आज क्यों इतना शरमाई हुई हो ,,
बताओ ना क्या हुआ है ????
पहली बार जब मिली उनसे ,,किस बात की तड़प थी जो शरमा रही थी आंखे सबको चुगली कर रही थी और
कितनी बेशरम थी सखियां जो छुपाने भी नहीं दे रही थी
कैसे बताऊं उस एहसास को ,,,,,
बोलो ना बोलो ना ,,,बस एक ही आवाज़ आ रही थी
कैसे कहती की क्या हुआ ,,,,कैसे कहती की धड़कनों ने क्या महसूस किया ,,,वो धीरे से हाथो को छूना ,,प्यार से गले लगा लेना ,,शरमाई सी आंखो पर प्यार से प्यार करना
मैं क्या कहूं ,,,,बस ये कह कर जैसे सखी की नहीं उनके ही गले से लग गई ।