नींद थोड़ी जादा आती है क्योकि हकीकत मे जीने का मन नही करता
बाकी कोई फर्क नही पड़ता।
सब के सामने तो हस लेते है पर अकेले मुस्कुराया भी नही जाता
बाकी कोई फर्क नही पड़ता
बात बे बात मन थोड़ा सुबक जाता है
बाकी कोई फर्क नही पड़ता
आँखे रुआसा और दिल पे बोझ सा लगता है
बाकी कोई फर्क नही पड़ता
खुलके हँसने पर बिखर जाने का डर सा लगता है।
बाकी कोई फर्क नही पड़ता
हा जब कोई साथ नही रहता
तब भी कोई जादा
फर्क तो नही पड़ता
-Yayawargi (Divangi Joshi)