क्यूँ इतनी भीड़ के बावजूद
यूँ तन्हा सा लगता है
क्यूँ अपनों के साथ के बावजूद
ये हाथ खाली सब लगता है
क्यूँ फोन में इतने contact के बावजूद
किसी खास से बाते करने का जी करता है
क्यूँ हम साथ नहीं है इसके बावजूद
उसे खो देने कर डर सताता है
सायद इस क्यूँ की वजह भी वो ही है
जो किस्मत में नहीं होकर भी दूर रहकर
मेरी ही तरह मेरा साथ निभाता है।
-Chandrika Gamit