फिर से सम्भलने की कोशिश करती हूं,
फिर से चलने की कोशिश करती हूं..
हां ये मुमकिन है कि हार जाऊं कल,
फिर भी आज जीतने की कोशिश करती हूं..
हां तू ख़्वाब ही है, हकीकत नहीं,
फिर भी इस ख़्वाब में जीने की कोशिश करती हूं.
हां ये भी मुमकिन है कि मेरे हो नहीं सकते तुम..
फिर भी तेरे इश्क़ में मरने की कोशिश करती हूं..
-Sarita Sharma