इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे बता देती मैं ले आती तुम्हारे लिए,, नरम लहजे में बोली माया देवी। राधा बोली -नहीं मां मुझे कुछ नहीं चहिए वो तो मैं पड़े पड़े बोर हो गई थी इसलिए सोचा चल कर थोड़ा घूम आती हुं। ठीक है राधा तुम यहां आकर सोफे पर बैठो मैं तुम्हारे लिए पानी ले आती हूं। नहीं मां मुझे कुछ नहीं चाहिए।
राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2)
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की....शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से कर बाहर आती है।क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें?तुम उठकर क्यों चली आई मुझे बता देती मैं ले आती तुम्हारे लिए,, नरम लहजे में बोली माया देवी।राधा बोली -नहीं मां मुझे कुछ नहीं चहिए वो तो मैं पड़े पड़े बोर हो गई थी इसलिए सोचा चल कर थोड़ा घूम आती हुं।ठीक है राधा तुम यहां आकर सोफे पर बैठो मैं तुम्हारे लिए पानी ले आती हूं।नहीं मां मुझे कुछ नहीं चाहिए।तो काफी बना दूं तेरे लिए,नहीं मां मन नहीं ...Read More