नफरत का रिश्ता भी कितना अजीब होता है
होती उसी से है जो दिल के सबसे करीब होता है।
बेइंतिहा मोहब्बत का ही अंजाम है शायद
गीली लकड़ी की तरह सुलगना ही नसीब होता है।।
एक पल के लिए भी भूलता नहीं है वो
नफरत का रिश्ता प्यार से कहीं गहरा है।
न मरने देता है न ही चैन से जीने देता
ये दुश्मन तो दिल में सदा के लिए ठहरा है।
जमीला खातून