नयी कोपलों के स्पर्श की अनुभूति ।
जिसे गत वर्ष की आपदा ने छीन लिया था ।
ऐसा लगता है बीत गयीं सदियां ।
बिछुड़े अपने प्रतिरूप से ,जो बड़ा होकर मैं बनता ।
मुस्कानों पर महीनों लगा रहा पहरा ।
माँ की गोद प्रतीक्षा करती रही ।
कोई तो आकर दो बातें करें उससे ।
क्षण भर का ही दे जाए आन्नदबोध ।
विद्यालयों ने भी कई रूप बदले ।
गाँव में गए कई बार यह बताने कि ।
अब बहुत हो गया ,मैं नहीं झेल सकता अकेले पन का दंश ।
आओ चलो मुझे फिर से सुनाओ ।
मुझे सुननी है ,गिनती ,कहानियां ,बालगीत ।
अब इस नये साल मेंं नहीं रहना चाहता ,अकेला और उदास ।