जिंदगी के दरिया में
कभी डूबते हैं, कभी उतराते हैं,
कभी गमों के भवँर में
बिल्कुल ही डूब जाते हैं,
कभी खुशियों के सहारे से
बचकर निकल आते हैं,
कभी गहरे उतरकर
मोती निकाल लाते हैं,
पर अक्सर हम डरकर
किनारे खड़े रह जाते हैं,
और ताउम्र ख्वाहिशों के पूरे
न होने पर रोते रह जाते हैं।
एक बेमकसद सी जिंदगी
यूँ ही गुजार जाते हैं।