सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
कविता
सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
आने वाले कल की
अच्छे दिनों की
पूरे होने वाले सपनों की
सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजा रहे
तुम्हारे तुम्हारे साथ रहने की
तुमसे प्यार करने की
सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
वह इंतजार झूठी ही सही
पर उस झूठे इंतजार पर एतबार रहे
बस यही एक जीने का तरीका है
सच से अगर कभी हुई मैं रूबरू
शायद खत्म कर लु मैं खुद को
इस सबसे अच्छा है कि
झूठ पर ही गुजार लु मैं अपनी जिंदगी
हां तकलीफ होगी
पर शायद मैं झूठी सहारे के साभ जिंदा रह लूंगी
सच हमेशा आईने की तरह साफ रहा मेरे सामने
फिर भी मैंने झूठ को चुना
सांस लेने के लिए
वह झूठ जो मुझे बचाए रखा
मुझ में हिम्मत नहीं थी
सच को स्वीकार करने की
ऐसा कुछ भी नहीं था
बस मुझ में ताकत नहीं थी
इस झूठ से लड़ने की
इसीलिए सच के आगे मोटी परते बिछा दी झूठ की
कि सच मुझे कभी ना दिखे
ना मैं खुद से सवाल करूं
कि तू झूठ को अपनी सांस बना ली है
सब कुछ खत्म होने से अच्छा हो
की उम्मीद रहे
शगुन से सांसे लेने की
बिना दर्द के जीने की
जो चाहे जी करने की
सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
अच्छे दिनों की
अगर एक कविता अच्छी लगे तो आगेपढ़ते रहिए
मैं आपकी प्रिय लेखक अभिनिशा ❤️🦋💯