मुहावरे वाली रचना हमेशा
मंडराती रहती है नये मुहावरे की तरफ .....
कही अनकही बाते आँख मिचौली
खेलते खेलते ही समज आ जाए....
आग बबूला हो जाने का नाटक तो कर ले....
लेकिन आँखो से मारा तीर...
दिल को घायल कर के....
शर्म से पानी पानी हो जाए....
-Shree...Ripal Vyas