बंद बोतल में उतारा जा रहा है
इश्क मुझे फिर से मारा जा रहा है।
कभी मुस्कुरा के लगता था गले मेरे
आज जो बिना बोले सामने से नजारा जा रहा है।
बुलाते थे कभी तुम मुझे महफिल में बैठने के लिए
आज मुझे मेरी ही महफिल से निकाला जा रहा है।
सच बोलने में ही तो खोए हैं सारे रिश्ते मैंने
और झूठ बोलने का इल्जाम लगाया जा रहा है।
कितने तसल्ली से बैठे हैं यह मेरे सितमगर
मुझे जख्म दे के मुस्कुराया जा रहा है।
गुनाह तुम करके जो छुप गए मेरे पीछे
तुम्हारे ही द्वारा इल्जाम मुझ पर लगाया जा रहा है।
मुझसे निगाहें फेर कर खुश रहते हो तुम
अपना हाथ किसी गैर की ओर बढ़ाया जा रहा है।
कैसे बदला वह ले रहा है मुझसे राघव
मुझे हर घड़ी क्यों आजमाया जा रहा है।
इश्क में "रोहित" तोड़ दी गई है अब तो सारी हदें
दुश्मनी इतनी कि मेरे सामने गैर को गले लगाया जा रहा है।
प्रेम नो जोकर💔💔💔🙏