Radhe... A Unique Tale of Love (Season 2) in Hindi Love Stories by Soni shakya books and stories PDF | राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2)

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राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2)

तभी ऑफिस में देव के सर आ जाते हैं।

बॉस के आते ही देव  उनसे मिलने जाता है।

क्या मैं अंदर आ सकता हूं सर ?

क्यों नहीं देव आ जाओ।

देव अंदर जाता है। 

सर कहते हैं बैठो देव ।

देव कुर्सी पर बैठ जाता है।

कहो क्या कहना है देव ।

सर मुझे दो-चार दिन की छुट्टी चाहिए।

क्यों क्या हुआ देव सब ठीक है ना तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना और घर में।

हां सर सब ठीक है बस दो-चार दिन की छट्टी चाहता‌ हुं सर।

ठीक है देव तुम जाओ वैसे  भी तुम कहां छुट्टी लेते हो।

और कुछ परेशानी हो तो बताना देव आखिर हम इतने सालों से एक साथ काम कर रहे हैं। 

जी सर कहते हुए देव केबिन से निकल आया ।

.......    ‌......        ......,        ......

शाम के वक्त ब्लैक टी पीते हए देव‌ अपनी पत्नी रमा से बोला -मुझे दो-चार दिन के लिए बाहर जाना है।

रमा बोली- कहां और क्यों?

ऑफिस के काम से ।

अच्छा कहां पर जाना है। 

बस अपने ही शहर। 

अच्छा.! तो मैं भी चलूं बहुत दिन हो गए मां और पिताजी से भी मिल लेंगे।

अरे नहीं  !

अभी तुम यहीं रुको मैं ऑफिस के काम में बिजी रहुगां । और फिर बेटे की पढ़ाई  में भी नुकसान होगा उसका स्कुल और कोचिंग भी तो है।

और फिर मैं वहां रहने या घूमने नहीं जा रहा हूं। ऑफिस का काम खत्म होते ही घर आ जाऊंगा।

रमा बोली -अच्छा ठीक है। 

कब जाना है तुम्हें ?

बस कल सुबह ही निकल जाऊंगा। मेरा कुछ सामान पैक कर दो।

ठीक है कहते हुए रमा अंदर चली गई।

देव के दिलों  दिमाग में अब भी सवालों  का पहाड़ खड़ा था 

क्या हुआ होगा ?

क्यों आंटी  ने मुझे मिलने ‌बुलाया‌ होगा वो भी इतने सालों बाद।

राधा तो अपने ससुराल में खुशी खुशी रह रही हैं फिर क्या हो सकता है?

देव का मन बहुत विचलित हो रहा था।

जाने‌ क्यों आज शाम बहुत लम्बी लग रही है। जब शाम खत्म होगी तभी तो रात आएगी और जब रात‌ खत्म होगी तब तो सुबह होगी। और जब सुबह नहीं हो जाती में आंटी से मिलने कैसे जाऊगा ।

.........           ..........            .........

राधा आज बहुत बचैन थी शायद उसका दर्द आज कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था।

राधा को यू बेचैन देखकर मायादेवी बोली --चलो राधा हॉस्पिटल चलते हैं ।

पर राधा कहां मानने वाली थी उसने साफ इंकार कर दिया।

मायादवी आंखों आंसू भर बोली अगर पापा होते तो चली जाती ।

क्या मेरी बात नहीं सुनोगी राधा?

राधा बोली -पर मुझे नहीं जाना हॉस्पिटल मुझे नहीं खानी गोलियां ।

ठीक है बेटा मत‌ खाओ गोली हम इंजेक्शन लगवा कर आ जाते हैं।

मां के बार-बार कहने पर राधा हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार हो गई।

......   .....

डॉक्टर के केबिन में माया देवी डॉक्टर से बात कर रही है अब कैसी तबीयत है सर उसकी। क्या कोई प्रोग्रेस हुई है। 

नहीं ,, बल्कि उसकी हालत और गिरती जा रही है वो कुछ कॉर्पोरेट नहीं करना चाहती। दवाइयां भी नहीं लेती फिर कैसे ठीक होगी। 

मुझे तो लगता है कि शारीरिक के साथ-साथ मानसिक बीमारी ने भी घेर रखा है राधा को ।

कोई बात है जो उसके अंदर है।

ऐसा लगता है जैसे उसे जिंदगी जीने में कोई इंट्रेस्ट ही नहीं है।

वो जिंदगी जीना ही नहीं चाहती बस दिन काट रही हैं।

आप बताइए ऐसा कुछ है क्या ?

जिसने उसके जीने की चाहत ही छीन ली ।

देखिए मैं एक डॉक्टर हूं और मुझे राधा के बारे में सब कुछ जानना है ताकि मैं उसका सही से इलाज कर शकु।

मायादेवी तो सब जानती थी पर वह डॉक्टर से क्या कहती बस‌ चुप रही।

मायादवी को समझ आ गया था कि अब डॉक्टर की दवाइयां या दिलासा राधा की बीमारी को ठीक नहीं कर सकती।

वो अपनी बेटी को सुकून के कुछ पल देना चाहती थी।  

और वह जानती थी की कठिनाई के इस समय में देव ही आशा की एकमात्र किरण है।

इसलिए माया देवी ने देव को मिलने बुलाया था।

........            .. ‌ .......          ........         ‌.........    ‌    ......