औरत तु औरत होनेका गम ना कर,
बल्कि अभिमान कर।
प्यार और करुणा की मिशाल हो तुम,
विकट परिस्थितियों मे रास्ता निकाल लेती हो तुम
तेरे होने से परिवार पूरा होता हैं, घर आखिर घर कहलाता हैं, वरना मकान लगता हैं।
चुहेँ से डरनेवाली , जब कपनो पे मुसिबत आती है तो अकेली लड जाती हैं तु ।
औरत तु औरत होने का गम ना कर,
बल्कि अभिमान कर ।
आसमान मे चमकते तारों जैसी हैं तू
इस दुनिया मे तेरा असितत्व मानो,
धरती पर स्वँग का अहसास हो तुम।
औरत तू औरत होने का गम ना कर,
बल्कि अभिमान कर ।