हर कोई इस ज़माने में कहता है
कि यह लोगों का नहीं, कलियुग का प्रभाव है।
पर क्या यह सच है?
अगर हम खुद को बदल नहीं पाए
तो इसे कलियुग का प्रभाव कह दिया जाता है?
या फिर हम बुराई को छोड़ नहीं पाते,
इसलिए दोष ज़माने पर डाल देते हैं?
असली प्रभाव किसका है—
समय का, दुनिया का,
या फिर हमारी अपनी कमज़ोरियों का,
जिन्हें हम कभी मानना ही नहीं चाहते?
✍️by A.Shadow🖤
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