❣️की अपने आप के भी पीछे खड़ा हूं मैं
ज़िन्दगी कितना धीरे चला हूं मैं
की अपने आप के भी पीछे खड़ा हूं मैं
ज़िन्दगी कितना धीरे चला हूं मैं
और मुझे जगाने, जो और भी हसीन होके आते थे
मुझे जगाने, जो और भी हसीन होके आते थे
उन ख्वाबों को सच समझकर सोया रहा हूं मैं
ज़िन्दगी कितना धीरे चला हूं मैं।
भूख देखी है...
भूख देखी है, देखी है तिरस्कार करती हुई आंखें
कदमों से चल चलकर रास्तों को नाम बदलते देखा है,
अपने टूटे हुए स्वाभीमान के साथ खुद को काम बदलते देखा है।
देखी है नाउम्मीदी, अपमान देखा है
देखी है नाउम्मीदी, अपमान देखा है
ना चाहते हुए भी मां बाप का झुक्ता हुआ आत्मसम्मान देखा है,
सपनों को टूटते देखा है अपनों को छूटते देखा है
हालात की बंजर ज़मीन फाड़ कर निकला हूं...
बेफिकर रहिए, मैं शौहरत की धूप में नहीं जलूंगा
.
.
आप बस साथ बनाए रखिए🙏🏻
अभी तो मैं लंबा चलूंगा।🪔