तू इतनी खामोश मत बैठ थोड़ा सुकून का लफ्ज़ कानो में भरदे,
सियासत की तरह मत देख थोड़ा नफरत का वजूद दूर खड़ा करले।
प्यार भरी नजरो से ही ये मुकाम खड़ा करले,
थोड़ा तौबा-ए-इश्क जान पे कुर्बान करले।
ये रोज रोज की दूरियां में कोई एक समझौता करले,
तू साथ आ और दो जिस्म एक जान का मशवरा खड़ा करले।
DEAR ZINDAGI 💞