सुकून में भी तुजसे मिलने की तड़प होती है
तेरे हाथो में मेरा हाथ ना होने की कमी महसूस होती है
लोग केहते है समय रहते सब ठीक हो जाता है
हर जख्म भर जाते है यादें धुंधली हो जाती है
झूठ केहते है लोगो औरों को तसल्ली देने के लिये
वरना ये चांदनी रात ठहरे हुवे पानी के जैसी
तेरी इन यादों में कंकड़ डाल कर फिरसे
तेरे प्यार की तरंगे ना पैदा करती ।
-Chandrika Gamit