बाक़ी कुछ ना रहा हमारे बीच में,
बस तुम्हारी यादें लौटानी है
मेरे आंसुओं का हिसाब चाहिए
ज्यादा से ज्यादा वक़्त जहां गुजरा
उन लम्हों पे लिखी किताब चाहिए
तुम्हारी अक्सर वो रूठने की आदत
जिस पर मेरा मनाना बेहिसाब चाहिए
यूं तन्हा फिरेंगे फिर तन्हाइयों में
भीड़ ना पहचान ले वो नक़ाब चाहिए
-Sunil Singh Chauhan