हास्य व्यंग खूद पर...
यार दोस्त कहते हैं मुझे,
बताओ क्यों तुम पतंग उड़ाते नहीं।
मैं कहता उनसे अरे यार जानते तो हो,
तुम मेरी दुबली पतली काया को,
कहीं पतंग रह जाए जमीन पर, और
मैं सायद कहीं उड़ जाऊं असमान में।
(आप सभी को मकर संक्रांति एवं लोहरी/लोहड़ी पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं)
✍️मनिष कुमार "मित्र" 🙏