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एक छोटी सी कहानी मेरे द्वारा लिखी गयी है "आखिरी इच्छा, आखिरी सांस"
दो पात्र है जिसमे एक मै खुद हु और दूसरा डॉक्टर
मैं हॉस्पिटल में भर्ती था , बस कुछ क्षण ही बचे थे मेरे जीवन के तब डॉक्टर ने मुझे पूछा कि सर अगर इस वक्त आपकी अगर कोई आखिरी इच्छा होगी तो क्या होगी ?
तब मैंने जवाब दिया : डॉक्टर साहब बस मेरी एक ही आखिरी इच्छा है , और वो है आखिरी सांस तक जीना है ।
डॉक्टर ने पूछा : ये कैसी इच्छा है ?
तब मैंने जवाब दिया : क्योंकि आखिरी सांस तक जीवित रहूंगा तो सबके साथ थोड़ा थोड़ा वक्त बिताउँगा , मेरे परिवार, दोस्तो और रिश्तेदारों के साथ ।
डॉक्टर ने पूछा : अब ये सब क्यों ?
तब मैंने जवाब दिया : जो मैं इतने वर्षों से इन सबसे इतना दूर था आज मै अकेला यहाँ बिस्तर पर सोया हु । मेरी इच्छा है की ये वक्त इनके साथ गुजरूँगा तो कम से कम मेरी अर्थी तो उठाने वाले मुझे कोई तो मिल जाएंगे । वरना कहा शहर की मोर्चरी में कोई अता नहीं और कोई पहचान और पता नही वाली जगह पर राख बनूँगा ।
ये सब सुनके डॉक्टर की आंखों से आंसू आने लगे और डॉक्टर ने निर्णय लिया कि वो 5 दिन की छुट्टी लेके अपने गांव अपने माता-पिता और दोस्तो ओर रिश्तेदारों से मिलकर आने का ।
डॉक्टर अपने गांव चला गया।
मैंने डॉक्टर के शहर आने से पहले अपनी आखिरी सांस हॉस्पिटल मे ही ली ।
( नॉकरी की तलाश में इतने भी दूर ना जाओ की परिवार , रिश्ते और दोस्त सभी एक तरफ रह जाये और अपन अकेले )
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