जब हवा चलती है
कुछ ज्यादा ही तेजी से
एक लड़का मेरे सामने से गुजरता है
उदास-उदास, खुश-खुश सा
मैं भी उसके पीछे-पीछे चलने लगता हूँ
कुछ दूर उसका पीछा करते-करते मैं
एक बन्द कमरे में पहुँच जाता हूँ
अचानक से कमरे में उजाला हो जाता है
वह कमरा फिर कमरा नहीं; बुग्याल सा नजर आता है
कुछ फिर दिन भी धीरे-धीरे अँधेरे की ओर बढ़ता है
तब दूर से मुझे वही लड़का आता दिखाई देता है
जब वह मेरे करीब पहुचता है; तो मैं डर जाता हूँ
वह कोई और नहीं; खुद मैं होता हूँ
वह मुझसे सवाल करता है, "कौन है तू?"