इश्क था नहीं........ભટ્ટસાહેબ.
इश्क था नहीं तो जताया क्यूं,
टूटे दिल को फिर सजाया क्यूं।
जो वादे करके निभाने नहीं थे,
तो फिर वादों को बनाया क्यूं।
रात को बात करना अच्छा लगा,
तो फिर सपनो को ठुकराया क्यूं।
बोला था साथमे चलेंगे साथ-साथ,
ये सफर में अकेले तरसोदा क्यूं।
मालूम था कि साथ चलना नहीं है,
" साहेब " फिर सपनो को सिंचोया क्यूं।