अगर हमारा घर हमारे दिल में बसता तो,
यह बंजारा कभी बेघर नहीं होता।
मेरे घर की यादे मुझे हिलाकर रख देती है,
मे इस दर्द को महसूस करती हूँ ।
मैंने घर को दिल में बसाया है,
ताकि में अकेली ना रहूँ।
एक परदेसी हो कर भी में अपने घर में हू,
आओ और मेरे दिल में बस जाओ।
और वो महसूस करो जो में करती हू,
तुम्हें इस दिल में बेशुमार प्यार मिलेगा।
जानती हू मेरा दिल कोई घर नहीं है पर,
मे उसे घर कहती हू....!
जानती हू मेरा दिल कोई घर नहीं है पर,
मे उसे घर कहती हू....!