जमाने में गम को उठाना पड़ा,
हमें जिंदगी को बचाना पडा।
जो इक नाम ले ले के जीते रहे,
वहीं सरको अपने जुकाना पडा।
सुनी राह का है ये तनहा सफर,
अकेले ही खुद को चलाना पडा।
उमीदों का दामन जो छुटा नहीं,
सबर से ही हमको निभाना पडा।
उन्हें अपना जाना मगर क्या मीला
महोबत का अरमां दबाना पडा।
नजर ढुडती रही उनको मासूम,
युं ही आह भर दिल जलाना पडा।
मासूम मोडासवी