उम्मीद से भरा हुआ जिंदगी
कविता
उम्मीद से भरा हुआ जिंदगी
जो कभी खत्म नहीं होती
इन उम्मीद में खत्म हो जाती है बस जीने की चाहत
चाहत बस बचती है दिल में जी उठने की
आंखें खाली है
और सपनों में दोहरापन है
उन दिनों की जो कभी आया ही नहीं
खुली आंखों राहा तकती है
मेरे अपनों की
पर आंखों को इस भीड़ में कभी कोई अपना दिखाई नहीं
मेरी जान को तरसती है
एक बार मेरे अपनों को गले लगाने को
पर राह में मेरे अकेलापन के अलावा कुछ मिला ही नहीं
बस उम्मीदों से भरी जिंदगी में
जिंदा रहना कोई सजा से काम नहीं
और सजा काटने के लिए ही इंसान जन्म लेते हैं
जीने के लिए काम
और इन गमों को संभालने के लिए ज्यादा
इन दाहोरापन जिंदगी में कुछ भी नया नहीं है
खामोशी है दोहराया गया
दर्द है सदियों पहले अपनाया गया
अकेलापन है अपनों को छोड़ा गया
खुशियां नहीं है
और यह ढूंढने से भी मिलता नहीं है
बस जो है वह है गहरी उदासी
जो कभी समझा ही ना गया
उम्मीद से भरी जिंदगी में
बस आधी जिंदा लाश राहों पर चल रहा है
हजारों शिकायते पीछे छोड़कर
खामोश होंठ लिए
राहों पे आंखें बिछाए हुए
किसी अपनो की इंतजार करते हुए
उम्र बिता रही कभी ना पूरी होने वाली
सपनों पे भरोसा किया हुए