कविता--हिन्दी माँ की ममता सी निस्वार्थ होती है
प्रज्ञा ,प्रेक्षा ,प्रेरणा,प्रगति,प्रतिभा से परमार्थ होती है
मातृभाषा हिंदी से सदा भारतीयता कृतार्थ होती है ,
प्रामाणिक प्रेरक प्रसंगों से प्रभावित यथार्थ होती है
गौरवशाली संस्कृति की सृजनता से चरितार्थ होती है ,
साहित्य,समर्पण,संस्कारों का यशस्वी पुरुषार्थ होती है
हिंदी ममता सी निश्छल,.और माँ सी निस्वार्थ होती है
हिंदी ह्दय से मधुर उद्गगार ,रणक्षेत्र में अंगार है ,
हिंदी निष्ठा ,नम्रता, निर्मलता का नूतन श्रंगार है ,
हिंदी शिक्षा,सत्य ,शोध ,सभ्यताओं का आधार है ,
हिंदी कविता,कहानी,गीतों,गजलों के लिए उपहार है ,
हिंदी रिश्तों में अपनत्व,बुजुर्गों का आशीर्वाद होती है
हिंदी ममता सी निश्छल,..माँ सी निस्वार्थ होती है ...
मंदिर में सत्संग की स्वर लहरी,पूजा की पद्वति सी
गंगा की कलकल में,हिमालय की गोद में बहती सी
शक्तिमय,भक्तिमय ,पवित्र पूजनीय परिभाषा है हिंदी
पुष्प,पहाड़ ,धरती,नदी,आकाश की अभिलाषा है हिंदी
महलों ,घरों और झोंपड़ियों मे भी हिंदी आबाद होती है ,
हमारी हिंदी ममता सी निश्छल,माँ सी निस्वार्थ होती है ।
रहीम ,कबीर के दोहे ,रामायण की चौपाई है हिन्दी ,
गुलजार की नज़्म,मीरा भजन,मीर की रुबाई है हिन्दी
पंछियों का कलरव ,उमुक्त सी बहती पुरवाई है हिन्दी
मंत्रों सी मर्यादित या चाणक्य की चतुराई है हिन्दी
दादी-नानी की कहानी हिन्दी बिना ,अनाथ होती है
मातृभाषा हिंदी माँ सी निश्छल और निस्वार्थ होती है
हिंदी की बिंदी में चंदन,रोली-अक्षत सा अलंकरण रहे ,
राष्ट्रीयता का सर्वोच्च शिखर अडिग,अक्षय,अर्पण रहे,
मां भारती के चरणों मे हिन्द ,हिंदी ,हिंदुत्व सा तर्पण रहे
हिमालय के मुकुट में हिन्द गौरव का चमकता दर्पण रहै
राष्ट्र ,राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगीत से हिंदी सिद्धार्थ होती है
प्यारी हिंदी ममता सी निश्छल ,माँ सी निस्वार्थ होती है
नेहा नाहटा "निश्छल"