही थीं। आर्यन ने अपनी पॉकेट से एक छोटा सा स्केच निकाला जो उसने गुपचुप तरीके से कैफे में इशानी का बनाया था।इशानी ने उस स्केच को देखा—उसमें वह अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी और उसके चेहरे पर एक सुकून था। "यह बहुत खूबसूरत है," उसने धीरे से कहा। "तुमने मुझे वैसे देखा है जैसे मैं खुद को भी नहीं देख पाती।"आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा, "क्योकि तुम मेरी वो धुन हो जिसे मैं ताउम्र गुनगुनाना चाहता हूँ।"उनका प्यार किसी फिल्मी ड्रामे की तरह नहीं था। वह तो सुबह की उस पहली ओस की तरह था जो चुपचाप पत्तों पर उतर आती है और पूरी दुनिया को ताज़ा महसूस कराती है। उन्हें लगा था कि यह सफर यूँ ही खूबसूरती से चलता रहेगा, लेकिन वे इस बात से अनजान थे कि किस्मत के पास अक्सर अपनी ही एक अलग धुन होती है, जो हमेशा सुखद नहीं होती।उस रात जब वे बिछड़े, तो दोनों के दिलों में एक अनजाना सा सुकून था। लेकिन घर पहुँचते ही आर्यन के फोन पर एक ऐसा संदेश इंतज़ार कर रहा था, जो उनके इस खूबसूरत सपने की नींव हिलाने वाला था।


भाग - ३ के लिए कमेंट करे और अपना रिव्यू दे। धन्यवाद