Jwaan V/S Kissan
एक समय पर जय जवान जय किसान कहा करते थे ,
और एक आज का दिन है जहां जवान versus किसान हैं ।
कोई अपने हक के लिए लड़ रहा है तो कोई अपनी ड्यूटी के प्रति प्रतिबद्ध है ।
हमेशा धैर्य से काम नहीं बनता , अपने हक के लिए लड़ना भी पड़ता है ।
और जब धैर्य टूटता है तो नतीज़ा कुछ ऐसा होता है ।
ये देश का किसान है जो बोलने से ज्यादा करके दिखाने पर भरोसा रखता है ।
गलती तो उनकी भी नहीं है जो सुरक्षा के नज़रिए से किसानों को रोकने कि हर मुमकिन कोशिश में लगा है ।
कभी पिट रहा है , तो कभी पीट रहा है ।
भरी सर्दी में बैठे किसानों को कभी सहयोग ना करने वाले भी , आज इन्हें असभ्य , समाज विरोधी बताते है ।
और देखा जाए तो , ये तो हमारे देश की परम्परा है ,
पहले परदे के पीछे बैठ कर सब देखो और बाद में ताने कसो ।
गलत कौन है और सही कोन
कहना मुश्किल है ।
पर एक तरफा होकर सोचना
क्या ये सही है ?