लगाव
छोटी सी कहानी में भी शिख मिलता है मुझे
उसकी ईमानदारी से
आंखों में मेरे आंसु आता है उस दिन से ।।
हर इंसान को किसी ना किसी से लगाव होता है प्यार होता है मोहब्बत होती है आज़ ऐसी ही कहानी में लिख रहा हूं ।
ऐक ओटो ड्राईवर था उनका नाम गणेश था उसकी पत्नी का नाम भानुमती था उनके दो बेटे थे राजू और विजय दोनों पढ़ाई कर रहे थे राजू बडा था विजय छोटा था राजू कोलेज में पढ रहा था विजय बारहवीं में पढ़ रहा था
गणेश भाई को ओटो से बहुत लगाव था वो अपने ओटो में बैठने वाले को भगवान मानता था क्योंकि गणेश भाई का जनजीवन ओटो से चलाता था इसलिए गणेश भाई को ओटो से लगाव हो गया था, जितना ध्यान घर का रखतें थे उतना ही ध्यान वो अपनी ओटो का भी रखते थे उनकी ओटो में बैठने वाले नागरिक का ध्यान अपने घर के सदस्य की तरह रखतें थे
ओटो के बारे में कूच भी ग़लत सुन नहीं सकते थे गणेश भाई बहुत प्रेम था उनको अपनी ओटो से एक दिन अचानक गणेश भाई की तबीयत बिगड़ने लगी लड़के उनको कहने लगे पापा आप ओटो मत चलाना अब आपकी तबियत पहले जैसी नहीं है ऐसा होगा तो किसी को भाड़े चलाने दें देंगे अपनी ओटो
बच्चों की बात सुनकर गणेश भाई ने कहा बेटा ऐ ओटो ने हमें बहुत कुच दिया है जब हम शहर में आएं थे तब तुम नहीं थे,तब में किराए की ओटो चलाता था आज वो ओटो मेरी है, तब हम किराए पर रहते थे आज वो मकान भी हमारा आज तुम खुशी से ज़ी रहें हों ऐ सब मेरी ओटो का देन है,बेटा ओटो मेरी आत्मा है तुम उसे बेंच मत देना
राजू और विजय ने कहा पापा आप चिंता मत करना हम ओटो को कभी नहीं बेचेंगे और आप अब आराम करो आज़ से ओटो को में चलाऊंगा और विजय को में आगे पढ़ाऊंगा आप चिंता मत करना पापा ऐ सुनकर गणेश भाई और उनकी पत्नी खुश हो गए ।।
नरेन्द्र परमार "तन्हा "
ऐ कहानी काल्पनिक है