श्री कृष्णा देख मुझे एक जिज्ञासा हुई कि , राधा जी ने अपने प्रेम को कितने ही असुरो का वध करते देखा ,कितने ही लोगो का उपकार करते देखा है । उनको ज्ञात होगा कि श्री कृष्णा एक देवता है और इसी लिए सब उनके मोह से उनके पास खिंचे चले आते है । कभी तोह राधा जी को उल्जन हुई होगी कि मेरा क्या किरदार इस दुनिया में तो यही सब सोच के मेने एक छोटी सी कविता लिखी थोड़ी सी गलतिया होंगी ,आशा है कि आप पढेगे , और अच्छी लगी तो लाइक करेगें ,कमेन्ट करे।
मोह रहे, तुम जग सारा
मै न फसु इस मोह जल में
दिल दे बैठे तुमपे येह जग सारा
में न बेहकू इस माया जाल में।
ज्ञात तुम्हें है , ज्ञात मूझे है
आये तुम एक धर्म निभाने
एक अधूरा कर्तव्य निभाने
न मैं आवश्यक, न मैं प्रभावसाली
मैं तो एक बूंद ,जल सागर में।
अज्ञानी हु मैं, इस संसार की,
न ज्ञान मुझे बाते इस ब्राम्हण की
क्या लाभ मिलेगा तुमको
न में इस युद्ध में किसी काम की
न अस्त्र चलाया , न सत्र उठाया
क्या पहचान मिलेगी मुझको?
मैं एक अज्ञानी इस संसार की
मत मोहो मुझे , अपने प्रीत जाल में
साधारण नारी मैं मृत्यु लोक की
तुम नर हो क्षीर सागर के
तुम अये एक धर्म निभाने
तुम अये एक इतिहास बनाने
मैं मर जाऊ ,मैं जी जाऊ
नही लिखे जायेगे पल मेरे ,पुराण में
तुम हो एक नायक उस पुराण के
जिस में न जिक्र होगा इस राधा का
तुम हो नायक इस संसार के
है बहक रहा मन मेरा
हा फिसल रहा ह्रदये ,इधर सबका
तुम फास रहे सबको
स्वयं फिसल रहा मन मेरा
मैं जन्मी इस काल में
बस येह सोभाग्य है मेरा
नही जलना मुझे इस प्रीत आग में
मत फासो मुझे अपने मोह जाल में।