सुनो जरा गोर से कभी तो, अवाज़ हमेशा देती हूँ तुम्हें l
नाम तुम्हारा दिल पर लिख, अपना बना लेती है तुम्हें l
न्दमसतक रहता हैं सदा तुम्हारे लिए ही ये प्रेम हमारा l
दबी छुपी सी तुम्हारी मोहब्बत से मन नाराज स है हमारा l
नाम से तुम्हारें अपना नाम जोड़ना ख्वाहिश हैं दिली हमारी l
मन के कोने कोने में सदा बसी रहती है तस्बीर तुम्हारी l
दर्द से भरा पर तुम्हारी यादों से खुश रहता है दिल हमारा l
न दिखते हो न मिलते हो फिर भी इंतजार रहता हैं तुम्हारा l
- RJ krish... ✍️