'फांँसी'
शबनम के सामने फाँसी का फंदा झूल रहा था। कुछ ही देर में उसे और सलीम को फाँसी होने वाली थी। दोनों ने मिलकर अपने प्यार के रास्ते में आये, शबनम के माँ- बाप और परिवार के सात लोगों की निर्मम हत्या की थी।
बाहर उनके प्यार की निशानी ,उनका बेटा, दया याचिका लगाकर कोशिश कर रहा था कि फाँसी टल जाये।मगर शबनम को सिर्फ़ किलकारियांँ सुनाई दे रही थीं... अपने भाई के दस महीने के निर्दोष , निरीह दुधमुंहे बच्चे की... जिसका गला दबाते समय वह गोद में आने की कोशिश कर रहा था।
स्वाति ' सखि' जोशी
पुणे